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दक्षिण रेलवे का 11 जोड़ी नई गाड़ियाँ, 07 जोड़ी नियमित गाड़ियोंका मार्ग विस्तार शुरू करने का प्रस्ताव, साथ ही 14 गाड़ियोंके टर्मिनल्स भी बदलने की कवायद

03 अप्रैल 2024, बुधवार, चैत्र, कृष्ण पक्ष, नवमी, विक्रम संवत 2080

IRTTC इंडियन रेलवे टाइम टेबल कमिटी की कवायदें शुरू हो गई है। दरअसल प्रत्येक वर्ष जुलाई में अमूमन भारतीय रेल की सभी यात्री गाड़ियोंके समयसारणी में यथोचित बदलाव किया जाता है। साथ ही प्रत्येक क्षेत्रीय रेल कार्यालय अपनी ओर से यात्री गाड़ियोंसे सम्बन्धित प्रस्ताव समिति के सामने रखता है। इन प्रस्तावों में नई गाड़ियाँ, विद्यमान गाड़ियोंके मार्ग विस्तार, फेरे बढाना, मार्ग के बदलाव और टर्मिनल्स के बदलाव सम्मिलित किए जाते है। गौरतलब यह है, किसी क्षेत्रीय कार्यालय के सभी प्रस्तावों पर आमतौर पर अन्य क्षेत्रीय कार्यालय की कुछ न कुछ समस्याएं रहती ही है। समिती में उपरोक्त समस्याओं पर विचार विमर्श होता है और उपयुक्त प्रस्तावों को रेल मुख्यालय भेजा जाता है। अंतिम निर्णय वहीं से जारी किया जाता है।

दक्षिण रेलवे के विविध मण्डल कार्यकालों के कोचिंग विभाग द्वारा यह प्रस्ताव बनाया गया है। जिसमे दस जोड़ी नई गाड़ियोंका प्रस्ताव है।

प्रस्तावित नई गाड़ियाँ :

1) 16103/04 ताम्बरम रामेश्वरम ताम्बरम प्रतिदिन एक्सप्रेस वाया माइलादुतुराई, थिरुवरुर, कराइकुडी, मानामदुराई

2) 16625/26 कोयम्बटूर ताम्बरम कोयम्बटूर साप्ताहिक एक्सप्रेस वाया पोलाच्ची, डिंडीगुल, तिरुचिरापल्ली, माइलादुतुराई

3) 20611/12 ताम्बरम दानापुर ताम्बरम प्रतिदिन सुपरफास्ट

4) 20609/10 कोचुवेली सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया टर्मिनस/शिवमोग्गा टाउन कोचुवेली साप्ताहिक हमसफ़र वाया कोटयायम, एर्नाकुलम टाउन, पालाकड जंक्शन, पोडाणुर, सालेम, जोलारपेट्टी

5) 22635/36 कोचुवेली गौहाटी कोचुवेली साप्ताहिक वाया कोटयायम, पोडाणुर, इरुगुर, गुडूर, विजयवाड़ा, दुव्वाड़ा, हावड़ा, मालदा टाउन

6) 20651/52 नागरकोईल लोकमान्य तिलक टर्मिनस नागरकोईल त्रिसाप्ताहिक वाया तिरुनेलवेली, विरुदुनगर, मदुरै, तिरुचिरापल्ली, थांजावूर, माइलादुतुराई, विल्लुपुरम, चेन्नई एग्मोर, रेनिगुंटा, वाड़ी

7) 22695/96 तिरुनेलवेली श्री माता वैष्णो देवी कटरा तिरुनेलवेली द्विसाप्ताहिक वाया मदुरै, तिरुचिरापल्ली, वृद्धाचलम, विल्लुपुरम, काटपाडी, पेरंबूर, गुडूर

8) 22693/94 तिरुनेलवेली जोधपुर तिरुनेलवेली साप्ताहिक वाया विरुदुनगर, मानामदुराई, कराइकुडी, तिरुचिरापल्ली, वृद्धाचलम, विल्लुपुरम, ताम्बरम, चेन्नई एग्मोर, गुडूर, विजयवाड़ा, बल्हारशाह, वर्धा, भुसावल, सूरत, अहमदाबाद, मारवाड़

9) 20613/14 ताम्बरम सांतरागाछी ताम्बरम साप्ताहिक सुपरफास्ट

10) 20661/62 रामेश्वरम मालदा टाउन रामेश्वरम साप्ताहिक वाया मानामदुराई, कराइकुडी, तिरुचिरापल्ली, वृद्धाचलम, विल्लुपुरम, ताम्बरम, चेन्नई एग्मोर

11) 22608/07 नागरकोईल हावड़ा नागरकोईल साप्ताहिक सुपरफास्ट

गाड़ियोंका मार्ग विस्तार :

1) 12657/58 बेंगलुरु चेन्नई सेंट्रल बेंगलुरु प्रतिदिन मेल का चेन्नई एग्मोर, वृद्धाचलम होते हुए तिरुचिरापल्ली तक विस्तार

2) 22666/67 कोयम्बटूर बेंगलुरु कोयम्बटूर प्रतिदिन उदय एक्सप्रेस का पालकड जंक्शन तक विस्तार

3) 12664/63 तिरुचिरापल्ली हावड़ा तिरुचिरापल्ली द्विसाप्ताहिक का तिरुनेलवेली तक विस्तार

4) 13351/52 धनबाद अलेप्पी धनबाद प्रतिदिन एक्सप्रेस का कोचुवेली तक विस्तार

5) 06027/28 ताम्बरम विल्लुपुरम ताम्बरम मेमू का तिरुवन्नामलाई तक विस्तार

6) 22630/29 तिरुनेलवेली दादर तिरुनेलवेली साप्ताहिक का लोकमान्य तिलक टर्मिनस तक विस्तार (इस विस्तार से गाड़ी की संरचना में 15 कई जगह 22 LHB कोच दिए जा सकेंगे)

7) 16381/82 पुणे कन्याकुमारी पुणे प्रतिदिन केप एक्सप्रेस का छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस तक समय बदलाव कर विस्तार

गाड़ियोंके फेरे बढ़ेंगे :

1) 22611/12 चेन्नई सेंट्रल न्यू जलपाईगुड़ी चेन्नई सेंट्रल साप्ताहिक से द्विसाप्ताहिक

2) 20601/02 चेन्नई सेंट्रल बोदीनायकानुर चेन्नई सेंट्रल त्रिसाप्ताहिक से सप्ताह में चार दिन

3) 22113/14 लोकमान्य तिलक टर्मिनस कोचुवेली लोकमान्य तिलक टर्मिनस द्विसाप्ताहिक की जगह सप्ताह में पाँच दिन

टर्मिनल स्टेशन में बदलाव (14 गाड़ियोंमे)

1: 22657/58 ताम्बरम नागरकोईल ताम्बरम त्रिसाप्ताहिक एक्सप्रेस, नागरकोईल की जगह कन्याकुमारी

2: 16649/50 मंगलुरु सेंट्रल नागरकोईल मंगलुरु सेंट्रल परसुराम प्रतिदिन एक्सप्रेस, नागरकोईल की जगह कन्याकुमारी

3: 12667/68 चेन्नई एग्मोर नागरकोईल चेन्नई एग्मोर साप्ताहिक, नागरकोईल की जगह कन्याकुमारी

4: 12689/90 चेन्नई सेंट्रल नागरकोईल चेन्नई सेंट्रल साप्ताहिक, नागरकोईल की जगह कन्याकुमारी

5: 06639 पुनालूर नागरकोईल सवारी, नागरकोईल की जगह कन्याकुमारी

6: 06642/41 तिरुनेलवेली नागरकोईल तिरुनेलवेली सवारी, नागरकोईल की जगह कन्याकुमारी

7: 11097/98 पुणे एर्नाकुलम जंक्शन पुणे पूर्णा साप्ताहिक एक्सप्रेस, एर्नाकुलम जंक्शन की जगह कोटयायम

8: 22149/50 पुणे एर्नाकुलम जंक्शन पुणे द्विसाप्ताहिक एक्सप्रेस, एर्नाकुलम जंक्शन की जगह कोटयायम

9: 12695/96 चेन्नई सेंट्रल तिरुवनंतपुरम चेन्नई सेंट्रल प्रतिदिन सुपरफास्ट, तिरुवनंतपुरम से कोचुवेली

10: 20910/09 पोरबन्दर कोचुवेली पोरबन्दर साप्ताहिक, कोचुवेली से तिरुवनंतपुरम

11: 12644/43 तिरुवनंतपुरम हज़रत निजामुद्दीन तिरुवनंतपुरम साप्ताहिक सुपरफास्ट, तिरुवनंतपुरम से कोचुवेली

12: 16381/82 पुणे कन्याकुमारी पुणे प्रतिदिन केप एक्सप्रेस, कन्याकुमारी से नागरकोईल

13: 22623/24 चेन्नई एग्मोर मदुरै चेन्नई एग्मोर द्विसाप्ताहिक सुपरफास्ट, चेन्नई एग्मोर से ताम्बरम

14: 20681/82 चेन्नई एग्मोर सेनगोटाई चेन्नई एग्मोर त्रिसाप्ताहिक सीलाम्बु एक्सप्रेस, चेन्नई एग्मोर से ताम्बरम

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‘रियायत’ की कृपा नहीं, सुविधाओं का सहारा काफी है।

02 अप्रैल 2024, मंगलवार, चैत्र, कृष्ण पक्ष, अष्टमी, विक्रम संवत 2080

आजकल चुनावी दौर में विधानोंको एक अलग दृष्टिकोण से जनमानस के सामने लाया जाता है। इससे आम जनता के मन किंतु निर्माण होता है। धीरे धीरे एक छोटे से किन्तु को सहलाकर, सुलझाकर उसका बड़ा मुद्दा बनाया जाता है। खैर, हम हमारे रेल वाले विषय की ओर रूख़ करते है। विषय है, रेल सेवा में वरिष्ठ नागरिकोंको यात्री किरायोंमे दी जाने वाली रियायत।

यूँ तो 01 मई 1989 से पहले रेल किरायोंमें वरिष्ठ नागरिकोंको किसी भी रेल किराए में कोई रियायत नही मिलती थी। इसे 01 मई 1989 से, मेल/एक्सप्रेस के द्वितीय श्रेणी मूल किरायोंका आधार बनाकर, उन किरायोंमे 25% छूट का प्रावधान किया गया। यह छूट अपनी उम्र के 65 या 65 वर्ष से आगे के सभी पुरुषों, स्त्रियों के लिए लागू थी। आरक्षण शुल्क वगैरा अलग लागू रहेंगे। हाँ, एक और शर्त थी, यात्रा 500 किलोमीटर से ज्यादा होना आवश्यक थी। रियायत केवल द्वितीय श्रेणी, ग़ैरवातानुकूलित वर्ग और मेल/एक्सप्रेस में ही उपलब्ध थी।

वर्ष बितते गए और राजनीतिक कारणोंसे, इन रियायतोंका विस्तार किया जाने लगा और शर्ते हटती चली गई। वर्ष 1999 में यह रियायत भारतीय रेल के सभी वर्गों और राजधानी, शताब्दी सहित सारी गाड़ियोंमे उपलब्ध करा दी गई। वर्ष 2001 में वरिष्ठ नागरिक किराया रियायत के लिए पुरुष की उम्र 65 या उससे ज्यादा और महिला की उम्र 60 या उससे ज्यादा तय की गई और साथ ही छूट का प्रावधान 25% से बढ़कर 30% हो गया।

मित्रों, आगे राजनीति में गठबन्धन के सरकारोंके राज आए और छूट और व्यापक की गई। वरिष्ठ नागरिकोंको अब रेलवे के सभी वर्ग और गाड़ियोंमे 50% की छूट और महिलाओं की उम्र 60 की जगह 58 कर दी गई।

यह सारी रियायतोंकी व्यवस्था संक्रमण आने तक जारी थी। संक्रमण काल मे सारी यात्री गाड़ियाँ बन्द की गई और उसके साथ ही यह वरिष्ठ नागरिकोंकी रियायत भी बन्द कर दी गयी। तब यह तर्क दिया गया था, वरिष्ठ नागरिकोंको किराया रियायत देकर यात्रा करने के लिए उत्तेजित नही करना है। गाड़ियाँ तो शुरू हो गई मगर वरिष्ठ नागरिक रियायत शुरू नही की गई। मगर एक प्रावधान यथावत जारी रहा, वरिष्ठ नागरिकोंके लिए निचली बर्थ गाडीके तत्काल आरक्षण खुलने तक उपलब्ध रखी गई। अर्थात यह योजना पहले आओ, पहले पाओ तत्व पर थी और जब तक बुक नही हो जाती तब तक उपलब्ध रहती थी।

आज की अवस्था मे, सोशल मीडिया में जब ‘भारतीय रेल ने वरिष्ठ नागरिक रियायत बन्द कर पाँच हजार करोड़ कमाए’ ऐसी खबरें वायरल की जाती है, तब आश्चर्य होता है। एक तरफ रेल विभाग यात्रिओंको शून्य मूल्य पर कई सुविधाओं को मुहैया कराता है। प्लेटफार्म पर पहुंचने के लिए रैम्प, लिफ्ट, एस्केलेटर, बैठने के लिए व्यवस्था, वेदर शेड्स, पंखे, पीने के लिए शीतल जल इसके अलावा पानी के नल, शौचालय इत्यादि व्यवस्था की जाती है। बड़े स्टेशनोंपर इन्ही व्यवस्थाओंका प्रीमियम वर्जन अधिमूल्य पर उपलब्ध कराया जाता है। यही सारी व्यवस्था राज्य परिवहन निगम के बस अड्डों पर ना ही दिखाई देती है और न ही कोई उसके लिए आग्रह करता दिखता है।

सोशल मीडिया का छोड़िए, वहाँ बहुतेरे इंफ्लुएंसर्स रहते है और उनका काम ही है, विविध विषयोंको लेकर आम जनता को उत्तेजित करना। मगर आम जनता इन किराया रियायतोंके बारे में क्या सोचती है? मित्रों, यकीन मानिए, बहुत से वरिष्ठ नागरिक यह सोचते है, उन्हें व्यर्थ कृपा दृष्टि की आस नही है। यदि, रेल प्रशासन सोचती है, उन्होंने सभी टिकट धारकोंको ऐसे ही 56% मूल्य में टिकट देते रहना है ( ध्यान दें : रेलवे के टिकटों पर छपा वाक्य 😊) तो और अतिरिक्त रियायत की क्या आवश्यकता है? मगर वरिष्ठ नागरिकोंकी सुविधा, जैसे की ‘लोअर बर्थ कोटा’ बदस्तूर जारी रहना चाहिए। प्रत्येक बड़े  स्टेशनपर लिफ्ट, एस्केलेटर, यथोचित मूल्य पर  बैटरी कार आवश्यक रूप में उपलब्ध रखी जाए। रेलवे प्लेटफार्म पर जो भी व्यवस्था अर्थात वेदर शेड्स, पानी के नल, शौचालय, बैठक व्यवस्था, कोच इंडिकेटर, आवश्यक सहायता अद्यतन प्रकार से उपलब्ध रहें।

जाहिर सी बात है, देश की आबादी की औसत उम्र अब बढ़ती ही जा रही है और साथ ही साथ इस उम्र के यात्रिओंकी संख्या भी बढ़ती रहेगी। ऐसी स्थिति में वरिष्ठ नागरिक की यह अपेक्षा है, उन्हें रियायत की कृपा नही अपितु सुविधाओं का सहकार्य मिलना चाहिए।

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देर आए, दुरुस्त आए!

गाड़ी कोच संरचना के मानकीकरण में किया जा रहा है यात्री आवश्यकता नुसार बदलाव

30 मार्च 2024, शुक्रवार, चैत्र, कृष्ण पक्ष, पंचमी, विक्रम संवत 2080

भारतीय रेल में यात्री गाड़ियोंकी कोच संरचना का मानकीकरण किया जाना, रेल के ग़ैरवातानुकूलित कोचों के यात्रिओंके आसन व्यवस्था की कटौती में बदल गया। किसी लम्बी दूरी की मेल/एक्सप्रेस में द्वितीय श्रेणी साधारण के यात्री कोच वैसे भी कम ही होते थे और यह लोग ग़ैरवातानुकूलित शयनयान स्लिपर में अपना तालमेल बिठा कर यात्रा कर लेते थे। कोच संरचना मानकीकरण में सारे ग़ैरवातानुकूलित कोच की भारी कटौती की गई और यह यात्रिओंका रुख वातानुकूलित कोचों में सीधी घुसपैठ की ओर बढ़ गया। आए दिन शिकायतें बढ़ने लगी और कोच संरचना का मानकीकरण विषय, बड़ा वादग्रस्त विषय बन गया।

रेल प्रशासन की, इस कोच मानकीकरण के जरिए जो मेल/एक्सप्रेस गाड़ियाँ अपने गंतव्य स्टेशन पर पहुँच कर खाली समय व्यतीत करती थी, उसका उपयोग कुछ देरी से पहुँचने वाली अन्य गाड़ियोंके वापसी फेरे के लिए उपयोग करने की सोच थी। मानकीकरण किए जाने से उन गाड़ियोंकी कोच संरचना एकसमान रहती थी और उससे यात्रिओंकी अग्रिम आरक्षण को कोई बाधा नही पहुंचती थी। साथ ही साथ देरी से पहुँची गाड़ी की वापसी फेरे में समयपर छोड़ी जा सकती थी। संकल्पना बहुत ही सटीक और व्यवस्थित थी मगर किसी मुख्यालय से निकले परिपत्रक की व्याख्या कोई क्षेत्रीय कार्यालय किस तरह करेगा इसका कोई भरोसा नही। आइए, पहले वह वर्ष 2022 का रेल मुख्यालय का परिपत्रक देखते है,

रेल प्रशासन ने कोच संरचना मानकीकरण के प्रपत्र में उनकी योजना जाहिर कर दी, मगर आगे उक्त विषय मे क्षेत्रीय रेल के संज्ञान को भी महत्व दिया गया है। क्षेत्रीय रेल अपनी आवश्यकताओं के अनुसार रेल प्रशासन से अग्रिम अनुमति ले कर कोच संरचना के मानकीकरण से परे जाकर, बदलाव करा सकती है। अर्थात किसी क्षेत्रीय रेल को यह एहसास है, अभ्यास है, की उनकी फलाँ गाड़ी में वातानुकूलित कोचों की जगह ग़ैरवातानुकूलित कोच, द्वितीय श्रेणी साधारण या स्लिपर कोच की संख्या ज्यादा हो, तो वह उस प्रकार की संरचना रेल प्रशासन से अनुमति प्राप्त कर, बना सकती है।

अब यह बात और हे, की कई क्षेत्रीय रेल ने इस बात को महत्व नही दिया और जिस तरह रेल मुख्यालय से कोच संरचना के मानक भेजे थे, उसी प्रकार अपनी गाड़ियोंमे कोच संरचना करवा ली। जब साधारण टिकटधारियों का हुजूम वातानुकूल यात्रिओंकी व्यवस्था में हाहाकार मचाने लगा और आए दिन शिकायतोंके अम्बार रेल मुख्यालय, मंत्रालय तक दस्तक देने लगे तब जाकर मुख्यालय ने इस बारेमे संज्ञान लिया और क्षेत्रीय रेलवे को कोच संरचना सुधारने के निर्देश दिए। इसका परिणाम यह हुवा की कई लम्बी दूरी की मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंमे वातानुकूल कोच कम होने जा रहे है और उसके ऐवज में ग़ैरवातानुकूलित कोच, स्लिपर और द्वितीय श्रेणी साधारण कोच बढ़ाए जा रहे है। उदाहरण के लिए 12779/80 वास्को हज़रत निजामुद्दीन वास्को गोवा सुपरफास्ट का यह कोच संरचना बदलाव देख लीजिए,

गोवा एक्सप्रेस में स्लिपर, साधारण कोच 02- 02 की जगह 06 और 04 किए जा रहे है। अर्थात वातानुकूल कोच टू टियर 02 की जगह 01, वातानुकूल थ्री टियर इकोनॉमी 04 की जगह 02 और वातानुकूल थ्री टियर 04 की जगह 01 रह जाएंगे। गाड़ी में कुल 20 कोच यथावत बने रहेंगे।

आखिरकार भारतीय रेल को आम रेल यात्री की सुध लेनी पड़ी। भले देर से आए मगर दुरुस्त आ ही गए! 😊

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अनियमितताओंसे निजात पाने के लिए क्या कर सकता है, रेल प्रशासन!

23 मार्च 2024, रविवार, फाल्गुन, शुक्ल पक्ष, चतुर्दशी, विक्रम संवत 2080

यूँ तो भारतीय रेल और उसके रेलवे स्टेशनोंने अपना रंगरूप, कलेवर काफी हद तक बदल लिया है मगर यात्री है की अभी तक पुराने ढर्रे पर ही अटके हुए है। रेल प्रशासन ने स्टेशनोंपर खानपान विभाग में हर जगह नियमावली लिख रखी है, छपे मूल्य से ज्यादा दाम न दें। सामान, सामग्री के भुगतान हेतु बिल की माँग करें। यह बात और है, की ना ही विक्रेता के पास बिलिंग मशीन्स है और न ही यात्री को बिल की दरकार रहती है। 😊

सबसे बड़ा घोटाला पानी बोतलोंका है। रेल प्रशासन की इकाई, आईआरसीटीसी ‘रेल नीर’ का उत्पादन एवं वितरण करती है। ₹15/- अधिमूल्य की बोतल पर विक्रेता महज 10 से 15% कमाता है। वहीं अवैध ब्रैंड की बोतल पर उसे 100% कमाई है। अमूमन प्रत्येक आम रेलयात्री, पानी बोतल चाहे रेल नीर की हो या कोई अनब्रांडेड, सीधे ₹20/- में ही खरीदता है। हो सकता है, समस्या छुट्टे पैसे की है, न कोई विक्रेता ₹5/- लौटाता है, न ही खरीददार उससे लौटाने की अपेक्षा रखता है। यहाँ पर रेल विभाग अपने ब्रैंड रेल नीर की कीमत ही क्यों न ₹20/- कर दे? इससे एक छुट्टे लेनदेन की मुसीबत खत्म हो जाएगी दूसरा विक्रेता का कमीशन बढ़ेगा, ग्राहक को संतुष्टि रहेगी उसने उचित दाम देकर खरीदा और रेल प्रशासन चाहे तो उस अतिरिक्त दाम का उपयोग अपने सुरक्षा निधि, यात्री बीमा के लिए भी कर सकती है।

रेलवे स्टेशनोंपर अधिकृत वेंडर्स के लिए GPS और आधार बेस्ड आई डी कार्ड बनवाए जाए। इससे रेल सुरक्षा अधिकारियों को यह पता रहेगा, रियल टाइम में कितने वैध विक्रेता काम कर रहे है और इसके अलावे बाकी सारे अवैध है।

किसी भी सूरत में बिना पैक खाना न बेचा जाए, चाहे वह नाश्ता हो या भोजन या फिर फल। समोसा, कचौड़ी या पुड़ी भाजी सारी खाद्य सामग्री उत्पादन तिथि और मूल्य की लेबलिंग के साथ पैकिंग कर बेची जाए। चाय, कॉफी, दूध इत्यादि के लिए केवल प्रमाणित वेंडिंग मशीन्स ही वैध रहना चाहिए। खुली थर्मास से बेची जाने वाली चाय, कॉफी तुरन्त ही बन्द की जाए।

स्टेशनोंपर जब गाड़ी पहुंचती है तब देखिए, कितने वेंडर्स अपना सामान आवाज लगा कर बेच रहे होते, क्या यह सब अनुज्ञप्ति प्राप्त लोग होते है? क्या इनकी सामग्री मान्यताप्राप्त है? आजतक किसी पर्यावरण, मानवता वादी संगठन का रेलवे स्टेशनोंपर खुले में बेचे जाने वाले खाद्य सामग्री पर ध्यान ही नही गया होगा। मुख्य मार्ग के जंक्शन स्टेशनोंपर खानपान इकाई का, एक एक दिन का एक एक लाख रुपयोंका लेनदेन हो जाता है। खानपान की खुली सामग्री अर्थात आलूबड़ा, कचौड़ी, समोसा, पूड़ी भाजी इत्यादि मानक के अनुरुप है या नही, सामग्री का वजन उसका उत्पादन कैसे हुवा, कहाँ हुवा इसका भी कोई भरोसा नही।

इंटरनेट से साभार। यह प्रतीकात्मक तस्वीर है, ऐसे कई अवैध वेंडर्स आपको रेल के साधारण वर्ग के द्वितीय श्रेणी से वातानुकूलित उच्च आरक्षित वर्ग के कोचों तक अपनी सामग्री धड़ल्ले से बेचते नजर आएंगे और हैरानी की बात है, यात्री भी इनसे बिना किसी खौफ के सामग्री खरीदते है।

ऐसी स्थिति में बिना बिल के, यात्री सामग्री खरीदता है और उसे खाकर यदि बीमार हो जाए, उसे अन्न विष बाधा हो जाए तो क्या रेल प्रशासन इसके लिए जिम्मेदार नही? रेल प्रशासन के दायरे में रेलवे स्टेशन, प्लेटफार्म, चलती हुई गाड़ियाँ सम्मिलित है। और उनकी पुरी जिम्मेदारी है, गाड़ी में एक भी बिना अनुज्ञप्ति प्राप्त विक्रेता चले या अपनी निकृष्ट दर्जे की सामग्री बेचें। साथ ही साथ यात्री की भी जिम्मेदारी बनती है। उन्होंने भी बिना बिल के खाद्य सामग्री नही खरीदनी चाहिए और न ही अवैध विक्रेता से कोई माल खरीदना चाहिए। इस तरह का व्यवहार उसके जान माल की सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह लगा सकता है।

यह जरूरी हो जाता है, रेल प्रशासन अब तो अपनी सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद कर ले। अवैध विक्रेता और उसकी सामग्री पर नकैल कसे, उनपर क़ानूनी कार्रवाई करें और यात्रिओंको सुरक्षित महसूस करवाए।

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आशाएँ, आशाएँ…..

17 मार्च 2024, रविवार, फाल्गुन, शुक्ल पक्ष, अष्टमी, विक्रम संवत 2080

😊 शीर्षक देख कर लगता नही न, की यह किसी रेल सम्बन्धी ब्लॉग का शीर्षक हो? जी, हम रेल प्रेमियोंकी, रेल यात्रिओंके लिए पता नही क्या क्या और कैसी कैसी आशाएँ बन्धी रहती है। बीते 8, 10 वर्षों में कई पूरी भी हुई है और कुछ ऐसी है, जो जल्द ही पूरी होने की आशाएँ है।

देश के सुदूर इलाके जम्मू-कश्मीर और ‘फार ईस्ट’ उत्तर पूर्व के सीमान्त क्षेत्र में रेल पहुँचना, देश के रेल नेटवर्क से बड़ी लाइन (ब्रॉड गेज) के जरिए उनकी सम्पर्कता जुड़ना बड़ी उपलब्धि है। मुम्बई से अगरतला सीधी यात्री गाड़ी और अब जल्द ही कश्मीर में श्रीनगर तक सीधी गाड़ी होना बड़ी बात है न? अब आप कहेंगे, देश मे किसी शहर से किसी शहर को जोड़ा जाना कोई विशेष तो नही, मगर यह बात जब देश मे रेल शुरू होने के लगभग पौने दो सौ साल में पूरी होती है तो बहुत विशेष ही है।

कई रेल क्षेत्र ऐसे है, जिनमे अब, बड़ी लाइन (ब्रॉड गेज) अमान परिवर्तन कर डली जा रही है। नई रेल लाइने, रेल दोहरीकरण, तिहरीकरण, चार – पाँच रेल लाइने! हाँ! नही सोचते थे कभी, की भुसावल – जलगाँव के बीच, मात्र 25 किलोमीटर अन्तर में रेल की चार लाइने डल जाएंगी और अब पाँचवी की तैयारी चल रही है। नही सोचा था कभी की, विदेशों में चलती है वैसी सुन्दर, आरामदायक रेल गाड़ियाँ भारतीय रेल पर भी चलेंगी, 102 वन्देभारत प्रीमियम गाड़ियाँ चल रही है और यात्रिओंको खासी पसन्द आ रही है, उनकी आवश्यकताएँ पूर्ण कर रही है। वन्देभारत तो खैर प्रीमियम रेन्ज की यात्री गाड़ी है, मगर आम मेल/एक्सप्रेस गाड़ियाँ? वे गाड़ियाँ भी अब नई LHB कोच संरचना से गतिमान हुई है, 130 किलोमीटर की तेज गति से चल रही है। साधारण सवारी गाड़ियोंको अब डेमू/मेमू के ट्रेन सेट में बदला जा रहा है, जिन्हें अलग से लोको जोड़ने की जरूरत नही और न ही शंटिंग करने की।

रेल विभाग में बरसों चलते रही शंटिंग पद्धति को भी रेल प्रशासन ने लगभग बन्द कर दिया है। यह सब देशभर की रेल लाइनोंके समग्र विद्युतीकरण कार्यक्रम से सम्भव हो पाया है। अब लम्बी दूरी की यात्री गाड़ियाँ, मालगाड़ियाँ प्रारम्भिक स्टेशन से गन्तव्य तक शायद ही लोको बदलने के लिए रुकती है। बस, परिचालनिक कर्मी, लोको पायलट बदले की चली। इससे रेल यातायात में बहुत बडे, कीमती समय की बचत हुई है।

अमूमन प्रत्येक जंक्शन स्टेशन के सामने बाईपास रेल मार्ग बनाया जा रहा है। इसकी शुरुआत अत्यंत व्यस्त रेल जक्शनोंसे हो चुकी है। इससे लोको रिवर्सल में जो कीमती समय, श्रम और रेल खण्ड को उतने समय अटका कर रखने से निजात मिल रही है। जहाँ बाईपास के लिए ज्यादा जमीन उपलब्ध नही है वहाँपर उडडान पुल, फ्लाई ओवर के जरिए रेल लाइन डाल, जंक्शन स्टेशन की व्यस्तता कम की जा रही है।

रेलवे स्टेशनोंका आधुनिकीकरण किया जा रहा है। कुछ वर्षों पहले रेल स्टेशनोंपर दिव्यांगों, वृध्दों या मरीजोंको प्लेटफार्म पर पहुंचने के लिए, भारवाहको की आवश्यकता होती थी मगर आजकल अमूमन सभी बड़े स्टेशनोंपर रैम्प डल गए है। लिफ्ट, एस्केलेटर जैसी आधुनिक यात्री व्यवस्था उपलब्ध करा दी गई है। जहाँ हमारी एक रैम्प की माँग पर रेल अधिकारियों की हँसी छूट गई थी, उस भुसावल मण्डल में प्रत्येक जंक्शन पर न सिर्फ रैम्प बल्कि लिफ्ट और एस्केलेटर भी लग चुके है। जिन रेलवे स्टेशनोंके आहाते गाँवभर के भिखारियों, आवारा पशुओं, आवारागर्दी का रैन बसेरा हुवा करते थे, आज पर्यटनस्थलों में बदल गए है। गांव और शहरोंकी शान बन चुके है।

मित्रों, यह सारी उपलब्धियाँ बस पिछले दशक भर की है और हम यह परिवर्तन इसलिए बता पा रहे क्योंकि हम हमारी उम्र के पांचवें दशक को पार कर चुके है। रेल जिस गति से आधुनिकीकरण की ओर अग्रेसर है, आने वाले दशक में हम और भी व्यापक बदलाव देखेंगे। रेल की गति 160 और 240 प्रति घण्टा बनने वाली है। वन्देभारत सिटिंग के साथ साथ स्लिपर आवृत्ति भी आ रही है।  400, 500 किलोमीटर प्रति घण्टे से यात्रा कराने वाली बुलेट ट्रेन की तैयारी जोरों शोरों पर है। अमूमन हर बड़े शहर में शहर यातायात के लिए मेट्रो ट्रेन्स का नेटवर्क बन रहा है। दो उद्यमी शहरोंके बीच की यात्रा का समय कम करने हेतु तेजी से काम किया जा रहा है। न सिर्फ रेल बल्कि सड़क और हवाई मार्ग का भी विकास तेजी से हो रहा है।

मित्रों, देश के इस यातायात विकास में आप भी अपनी आशाएँ, अपेक्षाएँ बन्धी रखिए। जो कभी सोचा भी नही होगा वह भी पूरा होने की स्थितियाँ बन जाती है। “लेट द फिंगर् क्रॉस” ☺️