07 मार्च 2024, गुरुवार, फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, द्वादशी, विक्रम संवत 2080
01439/40 पुणे अमरावती पुणे द्विसाप्ताहिक विशेष जो फिलहाल विशेष गाड़ी, विशेष किराया श्रेणी में परिचालित की जा रही है, मध्य रेल प्रशासन ने उसे अब नियमित गाड़ी क्रमांक देकर नियमित करने का निर्णय लिया है। यह गाड़ी अब 11405/06 गाड़ी क्रमांक से चलाई जाएगी। समयसारणी निम्नलिखित है,
अब आम यात्री सोचता होगा, फिलहाल चलित विशेष गाड़ी को नियमित किया तो क्या अन्तर हुवा? समयसारणी वही, परिचालन समय, तिथि सभी तो समान ही है।
हम आपको समझाते है, विशेष गाड़ी और नियमित गाड़ी का मूलभूत अंतर। दरअसल अंतर पड़ता है, किरायोंमे! विशेष गाड़ी के किराए और नियमित गाड़ी के किराए में लगभग दुगुने का अंतर है। हिंगोली से अमरावती के बीच विशेष गाड़ी के स्लिपर किराए ₹385/- और वातानुकूलित थ्री टियर के ₹1050/- है। वहीं नियमित गाड़ी के किराए, स्लिपर ₹165/- और वातानुकूलित थ्री टियर के ₹505/- है। अब समझे, विशेष की विशेषता? ☺️
खैर, हिंगोली और इस मार्ग के सभी यात्रिओंको पुनश्च बधाई। जनशताब्दी का विस्तार और अब पुणे – अमरावती का नियमित होना, बढ़िया है।
05 मार्च 2024, मंगलवार, फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, नवमी/दशमी, विक्रम संवत 2080
चालीसगांव स्टेशनपर भुसावल – इगतपुरी रेल तिहरीकरण हेतु यार्ड रिमोडलिंग, PRE NI & NI के कार्य के चलते ब्लॉक लिया जा रहा है,जिसके चलते भुसावल मंडल की कुछ गाडीयाँ दिनांक 07 मार्च से 14 मार्च तक अपने प्रारम्भिक स्टेशनसे गन्तव्य स्टेशन तक पूर्णतः रद्द की जा रही है!
1) 11114 भुसावल – देवलाली एक्सप्रेस दिनांक 07 मार्च से 14 मार्च तक नही चलेंगी।
2) 11113 देवलाली – भुसावल एक्सप्रेस दिनांक 08 मार्च से 14 मार्च तक नही चलेंगी।
3) 01211 और 01212 बडनेरा – नाशिक रोड – बडनेरा प्रतिदिन मेमू विशेष दिनांक 07 मार्च से 14 मार्च तक नही चलेंगी।
4) 11120 भुसावल – ईगतपुरी एक्सप्रेस दिनांक 07 मार्च से 14 मार्च तक नही चलेंगी।
5) 11119 ईगतपुरी – भुसावल एक्सप्रेस दिनांक 08 मार्च से 14 मार्च तक नही चलेंगी।
05 मार्च 2024, मंगलवार, फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, नवमी/दशमी, विक्रम संवत 2080
12071/72 मुम्बई – जालना – मुम्बई जनशताब्दी का जालना से आगे हिंगोली तक विस्तार करने के विषय मे रेल मुख्यालय का परिपत्रक जारी हो चुका है। गौरतलब यह है, मुख्यालय ने गेंद सम्बंधित क्षेत्रीय कार्यालय के पाले में “अर्ली कनविनिएंट डेट’ डाल कर सरका दी है। अब SCR दमरे और CR मरे जाने, समझे और जब उचित हो इसे लागू कर दे।
वैसे जाहिर सी बात है, चुनाव घोषित होने के बाद इसे उद्घाटन कर चलाना मुश्किल होगा, सम्भवतः जल्द से जल्द ही गाड़ी हिंगोली से शुरू होने के आसार रहेंगे।
परिपत्रक में अनुमानित समयसारणी दी गई है। जिसमे जालना – मुम्बई के बीच यह गाड़ी यथावत चलती रहेगी और विस्तारित भाग में जालना से 19:50 को रवाना होकर मार्ग में परभणी, पूर्णा और बसमत रुकते हुए रात 0:30 को हिंगोली टिका देगी। वापसी में 12072 अल-सुबह 4:20 की हिंगोली से रवाना होकर 8:55 पर जालना पहुँचेंगी और आगे मुम्बई पहुँचेंगी। 12072 के जालना से मुम्बई के रन में करीबन 30 मिनट का बदलाव दिख रहा है जो क्षेत्रीय रेलवे जब विस्तृत समयसारणी जारी करेगा तभी पूर्ण जानकारी मिल पाएगी।
एक बात इसमे और चिंतनीय है, मुम्बई से हिंगोली के बीच 655 किलोमीटर के लिए उपरोक्त शेड्यूल को देखते हुए, इस गाड़ी की अब औसतन गति 52, 53 किलोमीटर प्रति घण्टा रह जाएगी, तो क्या यह अपना सुपरफास्ट का स्टेटस खोने जा रही है? चूँकि रेल विभाग के सुपरफास्ट के मापदंड में गाड़ी की दोनों दिशाओं में औसतन गति, 55 किलोमीटर प्रति घंटा की होना आवश्यक है।
04 मार्च 2024, सोमवार, फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, अष्टमी/नवमी, विक्रम संवत 2080
यज्ञपी आधिकारिक सूचना पटल पर आने की है मगर खोजी तो अपने तर्कोसे, कुछ न कुछ लिंक निकाल ही लाते है।
नान्देड़ मण्डल की डी आर एम कल दिनांक 05 मार्च को अपने निरीक्षण दौरे पर हिंगोली जा रही है। परिपत्रक में यात्रा का उद्देश्य साफ किया गया है, मा. रेल राज्यमंत्री रावसाहेब दानवे दिनांक 07 मार्च को जनशताब्दी को अपनी पहली दौड़ के लिए हिंगोली स्टेशन से रवाना करेंगे।
जैसे ही अर्थात एक, दो दिन में इसकी आधिकारिक सूचना, समयसारणी घोषित हो जाएगी और उसे हम आपके लिए ले आएंगे। एक बार फिर, हिंगोलीवासियों को मुम्बई के लिए सीधी गाड़ी की शुभकामनाएं।
28 फरवरी 2024, बुधवार, फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, चतुर्थी, विक्रम संवत 2080
भारतीय रेल मुख्यालय ने फिर एक अकल्पनीय निर्णय लिया है। संक्रमनपूर्व सवारी गाड़ियोंके किफायती किराए यात्रिओंको लौटा दिए गए है।
भुसावल रेलवे टिकट काउन्टर पर निकला सामान्य यात्री टिकट
गौरतलब यह है, संक्रमण पूर्व काल की बहुतांश सवारी गाड़ियाँ मेल/एक्सप्रेस में बदली गयी है। उनमें परिचालनिक सुधार किया गया है। पुराने पारम्परिक ICF कोचों को बदल कर उन्हें डेमू/मेमू रैक में बदला गया है। यह गाड़ियाँ स्पीड-अप हुई है, उनके कुछ स्टोपेजेस भी रद्द किए गए है। कुल मिलाकर उन्हें एक्सप्रेस गाड़ियोंके स्वरूप में ढालने का प्रयास किया गया है।
अब विषय यह आता है, जब पुराने सवारी किराए लौटे है, तो वह कौनसी गाड़ियाँ है? यह केवल वह गाड़ियाँ है, जिनके स्टोपेजेस रद्द नही हुए है। जो अपनी पूरी यात्रा, अर्थात प्रारम्भिक स्टेशन से लेकर गंतव्य स्टेशन तक सभी स्टोपेजेस पर ठहराव ले रही है। जो गाड़ियाँ अभी भी विशेष गाड़ियोंकी श्रेणी में अपने गाड़ी क्रमांक में ‘0’ से शुरुवाती आँकड़े से कर रही है। जिसका परिचालन 200 से 250 किलोमीटर के भीतर का है। ऐसी परिभाषित गाड़ियाँ प्रत्येक मार्ग पर बिल्कुल गिनीचुनी बची है।
मध्य रेल के भुसावल मण्डल की बात की जाए तो सूरत की ओर जाने वाली तीन जोड़ी सवारी गाड़ियाँ थी, जिनमे दो जोड़ी एक्सप्रेस बन चुकी है और उनके किराए यथावत एक्सप्रेस के ही रहेंगे। केवल एक 09077/78 भुसावल – सूरत – भुसावल सवारी जो संक्रमण काल के पश्चात घटकर भुसावल – नंदुरबार – भुसावल बन गई, उसमे यह सवारी किराए लागू है। भुसावल – अमरावती मेमू जिसे भुसावल – बड़नेरा मेमू बनाया गया, उसमे भी यह सवारी किराए लागू है। मगर भुसावल वर्धा भुसावल सवारी जो अब एक्सप्रेस के स्वरूप में है और भुसावल – नागपुर – भुसावल ओवर नाइट सवारी बन्द की जा चुकी है, पुनर्स्थापित नही हुई और पुनर्बहाली के कोई आसार भी नही है। उसी प्रकार खण्डवा की दिशा में, भुसावल कटनी के बीच परिचालित सवारी गाड़ी सूरत भुसावल सूरत एक्सप्रेस से लिंक कर एक्सप्रेस में रूपांतरित हो चुकी है और भुसावल इटारसी के बीच चलने वाली सवारी भी एक्सप्रेस बन चुकी है। अर्थात भुसावल – खण्डवा मार्ग पर अब कोई सवारी गाड़ियाँ परिचालित नही हो रही।
फिर रेल प्रशासन के मद्देनजर, सवारी (ऑर्डिनरी) गाड़ियोंकी स्टेंडर्ड डेफिनेशन, मानक परिभाषा क्या है? मित्रों, परिपत्रक अनुसार तो संकल्पना क्या है, यह तो हमने उपरोक्त परिच्छेद में बताया है और एक रास्ता है, रेल विभाग के अनारक्षित टिकट बुकिंग ऍप UTS पर ऑर्डिनरी गाड़ियोंको ‘पैसेंजर विशेष’ ऐसा नामकरण किया गया है, उनमें यात्रियोंको सवारी गाड़ियोंके सामान्य किराए लागू होंगे।
यह वायरल मेसेज है, सोशल मीडिया में,
अब विचार करने की बात है, इस सस्ते किरायोंको फिर से बहाल करने की क्या आवश्यकता थी? यात्री तो मेल/एक्सप्रेस किराए चुका कर यात्रा करना शुरू हो गए थे। एक तरफ वन्देभारत प्रीमियम गाड़ियोंके टिकट पर भी छपता है, ‘रेल विभाग केवल 57% किराया ही वसूलता है’ दूसरी तरफ आप फिर से कम किराए बहाल कर रहे हो? दूसरा मुद्दा यह भी है, जितनी सवारी गाड़ियाँ संक्रमण काल के पूर्व में परिचालित थी उनमें से अमूमन 75% गाड़ियोंको रेल प्रशासन मेल/एक्सप्रेस में रूपांतरित कर चुकी है। मण्डल मुख्यालय या क्षेत्रीय मुख्यालय या खुद रेल प्रशासन भी इस सामान्य किरायोंकी पुनर्बहाली की सूचना आम हलक़ों में परिपत्रक निकाल कर दे नही रही। स्टेशनोंपर, टिकट खिड़कियों पर भी कोई सूचनाएं प्रदर्शित नही की गई है, तो क्या समझना है, यह प्रयोग है या यात्रिओंकी भावनाओं से किया गया खिलवाड़ है?
प्रीमियम, तगड़े किरायोंकी वसूली के बावजूद रेल प्रशासन वन्देभारत के टिकट पर अपनी ‘सब्सिडी’ वाली पंक्ति छापना नही भूलती
इससे बेहतर तो यही रहता, प्रशासन ने जो इन सवारी गाड़ियोंका मेल/एक्सप्रेस श्रेणी में उन्नतिकरण किया था भले ही केवल किरायोंको लेकर ही था, उसे अपने मानकों पर खरा करा देते, पूर्ण रूप से एक्सप्रेस की गति से, उचित समयसारणी पर चलवाते। यात्रिओंको मेल/एक्सप्रेस किराया देने में कोई परहेज नही था और आज रेल प्रशासन इनके किराए घटाकर ले रहा है तो कोई खुशी भी नही है।