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स्पेशल ट्रेनों का सीज़न

आ गया जी स्पेशल ट्रेन्स चलने वाला सीज़न। ढेरो छूटटी स्पेशल, समर स्पेशल गाड़ियाँ चल पड़ी है, अपने खास यात्रिओंको उनके गांव, रिस्तेदारोंसे मिलवाने।

हमेशा रेग्युलर चलनेवाली गाड़ियाँ एकदमसे फुल्ल चलती है तो भीड़ कम करने के लिए, इन गाड़ियोंका दबाव कम करने के लिए रेल प्रशासन एक्स्ट्रा गाड़ियाँ चलाता है। इन स्पेशल गाड़ियोंकी एक विशेषता होती है। समय सारिणी तो होती है, लेकिन समय पालन कभी कभार ही होता है। स्टोपेजेस कम होते है, लेकिन बीच मे कहीं भी खड़ी हो जाती है। आरक्षित डिब्बे तो होते है, लेकिन टिकट बाबू अरे वहीं अपने टी टी साहब नदारद।

स्पेशल गाड़ियोंके बड़े स्पेशल दुखड़े रहते है। साफ सफाई, टँकीयोंमे पानी, गाड़ी में दियाबत्ति ढंग से मिल जाए तो भाईयों आप गंगा नहाए, सफल हो गईं यात्रा। अब आप कहेंगे, हम तो स्पेशल ट्रेनोकी बुराई करते ही जा रहे, भाई यह हमें हमारे स्टेशनपर पोहोचायगी या नही। जी, जी जरूर जाएगी, लेकिन आपकी पूरी सहनशीलता को कसौटी पर नापकर।

अब ऐसा होता यूँ है, की छुट्टियोंका सीज़न अपने चरम पर होता है। रेग्युलर गाड़ियोंके समय पालन का दबाव रहता है, और उसमें जो गैप रहता है उनमें यह एक्सट्रा गाड़ियाँ चलाई जाती है। स्टेशनोंपर ट्रेन मेंटेनेंस स्टाफ़, गाड़ियोंका एमिनिटी स्टाफ़ पुरी शिद्दत के साथ काम मे जुटा रहता है। ट्रेन कन्ट्रोलिंग स्टाफ़, अपने काम पर इतनी बारिकीसे नजर गड़ाए रखता है की हर छोटे से स्लॉट में से इन गाड़ियोंको झट से आगे खिसकता रहता है। इसके बावजूद, उफ़्फ़! थोडी बहुत देरी कहीं न कहीं हो ही जाती है। शायद यही वजह रहती है की यह गाड़ियोंका यात्रा समय भी थोड़ा ढीला ही रहता है।

खैर, आप कभी ईन गाड़ियोंमें बैठ जाओ तो अपने पूरी यात्रा के दौरान खानपान का बंदोबस्त तबियत से जमा लेना, और शान्ति से, एक योगी की तरह अपना गंतव्य स्टेशन तक का सफर करना। अहं, हम आपको बिल्कुल डरा नही रहे है। बेशक आप इसमें यात्रा कीजिए, बस हम आपको परिस्थितियों से अवगत करा कर आपका धैर्य मजबूत कर रहे है।

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