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क्या आपने रेलवे में रिजर्वेशन लिया है?

अभी पिछले हफ्ते एक न्यूज पढ़ने में आई, रेलवे प्रशासन ने तय किया है, की वे जनरल सेकंड क्लास डब्बोंमे बॉयोमेट्रिक आई डी से एंट्री देंगे। इसकी शुरुवात मध्य रेल के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस मुम्बई से होगी और ट्रेन रहेगी, मुम्बई लखनौ पुष्पक एक्सप्रेस।

पुष्पक एक्सप्रेस, जिसमे 24 डिब्बोंमे से, केवल 4 डिब्बे अनारक्षित जनरल सेकंड क्लास रहते है। मुम्बई में, गाड़ी छूटने के समय जनरल डिब्बे में बैठने वालोंकी कतार लगती है और RPF की निगरानी में लोग चढ़ते है। फिर भी गाड़ी में चढ़ने वालोंका जो हुजुम रहता है, कई लोग इसमें चढ़ ही नही सकते और चढ़ भी गये तो बैठने की जगह नही मिल पाती। कई सारे लोग जगह सम्भाले होते है और दाम लेकर जरूरतमंदोंको बेचते है। इन्हीं एजंटोंपर नकैल कसने के लिए रेल प्रशासन ने यह कदम उठाने की सोची है।

जनरल टिकट लेते वक्त ही यात्रीका बॉयोमेट्रिक आईं डी याने हो सकता है आधार कार्ड नम्बर, टिकट पर अंकित किया जाएगा और डिब्बे के बाहर उसे कन्फर्म करके ही एंट्री दी जाएगी। जैसे भी हो, लेकिन प्रशासन का यह सराहनीय प्रयास रहेगा। इसके चलते वास्तविक यात्री और वृद्ध एवं महिला यात्रिओंको को अपनी सीट पानेमे काफी सुलभता होगी। हम ऐसे प्रयासोंका तहे दिल से स्वागत करते है।

यह तो हो गई जनरल सेकंड क्लास की बात, लेकिन आरक्षित डिब्बोंके बारेमे रेल प्रशासन क्या सोचता है, जरा यह भी तो पता चलें। आजकल हर तरह के आरक्षित डिब्बे चाहे वो AC का 2 टियर हो, 3 टियर हो, अनारक्षित यात्री, उसमे भी खास करके रोजाना अपडाउन करने वाले MST पास धारक, पुलिस और रेलवे के कर्मचारी बेख़ौफ़ यात्रा करते नज़र आते है।

जब AC की कोई पर्वा नहीं तो शयनयान स्लिपर की तो बिल्कुल ही इज्जत नही रहती। स्लिपर क्लास तो दिन की यात्रा में दूसरा जनरल डिब्बा ही बना रहता है। बेचारा आरक्षित यात्री अपना मुँह भींचके, रात होने का इंतजार करते, अपना सफर काटते रहता है। ताकी रात हो और वह अपनी बर्थ पे लेट सके।

इन सभी आरक्षित डिब्बोंके कॉरिडोर, अपडाउन वाले यात्रिओंसे डटे रहते है। जिसकी हिम्मत अंदर आ के जमने की नहीं हो पाती वह कॉरिडोर में जमा रहता है।
अंदर बैठा बेचारा यात्री टॉयलेट तो क्या यूज कर ले।

जब हर आरक्षित डिब्बा, रेल का प्रतिनिधि चाहे वह TTE हो, AC का कन्डक्टर हो, या अटेन्डेंट हो, अपनी ड्यूटी पर हाज़िर रहता है तो क्यों यह मुसिबत झेलनी पड़ती है आरक्षित यात्री को? इसमें रेल प्रशासन क्यों नही कोई कडा कदम उठाती है?

हमारा आग्रह है रेल प्रशासन से, यह रोजाना की आरक्षित यात्रिओंकी शिकायतों पर गौर करे, पैसेंजर एमिनिटीज के स्टाफ़ में बढ़ोतरी करके यात्री की सुविधा का ध्यान रखे, उनके द्वारा चुकाए गए आरक्षित टिकट के मुल्य की क़दर करे। कई यात्री अपना टिकट तत्काल और प्रीमियम तत्काल में डेढ़ गुना, दुगुना दाम देकर यात्रा करते है। क्या वह यह सोचकर घरसे निकलते है की उन्हें अपनी तमाम यात्रा किसी के साथ अपनी जगह बाँट कर पूरी करनी होगी?

रेलवे प्रशासन यह भी तो कर सकती है, की दिन की यात्रा और अपडाउन करनेवालोंके समय की गाड़ियोंमे ज्यादा सीट्स की क्षमता वाले एक्स्ट्रा कोचेस लगाए जाए ताकी दोनोंही तरह के यात्रिओंको परेशानी का सामना ना करना पड़े। जब गाड़ियोंकी क्षमताएं बढ़ाई जा रही है, 21 डिब्बोंके जगह 24 और 26 डिब्बे लगाए जा रहे है तो क्यों न हायर सीटिंग कैपिसिटी वाले डिब्बे एक्स्ट्रा कोचेस में लगाए जाए?

जो गाड़ियाँ, हर 25, 50 km पर रुकने वाली है, उन गाड़ियोंके लिए तो यह व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।

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