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चौकीदार, रेलवे में

जबसे ‘चौकीदार’ वाला अभियान चला है, सबसे ज्यादा चौकीदार रेलवे विभाग ने पाए है। सारे जागरूक नागरिक, ट्वीटर के जरिए रेलवे के अफ़सरोंसे भिड़ते रहते है। चूँकि हर प्रश्न का उत्तर जिम्मेदार अफसर देते है, तो ट्वीटर पर तो यही दिखता है की सभी रेलवे अफसर यात्रिओंकी शिकायतों पर एकदम मुस्तैदी से हाजिर है।

रेलवे विभाग में हर रोज सैकड़ों, हजारों शिकायतें ट्वीटर पर लगी रहती है। दरअसल शिकायतें वहीं की जाती है, जहाँ उसकी तुरन्त सुनवाई होती रहे, उसका समाधान होता रहे। रेलवे प्रशासन इस मामलोंमें बेहद सतर्क दिखाई देता है। कमोबेश 100 में से 70 शिकायतें साफसफाई के संदर्भ में होती है, 25 शिकायते सुरक्षा और कर्मचारियों के अनुशासन की कमी के बारेमे होती है और बची 5 जो है वह प्रार्थना, बिनती होती है, जैसे किसको कोई चिकित्सा सहायता, या सम्पर्क नही हो पा रहा है तो मदद या फिर किसी तरह की कोई सहायता की बिनती होती है। लेकिन कुल मिलाकर 95% तो शिकायते ही होती है। हर शिकायतोंका जवाब तुरंत मिलता है और कार्रवाई के लिए फौरन सम्बन्धित विभाग को ट्वीटर के ही जरिए चैट में जोड़ लिया जाता है। जब तक यात्री का समाधान नही होता तब तक चैट चलते रहती है।

इसमें भी एक विशेषता और देखने में मिल रही है, लगभग 50% शिकायतें स्लिपर क्लास में अनाधिकृत रूपसे चढ़े हुए यात्रिओंके बारेमे होती है। याने हर दूसरी शिकायत इस प्रकार की है और जिसका स्थायी समाधान रेल प्रशासन बिल्कुल ही नही कर पा रही है। ऐसी कोई गाड़ी नही की जिसके स्लिपर क्लास डिब्बोंमे एक भी अनाधिकृत यात्री नही। यह खेल जब तक चलते रहेगा जब तक रेलवे आरक्षित टिकट को अनिवार्य रूपसे e टिकट में बदल नहीं देता। e टिकट यदि कन्फर्म नही होता है तो अपनेआप रद्द हो जाता है और उस टिकट के पैसे रेलवे यात्री को लौटा देता है लेकिन पारंपरिक छपा, बुकिंग ऑफिस वाला टिकट वेटिंग लिस्ट में भी छपता है और यह टिकटधारी यात्री स्लिपर क्लास में यात्रा भी करते रहता है।

इस परेशानी का हल पूर्णतयः हो सकता है।

1: स्लिपर क्लास की टिकट पूर्ण रूपसे e टिकट न कर पाओ तो कमसे कम यदि टिकट, वेटिंग वाली जनरेट होने लगती है तो उसे केवल e टिकट प्रारूप में ही दी जाए। ताकी जो टिकट चार्ट बनने के बाद भी प्रतीक्षा सूची पर रह जाती है, वह अपनेआप रद्द हो जाए। जब यात्री के पास टिकट ही नही होगा तो वह गाड़ी में चढ़ने के लिए परहेज करेगा।

2: स्लिपर क्लास में अमिनिटिज स्टाफ याने TTE के साथ RPF भी मदत के लिए मौजूद हो।

3: जिस मार्ग पर निर्धारित संख्यासे ज्यादा MST पासेस बुक की गई है, उस मार्ग पर, यात्रिओंके अनुपात में EMU, इंटरसिटी चलाई जानी चाहिए। जब तक यह सम्भव नही हो पाता तब तक निर्धारित गाड़ियोंमे MST कोच उपलब्ध कराए जा सकते है।

4: यह सेकण्ड क्लास टिकटधारी यात्री या वेटिंग लिस्ट टिकटधारी यात्री को जुर्माना, दंड लेकर उसी डिब्बेमे याने स्लिपर क्लास में यात्रा करने के लिए अनुमति दे देना बिल्कुल ही अनुचित है, जो बेखटके हो रहा है।

इस तरह प्रतीक्षा सूची वाले यात्रिओंपर बन्धन ला कर लम्बी दूरी के आरक्षित यात्री को सुकून की यात्रा मिल पाएगी और छोटी दूरी के यात्रिओंको भी उनके लिए अलगसे गाड़ी या डिब्बोकी व्यवस्था रही तो वे स्लिपर क्लास में भीड़ में यात्रा करने से परहेज़ करेंगे या यूँ कहिए बचेंगे।

स्लिपर क्लास के उदाहरण के तौर पर कुछ चित्र दे रहे है।

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