देशमे 100 मार्ग पर करीबन 150 प्राइवेट गाड़ियोंके चलाए जाने की खबरें है। मुम्बई के लिए पनवेल, दिल्ली के लिए ओखला, हैदराबाद के लिए चारलापल्ली, चेन्नई के चेन्नई एग्मोर इस तरह से प्राइवेट गाड़ियोंके लिए टर्मिनल स्टेशन बनाए जाएंगे।
रेलवे की हर वो सुविधा जो आजतक बाकी रेग्युलर गाड़ियोंको नही मिली वो इन गारंटीड कमाई देने वाली गाड़ियोंको दी जाएगी। अब आप पूछेंगे ‘ गारंटीड इन्कम?’ जी हाँ! रेलवे, जो भी इन गाड़ियोंका ऑपरेटर रहेगा उनसे अपनी शर्तोंके हिसाब से पहलेही रक्कम जमा कर लेगी। एक गाड़ी के लिए कमसे कम 10 डिब्बों का रैक अनिवार्य रहेगा, चाहे डिब्बे जिस किसी श्रेणी के हो। यह बात भी निश्चित है, की प्रिमियम गाड़ियाँ रहेगी तो द्वितीय श्रेणी, स्लिपर तो गिनती में शायद ही रहेंगे। तो सिटोंका किलोमीटर के हिसाब से किराया ले लिया जाएगा। एम्प्टी हौलेज याने किसी जगह से विविक्षित जगह पर जाने का खाली रेक का किराया प्रति घंटेसे, गन्तव्य पर पोहोंचने के बाद, अपनी वापसी यात्रा शुरू करने तक वहाँ पर जितनी देर गाड़ी खाली खड़ी रहेगी उसका ‘डिटेंशन चार्जेस’ भी लिया जायेगा। यह कुल मिलाकर ऐसा मालूम होता है की, पर्यटकों के लिए एक स्पेशल ट्रेन को जो जो चार्जेस लगते है, वैसे ही ट्रीटमेंट रहेगी।
अब रही बात यात्रिओंके यात्रा किरायोंकी, तो कोई भी ऑपरेटर अपनी कमाई तो देखेगा ही। यह बेसिक चार्जेस जाने के बाद, ऑपरेटर उसमे प्रिमियम टाइमिंग, बेडिंग, खान-पान, बीमा, आवभगत, समयपालन, साज-सज्जा आदि जोड़कर यात्री को लुभाया जा सके इतने किराए चार्ज करेगा।
हर वह चीज, जिसमे उसे उसके व्यवसाय का पोटेंशियल नज़र आएगा उसे वह अपनाएगा। चाहे वह गन्तव्य स्टेशन हो, बीच वाले स्टेशन हो या परफेक्ट पोहोंचने का समय हो। अब तक किसी भी वजनदार, रसूखदार के अनुरोधों पर गाड़ियाँ चलाई जाती थी, नए नए होल्ट्स दिए जाते थे, वह दिन इन गाड़ियोंके लिए लद गए। यहाँ सिर्फ और सिर्फ कमाई अर्निंग यही एक निकष रहेंगा। जिस स्टेशन से यात्रिओंकी माँग रहेगी, ट्रैफिक का पोटेंशियल रहेगा, वहीं होल्ट मिलेगा।
आज किसी भी गाड़ी को एक्सटेंड किया जाता है, उसके गंतव्य स्टेशन को बदल कर किसी आगे के स्टेशन के लिए विस्तरित किए जाने पर बहोत सारा बवाल खड़ा किया जाता है। रेल प्रशासन भी दबाव में 300 – 400 किलोमीटर तक दस-दस डिब्बोंको यात्रिओंके माँग पर लॉक कर के लाने पर राजी हो जाता है। क्या इसी का नतीज़ा यह प्राइवेट गाड़ियाँ कार्यान्वित हो रही है? स्लिपर डिब्बों में, वातानुकूलित डिब्बों में आए दिन अतिरिक्त यात्री के रूप में सीज़न टिकट धारी, रेलवे के ऑन ड्यूटी कर्मचारी, गैरकानूनी विक्रेता, भीख मांगनेवाले, लूट मचानेवाले तृतीयपंथी क्या इन सबसे आसानीसे निज़ात पाने का यह तरीका है?
मित्रों, यह नया दौर आने जा रहा है। 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति, एयरहोस्टेस की तर्जपर की आवभगत, पाँचतारा वाला खाना, उच्चतम आसन व्यवस्थाओंके साथ यह गाड़ियाँ जब हमारे सेवाओं में हाजिर होंगी तब भारतीय रेल के यात्रिओंके नाम एक इतिहास लिखे जा रहा होगा और हम सब उसके गवाह रहेंगे।
