हमारे देश सम्पर्क का सबसे उपयुक्त साधन क्या है, हर किसी का उत्तर होगा रेल्वे। आसान, किफायती, बेहद सुविधाजनक और सर्वथा सुरक्षित। इसीलिए जब 12 तारीख से 15 जोड़ी राजधानी स्पेशल गाड़ियाँ शुरू की गई तो बाकी भी मार्ग के यात्रिओंकी उम्मीद जगी, आज नही तो कल हमारे शहरोंकी गाड़ियाँ भी चल पड़ेगी।
2-4 ही दिनोंमें, इन स्पेशल गाड़ियोंके उत्साहवर्धक परिणामों को देखते हुए, रेल प्रशासन ने 22 से इंटरसिटी, शताब्दी और मेल/एक्सप्रेस स्पेशल गाड़ियाँ चलाने की खबर दे दी, दिनांक 15 से सिटों की बुकिंग भी शुरू होनी थी। मगर पता नही क्या हुवा, घोषणा ऐसे फुर्र हुई की यात्रिओंको लग रहा है, खबर सच भी थी या नही।
हाल ही में कर्नाटक राज्य शासन ने केवल राज्य की राजधानी से राज्य के मुख्य शहरों के बीच रेल गाड़ियाँ चलाने की मांग की है। यह गाड़ियाँ बेंगालुरु, हुब्बाल्ली, मैसूरु और बेलागावी के बीच चलाने की मांग की गई है।
हमने शुरुवात से ही कम स्टापेजेस वाली इंटरसिटी गाड़ियाँ, जिसमे शताब्दी, गतिमान और गरीबरथ गाड़ियाँ चलवाई जाए ऐसा अनुरोध किया था। आज जो 15 जोड़ी राजधानी गाड़ियाँ है, उन मे से एक भी गाड़ी मध्य रेलवे के नागपुर – इटारसी मार्ग के अलावा कहीं नही चल रही है। मध्य रेलवे के मुख्यालय, महाराष्ट्र की और देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई से मध्य रेलवे पर कोई यात्री गाड़ी नही चल रही है। जिस तरह कर्नाटक राज्य की मांग है, उसी प्रकार सभी राज्य रेल सम्पर्क के लिए गाड़ियोंकी माँग कर सकते है जो लाजिमी, आवश्यक भी है।
रेल प्रशासन को चाहिए की वे चुनिंदा गाड़ियाँ, जिसमे शताब्दी, गरीबरथ, हमसफर जैसी कम स्टापेजेस वाली गाड़ियाँ शुरू करें।
