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दक्षिण मध्य रेलवे की 11 जोड़ी गाड़ियाँ किस तरह चलेगी, उनका व्यवस्थापन पत्रक

मित्रों, इन 11 गाड़ियोंका व्यवस्थापन दक्षिण मध्य रेल किस तरह करेगी, यह बहोत बहोत टेक्निकल है और आम यात्रिओंका कतई कोई लेना देना नही होता। यात्रिओंको तो बस गाड़ियोंका यात्री शेड्यूल, गाड़ियोंके फेरोंके दिन इस बात से मतलब रहता है। आपको शायद यह भी पता नही होगा की जिस तरह रेलवे की एक समयसारणी यात्रीओंके लिए बनती है, उसी प्रकार उनके ऑपरेटिंग स्टाफ़ याने लोको पायलट, गार्ड्स और वाणिज्य नियंत्रकोंके लिए वही गाड़ियोंकी, स्टेशनोंकी एक अलगसे, यात्री समयोंसे भिन्न ऐसी समयसारणी बनती है।

यात्री गाड़ियाँ जिस ज़ोन की, स्वामित्व वाली होती है वहाँसे उनका प्राइमरी मेंटेनेन्स याने प्राथमिक रखरखाव होकर निकलती है और जब गन्तव्य पर पोहोंचती है तो उसका सेकेंडरी याने दुय्यम रखरखाव किया जाता है। प्राथमिक रखरखाव को ज्यादा वक्त लगता है, जिसमे गाड़ी के सारे कलपुर्जों की बारिकीसे जाँच होती है वहीं दुय्यम रखरखाव में साफसफाई और अन्य जरूरी जांच करा के गाड़ियाँ रवाना की जाती है। बड़े बड़े जंक्शनोंपर जहाँ ऑपरेटिंग और कमर्शियल स्टाफ़ बदलता है वहाँपर यात्री समयसारणी में भले ही गाड़ी 2 या 5 मिनट का स्टापेज दिखा रही हो पर ऑपरेटिंग समयसारणी में वह ठहराव 15 से 20 मिनट का भी हो सकता है।

आज जो परीपत्रक हम यहां दे रहे, वह भी पुर्णतयः ऑपरेटिंग स्टाफ़ के उपयुक्त है। आप उस पत्रक से केवल यह जान लीजिए यह गाड़ियाँ कौनसे दिन और कौनसे समय पर चलेगी, गन्तव्योंपर कब पोहोचेगी। तो लीजिए

अब यह पत्रक देखने के बाद आपको यह तो समझ ही गया होगा, PM याने प्राइमरी मेंटेनेन्स, SM याने सेकेंडरी मेंटेनेन्स और TA याने टर्न अराउण्ड। स्टेशनोंके, डब्बोंके कोड का इस्तेमाल होता है।

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