रेलवे के तमाम क्षेत्रीय कार्यालयोंने विविध परीपत्रक जारी कर कर के, गाड़ियोंकी घोषणा कर दी। किसी की 5 तो किसी की 15 गाड़ियाँ चल पड़ेंगी, यहाँतक की विन्टर स्पेशल गाड़ियांभी 15 अक्टूबर से चल पड़ेंगी। लेकिन मित्रों यह जो भी गाड़ियाँ है सारी की सारी स्पेशल और आरक्षित आसन व्यवस्थाओंके साथ चलाई जा रही है।
जब तक (पता नही कब तक☺️) यह विशेष और आरक्षित आसन व्यवस्थाओंके साथ गाड़ियोंका दौर चलता रहेगा, तब तक मासिक पास धारकोंकी दखल लेनेवाला कोई नहीं है। न सिर्फ उपनगरीय अपितु देशभर की सारी रेल सेवाओंपर हजारों, लाखोंकी संख्या में मासिक पास धारक है। आसपास के शहरोंमें नौकरी करनेवाले, कॉलेज और क्लासेस मे पढनेवाले विद्यार्थी इस तरह के मासिक पास निकालते है। मासिक पास रोज का जाना आना करनेवालोंके लिए बेहद उपयोगी और आर्थिक दृष्टिकोण से किफायती भी है। एक बार पास बना लिया तो इन लोगोंको टिकट खिड़की की लम्बी क़तारों में खड़ा रहने की जरूरत नही और दूसरा किफायती इतनी की नियमित किरायोंसे 25 से 30 प्रतिशत शुल्क में महीनेभर यात्रा की जा सकती है।
जहाँ उपनगरीय गाड़ियाँ चलती है, जैसे मुम्बई, पुणे या इतर बड़े महानगर वहाँपर धीरे धीरे यात्रिओंके लिए यात्रा की सुविधा खोली जा रही है। लेकिन जहाँपर उपनगरीय गाड़ियाँ नही चलती, वहाँ के मासिक पासधारकोंकी अवस्था बड़ी भीषण है। इन लोगोंकी तकलीफ यह है, की सारी गाड़ियाँ आरक्षित और द्वितीय श्रेणी टिकट बन्द होने के कारण यह लोग ट्रेनोंमें यात्रा नही कर पा रहे है और सड़क मार्ग से यात्रा करने के लिए मजबूर है। सड़क मार्ग से रोजाना जाना आना कर के इन लोगोंकी शारारिक, मानसिक और आर्थिक परिस्थिति बड़ी ही बिकट हो गयी है। आधे से ज्यादा तनख्वाह, बाइक या कार के इन्धन और रखरखाव पर खर्च हो जाती है। विशेष बात तो यह है, की न तो कोई नेता या कोई रेल यात्री संगठन इनकी तकलीफों पर गौर कर रहा है।
संक्रमण काल के 22 मार्च से लेकर आज तक छह महीने बीत गए और अब सातवाँ महीना चल रहा है। अनलॉक 5 भी आ गया, लेकिन रेल प्रशासन मासिक पास धारकोंकी सुध लेने को तैयार ही नही। तमाम आरक्षण स्पेशल गाड़ियोंसे इन लोगोंको कोई लेनादेना नही, इनके लिए तो इनकी सवारी गाड़ियाँ, डेमू, मेमू चलना चाहिए। जहाँतक बात यात्री रिकॉर्ड की है, तो हर एक मासिक पास धारक का रिकॉर्ड रेलवे के पास उसकी फोटो आइडेंटिटी और ऐड्रेस के साथ रखा जा सकता है। इतनी सारी औपचारिकता अपनाने के बाद भी रेल प्रशासन इन सीज़न पास धारकोंकी कोई व्यवस्था क्यों नही कर पा रहा है, यह एक संशोधन का विषय हो जाता है। हम तो रेल यात्री संगठनोंको भी आवाहन करते है, आए दिन फलाँ गाड़ी शुरू हो रही है या फलाँ गाड़ी को एक्सटेंड करवाना है, स्टापेजेस बढ़वाना है इसके परे जाकर थोड़ा मासिक पास धारकोंके लिए भी पत्राचार करे, उनकी तकलीफों को भी महसूस करें, रेल मंत्री, अफ़सरोंतक पासधारकोंकी बात अब अग्रक्रम से रखी जाना चाहिए।
सवारी गाड़ियोंको चलवाना रेल प्रशासन मुनासिब नही समझता तो कम अन्तरोंके स्टापेजेस वाली कई एक्सप्रेस गाड़ियाँ चल पड़ी है, उन गाड़ियों में ही पास धारकोंकी व्यवस्था करवा दी जाए।
