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चलो, अब आया नम्बर मेमुओं का!

एक एक करके गाड़ियाँ शुरू की जा रही है। कई क्षेत्रीय रेलवे ने अपने इलाके की मेट्रो, उपनगरीय गाड़ियाँ और जहाँ उपनगरीय गाड़ियाँ नही है, वहाँपर मेमू गाड़ियाँ चला दी है। मध्य और पश्चिम रेलवे मे दोनोंही रेल्वेज का मुख्यालय मुम्बई पड़ता है और महाराष्ट्र में है। अतः महाराष्ट्र राज्य शासन की संक्रमण कालीन एहतियात, नियम के अधीन रहते हुए इन दोनों ही रेल्वेज को अपनी गाड़ियोंके बारेमे निर्णय लेना पड़ता है। हाल ही में महाराष्ट्र राज्य शासन ने मुम्बई की लोकल गाड़ियाँ 1 फ़रवरी से आम यात्रिओंके लिए कुछ बन्धनोंके साथ खोले जाने का निर्णय जाहीर किया और उसी निर्णय के आधार पर मध्य और पश्चिम रेल्वेज ने अपनी उपनगरीय गाड़ियोंकी संख्या में वृद्धि की।

आज पश्चिम रेलवे ने अपनी गैर उपनगरीय क्षेत्र में पहली अनारक्षित मेमू चलाने की घोषणा की है। स्वागत है। गौरतलब यह है, यह गाड़ी गुजरात राज्य में सूरत – वलसाड के बीच चलेगी।

यह शुरवात है और धीरे धीरे मेमू गाड़ियाँ बढ़ेंगी। ध्यान रहे, जितनी जिम्मेदारी शासन की है उससे कई ज्यादा जिम्मेदारी इन गाड़ियोंमे यात्रा करने वाले यात्रिओंकी भी है। अब भी संक्रमण कालीन नियम जारी है, टीकाकरण अभी पूरा नही हुवा है तो जब तक दवाई नही, तब तक ढिलाई नही, समझे?

अ र रं !

भाईसाहब, ज्यादा खुश होने का कौनो जरूरत नाही, सचमुच बिलकुल ही बिलकुल ढिलाई नही। फिर से सुधारित परीपत्रक आया है और मेमू गाड़ी केवल आरक्षित आसन व्यवस्थाओंके के साथ ही चलेगी। क्या समझे? 😊😊

यह सुधारित परीपत्रक है।
और यह है, साहब जी का, शाम का अश्योरेन्स, “हाँ, भाई अनारक्षित मेमू ही है।” लेकिन शाम में जो “है” थी वह शाम ढलते ढलते थी हो गयी 😢

इससे पहले की और कुछ बदलाव आ जाए, इस लेख की तो इतिश्री कर लूं। जय हो। ☺️

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