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लिंक एक्सप्रेस की उपयुक्तता को रेल प्रशासन कैसे नकार सकती है

एक बार फिर लिंक एक्सप्रेस गाड़ियोंका जिन्न बोतल से बाहर आने को है। हाल ही में SCR द म रेल ने हैदराबाद/तिरुपति से वास्को के लिए एक विशेष गाड़ी की घोषणा की। इसमें मुख्य गाड़ी 07419/20 तिरुपति वास्को स्पेशल है और हैदराबाद से 07021/22 क्रमांक से 10 कोच की गाड़ी गुंटकल तक आकर मुख्य तिरुपति वास्को में जुड़ेगी। यह पुरानी लिंक एक्सप्रेस की ही संकल्पना है।

यह लिंक एक्सप्रेस वाली संकल्पना ब्रांच लाइन के महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनोंको मुख्य मार्गपर चलने वाली गाड़ियोंसे जोड़ते है। कई बार ऐसा होता है, ब्रांच लाइन के स्टेशनोंकी गाड़ियोंकी मांग तो होती है, मगर एक पूर्ण गाड़ी भरे इतने यात्रिओंकी नही, ऐसी स्थिति में भारतीय रेल के ब्रिटिशकाल से ही लिंक एक्सप्रेस या लिंक कोचेस चलाने की व्यवस्था चल निकली। कमसे कम 50 लिंक एक्सप्रेस गाड़ियाँ ब्रांच लाइनके छोटे बड़े स्टेशनोंके यात्रिओंको प्रतिदिन सेवाएं दिए जा रही थी, जिसे रेल प्रशासन ने अपने शून्याधारित टाइमटेबल के नियोजन में समाप्त किए जाने की घोषणा कर दी।

यह लिंक एक्सप्रेस गाड़ियाँ कितनी उपयुक्त है, इनकी सूची देखकर आप जान जाएंगे। इन्दौर – उज्जैन – भोपाल जयपुर लिंक, हावडा जोधपुर – बीकानेर लिंक, गौहाटी – बाड़मेर बीकानेर लिंक, दिल्ली सराय रोहिल्ला जोधपुर बीकानेर लिंक, निजामुद्दीन वास्को हुब्बाली लिंक, हावडा पोरबंदर ओखा लिंक, खजुराहो वाराणसी लिंक, झांसी इन्दौर लिंक, मानिकपुर खजुराहो निजामुद्दीन लिंक, राधिकापुर आनन्द विहार लिंक, तूतीकोरिन कोयम्बटूर लिंक, मदुराई चंडीगढ़ लिंक, सियालदाह हल्दीबाड़ी लिंक, सहरसा राजेंद्रनगर लिंक, वाराणसी शक्तिनगर लिंक, पटना सिंगरौली लिंक, दिल्ली सराय रोहिल्ला कोटद्वार मसूरी लिंक, शक्तिनगर टनकपुर त्रिवेणी लिंक, भगत की कोठी रामनगर कार्बेट पार्क लिंक, दिल्ली रामनगर लिंक, डिब्रूगढ़ दरभंगा अवध असम लिंक, टाटा कटिहार लिंक, मन्दसौर मेरठ लिंक, बरवाडीह बरेली लिंक इत्यादि इसके अलावा लिंक कोचेस भी चलते थे जिनकी सूची यहाँपर देना मुमकिन नही। लेकिन एक उदाहरण मुम्बई से चंद्रपुर, बल्हारशहा कोच का है। यह 4-5 कोच मुम्बई नागपुर सेवाग्राम से वर्धा आकर बल्हारशहा सवारी में लगते है। इस तरह चंद्रपुर, बल्हारशहा के यात्री सीधे मुम्बई की यात्रा प्रतिदिन उपलब्ध है। इसके ऐवज में क्या रेल प्रशासन इन्हें प्रतिदिन मुम्बई के लिए एक पूरी गाड़ी चलवा सकती है?

रेल प्रशासन का तर्क यह है, एक तो आधुनिक LHB कोचेस से गाड़ियाँ चलने से तकनीकी कारणोंके चलते उन गाड़ियोंमे लिंक एक्सप्रेस के डिब्बे जोड़ना, निकालना मुमकिन नही है। दूसरा जंक्शन स्टेशन जहाँपर लिंक एक्सप्रेस की जोड़ की जाती है, गाड़ी का समय जाया होता है। लाइनें ब्लॉक होती है और साथमे कर्मचारी वर्ग भी ज्यादा रखना पड़ता है। इनके ऐवज में रेलवे ब्रांच लाइनके स्टेशन से सीधी गाड़ियोंकी पेशकश करती है और ऐसी कई सीधी गाड़ियोंकी घोषणा भी उन्होंने कर दी है।

अब यात्रिओंकी परेशानी भी समझिए, जो लिंक एक्सप्रेस प्रतिदिन चलती थी वहाँपर द्विसाप्ताहिक या त्रिसाप्ताहिक गाड़ियोंपर उन्हें सन्तुष्ट होना पड़ रहा है। गाड़ियोंके फेरे कम किए जाने से प्रतिदिन की सम्पर्कता पर बड़ा असर हुवा है, जिस दिन यात्रा करना हो यदि उस दिन गाड़ी न हो तो कहीं दूसरे स्टेशन जाकर गाड़ी पकड़नी पड़ेगी। कहीं कहीं तो ऐसे पर्याय भी नही दिए गए है। जैसे मन्दसौर मेरठ लिंक के एवज में मंदसौर के यात्री को कोटा तक अलग गाड़ी और कोटा से सीधी ट्रेन में यात्रा करनी होगी।

एक तरफ सारी लिंक एक्सप्रेस गाड़ियाँ रेल प्रशासन रद्द करने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर द म रेल के कार्यक्षेत्र में लिंक एक्सप्रेस की घोषणा की जाती है। ऐसी स्थितियोंमे जहाँपर लिंक एक्सप्रेस गाड़ियाँ रद्द की गई है, वहांके रेल यात्री आहत हुए है। उन्हें रेल प्रशासन के भेदभावपूर्ण व्यवहार से बड़ी ठेस पहुंची है। वह चाहते है, उनके लिए भी लिंक एक्सप्रेस फिर से चलाई जाए या सक्षम पर्याय उपलब्ध कराया जाए।

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