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अब ऊंट किस करवट बैठेगा? ये आखिर हो क्या रहा है?☺️

एक और परीपत्रक, और नीतियां, नियम बदले गए।

भाईसाहब कल मन मे लड्डू फूटा और आज उसका चूर चूर करवा दिया। कल पश्चिम रेलवे दिनांक 04 से अपनी सारी 65 गाड़ियोंमे से 29 जोड़ी याने 58 गाड़ियोंके किराए अनारक्षित सवारी श्रेणी का करने का परीपत्रक जारी किया था। बहुतों ने अपने टिकट अग्रिम आरक्षण कर रखे थे। एक परीपत्रक के चलते उनके ऑनलाइन टिकट रद्द हो गए या PRS के टिकट की कीमतें लगभग आधी हो गयी।

रतलाम मण्डल में यह बवाल थम ही नही रहा था की टिकट रद्द करे या ना करे। एक तरफ परीपत्रक कहता है, टिकट रद्दीकरण में कर्मचारी मदत करे या यात्री टिकट नही रद्द कराना चाहे तो उसे अग्रक्रम मे गाड़ी में बिठाया जाए और दूसरी ओर मण्डल के अधिकारी ट्वीट कर कग रहे है, टिकट कैंसल हो गयी, नई अनारक्षित टिकट खरीदे फिर यात्रा करें।

अब यह नया फ़रमान आ गया, माफ कीजिए परीपत्रक आ गया, दिनांक 06 से अनारक्षित विशेष गाड़ियोंको मेल/एक्सप्रेस का किराया लगेगा, जो न्यूनतम देय किराया ₹30/- होगा।

अब यात्री फिर सोच में, अग्रिम आरक्षित PRS टिकट का क्या करे? क्योंकि अब तो शायद उसका टिकट का मूल्य कम है, जबकी नए हिसाब के टिकट का मूल्य ज्यादा होगा। बड़ी उलझन है।

दरअसल यह उलझन प्लेटफॉर्म टिकट की कीमत से हुई है। प्लेटफॉर्म टिकट का मूल्य ₹10/- से बढ़ाकर ₹30/-,₹50/- तक कर देने से कोई भी यात्री उसे क्यों कर खरीदता? वह सवारी गाड़ी का ₹10/- का टिकट ही खरीद कर प्लेटफॉर्म पर हो आता। कभी भी न्यूनतम यात्री किराए का मूल्य, ग़ैरउपनगरिय क्षेत्र में प्लेटफॉर्म टिकट से कम हो ही नही सकता।

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