कोई स्टेशन किसी बड़े बरगद के साये में कैसे अपनी कनेक्टिविटी के लिए तरसते रह जाता है, इसका सुन्दर उदाहरण “नासिक” महानगर है।
मुम्बई से मात्र 187 किलोमीटर पर बसा यह शहर, देशभर से रेलवे से सीधे सम्पर्क के लिए मुम्बई का मोहताज है। मुम्बई भुसावल मुख्य रेल मार्ग पर स्थित नाशिक से राजस्थान, गुजरात के लिए कोई सीधी रेल गाड़ी नही है। ऐसा नही है, की मुम्बई – मनमाड़ – भुसावल की गाड़ियाँ नासिक के यात्रिओंको सेवा नही देती मगर इस शहर की स्थिति ऐसी है की देश के प्रमुख भागोंसे सीधे रेल गाड़ियाँ यहांसे उपलब्ध नही है।
नाशिक एक पुरातन, आध्यत्मिक शहर है। त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग, भगवान श्रीराम के परमपवित्र सानिध्य से पावित पंचवटी, महाराष्ट्र का शक्तिपीठ सप्तश्रृंगी देवी, दक्षिण गंगा गोदावरी का उद्गम स्थल। साथ ही बहुत बड़ा औद्योगिक हब भी है, सरकारी नोट प्रेस, महिंद्रा का कार उत्पादन इसके साथ ही कई कारखाने यहाँपर है। फलोत्पादन के मामले में नासिक – पुणे – अहमदनगर क्षेत्र को देश का कैलिफोर्निया कहा जाता है। अंगूर, अनार की भरपूर फसल यहाँपर होती है। अंगूर पर प्रोसेसिंग कर उसकी वाइन बनाने की भी फैक्टरीज इस क्षेत्र में है।
लेकिन सीधे रेल सम्पर्क की बात की जाए तो नासिक का गुजरात या राजस्थान के किसी शहर से कोई रेल सम्पर्क नही है। गुजरात के सूरत, अहमदाबाद या कच्छ, सौराष्ट्र या फिर राजस्थान के जोधपुर, अजमेर, जयपुर, बीकानेर किसी शहर से कोई रेल सेवा नासिक को नही जोड़ती। कहने को नासिक जिले का एक जंक्शन मनमाड़ जो की नासिक से 73 किलोमीटर पर पड़ता है, जो एक साप्ताहिक गाड़ी हैदराबाद जयपुर से जिले को राजस्थान से जोड़ता है, वही ओखा – रामेश्वरम, अहमदाबाद – यशवंतपुर ऐसी दो साप्ताहिक गाड़ियाँ भी है जो गुजरात, कर्णाटक सम्पर्क की खानापूर्ति करा देती है।
नासिक शहर और भी कई बड़े शहरोसे जुड़ने के लिए मुम्बई पर आधारित है। बेंगलुरू, चेन्नई, हैदराबाद जैसे दक्षिण के शहर मुम्बई से जुड़ते है। महाराष्ट्र के ही सोलापुर, कोल्हापुर, सातारा, सांगली, अहमदनगर जैसे बड़े शहरोंके लिए कोई सीधा रेल सम्पर्क उपलब्ध नही है। यहाँतक की पुणे के लिए दिनभर में केवल एक गाड़ी सीधी थी जो फिलहाल संक्रमण कालीन रेल बन्द से रद्द ही चल रही है।
एक बात विशेष है, किसी बड़े शहर से सीधे रेल गाड़ियाँ नही है, मगर सड़क नेटवर्क से उपरोक्त शहरोसे बड़ी ट्रैफिक नासिक के लिए चलती है, जिसमे सरकारी बसे, निजी बसे और टैक्सियों से काफी परिवहन होता है।कारखानों का काम भी सड़क परिवहन से निपट लिया जाता है। रेल प्रशासन ने भी कभी इस ओर गौर नही किया और न ही नासिक रेल संगठन ने कभी ऐसी कोई मांगे रखी। शायद मुम्बई के 187 किलोमीटर दूरी के लिए मासिक पास की उपलब्धता में यहांके रेल संगठन सन्तुष्ट है।
