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भारतीय रेल यात्री आरक्षण प्रणाली मे और सुधार की आवश्यकता है : रेल संबंधी स्थायी समिति की समीक्षा

भारतीय रेल हमारे देश की जीवन वाहिनी, नैशनल कैरियर मानी जाती है। भारतीय रेल न सिर्फ परिवाहन का सबसे किफायती और पर्यावरण अनुकूल संसाधन है बल्कि देश के सामाजिक, आर्थिक विकास मे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारतीय रेल प्रतिदिन 13,500 यात्री गाड़ियोंमे लगभग 2,30,00,000 यात्रीओंको लाने – ले जाने की लिए लंबा रास्ता तय करती है। यात्रीओं की इतनी व्यापक संख्या को देखते हुए रेल्वे की यह जिम्मेदारी बनती है की वे अपने यात्रीओं के लिए देशभर से कहीं से भी यात्रा करने के लिए किसी भी स्टेशन से टिकट बुकिंग करने की उचित सुविधा प्रदान करे।

रेल्वे मे पहले आरक्षित एवं अनारक्षित टिकट मैनुअल तरिके से बुक की जाती थी। अब यह काम कंप्यूटर से ऑनलाइन PRS प्रणाली से किया जा रहा है। चूंकि विषय आरक्षण प्रणाली का है, तो उसी को ले कर आगे बढ़ते है। ऑनलाइन PRS प्रणाली की शूरवात सितंबर 1985 से CMC के सहयोग मे नई दिल्ली से हुई जिसे रेल्वे की तकनीकी उपकम्पनि CRIS एवं CONCERT द्वारा सिकंदराबाद, मुम्बई, कोलकाता और चेन्नई मे आगे बढ़ाया गया। अप्रेल 1999 से यह प्रणाली पूरे देशभर मे कार्यान्वित की गई। 30 जून 2020 तक 4043 आरक्षण केंद्र मे 10725 टर्मिनल रेल्वे आरक्षण का काम सुचारु रूप से कर रहे है। इनमे रेल्वे के PRS काउंटर, आईआरसीटीसी के वेबसाइट और ऐप, डाकघर के PRS, YTSK यात्री टिकट सुविधा केंद्र और गैर रेल्वे केंद्र जो भौतिक रूप के टिकट बुक करते है, शामिल है।

भारतीय रेल्वे अपनी आरक्षण प्रणाली को दिन ब दिन मजबूत और अद्यतन करते रहती है। वर्ष 2019-20 मे PRS का अधिकतम लेन – देन प्रति मिनट (TPM) 8,711 था जो फिलहाल 28,915 तक उन्नत किया गया है। जनवरी 2020 के आँकड़े यह बताते है की एवरेज 14,16,990 लेन – देन प्रतिदिन हो रहे है जिस मे लगभग 84% टिकट की बुकिंग और 16% रद्दीकरण किया जा रहा है। आईआरसीटीसी के ई-टिकट और PRS के भौतिक टिकट मे एक बहुत बड़ा फर्क है। ई-टिकट यदि अंतिम चारटींग के बाद प्रतीक्षा सूची मे रह गए तो अपने आप रद्द हो जाते है जब की PRS टिकट रद्द कराने के लिए व्यक्तिशः पहल करनी पड़ती है। यज्ञपि रेल्वे उसका PNR क्रमांक रद्द कर देती है फिर भी उस टिकट पर अनारक्षित कोच मे यात्री यात्रा कर सकता है। अब इसमे सबसे बड़ी तकलीफ यह है की वह यात्री अपनी प्रतीक्षासूची वाली टिकट लेकर आरक्षित कोच मे जबरन यात्रा करने का प्रयत्न करता है। हालांकि रेल प्रशासन उस यात्री को आरक्षित कोच मे यात्रा करने के लिए दंडित करता है मगर व्यापक निगरानी के अभाव मे ऐसे यात्री को आरक्षित कोचों मे आम तौर पर सहज ही पाया जाता रहा है। रेल प्रशासन को चाहिए की ऐसे PRS टिकट को भी पूर्णतया रद्द समझ कर रिफ़ंड प्रोसेस के लिए आवश्यक माना जाए और ऐसे टिकट को अनारक्षित कोच मे भी रद्द समझा जाना चाहिए। यात्रा करने के लिए उचित टिकट ही वैध माना जाना चाहिए, यात्री को प्रतीक्षा सूची टिकट को अनारक्षित टिकट का विकल्प रद्द किया जाना चाहिए।

रेल्वे प्रशासन द्वारा यात्री सुविधा के लिए दिसम्बर 1997 से तत्काल आरक्षण प्रणाली शुरू की गई। शुरुवात मे तत्काल व्यवस्था केवल 110 गाड़ियोंमे और स्लीपर क्लास के लिए ही शुरू की गई थी लेकिन इसके उत्साहवर्धक परिणाम देखने के बाद अगस्त 2004 से इसे देशभर की सभी गाड़ियोंमे लागू किया गया। अक्तूबर 2014 से तत्काल कोटे मे एक प्रीमियम तत्काल नामक एक और कोटा शुरू किया गया। जिस मे टिकट का दर प्रीमियम डायनामिक रेट से बढ़ता है। प्रत्येक गाड़ी के तत्काल और प्रीमियम तत्काल कोटे का निर्धारण संबंधित क्षेत्रीय रेल्वे के पास है। तत्काल टिकट गाड़ी के प्रस्थान स्टेशन से एक दिन पहले शुरू होता है और पहले चार्टिंग तक आबंटित किया जाता है। इसके पश्चात यदि कोई जगह खाली रह जाती है तो उसे संबंधित स्टेशन के जनरल कोटे मे वर्ग कर दिया जाता है।

आरक्षण रद्दीकरण के नियम :

रेल यात्री किरायोंमे रियायत :

भारतीय रेल देश के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भागीदारी रखती है और जनता में यह स्तर बराबरी में रखने हेतु अलग अलग मदों में यात्री किरायोंमे छूट के प्रावधान प्रदान करती है। 54 वर्ग में रियायत दी जाती है जिसमे बच्चोंसे लेकर बुजुर्ग, मरीज, दिव्यांग, विविध राष्ट्रीय पुरस्कार, पत्रकार, किसान और युवा आदि आते है। बीते वित्त वर्ष 2018-19 में, रियायतोंके चलते रेलवे ने लगभग 2000 करोड रुपए का राजस्व खोया है। समिति ने रेल्वेसे रियायतों के क्षेत्र में सभी प्रवर्ग में रेलवे की उचित निगरानी बनाए रखने की सिफारिश की है। समिति ने रेल कर्मियों को दिए जाने वाली पास पीटीओ की भी जानकारी ली। रेल प्रशासन ने उसे रियायत नही बल्कि सेवा पात्रता का दर्जा दिया है। कई रेल कर्मी सुविधा होते हुए भी उसका उपयोग नही करते या उनको उसकी आवश्यकता ही नही पड़ती। इसका अलग से लेखाजोखा भी रेल विभाग के पास नही होने से इस मद पर कितना खर्च होता है इसका समिति द्वारा आकलन नही किया जा सका।

स्वतंत्रता सेनानी और उनके परिवार में भी रेल किरायों की रियायत दी गयी है। वर्ष 2016-18 में 10435 स्वतन्त्रता सेनानी पास जारी किए गए जिसपर कुल 34 करोड़ रुपये का भुगतान गृह विभाग से किया गया। आजादी को लगभग 75 वर्ष हो गए और औसतन स्वतंत्रता सेनानी की उम्र 85-90 के आसपास होनी चाहिए ऐसे में समिति ने इस प्रवर्ग में यथोचित समीक्षा कर स्मार्ट कार्ड जारी करने की सूचना की है। इस रियायत में रेलवे की कोई हानि नही होती, किराए का भुगतान गृह विभाग कर देता है।

समिति ने रेलवे के पूरे आरक्षण प्रणालीपर जानकारी लेने के बाद कुछ टिप्पणीयाँ और सूचनाएं दी है। रेल्वे के ऑनलाइन आरक्षण प्रणाली को और मजबूत और सुचारू करने हेतु उन्नत किया जाए, बुकिंग एजंट पर यथायोग्य निगरानी रखी जाए, सेकण्ड चार्टिंग की उपयोगिता की समीक्षा की जाए, महंगे फ्लेक्सी/डायनामिक किरायोंकी समीक्षा कर उन्हें तर्कसंगत बनाए, यात्री किराया रियायतें सामाजिक समानता रखने हेतु दी जाती है परंतु इसका ग़ैरफ़ायदा असामाजिक तत्व उठाते है इसलिए ऐसे तत्वों की यथोचित छानबीन कर उनपर अंकुश लगना चाहिए। रेल कर्मियों के पास लेने / छोड़ने का अलग से लेखाजोखा रखा जाए।

यूँ तो समिति ने व्यापक समीक्षा की है और रेलवे के आरक्षण प्रणाली पर समाधान व्यक्त किया है। समिति ने इसी व्यवस्था को कायम रखते हुए कुछ और सुधारणा करने के प्रस्ताव दिए है। हालांकि धरातल पर जब नियमोंके पालन का वक्त आता है तो मनुष्यबल की कमी के चलते कुछ तत्व इनका फायदा लेकर सही जरूरतमंद को वंचित रखते है। PRS काउंटर पर रेलवे द्वारा नियुक्त एजेन्टोंको विशिष्ट टिकटोंकी बुकिंग करते वक्त कुछ देरी से टिकट बुकिंग की अनुमति है मगर यात्रिओंकी मांग है, इन एजेण्टों को केवल IRCTC से ही टिकट निकालने की पात्रता रखी जाए और हर तरह के PRS टिकट की अनुमति रद्द की जाए। PRS टिकट और ई-टिकट के बुकिंग/रद्दीकरण के नियम प्रत्येक स्तर पर समान रखे जाए। PRS टिकट में सेवा शुल्क नही लिया जाता वहीं ई-टिकट में बुकिंग और रद्दीकरण दोनों अवस्था मे वह लगता है। इस तरह की असमानता पर समिति ने गौर कर इसे खत्म करना चाहिए था ऐसी लोकभावना है।

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