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‘रतलाम – महू – खण्डवा – अकोला’ यह गेज कन्वर्शन किया जा रहा है या खिलवाड़?

लगातार रेल बजट में निधि का आबंटन किया जाता है, लगातार चर्चा में रहने वाला यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट, जिसकी मूल मीटर गेज लाइन महज 4 वर्षोंमें बनकर कार्यान्वित की गई अब 14 वर्ष बीत चुके है, मात्र आमान परिवर्तन का कार्य पूर्ण नही हो पा रहा है। रेल प्रेमी गणेश अय्यर इन्होंने इस गेज कन्वर्शन प्रोजेक्ट की हालिया स्थिति का लेखाजोखा लिया है। आप भी समझिए,

रतलाम से अकोला वाया महू, खण्डवा इस गेज कन्वर्शन प्रोजेक्ट की कुल लंबाई – 472.64 किमी + 22.96 किमी (फतेहाबाद-चंद्रावतीगंज-उज्जैन)

पश्चिम रेलवे- 298.64 किमी+ 22.96 किमी और दक्षिण मध्य रेलवे-174.00 किमी

रेलवे के क्षेत्र वार प्रगति निम्नानुसार है:-

पश्चिम रेलवे:- खण्डपर कार्य पूर्ण किया गया-

(i) धोसवास- रतलाम-इंदौर-राउ-महू- 147.70 किमी

(ii) निमरखेड़ी-मथेला –  45.61 किमी. 

(iii) सनावद-निमरखेड़ी (11.6 किमी)-सीआरएस निरीक्षण 31.03.2021 को किया गया। 

(iv) फतेहाबाद-उज्जैन (22.96 किमी)-सीआरएस निरीक्षण दिनांक 11.02.2021 को किया गया। 

कार्य प्रगति पर:-

i) खंडवा बाय पास केबिन खंडवा (5.00 किमी) – शेष कार्य के लिए निविदा प्रदान की गई।  कार्य प्रगति पर है। 

ii) राऊ-महू दोहरीकरण (9.50 किमी) – निविदा कार्य प्रगति पर है। 

iii) मुक्तियार बलवाड़ा से सनावद (26.10 किमी) के खंड 1:150 ग्रेड के लिए, ईपीसी निविदा तैयार कर मुख्यालय को अनुमोदन के लिए भेजा गया है। 

iv) खण्डवा – महू – मुख्तियार बलवाड़ा (58.55 किमी), संचालन विभाग ने 1:100 के बजाय ग्रेड 1:150 के संशोधन के लिए कहा है।  पत्र संख्या 93/डब्ल्यूआई/जीसी/डब्ल्यू/12/आरटीएम-एमएचओ-पार्ट-5 दिनांक 05.07.2021 के द्वारा रेलवे बोर्ड ने रूलिंग ग्रेडिएंट में 1in100 से 150 में 1 में परिवर्तन के लिए स्वीकृति प्रदान की है।

v) एफएलएस निविदा के लिए तैयार किया गया है  संशोधित ग्रेड के अनुसार संरेखण तय करना।  निविदा दिनांक 30.09.2021 को खोली गई है। 

दक्षिण मध्य रेलवे: – कार्य सम्पन्न

1. अकोला-अकोट (43.50 किमी) – गेज कन्वर्शन पुरा हुवा। 

2.आकोट-अमलखुर्द (77.43 किमी) – संरेखण मेलघाट टाइगर रिजर्व से गुजर रहा है।  उसी संरेखण पर जीसी करने के लिए स्वीकृत विस्तृत अनुमान।  लेकिन वन विभाग से वन व वन्य जीव की मंजूरी नहीं मिली।  काम शुरू नहीं हुआ। 

3. अमलखुर्द – खंडवा (54.50 किमी)।  – कार्य प्रगति पर है।  ट्रैक गुरही-अमलाखुर्द स्टेशनों के बीच किमी 644.80 से किमी 619.80 किमी तक आरक्षित वन से गुजर रहा है।  21.446 हेक्टेयर की वन भूमि के व्यपवर्तन हेतु संशोधित ऑनलाइन आवेदन दिनांक 26.05.2021 को वन विभाग को प्रस्तुत किया जाता है।  टीडीसी: मार्च 2023।

उपरोक्त सारी जानकारी, रेलवे के cspm.gov.in वेबसाइट से संकलित की गई है। क्षेत्र की पीड़ित जनता के मन मे क़ई प्रश्न है, क्या रेल प्रशासन इतना सक्षम नही है, की बार बार महू – सनावद प्रोजेक्ट का निर्धारण बदल रहा है तय ही नही कर पा रहा है? दूसरी तरफ स्थानीय राजनीति अपने चरम पर है, इन्दौर क्षेत्र के कई कार्य इसी तरह आधे-अधूरे पड़े है, जिसके लिए सभी को रतलाम – अकोला कार्य का अखर्चित निधि ही आँखोंमें गडता है। दिनोंदिन फण्ड ट्रान्सफर करने के तरीके बताए जाते है, कारण दिया जाता है, अखर्चित फण्ड डूब जाएगा। जनता पूछती है, “ई फण्ड का नर्मदा जी मे डूब जाएगा? अब तक तो फण्ड वापिस लौट जाता है ऐसा सुनते आए है, यह डूब जाता है पहली बार ही सुना जा रहा है”

क्षेत्र की जनता, स्थानीय राजनीति की खींचतान से ऊब चुकी है। चाहती है, माननीय प्रधानमंत्री खुद इस अधूरे दुर्लक्षित कार्य को अपनी निगरानी में ले और इन अधिकारियों की अनदेखी और खिलवाड़ पर कड़ी कार्रवाई करें तब ही इस कार्य को सही दिशा मिल पाएगी।

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