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रेल आरक्षण में पद्धति में व्यापक बदलाव लाना आवश्यक है।

14 जानेवारी 2023, माघ, कृष्ण पक्ष, सप्तमी, विक्रम संवत 2079

भारतीय रेलवे में हर रोज करीबन 2.5 करोड़ यात्री यात्रा करते है। जिसमे 35% टिकटें रेल्वेके PRS काउन्टर्स पर बुक होती है और बाकी 11 लाख से भी ज्यादा टिकटें हर रोज, रेल्वे के ऑनलाइन प्लेटफार्म आईआरसीटीसी के द्वारा बुक की जा रही है। ऑनलाइन आरक्षण प्रणाली अपने चरम पर काम कर रही है। काउन्टर्स की टिकटोंमें और ऑनलाइन टिकटों में सर्विस चार्ज का फर्क है, फिर भी ऑनलाइन टिकटोंका प्रचलन दिनोंदिन बढ़ते ही जा रहा है। हालांकि रोजाना करोडों यात्रीयोंमे 50% यात्री तो आरक्षण कर यात्रा निश्चित ही करते होंगे। अनारक्षित यात्रिओंकी संख्या उपनगरीय सेवाओंकी वजह से बढ़ जाती है। खैर, आज हमारा विषय टिकट बुकिंग की संख्या का नही उसमे लाये जाने के सुधारों का है।

रेल यात्रियों और रेल फैन में आजकल अनावश्यक रूप से आरक्षित यानोंमें अनारक्षित यात्री का जबरन यात्रा करना बड़ा चर्चा का विषय है। आरक्षित स्लीपर कोचों में, आमतौर पर दिन की यात्रा में ऐसी कुव्यवस्था हमेशा ही देखी जाती रही है, मगर यह चलन अब वातानुकूल थ्री टियर, टु टियर कोचेस में भी सहज हो गया है। आरक्षित यात्रिओंके लिए ऐसा मन्जर बेहद परेशानी भरा रहता है। रेल मदत के ट्विटर अकाउंटपर आपको इस तरह की शिकायतें हर रोज दिखाई देंगी। जिसमे भी 90% यात्री इन परेशानियोंसे समझौता कर यात्रा कर लेते है। वैसे बचे 10% शिकायतकर्ताओंको भी यही अमूमन यही करना पड़ता है।

संक्रमण काल मे रेल विभाग ने सभी यात्री गाड़ियाँ आरक्षित कर दी थी। द्वितीय श्रेणी अनारक्षित कोचों को ‘2S’ आरक्षित द्वितीय सिटिंग में बदल दिया गया था। जिस यात्री के पास कन्फ़र्म टिकट है, केवल उसे ही प्लेटफार्म पर प्रवेश दिया जा रहा था। इससे विना आरक्षण यात्रिओंकी संख्या में उल्लेखनीय कमी दिखाई दी थी और आरक्षित कोच के यात्रिओंको काफी राहत होती थी, उन की रेल यात्रा सही मायनों में सुखद, सुरक्षित और आनंददायी हो रही थी।

रेल विभाग सीजन टिकट आबंटन के वक्त जता देता है, उपरोक्त टिकट पर आरक्षित कोच में यात्रा करने की अनुमति नही है, इसके बावजूद MST यात्री आरक्षित कोच धड़ल्ले से यात्रा करते है। PRS काउन्टर्स के वेटिंग लिस्ट टिकट धारक भी आरक्षित कोच में जमे रहते है। अब टिकट जाँच दल भी इन यात्रिओंसे केवल जुर्माना वसूलता है, इन्हें आरक्षित कोच से उतारता नही है। इस विषयमे काफी शिकायतें रेल विभाग के पास पहुंचती है और शायद ही कार्रवाई होती है। इधर रेल की आय में जुर्माने से मिलने वाली रकमोंमे रिकॉर्ड दर्ज कराए जा रहे, जाँच दल को इसके ऐवज में पुरस्कृत किया जा रहा है।

कुल मिलाकर आरक्षित यात्रिओंको होनेवाली सारी परेशानी, PRS काउन्टर्स के वेटिंग लिस्ट यात्रिओं, MST धारक और बेतहाशा आबंटित अनारक्षित द्वितीय श्रेणी टिकट धारकोंकी वजह से हो रही है। रेल प्रशासन को इन मदों पर नियंत्रण करना अब आवश्यक हो गया है। टिकट जाँच दल आरक्षित कोचोंमे इन अवांछनीय यात्रिओंपर नियंत्रण रखने में बिलकुल अक्षम मालूम पड़ रहा है। रेल विभाग इसे टिकट बुकिंग में निम्नलिखित सुधार कर नियंत्रित कर सकता है।

भारतीय रेलवे में आरक्षण प्रणाली में जिस तरह पूर्णतः अनारक्षित गाड़ियाँ सूचि में शामिल नही की जाती, उसी तरह जिन गाड़ियोंमे कन्फ़र्म टिकटें खत्म हो गयी हो वहॉं प्रतिक्षासूची टिकटोंका आबंटन बन्द करना चाहिए।

500 किलोमीटर से ज्यादा चलनेवाली गाड़ी में, (इंटरसिटी एक्सप्रेस गाड़ियाँ अर्थात केवल दिन में अपनी यात्रा पूर्ण करती हो उन्हें छोड़कर) द्वितीय श्रेणी अनारक्षित टिकट बुकिंग बिल्कुल बन्द की जानी चाहिए। यह गाड़ियाँ पूर्णतः आरक्षित ही हो। द्वितीय श्रेणी कोच को भी आरक्षित ‘2S’ में बदल देना चाहिए।

MST टिकट प्रणाली में पुनर्वलोकन की नितान्त आवश्यकता है। फिर यह अंतर 150 किलोमीटर के बंधन को घटाकर कम करना, केवल इंटरसिटी, डेमू, मेमू गाड़ियोंकी यात्रा के लिए अनुमति देना (चूँकि सवारी गाड़ियोंके परिचालन का निर्णय अब भी अनिर्णीत है), टिकट पर गाड़ी नम्बर अंकित करना इत्यादि हो सकते है। इसके अलावा MST धारक को टिकट का दुरुपयोग करते हुए पकड़े जानेपर दण्डित करने के बजाय उसे MST टिकट खरीदने के लिए समयोचित प्रतिबन्धित करना ज्यादा कारगर सिद्ध होगा।

आरक्षित टिकटोंकी फाइनल चार्टिंग में भी सुधार की एक सूचना है। हर गाड़ी के तत्काल जिस तरह एक फिक्स्ड समय याने गाड़ी के प्रारम्भिक स्टेशन से चलने के एक दिन पहले, सुबह 10 बजे वातानुकूल श्रेणियों और सुबह 11 बजे ग़ैरवातानुकूल श्रेणियोंमे शुरू किया जाता है। ठीक उसी तरह फाइनल चार्टिंग का समय देशभर की सभी गाड़ियोंके लिए फिक्स्ड, एक ही समय तय किया जाना चाहिए। इसके लिए रात 00:00 से लेकर दिन की 12:00 बजे तक शाम 18:00 बजे और दोपहर की 12:01 से लेकर रात 23:59 तक कि गाड़ियोंके लिए सुबह 06:00 बजे का समय तय होना चाहिए। फिलहाल सभी PRS चार्टिंग स्टेशन से गाड़ी छुटने के 4 घंटे पहले फाइनल चार्टिंग करते है। उनमें भी SR दक्षिण रेल्वे परिचालन समयसारणी से सटीक 4 घंटे पहले और बाकी PRS जिन गाड़ियोंका चार्टिंग समय रात 22:00 से सुबह 08:00 के बीच मे आता हो उन्हें रात 20:00 से 22:00 तक कभी भी अपनी सहूलियत अनुसार करते है जो यात्रिओंके लिए बेहद तकलीफ़देह साबित होता है। खैर, यदि प्रतिक्षासूची पर रेल विभाग कुछ मजबूती से निर्णय के लेता है तो इसकी ज्यादा आवश्यकता नही रहेगी।

रेलवे प्रशासन पर प्रतिक्षासूची के अनगिनत टिकटोंको जारी कर के अतिरिक्त धन उगाही का आरोप लगते रहता है। अब वक्त आ गया है, की रेल्वे प्रशासन अपनी नैतिकता शुद्ध रखते हुए अनावश्यक संख्या में जारी किए जानेवाले प्रतिक्षासूची के टिकट और द्वितीय श्रेणी टिकट पर लगाम लगाए।

लेख में ली गयी टिकटों की तस्वीरें इंटरनेट से ली गयी है और केवल प्रतीकात्मक है। इन अन्जान तस्वीरकर्ताओंके हम लेख में तस्वीरे उधृत करने के लिए आभार प्रकट करते है।

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