02 फरवरी 2024, शुक्रवार, माघ, कृष्ण पक्ष, सप्तमी, विक्रम संवत 2080
कल आम बजट संसद में प्रस्तुत हुवा। आम बजट में ही रेल विभाग के बजट आबंटन की घोषणा रहती है। भारतीय रेल को वर्ष 2024-25 के लिए, अन्तरिम बजट में 2,52,000 करोड़ रुपए आबंटित किए गए है। इसके साथ ही कुछ प्रमुख बुनियादी ढांचे के सुधार हेतु घोषणाएं हुई। जिनमे रेल विभाग, गति शक्ति कार्यक्रम के तहत तीन प्रमुख रेल कॉरिडोर बनाने जा रहा है। एनर्जी, मिनरल्स और सीमेंट क्षेत्र के लिए यह रेल कॉरिडोर होंगे। इसके साथ ही पोर्ट कनेक्टिविटी और हाई ट्रैफिक डेन्सिटी कॉरिडोर के भी निर्माण की बात भी की गई है। ज्ञात रहे, पहले मालभाड़े हेतु समर्पित गलियारों, WDFC और EDFC के अलावा अन्य (डेडिकेटेड फ़्रेट कॉरिडोर) घोषित किए गए थे जिन्हें अबतक रद्द करार बताया जा रहा था और अब जो नए कॉरिडोर की घोषणाएं की गई है, वह भी लगभग उन्ही क्षेत्रोंसे जुड़ी है, जिन्हें ठण्डे बस्ते में डाला गया था।

अगली विशेष घोषणा है, वन्देभारत सन्दर्भ में। निम्नलिखित ट्वीट देखिए,


विरोधाभास कहाँ है, रेल मंत्रालय, मा. अर्थ मन्त्री अपने घोषणा में वन्देभारत मानक की बोगियाँ बनाकर उन्हें सामान्य यात्री कोच में लगाया जाएगा, वहीं दूसरे ट्वीट्स में सामान्य यात्री कोचेस वन्देभारत मानक में बदले जाएंगे यह कहा जा रहा है।
मित्रों, सबसे पहले आपको बता दूँ, तकनीकी भाषा मे बोगी और कोच बिल्कुल अलग चीजें है। “बोगी” और “कोच” रेल गाड़ी की प्रणाली के विभिन्न घटकों को संदर्भित करते हैं और उन्हें एक – दूसरे के बदले प्रयोग कतई नही किया जा सकता हैं। बोगी यह एक प्रकार का चक्कों का अंडरकेरेज आहे जो रेल गाड़ी के यात्री डिब्बे का आधार और उसे सस्पेंशन प्रदान करता है। दूसरी ओर, कोच एक निजी रेलवे वाहन है जिसे हम लोग आम तौर पर रेल गाड़ी का यात्री डिब्बा कहते है। जो यात्रियों या सामान ले जाने के लिए निर्माण किया गया है। हालाँकि आम लोगों के लिए ट्रेन के डिब्बे को सामान्य अर्थ में “बोगी” शब्द का उपयोग करना सहज बात है, लेकिन ऐसा करना तकनीकी रूप से गलत है।


अब जहाँ 40,000 सामान्य कोचों को वन्देभारत मानक पर बदले जाने की चर्चा पर आते है। 40,000 पुराने आई सी एफ कोच है, जिन में से कुछेक को ‘उत्कृष्ट’ कोच कार्यक्रम के अंतर्गत लाया गया था। हालाँकि यह कोच अपनी ‘उत्कृष्टता’ को बरकरार नही रख पाए यह और बात है। एक तरफ आई सी एफ कोच नियमित यातायात से हटाकर एल एच बी कोच की संरचना में बदले जा रहे है। आए दिन फलाँ गाड़ी LHB सुसज्जित होने की खबरें आती रहती है, उसमे यह वन्देभारत का ट्विस्ट कैसे आ गया? एक तरफ वन्देभारत के जनक, तकनीशियन्स का मानना है, पुराने कोच वन्देभारत मानक में बदले जा ही नही सकते। दोनों तकनीक बिल्कुल ही बिल्कुल भिन्न है।
जहाँ तक हमे लगता है, वन्देभारत की बोगियाँ अर्थात केवल चक्कों की असेम्बली का उपयोग पुराने आई सी एफ कोचोंमे कर उन्हें फिर से गाड़ियोंकी संरचना में लाया जायेगा। और गौर फरमाएं, जो डर आम रेल यात्रिओंमें फैल रहा था, इस बदलाव से यात्रिओंको किसी तरह से वन्देभारत के किरायोंकी चपत नही लगेंगी।
(लेख में प्रस्तुत बोगी और कोच के चित्रोंके लिए हम The News Insight के आभारी है।)
