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सूत्रों से पता चला है …

6 जून 2024, गुरुवार, जेष्ठ, कृष्ण पक्ष, अमावस्या, विक्रम संवत 2081

हम कभी भी पोलिटिकल खबरों में नही जाते है और ना ही रेलवे के इस ब्लॉग को किसी अन्य दिशा में जाने देंगे। चूँकि विद्यमान मन्त्री मण्डल बर्खास्त हो चुका है और नए मंत्रिमंडल का इन्तजार किया जा रहा है। तमाम रेल प्रेमियोंके बीच नए रेल मन्त्री के नामों की अटकलें तेज है। इसी बीच आप यकीन मानिए, रेल मंत्रालय इस बार किसे मिलने वाला है, हमारे नए रेल मंत्री कौन होंगे यह हमें सूत्रों से पता चला है। कौन इस बार रेल मन्त्री बनने वाले है, इस बात का राज़ हम खोले इससे पहले यात्रियों, रेल प्रेमियोंके बीच क्या चर्चाएं है, जरा उसे समझते है।

वैसे तो बीते दस वर्षोँसे जिस पार्टी गठबंधन का मंत्रिमंडल बनता था, समझा जाता है इस पँचवार्षिक मे भी वही लोग मंत्रिमंडल बनाने जा रहे। हालाँकि परिस्थितियाँ थोड़ी सी बदली है मगर भिन्न भिन्न तर्कों के घनघोर बादल, सावन की बदली भी शरमा जाए इतने तेजी से गहरा रहे है। टॉप टेन चैनल सर्च कर लीजिएगा, प्रत्येक मिनट पर ब्रेकिंग न्यूज का टैग लगा कर एक नयी माँग और किसी दूसरे चैनल पर माँग करते उसी दल की केवल शिद्दत से साथ निभाने का वादा जताने की खबरें दिखाई दे रही है। हम रेल प्रेमियोंकी हालत तो इतनी खराब है, जैसे फ़िल्म “चख दे इंडिया” में कोच सर की थी। वह अपने टीम के गोली को स्ट्राइकर किस दिशा में स्ट्रोक लगाने वाली है इस का अंदाजा देने वाले थे।

कोई कह रहा है, इस बार रेल मंत्रालय तो सिर्फ और सिर्फ बिहार ही ले जाएगा। बड़के बाबू ज़िद लिए बैठ गए है। अब सोचिए पहले भी सम्भाले हुए है, यह मंत्रालय। 9 क्षेत्र के टुकड़े कर उन्हें 16 कर किए थे, अब लौटेंगे तो क्या 16 से भी ज्यादा करा देंगे? सम्पर्क क्रान्ति गाड़ियाँ इनकी ही देन थी, वन्दे, नमो, अमृत इन नामों की आदत हो चुके रेल यात्रिओंको अब क्या बदली हुई सीरीज मिलने जाएंगी?

रेल मंत्रालय प्रधान सेवक जी के दिल के करीब का मामला है, अतः यह मंत्रालय शायद ही अलायन्स में जाता नजर आएगा। पुराने मन्त्री जी, हो सकता है, उनके पुराने कार्यक्षेत्र उड़ीसा राज्य की कमान सम्भालने चले जाए इसलिए उनका नाम पीछे पड़ गया है। राज्य मन्त्री जी को प्रमोट कर आगे लाते तो वह पहले ही डिस्क्वालिफाई हो चुके है। कुछ लोग नागपुर वाले हाई वे फैक्ट्री की भी वकालत कर रहे है। उनका मानना है, जिस तरह इन्होंने धड़ाधड़ (खटाखट, ठकाठक नही हं😊) हाइवे बनवाए है, रेलवे इन्हें ही सौपना चाहिए ताकि रेल भी झटपट डलवा कर दनादन नई गाड़ियाँ चलाई जा सके। मगर उनका स्वास्थ्य थोड़ा नरम चल रहा है और सड़क में उनके मुकाबले कोई और दिखाई नही दे रहा अतः उन्हें वही रहने देने की भी चर्चाएं है। एक नाम इसी विभाग में पहले मन्त्री रह चुके सी ए साहब की भी चर्चाएं जोरों पर है। मगर उन्हें रेल की जगह अर्थ का अर्थ ज्यादा समझ मे आता है।

कुल मिलाकर सार यह है, अनार एक है और ललचाए कई। क्यूँ न हो? रेल मंत्रालय वह जगह है जो सीधे जनता के दिलों में उतरने का दरवज्जा खोलता है। एक नई गाड़ी चला दीजिए या सीधी निकलती गाड़ी को दो मिनट के लिए बीच वाले स्टेशन पर रुकवा दीजिए, लाखों वोटर खुश।

मित्रों, सूत्रों के भी सारे पीड़ खुल गए अब कोई न कोई अप्रत्याशित और नया नाम ही सामने आएगा। जल्दी ही ‘सूत्रों’ से यह बात हमे पता चलेगी और हम फौरन आपको बताएंगे। तब तक टॉप टेन चैनल्स की ‘ब्रेकिंग न्यूज’ की खबरें लेते रहिए। 😊

लेख में उधृत चित्र के लिए हम times group और fundamatics के आभारी है।

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