1 फरवरी 2023, बुधवार, माघ, शुक्ल पक्ष, एकादशी, विक्रम संवत 2079
रेलवे को 2.4 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड आवंटन मिला। 2013 के फण्ड से 9 गुना ज्यादा है। बीते बजट में करीबन 1.62 लाख करोड़ रुपये मिले थे, उससे यह आबंटन लगभग 80,000 करोड़ रुपये ज्यादा है।





1 फरवरी 2023, बुधवार, माघ, शुक्ल पक्ष, एकादशी, विक्रम संवत 2079
रेलवे को 2.4 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड आवंटन मिला। 2013 के फण्ड से 9 गुना ज्यादा है। बीते बजट में करीबन 1.62 लाख करोड़ रुपये मिले थे, उससे यह आबंटन लगभग 80,000 करोड़ रुपये ज्यादा है।





31 जानेवारी 2023, मंगलवार, माघ, शुक्ल पक्ष, दशमी, विक्रम संवत 2079
कृपया राजकोट मण्डल से जारी किया गया परिपत्रक देखें,



29 जानेवारी 2023, रविवार, माघ, शुक्ल पक्ष, अष्टमी, विक्रम संवत 2079

उपरोक्त पोस्ट सोशल मीडिया में वायरल है, जिसमे हमारे माननिय प्रधानमंत्रीजी का मुम्बई कार्यक्रम सादर किया गया है। प्रधानमंत्री 10 फरवरी को मुम्बई – साईंनगर शिर्डी और मुम्बई – सोलापुर के बीच सप्ताह में 6 दिन चलनेवाली वन्देभारत एक्सप्रेस गाड़ियोंका उद्धाटन करेंगे।
मुम्बई – साईंनगर शिर्डी उद्धाटन विशेष, दिनांक 10 फरवरी को दोपहर 15:00 बजे मुम्बई से एवं सोलापुर – मुम्बई उद्धाटन विशेष उसी दिन याने दिनांक 10 फरवरी को उसी समय दोपहर 15:00 बजे सोलापुर से मुम्बई की ओर निम्नलिखित ठहरावों के साथ रवाना की जाएगी।

मुम्बई – साईंनगर शिर्डी – मुम्बई वन्देभारत एक्सप्रेस की प्रयोगात्मक समयसारणी

सोलापुर – मुम्बई – सोलापुर वन्देभारत एक्सप्रेस की प्रयोगात्मक समयसारणी

अब हमारे शीर्षक विषय की ओर बढ़ते है। जब से हमारे देश मे वन्देभारत एक्सप्रेस का अविष्कार किया गया है, रेल प्रशासन क्षेत्रीय रेल्वेज के हर मुमकिन भीड़ वाले मार्ग पर वन्देभारत एक्सप्रेस लादने का प्रयास कर रही है। जी, हम ‘लादने’ इस शब्द का प्रयोग करने से कब तक बच सकते है, चूँकि प्रत्येक नेता, राजनेता उनके क्षेत्र में वन्देभारत गाड़ियोंकी माँग लेकर रेल मंत्रालय पहुंचता है? क्या सचमुच हमारे रेल यात्री भी इन सुपर लग्जरी, वातानुकूलित गाड़ियोंमें हर रोज यात्रा करने के लिए ललामभूत है?
उदाहरण के तौर पर मुम्बई – शिर्डी वन्देभारत लीजिए। मुम्बई – नासिक यह यात्रिओंकी अत्याधिक मांग वाला मार्ग है। पंचवटी, गोदावरी, राज्यरानी और हुतात्मा एक्सप्रेस इस मार्ग की प्रॉमिनेंट, लोकप्रिय गाड़ियाँ है। जिनमेसे गोदावरी विशेष श्रेणी में चलाई जा रही है। राज्यरानी को नान्देड़ तक और हुतात्मा को भुसावल तक विस्तारित कर दिया गया है। केवल पंचवटी एक्सप्रेस नासिकवासियोंकी एकमात्र समर्पित गाड़ी बची है। दूसरा विषय यह है, शिर्डी वन्देभारत के मुम्बई से चलने का समय सुबह 6:15 का है जो लगभग सर्वसाधारण मेल/एक्सप्रेस की गति से चलकर ढाई घण्टे में नासिक पहुंच सकती है। इतना ही समय मध्य रेल की राजधानी एक्सप्रेस भी लेती है। अब उसी समय याने सुबह 6:00 को गीतांजलि और 6:15 को तपोवन एक्सप्रेस नासिक की ओर निकलती है, जिनके किराए वन्देभारत से काफी किफायती रहेंगे। जानकार यही सारी चीजें सोलापुर वाली वन्देभारत एक्सप्रेस के मुकाबले में भी खोजेंगे। खैर शिर्डी वन्देभारत से सोलापुर वन्देभारत की गति और समयसारणी यात्रिओंके लिए ज्यादा उपयुक्त है।
स्थानीय यात्रिओंकी कम अंतर में चलनेवाली गाड़ियोंकी मांग दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। सवारी गाड़ियोंके स्थानपर शुरू की गई डेमू/मेमू विशेष गाड़ियाँ उनके छोटे रैक और कम यात्री क्षमता के कारण कई मार्गोंसे हटाई गई है, हटाने की मांग है और उसपर भी उनके रैक समुचित संख्या में उपलब्ध नही हो रहे है। नियमित एक्सप्रेस गाड़ियोंके स्लीपर, वातानुकूलित थ्री टियर अपने यात्री संख्या क्षमतासे ज्यादा यात्रिओंकी ढुलाई कर रहे है। द्वितीय श्रेणी जनरल के यात्रिओंकी अवस्था के लिए तो शायद ‘मानवाधिकार समितियाँ’ भी शर्मा जाए इतनी बिकट है।
बेशक आप वन्देभारत गाड़ियाँ चला सकते है। जरूर इन गाड़ियोंके समयसारणी को स्थापित करने के लिए मुम्बई – मनमाड़ और मुम्बई पुणे मार्ग की कुछेक मेल/एक्सप्रेस और कुछ उपनगरीय गाड़ियोंको विस्थापित किया जाएगा, क्योंकि जब भी आम यात्री अपनी संक्रमनपूर्व चलनेवाली और फिलहाल रद्द गाड़ियोंकी मांग करता है तो उसे “यह मार्ग काफी संतृप्त है” यह उत्तर देकर टाल दिया गया है।
28 जानेवारी 2023, शनिवार, माघ, शुक्ल पक्ष, सप्तमी, विक्रम संवत 2079
रेल बजट के मद्देनजर, एक पूर्वावलोकन : मध्य रेल के वे सारी रेल परियोजनाएं जो अलग अलग स्थितियों में है। किसी का सर्वेक्षण चल रहा है तो कोई मुख्यालय में विचाराधीन है। कई परियोजनाएं निधी के या किसी अनुमती के अभाव में ठण्डे बस्ते में भेजी जा चुकी है। आइए देखते है,
घोषित किये गए रेल सर्वेक्षण (16 जनवरी 2023 तक की स्थिती)



बीते वर्षोंके रेल बजट सम्बंधित परियोजनाएं जो ‘पिंक बुक’ मौजूद, पर अस्वीकृत अवस्थामें है।


सर्वेक्षण सम्पन्न, रेल मुख्यालयों में विचाराधीन परियोजनाएं


रेल मुख्यालय के ठण्डे बस्ते में पड़ी परियोजनाएं ; जो शायद ही आगे बढ़ पाएंगी।







