22447 नई दिल्ली – अम्ब अन्दौरा वन्देभारत एक्सप्रेस और 22448 – अम्ब अन्दौरा – नई दिल्ली वन्देभारत एक्सप्रेस। दोनोंही दिशाओंसे यह गाड़ियाँ, सप्ताह में 6 दिन चलेंगी, ( प्रत्येक बुधवार को छोड़कर ) दिनांक 21 अक्टूबर से अपना पहला नियमित फेरा शुरू करेगी। कृपया निम्नलिखित समयसारणी देखिए,
भारतीय रेल धीरे धीरे आम यातायात सेवा से खास सेवा बनती जा रही है। आगे क्या होगा यह तो पता नही मगर अभी ही सवारी गाड़ियाँ रेल सेवा के पटल से नदारद हो चुकी है और उसके साथ ही सस्ती रेल यात्रा भी उड़नछू हो गयी है।
जिन क्षेत्रोंमें उपनगरीय रेल सेवा नही चलती उन क्षेत्रोंके लिए सवारी गाड़ियाँ, जो दिनभर में कमसे कम दो गाड़ियाँ, सुबह और शाम में चलती ही थी। अब उनका रूप, नाम, किराया सब बदल चुका है। यह गाड़ियाँ मेमू/डेमू एक्सप्रेस बन गयी है। जिनकी न ही औसत गति एक्सप्रेस के बराबर है न ही पड़ाव घटे है। जो पड़ाव रद्द किए गए है, उन स्टेशनोंके यात्री अलग परेशान है तो पुरानी सवारी गाड़ियोंकी ही समयावधि के लिए एक्सप्रेस के मूल्य का किराया चुकाना पड़ रहा है इसलिए नियमित टिकटधारी यात्री परेशान हो रहे है।
जहाँ गैरउपनगरीय क्षेत्रोंमें कम दूरी की, सभी स्टेशनोंपर रुकनेवाली गाड़ियोंकी जरूरत है और हमारे नेतागण प्रीमियम गाड़ियोंकी माँग, आग्रह जता रहे है। यह वातानुकूलित गाड़ियाँ क्या आम जनता को पुसानेवाली है? यह तो छोड़िए, रेल विभाग की नई डिब्बा संरचना सुनेंगे तो आप भौंचक रह जाओगे।
01 कोच वातानुकूलित प्रथम/द्वितीय या पूर्ण प्रथम (H या HA)
कुल 22 कोच, यदि गाड़ी में पेंट्रीकार मान्य न हो तो क्षेत्रीय रेल अपने संज्ञान से किसी भी वर्ग का कोच जोड़ सकती है।
इस विषय का परिपत्रक क्रमांक CC/70/2022 दिनांक 03/06/2022 का आगे दे रहे है।
मित्रों, तो आगे अपनी रेल यात्रा के लिए अपनी जेबें ज्यादा ढीली करने की तैयारी कर के रख लीजिए। क्योंकी 02 कोच स्लीपर में आपको आरक्षण मिलना बेहद मुश्किल है, जो 10, 12 कोच में ही नही मिलता था और वही कथा सामान्य द्वितीय श्रेणी अनारक्षित कोच, जिनकी संख्या भी 02 ही रहने वाली है।
आगे रेल विभाग वातानुकूलित 3 टियर में इकोनोमी श्रेणी का अविष्कार कर के अपनी पीठ थपथपाता है की उन्होंने 3 टियर वातानुकूलित कोच के किरायोंसे लगभग 7 से 8 % कम किराये में यात्रिओंके लिए बड़ी ‘इकोनॉमी’ उपलब्ध कराई है। जो की सांख्यिकी दृष्टिकोण से भले ही रेल विभाग को ज्यादा लगती होगी मगर अकेले या परिवार के साथ याटा करनेवाले यात्री को कुछ इकोनॉमी का एहसास नही करा पाती। यही फर्क 20 से 25 % रहता तो यात्री उसे अलग श्रेणी या इकोनॉमी श्रेणी मान सकता था।
खैर, जबरन नामकरण ही कर दिए है, तो बोलेंगे भाई “इकोनॉमी”। बात फर्क ही महसूस करने की है तो 3 टियर वातानुकूल के किराये 15% बढ़ जाएं और इकोनॉमी के वहीं के वहीं रहे तो फिर “इकोनॉमी” का फील आ ही जायेगा। ☺️
राजधानी आते आते अब सुपरफास्ट और वह भी साप्ताहिक आ रही है। खैर, नई तो नई ही गाड़ी होती है और आगे आशा भी बन्धी रहेगी की फेरे बढ़ाये जाएंगे।
दूसरा चक्कर मार्ग का था। हुबली, धारवाड़, मिरज, पुणे, मनमाड, भुसावल, भोपाल होते हुए निजामुद्दीन जाने का और पुरजोर मांग थी विजयपुरा, बागलकोट की ओरसे चलाने की। आखिरकार रूट, मार्ग तय हुवा और गाड़ी गदग, बदामी, बागलकोट, विजयपुरा, सोलापुर, दौंड, मनमाड़, भुसावल याने सोलापुर से निजामुद्दीन तक कर्नाटक एक्सप्रेस के मार्ग को अपनाएगी।
चलिए, देख लेते है समयसारणी।
20657/58 की नियमित समयसारणी
20657 हुबली हज़रत निजामुद्दीन साप्ताहिक सुपरफास्ट दिनांक 14 अक्टूबर से प्रत्येक शुक्रवार को निजामुद्दीन की ओर बढ़ेगी और वापसीमे 20658 हज़रत निजामुद्दीन हुबली साप्ताहिक सुपरफास्ट दिनांक 16 से प्रत्येक रविवार को निजामुद्दीन से हुबली की ओर प्रस्थान करेगी।
गाड़ी की संरचना : 01 वातानुकूल प्रथम, 02 वातानुकूल 2 टियर, 03 वातानुकूल 3 टियर, 10 स्लीपर क्लास, 02 द्वितीय श्रेणी साधारण, 02 जनरेटर कार/एसएलआर, 01 पेंट्रीकार, 01 पार्सल कुल 22 कोच
नए गाड़ी की अधिकृत सुचना
वैसे 11 अक्टूबर को माननीय रेल मंत्री जी 07385 हुबली हज़रत निजामुद्दीन विशेष को हुबली से दोपहर 15:00 को हरी झंडी दिखाएंगे।
वन्देभारत एक्सप्रेस चलते हुए पटरी पर आए मवेशियों से टकरा गई और उसके सामने के कवर का नुकसान हो गया। खैर हमारे भारतीय रेल के तकनीशयन ने इसे चन्द घंटोंमे राइट कर रवाना किया। यूँ तो इस वाकये पर कई तस्वीरें और तरह तरह के ट्वीट्स आ चुके है अतः उसमे हम नही जायेंगे बस एक विचार आपके सामने रख रहे है।
सुरक्षा मानकों पर वन्देभारत का पूरी तरह से परीक्षण किया गया है। इसे उच्च गति और तीव्र पिकअप के लिए डिज़ाइन किया गया है। गाड़ी का बुनियादी ढांचा कहीं भी क्षतिग्रस्त नहीं है, यह मजबूत है। यह केवल कवर है जो क्षतिग्रस्त है और रेलवे तकनीशियनों को इसे बदलने के लिए अच्छी तरह से प्रशिक्षित किया गया है, कोई चिंता नहीं है।
इतनी रफ्तार से ट्रेनें चलाने के लिए इसी तरह की सामग्री की जरूरत होती है लेकिन इन चीजों में यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाता है. इतना ही नहीं रेल प्रशासन ने पहले ही ट्रेन निर्माण के दौरान रेल लाइन पर बाड़ लगाने का आश्वासन दिया था, लेकिन इसे शुरू करने की जल्दी में बाड़ पर ध्यान नहीं दिया गया है.
खैर, हमें पता होना चाहिए कि यह हमारा होम प्रोडक्शन है। पता नहीं, हममें से कुछ लोग यह क्यों साबित करने पर उतारू होते है कि यह एक खटारा, नकारा चीज है?
कवर वगैरा का नुकसान होने के बावजूद जब रेलवे ने ट्रेन कैंसिल या लेट नहीं की तो रेल कर्मचारियों की तारीफ होना चाहिए या नहीं? जबकी हम में से कई लोग यह साबित करने पे तुले है, की फाइबर की फुस्सी गाड़ी बनाई गई है। क्या हमें ही हम पर भरोसा नही, जबकी 2 वन्देभारत रोजाना 160 की गति से दौड़ रही है। तीसरी भी पटरी पर चलना शुरू हो गयी है।
वन्देभारत गाड़ी हमारे भारतीय रेलवे की शान, हमारा गर्व होना चाहिए, है भी।
हाल ही में दपुमरे SECR में रेल तिहरीकरण के चलते गाड़ियाँ रद्द की गई थी और दिनांक 04 अक्टूबर से मध्य रेल CR के सोलापुर मण्डल के दौंड – अहमदनगर के बीच रेल दोहरीकरण हेतु 32 गाड़ियाँ रद्द की गई।
ऐसे ही देशभर में त्यौहारोंका मौसम चल रहा है और ऐसी हालत में रेल प्रशासन की ओरसे अत्यल्प समयावधि में घोषणा कर गाड़ियोंके रद्दीकरण/डायवर्शन की सूची जारी कर दी जाती है। जिन यात्रिओंकी टिकटें महीनों पहले आरक्षित की गई है और ऐन यात्रा के दिन उन्हें पता चलता है की उनकी गाड़ी रद्द हो गयी है या उनका स्टेशन छोड़ते हुए किसी अन्य मार्ग से चलेंगी तो उनपर बहुत बुरी बीतती है। यात्रा करना जरूरी हो तो तुरन्त ही अन्य यातायात मार्ग तलाशने पड़ते है या अन्य मार्ग से रेल यात्रा का नियोजन करना पड़ता है। उस वक्त यात्रा खर्च दुगना, तिगुना कर के भी यात्रा सुयोग्य और सुरक्षित हो पाएगी इसकी निश्चितता नही ली जा सकती।
यह तो हाल जिनके रद्दीकरण घोषणा के ही दिन के टिकट हो उनके है मगर असली विडम्बना तो आगे है। रेल ब्लॉक का परिपत्रक जारी होते है यात्री संगठन, नेतागण सक्रिय होते है। रद्द की गई गाड़ियोंमे से यात्रिओंके आग्रह पर कुछ गाड़ियाँ रिस्टोर अर्थात पुनर्बहाल की जाती है और जिन यात्रिओंने रद्दीकरण की सूचनाएं देख कर अपने टिकट रद्द कर दिए थे, अन्य यातायात को औने पौने दाम देकर अपनी यात्रा का नियोजन कर लिया हो, वह अपना माथा पिट लेता है। क्योंकि उसने जिस गाड़ी की टिकटें रद्दीकरण की सूचना देखकर रिफण्ड ले लिया हो, उसे रेल प्रशासन ने रिस्टोर कर दिया है।
हे भगवान!! क्या अब वह फिर से उसी रेल गाड़ी का टिकट ले? क्या अब उसी तरह कन्फ़र्म टिकट मिल पायेगा? और उसने जो अल्टरनेट नियोजन किया है उसका क्या? कुल मिलाकर यह घनघोर अनिश्चितता और असमंजसता का वातावरण निर्माण हो जाता है।
हम यह नही कहते की रेल प्रशासन अपनी पूर्वसूचित गाड़ियोंको पुनर्बहाल नही कर सकता मगर परेशानी यह है, की यात्री रेल प्रशासन की इस ढुलमुल नीति का क्या करें? उसकी गाड़ी सूचना नुसार रद्द रहेंगी, प्रस्थान के तिथि तक सचमुच रद्द ही रहेगी या अचानक किसी (?) के दबाव में आकर अपने सुनियोजित, सुनिश्चित (?) रेल ब्लॉक में बदलाव कर गाड़ी को चला देगी?
राहत इन्दौरी साहब का शेर था, “बुलाती है, मगर जाना नही” उसी तर्ज पर आम यात्री कह सकता है, गाड़ियाँ रद्द हो सकती है, मगर टिकट कैंसिल करने का नई। सूचनाएं, नोटिफिकेशन निकलते है, लेकिन उनको गम्भीरता से लेने का नई! स्टेशनपर जाओ, खुद अपनी आंखोंसे गाड़ी चलेगी के नई चलेगी यह देखो! लिखिलिखाई, छपी छपाई बातों पर यकीन करनाइच नई!!