Uncategorised

वन्देभारत के 100 रैक का बटवारा, किसके हिस्से कितनी वन्देभारत?

दरअसल देश की पहली सेल्फ प्रॉपलड़, लोको समहित, वातानुकूलित गाड़ी, वन्देभारत एक्स्प्रेस के 100 रैक 2024-25 तक पटरियों पर लाने का खाका खींच गया है। इनमे तरह तरह की तकनीकी बातें मीडिया मे या रही है। यह नया वन्देभारत का अवतार शायिका अर्थात बर्थ वाला रहेंगा। वातानुकूलित 3 टियर मे प्रत्येक कोच की क्षमता 61 यात्री, वातानुकूलित 2 टियर की 48 यात्री और वातानुकूलित प्रथम मे 24 यात्री इस तरह रचना रहेगी। वन्देभारत एक्स्प्रेस के 16, 20 और 24 कोच के रैक तैयार करने की व्यवस्था की जा रही है। 16 कोच की वन्देभारत मे 11 3 टियर, 4 टू टियर और 1 प्रथम श्रेणी के कोच रहँगे। आगे 20 कोच की वन्देभारत मे थ्री टियर के कोच 11 से बढ़कर 15 एवं 24 कोच की वन्देभारत मे थ्री टियर के 19 कोच रखे जाएंगे। टू टियर के 4 और प्रथम श्रेणी का 1 कोच सभी संरचना मे यथावत रहेगा। जिस तरह तैयारियाँ चल रही है, 100 रैकों का अलॉटमेंट भी सामने आया है, जो निम्नप्रकार से है,

मध्य रेल CR को 5 रैक और पश्चिम रेल्वे WR को 5 रैक का आबंटन होगा। मध्य रेल के 5 रैक मे से 2 रैक मुम्बई छत्रपती शिवाजी महाराज टर्मिनस को, 2 रैक पुणे और 1 रैक मनमाड को मिलेगा। उसी प्रकार पश्चिम रेल्वे के 5 रैक मे से मुम्बई सेंट्रल को 2 रैक, अहमदाबाद, सूरत और डॉ आंबेडकर नगर महू को 1 – 1 रैक मिलेगा। आगे इस प्रकार से रैकों का बटवारा किया जाएगा, पूर्व तटीय रेल ECoR को 5, पूर्व मध्य रेल ECR को 4, उत्तर मध्य रेल NCR को 5, पूर्वोत्तर रेल NER को 4, पूर्वोत्तर सीमान्त रेल NFR को 5, सबसे ज्यादा उत्तर रेल NR को 24 रैक मिलेंगे, दक्षिण पश्चिम रेल SWR को 4, पश्चिम मध्य रेल WCR को 5, दक्षिण रेल SR को 13, दक्षिण पूर्व रेल SER को 5, दक्षिण मध्य रेल WCR को 4, दक्षिण पूर्व मध्य रेल SECR को 2, उत्तर पश्चिम रेल NWR को 5 इस तरह कुल 100 रैक का आबंटन दिखाई दे रहा है।

हालांकि यह सारी व्यवस्था टेन्टेटिव याने प्रयोगात्मक रूपसे तय की जा रही है इससे हम केवल यह अनुमान लगा सकते है की जहाँ रखरखाव किया जाएगा तो गाड़ी की शूरवात/समाप्त भी वहीं की जाएगी और इसी सूची के आधार पर कुछ स्टेशनों को वन्देभारत एक्सप्रेस का संचालन करने का सौभाग्य मिलने जा सकता है। दपुमरे का गोंदिया, उपरे का श्रीगंगानगर, पमरे का रीवा, परे का डॉ आंबेडकर नगर महू, उरे का बरेली एवं नांगल डैम, पूर्वोत्तर का टनकपुर, उमरे का ग्वालियर, झाँसी और मरे का मनमाड यह कुछ आश्चर्यकारक प्रविष्टियाँ है। खैर अभी इन सब बातोंके पूर्णत्व हेतु 3 वर्षों की अवधि है, प्रश्न यह है, क्या इन सारी वन्देभारत गाड़ियों को भारतीय रेल खुद चलाएगी या निजी हाथों मे सौपेगी?

Uncategorised

दपुमरे SECR ने अपनी महीनाभर रदद् गाड़ियोंकी सूची को अद्ययावत किया

11 जोड़ी गाड़ियोंका परिचालन रदद् किये जाने के बाद, (देखे, रेल दुनिया की 23 अप्रेल की पोस्ट)

SECR का अजीब तहलका; छुट्टियोंके दिनोंमें महीनेभर 11 जोड़ी यात्री गाड़ियाँ पण्यवहन यातायात के लिए रदद् कर दी। जिनमे मुम्बई की ओर चलनेवाली हटिया, भुबनेश्वर, पूरी, विशाखापट्टनम और डेली छत्तीसगढ़, 5 दिवसीय समता जैसी गाड़ियाँ है।
https://railduniya.in/2022/04/23/secr-%e0%a4%a6-%e0%a4%aa%e0%a5%81-%e0%a4%ae-%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-22-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a5%9c%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/

यात्रिओंकी अत्याधिक टिका के बाद दपुमरे ने अपने निर्णय में बदलाव किया। अब छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, समता एक्सप्रेस और त्रिसाप्ताहिक रायपुर सिकन्दराबाद रायपुर एक्सप्रेस का परिचालन बहाल किया गया है। निम्नलिखित परिपत्रक देखे,

Uncategorised

चल पड़ा IRTTC का दौर; उपरे NWR का मांगपत्र आया सोशल मीडिया में

दौर इसलिए, की यह IRTTC अर्थात इंडियन रेलवे टाइमटेबल कमिटी बैठकमें जो प्रत्येक वर्ष होती है। इस IRTTC की मीटिंग में देशभर के सभी रेलवे झोन के प्रतिनिधि अपने क्षेत्र से रेल सम्बन्धित विविध मांगे सामने रखते है और उसपर कजरचा करते है। जो गाड़ियाँ चर्चामे आती है, कई बार तो वर्षों वर्षों तक फाइलों से ही निकलती नही, बस, हकीकत की रेल पटरियोंपर चलने के बजाय सोशल मीडिया में ही दौड़ लगाती है और डेड एण्ड लाइनपर जाकर भुला देती है। चूंकि यह किसी झोन की अपने क्षेत्र के लिए पूर्वनियोजन जता कर रेल बोर्ड के पास, इतर झोन के अधिकारियों की उपस्थिति में की गई मांग होती है तो यह समझा जा सकता है, की बहुत सारी बाधाएं प्राथमिकता के स्तर पर पार कर ली जाती है और केवल रेल बोर्ड की अनुमति ही बाकी रह जाती है।

IRTTC 2020 के मीटिंग, उ प रेल, NWR सम्बन्धित पुराने मुद्दें सोशल मीडिया में वायरल हो रहे है। चलिए हम भी देख लेते है, आखिर उ प रेल अपने क्षेत्र के लिए कौनसी नई गाड़ियाँ, किन गाड़ियोंके विस्तार और किन गाड़ियोंके फेरों में बढ़ोतरी की अपेक्षा रखी थी।

नई गाड़ियाँ :- ( अहमदाबाद – उदयपुर के बीच बड़ी लाइन शुरु होने के पश्चात )

1: उदयपुर सिटी अहमदाबाद के बीच हिम्मतनगर होकर, प्रतिदिन

2: जयपुर – बांद्रा टर्मिनस के बीच त्रिसाप्ताहिक गाड़ी बरास्ता अजमेर, उदयपुर सिटी, हिम्मतनगर, अहमदाबाद

3: उदयपुर – पुणे के बीच साप्ताहिक गाड़ी, बरास्ता हिम्मतनगर

4: जयपुर – पुणे के बीच साप्ताहिक गाड़ी बरास्ता अजमेर, उदयपुर सिटी, हिम्मतनगर, अहमदाबाद

5: उदयपुर – चेन्नई के बीच साप्ताहिक गाड़ी बरास्ता हिम्मतनगर, अहमदाबाद, सूरत, जलगाँव, बल्हारशहा

नए गेज कन्वर्शन पर विस्तार

1: 19669/70 उदयपुर सिटी पाटलिपुत्र उदयपुर सिटी हमसफ़र साप्ताहिक एक्सप्रेस का हिम्मतनगर होकर अहमदाबाद तक विस्तार

2: 12963/64 हज़रत निजामुद्दीन से उदयपुर के बीच प्रतिदिन चलनेवाली मेवाड़ एक्सप्रेस का हिम्मतनगर होकर अहमदाबाद तक विस्तार

नई गाड़ियाँ : नियमित नेटवर्क पर

1: बाड़मेर – हावड़ा के बीच डेगाना, रतनगढ़ होकर द्विसाप्ताहिक गाड़ी

2: जयपुर – साईं नगर शिर्डी बरास्ता सवाई माधोपुर, नागदा, भोपाल, भुसावल, मनमाड़ साप्ताहिक गाड़ी, फिलहाल विशेष कर चलाई जा रही है।

3: जयपुर – रेनिगुंटा बरास्ता सवाई माधोपुर, कोटा, नागदा, भोपाल, बल्हारशहा द्विसाप्ताहिक गाड़ी

4: जयपुर – मदुरै बरास्ता सवाई माधोपुर, कोटा, नागदा, भोपाल, बल्हारशहा साप्ताहिक गाड़ी

5: जयपुर – शालीमार बरास्ता सवाई माधोपुर, नई कटनी, झारसुगुड़ा साप्ताहिक गाड़ी

6: जयपुर दिल्ली कैंट के बीच बांदीकुई, रेवाडी होकर त्रिसाप्ताहिक

7: हिसार – बांद्रा टर्मिनस के बीच द्विसाप्ताहिक जो रतनगढ़, डेगाना, जोधपुर, भीलड़ी होकर चले

8: बाड़मेर – बांद्रा टर्मिनस के बीच द्विसाप्ताहिक जो भीलड़ी होकर चले और साप्ताहिक तौर पर बाड़मेर – अहमदाबाद बरास्ता भीलडी

9: भगत की कोठी – बांद्रा टर्मिनस के बीच द्विसाप्ताहिक जो भीलड़ी होकर चले और साप्ताहिक तौर पर भगत की कोठी – अहमदाबाद बरास्ता भीलडी

10: बठिंडा – दिल्ली जंक्शन के बीच हिसार, रेवाड़ी होकर प्रतिदिन

गाड़ियोंका विस्तार :-

1: 14713/14 श्रीगंगानगर जम्मूतवी के बीच चलनेवाली साप्ताहिक गाड़ी का विस्तार जम्मूतवी से आगे श्री माता वैष्णो देवी कटरा तक

2: 22475/76 कोयम्बटूर हिसार कोयम्बटूर वातानुकूल साप्ताहिक गाड़ी का विस्तार हिसार से आगे श्री माता वैष्णो देवी कटरा तक

3: भिवानी – सिरसा – भिवानी सवारी गाड़ी लुधियाना तक

4: 12403/04 प्रयागराज – जयपुर – प्रयागराज प्रतिदिन एक्सप्रेस गाडीका विस्तार बीकानेर तक

5: 19715/16 जयपुर – गोमतीनगर – जयपुर त्रिसाप्ताहिक गाड़ी का विस्तार गोरखपुर तक

6: 22481/82 जयपुर दिल्ली सराय रोहिल्ला जयपुर प्रतिदिन गाड़ी का विस्तार हरिद्वार तक

7: जोधपुर – भीलड़ी के बीच सवारी गाड़ी को अहमदाबाद तक विस्तारित करना

8: 14819/20 जोधपुर – साबरमती जोधपुर प्रतिदिन का विस्तार बांद्रा टर्मिनस तक

9: 22477/78 जयपुर जोधपुर जयपुर प्रतिदिन गाड़ी का विस्तार जालोर तक

10: 22421/22 दिल्ली सराय रोहिल्ला जोधपुर के बीच चलनेवाली गाडीको 22483/84 में मिलाकर जोधपुर से आगे गांधीधाम तक प्रतिदिन, विस्तारित करना

11: दिल्ली जंक्शन – रेवाड़ी – दिल्ली जंक्शन मेमू गाड़ी को हिसार तक विस्तारित करना

12: 22919/20 चेन्नई अहमदाबाद चेन्नई साप्ताहिक हमसफ़र को जोधपुर तक विस्तारित करना

13: 12983/84 अजमेर – चंडीगढ़ अजमेर त्रिसाप्ताहिक गरीबरथ का लुधियाना/जलन्धर तक विस्तार करना

14: 19611/12/13/14 अजमेर – अमृतसर – अजमेर के बीच चलनेवाली इन गाड़ियोंका विस्तार अजमेर से आगे उदयपुर तक करना

गाड़ियोंके फेरे बढाना

1: 12065/66 अजमेर दिल्ली सराय रोहिल्ला के बीच पांच दिवसीय जनशताब्दी को प्रतिदिन कराना

2: 14717/18 बीकानेर हरिद्वार बीकानेर त्रिसाप्ताहिक गाडीके फेरे प्रतिदिन कराना

3: 14021/22 दिल्ली सराय रोहिल्ला जयपुर के बीच त्रिसाप्ताहिक सैनिक एक्सप्रेस को प्रतिदिन कराना

4: 22663/64 चेन्नई एग्मोर जोधपुर चेन्नई एग्मोर साप्ताहिक को त्रिसाप्ताहिक कराना

5: 16311/12 श्रीगंगानगर कोचुवेली श्रीगंगानगर साप्ताहिक को त्रिसाप्ताहिक कराना

6: 12489/90 बीकानेर दादर बीकानेर द्विसाप्ताहिक को प्रतिदिन

7: 22965/66 भगत की कोठी बांद्रा भगत की कोठी साप्ताहिक से द्विसाप्ताहिक

8: 22915/16 हिसार बांद्रा हिसार साप्ताहिक से सप्ताह में 4 दिन चलवाना

9: 22931/32 जैसलमेर बांद्रा जैसलमेर साप्ताहिक से सप्ताह में 4 दिन चलवाना

10: 19027/28 जम्मूतवी बांद्रा जम्मूतवी साप्ताहिक से सप्ताह में 4 दिन चलवाना

11: 14803/04 भगत की कोठी अहमदाबाद भगत की कोठी सप्ताह में 4 दिन की जगह प्रतिदिन चलवाना

12: 12974/73 जयपुर इन्दौर जयपुर द्विसाप्ताहिक से बढ़ाकर प्रतिदिन

13: 20814/13 जोधपुर पूरी जोधपुर साप्ताहिक से बढ़ाकर द्विसाप्ताहिक

14: 12980/70 जयपुर बांद्रा जयपुर त्रिसाप्ताहिक से बढ़ाकर प्रतिदिन

15: 15631/32 बाड़मेर गौहाटी बाड़मेर द्विसाप्ताहिक को बढ़ाकर सप्ताह में 4 दिन चलवाना

16: 18207/08 दुर्ग अजमेर दुर्ग साप्ताहिक को द्विसाप्ताहिक चलवाना

17: 18213/14 दुर्ग अजमेर दुर्ग साप्ताहिक को द्विसाप्ताहिक चलवाना

18: 19715/16 जयपुर गोमतीनगर जयपुर को त्रिसाप्ताहिक से प्रतिदिन चलवाना

19: 12940/39 जयपुर पुणे जयपुर द्विसाप्ताहिक को सप्ताह में 4 दिन चलवाना

20: 19609/10 उदयपुर योगनगरी हृषिकेश उदयपुर त्रिसाप्ताहिक को प्रतिदिन चलवाना

Uncategorised

भारतीय रेल : यात्री यातायात या पण्यवहन; प्राधान्य किसे?

यह कैसा सवाल? सभी यात्रिओंके मन मे यह बात जरूर आ गयी होगी। भई, भारतीय रेल भले ही साइड बाई साइड, पण्यवहन चलता रहे लेकिन रेल मे यात्रिवहन यह तो प्रत्येक भारतीय अपना मूलभूत अधिकार समझता है और इतना अधिक समझता है की कभी कभी उसे टिकट निकालना जरूरी है, आरक्षण करना जरूरी है, गाड़ी में व्यवसाय करने हेतु अनुमति लगती है, गाड़ी में साफसफाई रखनी होती है ऐसी छोटी छोटी बातें उसके ख्याल में आती ही नही।

भारत में रेलवे की नींव, अंग्रेजोंने रखी थी और उसका विस्तार भी व्यापक तरीके से किया गया। दरअसल अंग्रेजोंको भारत से कृषि उत्पाद की यातायात करने के लिए सस्ता और टिकाऊ संसाधन चाहिए था जो उन्हें रेलवे में दिखाई दिया। उस वक्त उन्होंने अपने देश से कई औद्योगिक इकाइयों को रेल निर्माण हेतु आमंत्रित किया और बड़ी तेजी से रेलवे का विस्तार किया। भरपूर जगह, बहुतायत मनुष्यबल और सीधी अनुमति रेल विस्तार के लिए और क्या चाहिए? (आजकल रेल प्रोजेक्टमें यही मदें अड़ंगे लगाती है) जहाँ से कृषिउपज, खनिज उठाने की आवश्यकता थी लाइनें वही डलती चली गयी। फिर अगला विचार श्रमिकों और सैन्य यातायात का आया तो लम्बी दूरी की यात्री गाड़ियोंको खोला गया। धीरे धीरे यात्री यातायात के लिए रेल भारतोयोंके बीच लोकप्रिय होती गयी। उस वक्त रेलवे दो स्तरों में बँटी थी, मैन लाइन और ब्रांच लाइन। मुख्य रेल मार्ग और दो अलग दिशाओंके मुख्य मार्ग के बीच जोड़ने वाली शाखा, ब्रांच लाइन और जिस स्टेशन पर यह मैन और ब्रांच लाइन जुड़ती थी वह स्टेशन जंक्शन स्टेशन कहलाया जाता था।

सीधा हिसाब था, जंक्शनोंपर ज्यादातर सभी लम्बी दूरी की गाड़ियाँ रुकेंगी। ब्रांच लाइन की गाड़ी मैन लाइनोंपर, सम्बन्धित जंक्शनोंके आगे नही जाएगी। जरूरत है तो ब्रांच लाइन गाड़ी को मैन लाइन की गाड़ी से जोड़ा जाएगा ( लिंक एक्सप्रेस ) या कुछ डिब्बों को जोड़ा जाएगा ( स्लिप कोचेस ) इससे रेलवे का परिचालन बेहद साफसुथरा, सरल था। कोई राजनीतिक दखल या पड़ावों की खींचतान नही थी। मेल गाड़ियाँ सर्वोच्च प्राथमिकता पर चलाई जाती थी, फिर एक्सप्रेस, पार्सल मिक्स और सवारी गाड़ियाँ यह क्रम था। पण्यवाहन अर्थात मालगाड़ियोंके के लिए भी पर्याप्त जगह होती थी, क्योंकि यात्री गाड़ियोंकी संख्या सीमित थी।

जनता राज में सुपरफास्ट नामक यात्री गाड़ी का अविष्कार लाया गया। यात्री गाड़ियोंकी प्राथमिकता बदलने लगी। आगे ‘यूनिगेज’ याने देशभर में एक ही तरह के रेल मार्ग की मांग उठी और छोटी गेज की लाइनें जो अक्सर ब्रांच लाइन्स श्रेणी में थी उन्हें बड़ी लाइनों में बदलने का राष्ट्रीय कार्यक्रम घोषित किया गया। यात्री गाड़ियाँ बढ़ने की यह शुरवात थी। जनसंख्या बढ़ रही थी, यातायात संसाधन में रेलवे ही प्रमुख और आरामदायी थी, मुख्यतः किफायती थी। राजनीति ने भी करवट बदली। यकायक राजनयिकोंके जनसेवा एजेंडे में रेल सेवा आ गयी। यात्री, जनता की सुविधा बढाने हेतु ब्रांच लाइन्स की गाड़ियोंको मैन लाइनोंपर और मैन लाइनोंकी गाड़ियोंको ब्रांच लाइनोंपर विस्तारित किया जाने लगा। चलस्टोक अर्थात डिब्बे के कमी थी तो नए गाड़ियोंके साप्ताहिक, द्विसाप्ताहिक परिचालन की घोषणा की जाने लगी। हेतु यह, भले ही सप्ताह में एक दिन चले मगर अपने क्षेत्र से सीधी गाड़ी चलाने का श्रेय तो मिलना ही चाहिए। इन सब जद्दोजहद में रेलवे का मुख्य उद्देश्य पण्यवहन कहीं छूटता, नजरअंदाज होता चला गया।

तब भी और आज के इस अत्याधुनिक रेल परिचालन में भी रेलवे का सारा अर्थकारण इस पण्यवहन की आय पर ही टिका है। रेलवे की कमाई न के बराबर है अपितु खर्चा भी बड़ी मुश्किलों से निकलता है और जो भी निकलता है उसकी वजह यह पण्यवहन गाड़ियाँ है। कोयला, लोहा, लोहअयस्क, सीमेन्ट, कच्चा तेल इसकी यातायात कर रेल अपना और हम, आपके लिए की जानेवाली यात्री यातायात का खड्डा भरती है। जी, हाँ! यदि पण्यवहन रेल की कमाई है तो यात्री यातायात यह रेल के लिए खर्चे की खाई ही है।

वर्षों यात्री यातायात की लोकप्रिय घोषणाओंके के बाद, हर तरह के पैतरे अपनाने के बाद भी रेल विभाग यात्री यातायात से कमाई तो क्या खर्च तक निकालने में असफल हो रही है। सीधा यात्री किराया बढाये तो राजनीति आड़े आती है। मतों की गिनती में सेंध लगती है। अतः यात्री किरायोंमे अलग अलग भार खोजे जाते है, स्टेशनोंपर मूलभूत सुविधाओं का महिमामंडन कर उससे उगाही करने का प्रयास किया जाता है। कभी निजी गाड़ियाँ FTR फूल टैरिफ दर का अविष्कार, तो कभी स्टेशन पर निजी नाम डलवाने का वादा, पूरे गाडीके डिब्बों को भद्दे आवरणोंमें लपेटकर कुछ खर्चा निकालने की कवायद, तो इंजीनोको इधर उधर से ‘उधार के सिन्दूर’ जैसी सजावट कर पैसा कमाने का जुगाड़। कितनी और किस तरह की दयनीय छटपटाहट!!

हाल ही के वर्षोंसे रेल विभाग ने इस बात को अच्छी तरह से समझा है की इस तरह खुरच खुरच कर रेलवे का पेट भरना नामुमकिन है और पण्यवहन जो कमाई की एकमेव मद बची है उस पर ही ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। रेलवे ने अब इस बातपर अंमल करना शुरू कर दिया है। पण्यवहन के लिए देशभर में DFC समर्पित मालगाड़ियोंके गलियारों का निर्माण कर के, EDFC और WDFC लगभग पूरे हो चुके है, बाकियोंपर काम शीघ्रता से किया जा रहा है। हाल ही की बात बताऊं, SECR दपुमरे, भारतीय रेल के एक झोन ने एक माह के लिए अपनी नियमित 11 जोड़ी गाड़ियोंको एक माह तक मालगाड़ियां यथास्थित चलाई जा सके इसके लिए रदद् कर दिया है।

रेलवे से राजनीतिक दखल हटें जो रेल विभाग में लिए जाने वाले उचित निर्णय में सबसे बड़ी बाधा होते है, तो भारतीय रेलवे की प्रगति, उन्नति के लिए आसमान खुला है। जिस तरह कच्चा तेल बन्धन मुक्त किया गया है आवश्यक है कि यात्री किराया वृद्धि के निर्णय भी बन्धनमुक्त किये जायें। हजारों हैक्टेयर खाली पड़ी रेल विभाग की जमीनोंके वाणिज्यिक उपयोग से भी यह भरपाई कुछ मात्रा में की जा सकती है बशर्ते उन जगहोंपर से अतिक्रमण हटें और रेल विभाग को निर्णय लेने की शक्ति हो। ऐसी और भी बाते है, जो आप, हम, हमारे नेतागण, रेल सम्बन्धित तज्ञ जानते है, समझते है, बस रेलवे जैसे बहुउपयोगी, लोकप्रिय सार्वजनिक परिवहन को यथासंभव सम्भाल ले तो बहुत अच्छा होगा।

Uncategorised

मध्य रेल की दो जोड़ी छुट्टी विशेष गाड़ियाँ ; मुम्बई से मऊ और रीवा के बीच चलेगी।

01051 लोकमान्य तिलक टर्मिनस से मऊ के लिए प्रत्येक गुरुवार को दिनांक 28 अप्रेल से 30 जून तक चलेगी और वापसीमे 01052 मऊ से लोकमान्य तिलक टर्मिनस के लिए प्रत्येक शनिवार को दिनांक 30 अप्रेल से 02 जुलाई तक रवाना की जाएगी। गाड़ी की समयसारणी एवं डिब्बा संरचना के लिए निम्नलिखित परिपत्रक देखे।

02187 रीवा से मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के लिए प्रत्येक गुरुवार को दिनांक 28 अप्रेल से 30 जून तक चलेगी और वापसीमे 02188 मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से रीवा के लिए प्रत्येक शुक्रवार को दिनांक 29 अप्रेल से 01 जुलाई तक रवाना की जाएगी। गाड़ी की समयसारणी एवं डिब्बा संरचना के लिए निम्नलिखित परिपत्रक देखे।