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कामायनी और काशी दोनोंही गाड़ियोंके नेपानगर ठहराव बहाल ; छह माह में होंगी समीक्षा

11071/72 लोकमान्य तिलक टर्मिनस वाराणसी कामायनी और 15017/18 लोकमान्य तिलक टर्मिनस गोरखपुर काशी इन दोनों प्रतिदिन चलनेवाली गाड़ियोंके नेपानगर स्टोपेजेस की पुनर्बहाली मिल गयी है। 19 मार्च से दोनोंही दिशाओं से यह गाड़ियाँ नेपानगर में रुकने लग जाएगी।

नेपानगर और सम्बन्धित यात्रीगण से नम्र निवेदन है, उपरोक्त ठहराव को प्रायोगिक श्रेणी में पुनर्बहाली मिली है अतः उपरोक्त गाड़ियोंमे ही और सम्भव हो तो नेपानगर से ही टिकट ले, आरक्षण भी वहींसे कराये ताकी छह महीनोंकी समीक्षा में यह अस्थायी ठहराव स्थायी रूप में बदल जाये।

इस ठहराव के लिए क्षेत्र के सांसद ज्ञानेश्वर पाटील इनके विशेष प्रयासों के लिए नेपानगरवासियोंने आभार प्रकट किए है।

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SWR द प रेल, हुबली मण्डल मे गदग बाईपास कार्य के चलते तीन जोड़ी गाड़ियाँ करीबन एक सप्ताह रदद् रहेंगी।

07332 हुबली सोलापुर विशेष सवारी दिनांक 17 से 23 मार्च तक रदद् रहेगी। वापसीमे 07331 सोलापुर हुबली विशेष सवारी दिनांक 19 से 25 मार्च तक रदद् रहेंगी।

07322/21 धारवाड़ सोलापुर धारवाड़ विशेष सवारी दिनांक 18 से 24 मार्च तक रदद् रहेगी।

07329 हुबली विजयपुरा इण्टरसिटी विशेष एक्सप्रेस दिनांक 15 से 23 मार्च तक रदद् रहेंगी। वापसीमे 07330 विजयपुरा हुबली इण्टरसिटी विशेष एक्सप्रेस दिनांक 16 से 24 मार्च तक रदद् रहेगी।

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पूर्वोत्तर सीमान्त रेल NFR मे मेल/एक्सप्रेस के द्वितीय श्रेणी कोच को अनारक्षित करने की कार्यवाही

NFR पूर्वोत्तर सीमान्त रेल ने अपनी 91 मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंकी सूची और उनमें अनारक्षित टिकटोंके जारी किए जाने की तिथियाँ सूचित कर दी है। गौरतलब यह देख सकते है, लगभग सभी तिथियाँ जून के आखिरी सप्ताह या जुलाई के प्रथम सप्ताह की है।

रेल प्रशासन के निर्देश के बाद से 120 दिनों बाद अनारक्षित सेवा का शुरू किया जाना बिल्कुल तर्कसंगत है। इससे पूर्व आरक्षित द्वितीय श्रेणी 2S के यात्रिओंके हितोंकी रक्षा होगी, वह अपने अग्रिम आरक्षण पर सुरक्षित यात्रा कर पाएंगे। निम्नलिखित तिथियोंसे मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंमे अनारक्षित सेवा शुरू हो जाने के बाद, आम यात्री टिकट काउन्टर से टिकट लेकर यात्रा कर सकेगा और उसे द्वितीय श्रेणी साधारण श्रेणी के लिए अग्रिम आरक्षण करने की जरूरत नही रहेगी।

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रेल प्रशासन के नियमोंकी, अनुशासन की उड़ रही है धज्जियाँ! अनारक्षित टिकटों का खेला, यात्रिओंकी माथापच्ची।

कभी कभी शक होता है, यह एकछत्र भारतीयरेल है या विविध क्षेत्रीय रेलवे में बटी स्वतंत्रता पूर्व काल की स्टेट रेलवे? तब एक राज्य, निज़ाम नही चाहता था की कोई दूसरा उसके क्षेत्र में दखल दे। यहाँतक की इसके लिए एक स्टेट रेलवे अपना गेज बदल लेती थी। इसका उदाहरण आपको गुजरात, राजस्थान, मप्र में मिल जाएगा। प्रत्येक राजा अपने इलाके के लिए अपनी खुद की रेल चलाता था और वह बगल के राजा की रेलवे से अलग गेज की रहती थी। आज फिर वही हालात है, किसी एक क्षेत्रीय रेल में अनारक्षित टिकट मिल रहे है, तो किसमे नही।

NWR उ प रेल ने घोषणा कर दी, हम 11 तारीख से ही 97 मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंमे अनारक्षित यात्री सेवा शुरू कर देंगे तो प रे WR ने 01 जुलाई से उपरोक्त सेवा शुरू हो पाएगी यह कह दिया। भाई, उत्तर रेलवे NR ने तो गजब कर दिया उन्होंने 250 के करीबन गाड़ियोंकी सूची छपवा दी और प्रत्येक गाड़ी में अनारक्षित सेवा शुरू की अलग अलग तिथियाँ भी। कुछ क्षेत्रीय रेलवे ऐसी भी है, जो मौन व्रत ले कर चुपचाप बैठी है, जैसे की मध्य रेल।

अब परेशानी क्या है, आज भी मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंके डिब्बों में अपनी क्षमता से दुगने यात्री यात्रा कर रहे है। कोई क्षेत्रीय रेलवे अनारक्षित टिकट जारी कर अपने यहाँसे अनारक्षित डिब्बों को यात्रिओंसे लबदब करा भेज रही है तो कोई रेलवे (CR) बिना आरक्षण द्वितीय श्रेणी में पैर भी धरने न दे रही है। ऐसे में जब केवल मध्य रेलवे के ही कार्यक्षेत्र में चलनेवाली गाड़ियाँ यदि यात्रिओंसे ठूँस ठूँस कर चले तो रेल प्रशासन के नियम, कानून, अनुशासन तो ताक पर रखे पड़े है, क्यों? सही है या नही?

रेलवे स्टेशनोंपर रेल सुरक्षा बल खड़ा है, ट्विटर के जरिये हर वरिष्ठ अधिकारी, मन्त्रीगण तक यात्रिओंसे सीधे जुड़े है, फिर भी ऐसी अराजकता मची है? आखिर चल क्या रहा है? या तो रेल प्रशासन सीधे कह दें अब कोई आरक्षित द्वितीय श्रेणी नही रहेंगी और सभी मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंके द्वितीय श्रेणी कोच अनारक्षित समझे जाएंगे, जिन यात्रिओंने द्वितीय श्रेणी का अग्रिम आरक्षण कर रखा है उसे अब आरक्षित रेल यात्रा यह एक सुन्दर बिसरा ख्वाब समझ कर भुला देना चाहिए। रेल विभाग वैसे भी आरक्षित आसन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी नही लेता अतः अब तो घोषित ही क्यों न कर दिया जाय की यात्री अपने बलबूते पर यात्रा करें, यज्ञपी हमने यात्री को आरक्षण दिया है, लेकिन उसके साथ अन्य रेल्वेज के अनारक्षित यात्री भी यात्रा कर सकते है।

कितनी कमाल बात है, ढेर व्यवस्था है मगर नियोजन के नाम पर सब शून्य और व्यर्थ है। तर्कहीन और निरी अनुशासन हीनता। ट्विटर पर अधिकारियों से रोजाना कम से कम एक तो भी शिकायत “ओवर क्राउडिंग” की रहती है। सम्बंधित शिकायत कर्ता से उसका PNR पूछा जाता है मगर कार्रवाई क्या हुई यह आजतक भी किसे ट्विटर पर प्रसारित होते दिखाई नही दी। मध्य रेल क्षेत्र में चलनेवाली ऐसी कई गाड़ियाँ है जिसमे रोजाना क्षमता से अधिक यात्री यात्रा कर रहे है, प्रशासन देख रहा है। न तो अनारक्षित टिकटें जारी किए जा रहे न ही बन्द हो चुकी गाड़ियाँ बहाल की जा रही है। पता नही, रेलवे अपने अधिकारों का उपयोग कब करनेवाली है?

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रेल्वे की अनारक्षित सीटें या यात्रीओं की दिमागी कसरत?

रेल प्रशासन ने मेल/एक्स्प्रेस गाड़ियोंमे द्वितीय श्रेणी सामान्य की अनारक्षित टिकटें शुरू करने के आदेश क्या निकालें, विविध क्षेत्रीय रेल मे कौन कब यह सुविधा शुरू कर रहा है इसकी KBC शुरू हो गई। अब आप पूछोगे कैसे, तो भैय्या जी हम बतावत है, तनिक ठइरो।

जैसे ही रेल बोर्ड से उपरोक्त आदेश जारी हुवा, सबसे पहले प्रतिक्रिया पश्चिम रेल्वे की दिनांक 02 मार्च को आयी। उन्होंने करीबन 200 गाड़ियोंकि सूची लगाकर मेल/एक्स्प्रेस गाड़ियोंकी अनारक्षित सेवा दिनांक 01 जुलाई से शुरू की जाएगी और इंट्रा जोन अर्थात पश्चिम रेल्वे के अंतर्गत चलाए जानेवाली मेल/एक्स्प्रेस गाड़ियोंकी सूची बाकी रख दी। इसकी वजह साफ थी, लंबी दूरी की गाड़ियोंमे ARP अग्रिम आरक्षण के चलते कई यात्रीओं ने 4 महिनेतक की द्वितीय श्रेणी मे आरक्षण शुल्क 15/- देकर अपनी सीटें आरक्षित करवा रखी है। ऐसे मे रेल्वे बोर्ड और पश्चिम रेल्वे का निर्णय बिल्कुल सही लगता है की पत्र की तिथि से 120 दिनों बाद यह अनारक्षित व्यवस्था को खोला जाए।

रेल्वे बोर्ड के पत्र मे 120 के ARP के बाद व्यवस्था कायम करने के अलावा एक प्रावधान और था, वह था, जिस दिन से द्वितीय श्रेणी मे किसी भी यात्री ने आरक्षण न कराया हो ऐसी गाड़ी मे उस दिन से यह सुविधा शुरू की जा सकती है। अब खेल यहाँ शुरू होता है। कौन सी गाड़ी मे कब तक आरक्षण किया गया है और कब तक नहीं यह बात केवल रेल्वे प्रशासन ही जान पाएगा और उसकी घोषणा करेगा तो उस प्रकार से उ प रेल NWR, दक्षिण रेल्वे और इसी तरह 2-4 क्षेत्रीय रेल्वे ने अपने अपने क्षेत्र से निकलने वाली गाड़ियों की सूचियाँ बनाई और सूचनाएं जारी कर दी। यह सारी सूचनाए अलग अलग दिन हमने अपने ब्लॉग के जरिए प्रकाशित भी की है। आज उत्तर रेल्वे की सूची भी यहाँ जोड़ रहे है, फिर आगे अपनी बात जारी रखेंगे।

यह 256 गाड़ियोंकी सूची है और तकरीबन हर गाड़ी मे अनारक्षित सेवा जारी होने की तिथि अलग अलग है। यात्री को भले ही एक दिशामे जाना हो मगर उस दिशामे जाने वाली प्रत्येक गाड़ी मे कौन से दिन से अनारक्षित टिकट मिलने लगेगी यह पता करना एक कंपेटिटिव एक्जाम पास करने जितना ही कठिन है। इस का हल एक ही है, बस यात्री रेल्वे की टिकट खिड़की पर जाए और वहाँ के बुकिंग बाबू से सर खपाए की फलाँ गाड़ी मे चालू टिकट मिलेगी या नहीं मिलेगी और नहीं मिलेगी तो कब से मिलेगी। है की नहीं दिमाग का दही जमाने वाली बात? कई क्षेत्रीय रेल्वे ऐसी भी है जिन्होंने इस विषय को लेकर न कोई तिथि बताई है और न ही कोई सूचना, जैसी की मध्य रेल्वे। मध्य रेल्वे मे द्वितीय श्रेणी का आरक्षण हो रहा है और मेल/एक्सप्रेस गाड़ियों मे भी आरक्षण के सिवा प्रवेश वर्जित है।

फोटो साभार : small town traveller youtube channel

कुल मिलाकर सबब यह है, यात्री स्टेशनपर जाएं, चालू टिकट मिलता होवे तो टिकट ले कर अपनी यात्रा शुरू करे अन्यथा आरक्षण मिलता होवे तो आरक्षण ले ले और वह भी उपलब्ध न हो तो सड़क मार्ग से अपनी व्यवस्था कर लें। हाँ, एक बात और है, जिन गाड़ियोंमे अनारक्षित टिकट शुरू कर दी गयी है, उनमे रेलवे के ई-टिकट भी उपलब्ध दिखाई दे रहे है। मतलब ई है, यात्रा का आरम्भ करते वक्त आपके आरक्षित सीट पर बैठे अनारक्षित बन्दे से अपनी जगह खाली करवाने के लिए, आपको एक सौ एक टका माथा फोड़ी करनी पड़ सकती है। ऐसे में हम और रेलवे एक ही बात कह सकते है, “आपकी यात्रा सुखद एवं मंगलमय हो!” 😊