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मध्य रेल के भुसावल मण्डल मे अंकाई – अंकाई किला स्टेशन के बीच दोहरीकरण कार्य हेतु 5 दिवसीय रेल ब्लॉक

Photo courtesy : indiarailinfo.com

अंकाई और अंकाई किला यह स्टेशन मनमाड – दौंड, मनमाड – औरंगाबाद इस मार्ग पर आते है। यह पाच दिवसीय रेल ब्लॉक मे इंजीनियरिंग, सिग्नल एण्ड टेलीकॉम और OHE विभाग संयुक्त स्वरूप मे कार्य करेंगे। रेल ब्लॉक के दरम्यान द म रेल एवं मध्य रेल की 8 गाडियाँ रद्द, 6 गाडियाँ नियंत्रित और 2 गाडियाँ आंशिक रद्द की जा रही है। आइए विस्तृत जानकारी लेते है:

रद्द गाड़िया:- (परिपत्रक की सभी तिथियाँ. JCO याने गाड़ी के प्रारम्भिक स्टेशन से चलने की तिथि रहेगी)

07777 नांदेड मनमाड डेमू विशेष दिनांक 10 से 13 फरवरी तक पूर्णतयः रद्द रहेगी।

07778 मनमाड नांदेड डेमू विशेष दिनांक 11 से 14 फरवरी तक पूर्णतयः रद्द रहेगी।

11409/10 पुणे निजामाबाद पुणे डेमू दिनांक 11 से 13 फरवरी तकदोनोंही दिशाओंसे पूर्णतयः रद्द रहेगी।

12071 मुम्बई छत्रपती शिवाजी महाराज टर्मिनस जालना जनशताब्दी दिनांक 12 से 13 फरवरी तक पूर्णतयः रद्द रहेगी।

12072 जालना मुम्बई छत्रपती शिवाजी महाराज टर्मिनस जनशताब्दी दिनांक 13 से 14 फरवरी तक पूर्णतयः रद्द रहेगी।

22147 दादर साई नगर शिर्डी दिनांक 11 फरवरी और 22148 साई नगर शिर्डी दादर दिनांक 12 फरवरी को नहीं चलेगी।

आंशिक रद्द गाडियाँ :-

17064 सिकंदराबाद मनमाड सिकंदराबाद एक्सप्रेस दिनांक 12 एवं 13 को सिकंदराबाद से औरंगाबाद तक ही चलेगी, औरंगाबाद से मनमाड के बीच रद्द रहेगी। उसी प्रकार वापसी मे 17063 मनमाड सिकंदराबाद एक्स्प्रेस दिनांक 13 एवं 14 फरवरी को मनमाड के बजाय औरंगाबाद से रवाना होगी।

नियंत्रित गाडियाँ :-

12779 वास्को निजामुद्दीन गोवा सुपरफास्ट दिनांक 12 एवं 13 फरवरी को सोलापूर मण्डल मे नियंत्रित की जाएगी।

16502 यशवंतपुर अहमदाबाद एक्सप्रेस दिनांक 12 फरवरी को सोलापूर मण्डल मे, मनमाड से पहले नियंत्रित की जाएगी।

17064 सिकंदराबाद मनमाड एक्स्प्रेस नांदेड मण्डल मे दिनांक 10 एवं 11 फरवरी को नियंत्रित की जाएगी।

18503 विशाखापट्टनम साई नगर शिर्डी एक्स्प्रेस दिनांक 10 फरवरी को नियंत्रित की जाएगी।

17002 सिकंदराबाद साई नगर शिर्डी एक्स्प्रेस दिनांक 13 फरवरी को नियंत्रित की जाएगी।

17206 काकीनाड़ा पोर्ट साई नगर शिर्डी एक्स्प्रेस दिनांक 12 फरवरी को नियंत्रित की जाएगी।

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पुणे लोणन्द फलटण लोणन्द पुणे डेमू पुनर्स्थापित की जा रही है।

01535/36 पुणे फलटण पुणे और 01537/38 लोणन्द फलटण लोणन्द डेमू गाड़ियाँ सप्ताह में छह दिन, प्रत्येक रविवार के सिवाय दिनांक 10 फरवरी से चलाई जाएगी।

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नया टर्मिनल, नयी रेलगाड़ी

कोटा स्टेशन के समीप नया टर्मिनल स्टेशन ‘सोगरिया’ बनाया गया है जिसका हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिर्ला और रेल राज्य मन्त्री दर्शना जरदोष ने उद्घाटन किया था। अब दिनांक 14 फरवरी को यहांसे दिल्ली के लिए प्रतिदिन इंटरसिटी गाड़ी की शुरुआत होने जा रही है। फिलहाल यह उद्धाटन विशेष गाड़ी की संक्षिप्त समयसारणी की सूचना है। विस्तृत समयसारणी भी आपके लिए जरूर ले आएंगे।

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लीजिए, एक और रेल रोड के सर्वे की घोषणा

निम्नलिखित पत्र, रेलवे बोर्ड से महाव्यवस्थापक मध्य रेल और पूर्वतटीय रेलवे के नामे आया है। पत्र में पूर्वतटीय रेलवे के बोलनगीर से नौपाडा पाटनागढ़ होकर 100 किलोमीटर के नए रेल मार्ग के सर्वे की बात की गई है और मध्य रेलवे में जालना से जलगाँव 174 किलोमीटर के भी सर्वे की बात लिखी है।

औरंगाबाद – भुसावल, औरंगाबाद – खामगांव अब जालना – जलगाँव कहते है न, ‘दिल बहलाने के लिए, खयाल अच्छा है ग़ालिब‘ चलिए हम तो आम खाने के शौकीन है, पेड़ काहे गिनेंगे? अच्छा है, जालना – जलगाँव भी महत्वपूर्ण जोड़ मार्ग रहेगा रेलवे का।

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रेल बजट मे क्षेत्रीय रेल्वे की पिंक बुक के कुछ मर्म

हमारे देश मे रेल प्रेमियों की कोई कमी नहीं है और ऐसे बहुत कम ही लोग होंगे जिन्होंने रेल ही ना देखी हो या उसमे कभी यात्रा ही न की हो। लेकिन रेल प्रेमियों की बात ही कुछ निराली होती है। यह लोग अपने क्षेत्र के लिए दिन रात लगे रहते है। फिर वह गाडियाँ चलवाने की बात हो या ठहराव दिलवाने की। वॉट्स ऐप पर ग्रुप बने रहते है। ट्विटर खोलिए, लगभग हर क्षेत्रीय, हर मण्डल के यूजर आइडी आप को मिल सकते है। यही लोग होते है जो क्षेत्र के यात्रीओं के लिए रेल्वे के अधिकारियों से बहस करते रहते है। सांसदों और क्षेत्र के अन्य राजनीतिक संबंधों से रेल्वे की यात्री सुविधाएं अपडेट कराते रहते है और विशेषता यह है की यह सारे काम वह अपने व्यक्तिगत पसंद से और जुनून के साथ करते है। जब भी हम ऐसे ग्रुप्स के ट्वीट देखते है, तो उनके कार्य और जुनून को सलाम करने की इच्छा होती है।

आज हम यह पोस्ट उनके लिए ही लाए है। पिंकबुक देखते वक्त उसकी कई सारी मदें इतनी पेचीदा होती है की उनसे इन ग्रुप्स मे आपस मे ही विवाद खड़े हो जाते है। रेल बजट मे किसको क्या मिला इस पर चर्चा करते वक्त एक पॉइंट सब के जहन मे अक्सर आता है, वह है पूँजी की जगह रुपये 1000/- का आबंटन। प्रोजेक्ट की कीमत हजारों करोड़ की है और निधि आबंटन मे सिर्फ रु1000/- क्यों? समझने की बात यह है की जो निधि उस प्रोजेक्ट को दिया जाना है वह हो सकता है EBR IF या EBR P से आना हो? अब EBR IF या EBR P यह क्या बला है? EBR याने एक्स्ट्रा बजेटरी रिसीट्स, IF याने इंस्टीट्यूशनल फाइनांस और P याने प्राइवेट। अब जब किसी परोजकत को EBR IF या EBR P का निधि मिलने वाला हो तो उस प्रोजेक्ट को रेल्वे की बुक्स मे हाजिर रखे जाने के लिए रु 1000/- का प्रावधान दिया जाता है और मुख्य निधि की व्यवस्था की जा रही होती है।

दूसरा जो निधि के आँकड़े होते है उनमे भी कई लोग उलझ जाते है। सहज गणित है, जो आंकड़ा दिखाई दे रहा है उसे 1000 से गुना कर लीजिए तो कितना निधि मिला है यह समझ जाएगा। जो बुक की सबसे छोटी इकाई है वही दी गई होती है। आपने देखा होगा, “आँकड़े हजार रुपए मे” यह उसका कारण है। एक विवाद यह भी है S FUND याने क्या? S FUND याने SINKING FUND, यह राखीव निधि होता है जो रेल विभाग की असेट, मालमत्ता को सुरक्षित करने हेतु निकाल गया अतिरिक्त निधि है। यह निधि सरकारी बॉंडस के रूप मे हो सकता है। कोई इसे सेफ़्टी फंड कहता है, ठीक है मगर निधि है यह महत्वपूर्ण बात है। DRF याने घसारा आरक्षित निधि और DF याने डेवलपमेंट फंड SRSF याने स्पेशल रेल्वे सेफ़्टी फंड ऐसे ही RRSK राष्ट्रीय रेल संरक्षण कोश कुल मिला कर अलग अलग मद मे निधि उपलब्ध कराया जाता है।

आम यात्री बहुतांश उसे कितनी गाडियाँ नई मिलनेवाली है यह जानने के लिए ज्यादा उत्सुक रहता है, वही स्थिति रेल फैन ग्रुप्स की भी होती है। पहले 75 वन्दे भारत गाड़ियों की घोषणा हुई थी और अब बजट मे 400 की। यात्रीओं के मन मे सबसे पहला सवाल यही की हमारे क्षेत्र से कितनी वन्दे भारत चलेंगी? भैय्या वन्दे भारत की संहिता समझिए, यह ज्यादातर शताब्दी की जो संहिता है की किसी दो प्रमुख स्टेशनों के बीच जहाँ सीधे चलने की मांग है वहीं चलाई जाती है। सीधे चलना अर्थात कम ठहराव और कम समय मे दो शहरों को जोड़ना। बताइए कौन से स्टेशनों को, क्षेत्रों को वन्दे भारत की ज्यादा जरूरत है? तेज गतिसे गाडियाँ चलाने की कवायद शुरू हो गई है, 110 – 120 – 130 और अब 160 kmph की गति प्राप्त करने का विश्वास है, मगर प्लेटफ़ॉर्म यह बुनियादी सुविधा, इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है? आज भी बहुतांश जंक्शनों पर गाडियाँ, स्टेशनों के प्लेटफ़ॉर्म खाली नहीं होने की वजह से आउटर सिग्नलों पर खड़ी रहती है। यात्री गाडियाँ प्लेटफ़ॉर्म के बाहर खड़ी रहना यह असामाजिक तत्वों को सीधा सीधा बुलावा है। आज भी यात्री गाड़ियों मे अवैध विक्रेता की कोई न कोई खबर सोशल मीडिया मे आती ही रहती है। यह लोग प्लेटफ़ॉर्म के बाहर से ही आवागमन करते रहते है। मुख्य कारण यह भी है जब तक यात्री इनसे सामान खरीदना नहीं छोड़ेंगे यह हर वह छुपे तरीकों से रेलों मे अवैध विक्री करने का प्रयत्न करते रहेंगे।

खैर, यह सब हमारी अपनी बातें है, आशा करते है आप को अच्छी लगी होगी।