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पश्चिम रेल्वे WR को रेल बजट से मिले 9149 करोड़

आम बजट मे एकमुश्त रकम रेल विभाग को दी जाती है और पिंक बुक के प्रकाशित किए जाने के बाद ही प्रत्येक क्षेत्रीय रेल विभाग को कितना आबंटन हुवा है यह पता चलता है। पश्चिम रेल्वे को कुल 9148.76 करोड़ रुपए का आबंटन हुवा है, जिसमे पूंजी निधि 6053.69 करोड़, घसारा आरक्षित निधि DRF 135.1 करोड़, डेवलपमेंट फंड DF 142 करोड़, सिंकींग फंड या सुरक्षा निधि SF 1748 करोड़, RRSK मे 1069.47 करोड़ ऐसे कुल 9148.76 करोड़ का निधि मिला है। हम कुल आबंटन के मुख्य मद देख रहे है।

नई लाइनें :-

इंदौर दाहोद वाया झाबुआ, धार 200 किलोमीटर के लिए 265 करोड़, छोटा उदेपुर – धार 157 किलोमीटर 100 करोड़, नीमच – बड़ी सादडी 48 किलोमीटर 50 करोड़ ऐसी 415 करोड़ की पूँजी दी गई है। वहीं मुम्बई – अहमदाबाद HSR हाई स्पीड रेल के लिए 5000 करोड़ का प्रावधान EBR(S) एक्स्ट्रा बजेटरी रिसीट्स स्पेशल के तहत किया गया है।

आमान परिवर्तन (गेज कनवर्जन) :-

रतलाम – महू – खंडवा – अकोला 472 किलोमीटर के लिए 456 करोड़ कैपिटल निधि और 432 करोड़ सिंकींग फंड SF से कुल 888 करोड़ का निधि मिला है। भीलड़ी – वीरमगाम 157 किलोमीटर को 5 करोड़, अहमदाबाद – हिम्मतनगर – उदयपुर को EBR(IF) एक्स्ट्रा बजेटरी रिसीट्स इंस्टीट्यूशनल फाइनांस के जरिए 268 करोड़, भुज – नालिया 101 किलोमीटर 4 करोड़, मियागाम करजन – दभोई – समलाया 96 किलोमीटर 150 करोड़, अहमदाबाद – बोटाड 170 किलोमीटर कुल 56 करोड़, दभोई – चांदोद – केवड़िया 49 किलोमीटर कुल 100 करोड़ यह बड़े आबंटन है। इसके बाद प्रत्येक खंड को 1 हजार रुपए का प्रावधान कर उन्हे पिंक बुक मे स्थायी किया गया है, वह है राजकोट – वेरावल – वानसजालिया – जेतलसर, वेरावल – सोमनाथ, सोमनाथ – कोडिनार, धासा – जेतलसर, कलोल – कटोसन, अद्रज मोती – विजापुर, विजापुर – अंबलियासन, खिजड़िया- विसावदार, जूनागढ़ – विसावदार, वेरावल – तलाला, सामनी – जंबुसर, जंबुसर – विश्वामित्री, सामलिया – टिम्बा रोड, नडियाड – पेतलाद, पेतलाद – भद्रान, तलाला – देलवाड़ा, प्राची रोड – कोडिनार, हिम्मतनगर – खेडब्रम्हा

रेल दोहरीकरण :-

उधना – जलगाँव 70 करोड़, वीरमगाम – सामाखियाली 182 किलोमीटर को 75 करोड़, वटवा – अहमदाबाद को 1.5 करोड़, पालनपुर – सामाखियाली को डिपॉजिट फंड से 400 करोड़, सुरेन्द्रनगर – राजकोट को कुल 250 करोड़, नीमच – चित्तौड़ गढ़ को 100 करोड़, वटवा – अहमदाबाद – साबरमती चौथी लाइन को 73 करोड़, असलोदा – गंभीर पुल को 1 करोड़, इन्दौर – देवास – उज्जैन को कुल 200 करोड़, आनन्द – गोधरा 100 करोड़, नीमच – रतलाम को 50 करोड़, मेहसाना – पालनपुर को 72 करोड़, राजकोट – कानालूस को 150 करोड़, सूरत – कोसांबा को 1 हजार, अकोदिया – मुहम्मद खेड़ा – शुजालपुर को 1 हजार, भीलड़ी बाइपास को 1 हजार, वीरमगाम – सुरेन्द्रनगर को 10 लाख इसके अलावा उज्जैन फ्लाई ओवर को 10 करोड़ निधि का आबंटन किया गया है।

यातायात सुविधा बढ़ाने हेतु :- रतलाम यार्ड हेतु 1 करोड़, साबरमती टर्मिनल हेतु 10 लाख, बोरडी – दाहोद – धमराडा सिग्नलिंग हेतु 39 लाख, तराना रोड – ताजपुर सिग्नलिंग हेतु 15 लाख, वडोदरा – अहमदाबाद – गोधरा यार्ड हेतु 4.12 करोड़, वसई रोड क्रॉस ओवर के लिए 1.5 करोड़, साबरमती स्टेशन पर सवारी गाड़ियोंके टर्मिनल हेतु 4.78 करोड़। इसके अलावा विशेष देखा जाए तो नई दिल्ली – मुम्बई रेल मार्ग को स्पीड अप कर 160 किलोमीटर प्रति घण्टे के योग्य बनाने हेतु EBR(IF) एक्स्ट्रा बजेटरी रिसीट्स इंस्टीट्यूशनल फाइनांस के जरिए 450 करोड़, डाइमंड क्रॉस ओवर सुधार हेतु 3.5 करोड़, सिग्नलिंग अपग्रेडेशन हेतु कुल 90.5 करोड़ और अंबरेला वर्क घोषित किए प्रोजेक्ट्स के लिए 1.4 करोड़ रुपयों का आबंटन किया गया है।

और अन्य मदों के लिए आप पश्चिम रेल्वेज की पिंक बुक डाउन लोड कर विस्तृत जानकारी ले सकते है।

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रेल बजट मे मध्य रेल CR को मिले 7251 करोड़, पिछले बजट से 50% ज्यादा

मध्य रेल्वे के रेल बजट पिंक बुक मे कुल पूंजी का आबंटन 7660 करोड़ एवं EBR और इतर मदें मिलाई जाए तो कुल योग 10274 करोड़ बंता है इसमेसे पुरानी जमा/देनदारिया घट/योग कर के 7251 करोड़ की पूंजी का आबंटन दिखाई देता है।

नई रेलवे लाइनों के लिए कुल 1455 करोड़ रुपये : जिसमे बजट प्रावधान 809 करोड़ एवं डिपॉजिट मद मे 646 करोड़ रुपए है।

अमरावती – नरखेड़ 3 करोड़, कल्याण – मुरबाड उल्हासनगर होकर, नए मार्ग के लिए के लिए 5 करोड़ रुपये। इसके अलावा अहमदनगर – बीड – परली वैजनाथ के 250 किलोमीटर मार्ग के लिए 567 करोड़ रुपये, वर्धा – नांदेड़ यवतमाल पुसद होकर 820 करोड़ रुपये, सोलापुर – उस्मानाबाद तुलजापुर होकर 84 किलोमीटर के मार्ग हेतु 10 करोड़ रुपये और धुले – नरडाणा के लिए 50 करोड़ रुपये प्रस्तावित रेलवे लाइन के लिए दिए गए है ।

दोहरीकरण/तीसरी लाइन/चौथी लाइन- 3627 करोड़ रुपये प्रस्तावित दोहरीकरण के खाते मे गए है। जिसमे बजट प्रावधान 1535 करोड़ एवं EBR मद मे 2092 करोड़ रुपए है। इसमे से तीसरी व चौथी लाइन के लिए; कल्याण – कसारा तीसरी लाइन – 160 करोड़ रुपये, वर्धा – नागपुर के लिए – 87 करोड़ रुपये, वर्धा – बल्हारशाह तीसरी लाइन के लिए 305 करोड़ रुपये, वर्धा – नागपूर चौथी लाइन के लिए 130 करोड़ रुपये, इटारसी – नागपुर तीसरी लाइन के लिए 610 करोड़ रुपये, पुणे – मिरज – – लोंडा दोहरीकरण के लिए 1566 करोड़ रुपये, दौंड – मनमाड दोहरीकरण के लिए 500 करोड़ रुपये, मनमाड – जलगांव तीसरी लाइन के लिए 205 करोड़ रुपये और जलगांव – भुसावल चौथी लाइन के लिए 55 करोड़ रुपये, गोधनी – नागपूर – कलमना कॉर्ड के लिए ढाई करोड़, तीनगाव – चिचोंडा 3री लाइन के लिए 5 करोड़, भुसावल – वर्धा 3 री लाइन के लिए 1 करोड़ आबंटित किए गए है।

इसके अलावा यातायात सुविधाओं, यार्ड री-मॉडलिंग और अन्य कार्यों के लिए भी मध्य रेल्वे को 100 करोड़ रुपये मिले है। जिसमें पनवेल – कलम्बोली कोचिंग टर्मिनस के लिए 20 करोड़ रुपये, लोकमान्य तिलक टर्मिनस के लिए कोचिंग सुविधाओं के लिए 20 करोड़ रुपये, मुम्बई छत्रपती शिवाजी टर्मिनस के विस्तार के लिए 20 करोड़ रुपये शामिल हैं जिससे प्लेटफॉर्म क्रमांक 10, 11, 12, 13 का 24 कोचों के लिए विस्तार किया जाएगा। पुणे के नए हडपसर स्टेशन को सैटेलाइट टर्मिनल के रूप में विकसित करने के लिए 41 करोड़ रुपये, नागपूर के अजनी स्टेशन को सैटेलाइट टर्मिनल के रूप में विकसित करने के लिए 15 करोड़ रुपये और पुणे स्टेशन के प्लेटफॉर्म का 24 से 26 कोच की गाड़ी के लिए विस्तार के लिए 31 करोड़ रुपये दिए गए है। कसारा यार्ड के 1 करोड़, कर्जत यार्ड के 4 करोड़, वसई – दीवा के लिए 1 करोड़, गाएगाव यार्ड के लिए 2.5 करोड़, वर्धा – चितोड़ा के लिए 1 करोड़, इटारसी – नागपूर – भुसावल लॉंग लूप के लिए 5 करोड़, बड़नेरा की गाड़िया सीधी निकल सकें इसके लिए भुसावल मे आई लैंड प्लेटफ़ॉर्म निर्माण हेतु 15 करोड़, सवारी गाड़ियोंके उचित टर्मिनलों के निर्माण हेतु 50 करोड़ आबंटित किए गए है।

ROB RUB और यात्री सुविधाएं निर्माण हेतु: विक्रोली रोड ओवर ब्रिज ROB के लिए 6 करोड़ और दिवा रोड ओवर ब्रिज के लिए 4 करोड़ रुपये आबंटित किए गए हैं। इसके अलावा पुलगांव रोड ओवर ब्रिज के लिए 5.5 करोड़ रुपये इसी तरह, मुंबई उपनगरीय सहित मध्य रेल्वे के विभिन्न स्टेशनों के प्लेटफार्मों पर 115 एस्केलेटर के लिए भी 24 करोड़ रुपये आबंटित किए गए। इस बजट में बडनेरा वैगन मरम्मत कार्यशाला के लिए 30 करोड़ रुपये और रत्नागिरी रोलिंग स्टॉक यूनिट के लिए 30 करोड़ रुपये आबंटित किए गए हैं। विभिन्न स्टेशनों पर बुनियादी सुधार के लिए 13.5 करोड़ रुपये और पैदल ऊपरी पुल के लिए 60.67 करोड़ रुपये भी इस बजट में आबंटित किए गए हैं। पैदल ऊपरी पुल FOB के अलावा स्टेशनों पर 143 लिफ्टों के लिए 34.18 करोड़ रुपये और स्टेशनों के पास सुरक्षा दीवारों के निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये इस बजट में आबंटित किए गए हैं। रैक नवीनीकरण कार्य के लिए 1048 करोड़ रुपये और पुल कार्यों और सुरंग कार्यों की मरम्मत के लिए 90 करोड़ रुपये और सिग्नलिंग और दूरसंचार कार्यों के लिए 216 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

मुम्बई को इस बजट में 575 करोड़ आबंटित किए गए है, जो की वर्ष 21-22 के बजट निधि 650 करोड़ से 75 करोड़ कम ही है। मुम्बई रेल विकास निगम MVRC को यह फंड विविध कामों के लिए दिया जा रहा है। नए पनवेल – कलम्बोली कोचिंग टर्मिनस के लिए 20 करोड़ रुपये, लोकमान्य तिलक टर्मिनस के कोचिंग सुविधाओं के विस्तार के लिए 20 करोड़ रुपये, मुम्बई छत्रपती शिवाजी महाराज टर्मिनस पर 24 कोचों के लिए प्लेटफॉर्म क्रमांक 10, 11, 12 और 13 के विस्तार हेतु 20 करोड़ रुपये आबंटित किए गए है।

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नान्देड मुम्बई नान्देड राज्यराणी एक्सप्रेस 4,5 फरवरी को रद्द की गई थी अब नासिक तक चलेगी।

मध्य रेलवे ने प्रेस नोट जारी किया है;

मध्य रेलवे का मुंबई मंडल 5वीं और 6वीं लाइन के लिए ठाणे – दिवा के बीच में 72:00 घंटे का विशेष यातायात और पावर ब्लॉक संचालित किया जा रहा है।

ब्लॉक दिनांक 05.02.2022 (शनिवार) से 00.00 से अर्थात दिनांक 04 की रात 12 बजेसे दिनांक 07.02.2022 के 24.00 घंटे तक अवधि कुल घंटे 72.00 घंटे का है। इस ब्लॉक की सूचनाएं प्रकाशित हो चुकी है।

1)ट्रेन क्रमांक 17611 नांदेड़ – मुंबई राज्यरानी एक्सप्रेस (JCO नांदेड़ ) 04.02.2022 (शुक्रवार) और 05.02.2022 (शनिवार) पहले रद्द कर दिया गया था अब इसे नासिक में शॉर्ट टर्मिनेट किया जाएगा। अर्थात यह गाड़ी नान्देड से चलकर नासिक तक ही जाएगी और नासिक से आगे नही जाएगी। नासिक मुम्बई के बीच रद्द रहेगी।

2) ट्रेन क्रमांक 17612 मुंबई – नांदेड़ राज्यरानी एक्सप्रेस (JCO मुंबई) 05.02.2022 (शनिवार) और 06.02.2022 (रविवार) पहले रद्द कर दिया गया था अब इसे नासिक से नांदेड़ के लिए चलाया जाएगा।

17611/12 की समयसारणी में नान्देड से नासिक और नासिक से नान्देड के बीच कोई बदलाव नही रहेगा।

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NWR उ प रेल का परिपत्रक है, भगत की कोठी तक चलनेवाली साबरमती गाड़ियोंका जोधपुर तक विस्तार। साथ ही सैटेलाइट टर्मिनलोंपर एक विचार

यह बहुत अच्छा निर्णय है, हम आशा करते है पश्चिम रेलवे भी इसी अंदाज में इन गाड़ियोंको अहमदाबाद तक ले जाए तो बेहतर होगा।

यह जो सैटेलाइट टर्मिनल्स का प्रचलन रेल विभाग में हो रखा है, इसका स्थायी उपाय करना बहुत ही जरूरी है। जब मुख जंक्शन पर गाड़ी को टर्मिनेट करने में कोई परेशानी है तो क्यों न उस स्टेशन के दोनों ओर टर्मिनेट कर दे? इस विषय पर हम पहले भी विस्तृत चर्चा कर चुके है और फिर से कह रहे है, चूँकि जंक्शन स्टेशन पर चारों दिशाओंकी गाड़ियाँ, उनमें से उतरे यात्री रहते है जिनको आगे की गाड़ियाँ पकड़नी होती है। यदि कोई यात्री मुम्बई की ओर से अहमदाबाद पहुंचता है और आगे जालोर के लिए ट्रेन पकड़ना चाहता है तो उसे अहमदाबाद की जगह साबरमती जाना पड़ेगा।

अहमदाबाद – साबरमती के बीच कोई उपनगरीय सेवाएं तो आप चला नही रहे, फिर वह यात्री साबरमती कैसे जाए? रोड से बस या ऑटो कर के? इसमें बहुत समय और सामान ढोने की दिक्कतें आती है। बुजुर्ग यात्री इसके चलते अपनी यात्रा बस से करना पसंद कर लेते है, ना ही प्लेटफार्म और टर्मिनल्स बदलने की झंझट और न ही गाड़ियाँ समझने और ढूंढने की परेशानी।

रेल विभाग को चाहिए की जब भी सैटेलाइट टर्मिनल बनाने की योजना तैयार करते है तो जंक्शन से किस तरह लिंक करता है यह अवश्य ध्यान में ले अन्यथा वह सैटेलाइट टर्मिनल किसी टापु की तरह बन जाएगा। अब मध्य रेलवे में पुणे के पास हड़पसर और नागपुर के पास अजनी रेल टर्मिनस विकसित किए जाने की बात की गई है। यह ठीक वही परेशानी खड़ी करनेवाली व्यवस्था है। हड़पसर से पुणे के लिए कितनी उपनगरीय गाड़ियोंकी व्यवस्था है, तो बमुश्किल दिनभर में 4 गाड़ियाँ और वह कतई पर्याप्त नही वैसे ही अजनी से नागपुर के बीच तो रेलवे की ओरसे कोई व्यवस्था ही नही है।

ऐसे में रेल विभाग नागपुर के लिए अजनी और इतवारी दोनो स्टेशनोंको नागपुर स्टेशन को सम्मिलित कर गाड़ियोंको टर्मिनेट करें तो बेहतर होगा। उसी तरह हड़पसर – पुणे – शिवाजीनगर / खड़की / चिंचवड़ इस तरह टर्मिनल विकसित करें तो उपयोगी होगा। जोधपुर के एक ओर भगत की कोठी टर्मिनल है तो दूसरी ओर भी एक टर्मिनल होना आवश्यक है। इसी तर्ज पर प्रत्येक मुख्य जंक्शन पर जहाँ जहाँ लम्बी दूरी की गाड़ियाँ टर्मिनेट की जाती है, वहाँ पर दोनों दिशाओंमें टर्मिनल विकसित करें, और यह बहुत आसानी से हो सकता है, रेल विभाग के लिए सुविधाजनक भी है।

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ये है 🧐🤔 ? क्या यही है, डेक्कन क्वीन?

जी हाँ!! यही है, आपकी “डेक्कन क्वीन”

साहेबान, कदरदान!! देख लीजिए डेक्कन क्वीन की नई लाइवरी, पोशाख़। चेन्नई के इंटेग्रल कोच फैक्ट्री ICF से इन तस्विरोंको लिया गया है। मुम्बई पुणे के बीच चलनेवाली बहु-प्रतिष्ठित डेक्कन क्वीन के LHB के नए रैक को सजाया (?) जा रहा है और जल्द ही सेवा में जारी कर दिया जाएगा।

यूँ तो तमाम रेल फैन इस विचित्रसी दिखाई देनेवाले संस्करण से बेहद खफ़ा है और इसके चितरंगी, अतरंगी वेशभूषा पर फब्तियां भी कसते जा रहे है। कोई इसे ‘ढक्कन क्वीन’ कह रहा है तो कोई ‘ढाका क्वीन’ कोई इसका नाम हरे रैपर वाले साबुन ‘मेडिमिक्स’ एक्सप्रेस ऐसा रखने का प्रस्ताव दे रहा है। हमे लगता है, जब यह रैक यात्री सेवा में आ जाएगा तब तो शायद इसके नामकरण की स्पर्धाएं न शुरू हो जाए, वैसे भी महाराष्ट्रमें, मराठी परम्परा है, जब नई बहू आती है तो उसका प्रचलित नाम बदल पुनरनामकरण किया जाता है।

वाकई ऐसे गहरे हरे लाल रंग और विचित्र शैली के परिधान करा कर डेक्कन क्वीन की डरावनी क्वीन कर दी है इन रेलवे अधिकारियों ने। आगे आपको क्या लगता है, आप हमें जरूर बताए।

Photo courtesy : @SardarParamveer

A WANDER & CAPTURE INDIAN RAILWAYS.