यह तस्वीर आज दि. 21/2/2022 के मराठी दैनिक ‘दिव्य मराठी’ जलगाँव दिव्य सिटी आवृत्ति से साभार प्रस्तुत की गई है।
संक्रमणकाल के निर्बंध अब महाराष्ट्र में लगभग न के बराबर है। स्कुल, कॉलेज खुल गए है, शैक्षिक संस्थानों की गतिविधियाँ बढ़ गयी है। शादी, ब्याह और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में उपस्थितियों पर भी अब अच्छी ढील मिल रही है। कल-कारखाने, व्यापार प्रतिष्ठान, उपज मंडियों में भी व्यवसाय निमित्त गतिविधियाँ बढ़ गयी है। ऐसे में इनसे सम्बन्धित तमाम लोग अपने घरोंसे निकल बाजारोंमें, व्यापार और सामाज में जाने-आने लगे है। बच्चे, युवा अपनी शिक्षा सम्बन्धी उधेड़बुन में लग गए है, क्लासेस में हाजिरी लगाने लग गए है और रेल प्रशासन है, की अब भी अपने निर्बंध खोलने को तैयार ही नही है, ना ही स्थानीय यात्रिओंके हितोंकी गाड़ियाँ चलवा रहा है, न ही द्वितीय श्रेणी सामान्य टिकटें उपलब्ध करवा रहा है।
इस दैनिक अखबार में छपी तस्वीर को आप प्रातिनिधिक स्वरूप में देखिए। मध्य रेल के प्रत्येक प्रमुख रेल मार्ग पर चलनेवाली हरेक गाड़ी के द्वितीय श्रेणी सामान्य डिब्बे की यह तस्वीर है। मध्य रेल प्रशासन ने अब तक मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंमे द्वितीय श्रेणी सामान्य श्रेणी आम यात्रिओंके के लिए खोली नही है। केवल एक-एक मेमू गाड़ी में यह व्यवस्था उपलब्ध है, जो हजारों सख्या के यात्रिओंके लिए समुचित नही है। द्वितीय श्रेणी के टिकट लेकर या प्रतिक्षासूची के टिकट लेकर या कभी कभी बिना टिकट यात्री रेल प्रशासन द्वारा आरक्षित द्वितीय श्रेणी 2S में मजबूरी में यात्रा करते पाए जाते है।
कहने को यह व्यवस्था आरक्षित है मगर कभी भी इन कोचेस में टिकट जांच निरीक्षक तैनात नही किये जाते। यहाँतक की स्लिपर क्लास के 8-10 कोचेस में भी आधे कोचेस की यही अवस्था रहती है। जब बिनाटिकट सामान्य यात्री रेलवे के गाड़ियोंमे क्या प्लेटफार्म और आहाते तक मन्जूर नही और अनाधिकृत समझा जाता है तो रेलगाड़ियोंमें इस तरह की भीड़ होना क्या रेल अधिकारियों को सम्मत है? रेल अधिकारी, टिकट जांच दल, सुरक्षा दल आँख मुन्द लेते है? ऐसी अनियंत्रित भीड़ प्रत्येक गाड़ियोंमे चली जा रही है तो क्या रेल अधिकारियों का कर्तव्य नही बनता की अपने उच्च स्तरीय अधिकारियों से स्थानीय यात्रिओंकी व्यवस्था बढवाने की माँग करें?
प्रश्न बहुतसे है, उनके समाधान भी सामने ही है मगर न ही रेल प्रशासन सक्रियता से उसे सुलझाने का प्रयत्न कर रही है और न ही स्थानीय प्रतिनिधि उसपर विशेष ध्यान दे रहे है। ऐसे में यह प्रतीत होता है, खानापूर्ति के लिए दिनभर में एखाद कार्रवाई की जाती रही है। क्योंकि एक-एक रेल गाड़ी की जाँच करने के लिए न ही रेलवे के पास समय है और न ही इतने संख्याबल में जांच कर्मी। ट्विटर पर शिकायत करें तो मण्डल अधिकारी का जवाब मिलता है,( भला हो तत्कालीन रेल मन्त्री सुरेश प्रभु का) ‘जाँच के लिए सम्बंधित अधिकारी को सौंपा गया है।’ मगर जाँच के बाद कार्रवाई क्या हुई यह आज तक न किसीने बताया है न ही किसीने समझा है।
कुल मिलाकर सारी व्यवस्था ‘अंधा पिसे, कुत्ता खावें’ वाली हो कर रह गयी है। रेलगाड़ियोंमे हजारों अधिकृत आरक्षित यात्रिओंके साथ-साथ सैकड़ों अनाधिकृत बिनाटिकट यात्री भी यात्रा कर ही रहे है, अनाधिकृत विक्रेता अब सरे-आम आरक्षित स्लिपर कोचेस के साथ वातानुकूलित कोचेस में भी अपने विक्री व्यवसाय करते नजर आ रहे है।
कल हमने उत्तर रेल्वे के 4 गाड़ियोंके बदलाव प्रस्तुत किए थे, आज NFR पूर्वोत्तर सीमान्त रेल के बदलाव लीजिए,
NFR रेल्वे मे कटिहार मण्डल मे 31 ‘डाउन’ गाडियाँ जो किशनगंज से कटिहार की ओर आएगी और 27 गाड़िया ‘अप’ जो कटिहार से किशनगंज, सिलीगुड़ी जंक्शन की ओर जाएगी, उनके PTT अर्थात यात्री समयसारणी मे बदलाव किए गए है। यह बदलाव गाड़ियोंके उत्तम समय अनुपालन हेतु किए जा रहे है।
निम्नलिखित 6 जोड़ी गाड़ियाँ, यात्री संख्या अभाव के चलते दिनांक 19 फरवरी से 31 मार्च 2022 तक अस्थायी रूप से रद्द की जा रही है।
UPSK उत्तरप्रदेश सम्पर्क क्रान्ति प्रतिदिन एक्सप्रेस दिनांक 25 फरवरी से मानिकपुर से बदले हुए समयसारणी से चलाई जाएगी। अभी फ़िलहाल की जो समयसारणी है उस में यात्रिओंकी माँग पर और उपयुक्त बदलाव किए जा रहे है। यह गाड़ी अब 17:05 के स्थान पर 18:25 को मानिकपुर से रवाना होगी और अलसुबह 3:50 के बजाय सुबह 5:22 को हज़रत निजामुद्दीन को पहुचेंगी।
यात्रीगण से निवेदन है निम्नलिखित समयसारणी में पहले दो कॉलम में existing wtt और existing ptt यह समय दिए गए है जो रेल परिचालनिक उपयोग हेतु है। तीसरे कॉलम में revised wtt यह भी रेल परिचालन विभाग के लिए ही है। आखरी चौथे कॉलम की revised ptt यह समयसारणी आम यात्रिओंके लिए है। दिनांक 25 फरवरी, मानिकपुर से चलने के बदले हुए समय यह रहेंगे।
चूँकि 12447 मानिकपुर निजामुद्दीन उत्तरप्रदेश संपर्क क्रांति के समय मे बदलावोंके चलते 12917 अहमदाबाद निजामुद्दीन गुजरात सम्पर्क क्रांति साप्ताहिक एक्सप्रेस, 20945 एकतानगर (केवडिया) निजामुद्दीन द्विसाप्ताहिक एक्सप्रेस और 12217 कोचुवेळी चंडीगढ़ द्विसाप्ताहिक एक्सप्रेस के हज़रत निजामुद्दीन स्टेशन के आवागमन समय मे मामुली सा बदलाव होने जा रहा है। यात्रीगण कृपया इस बात की भी जानकारी रखे।
महाराष्ट्र के राज्यपाल श्रीमान भगत सिंह कोशियारी जी, मुख्यमंत्री श्रीमान उद्धव ठाकरे जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी अश्विनी वैष्णव जी, रावसाहब दानवे जी, महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजीत पवार जी, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस जी, सांसद और विधायकगण, भाइयों और बहनों !
कल छत्रपति शिवाजी महाराज की जन्मजयंती है। सबसे पहले मैं भारत के गौरव, भारत की पहचान और संस्कृति के रक्षक देश के महान महानायक के चरणों में आदरपूर्वक प्रणाम करता हूँ। शिवाजी महाराज की जयंती के एक दिन पहले ठाणे-दिवा के बीच नई बनी पांचवीं और छठी रेल लाइन के शुभारंभ पर हर मुंबईकर को बहुत-बहुत बधाई।
ये नई रेल लाइन, मुंबई वासियों के जीवन में एक बड़ा बदलाव लाएंगी, उनकी Ease of Living बढ़ाएगी। ये नई रेल लाइन, मुंबई की कभी ना थमने वाली जिंदगी को और अधिक रफ्तार देगी। इन दोनों लाइंस के शुरू होने से मुंबई के लोगों को सीधे-सीधे चार फायदे होंगे।
पहला- अब लोकल और एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए अलग-अलग लाइनें हो जाएंगी।
दूसरा- दूसरे राज्यों से मुंबई आने-जाने वाली ट्रेनों को अब लोकल ट्रेनों की पासिंग का इंतजार नही करना पड़ेगा।
तीसरा- कल्याण से कुर्ला सेक्शन में मेल/एक्सप्रेस गाड़ियां अब बिना किसी अवरोध के चलाई जा सकेंगी।
और चौथा- हर रविवार को होने वाले ब्लॉक के कारण कलावा और मुंब्रा के साथियों की परेशानी भी अब दूर हो गई है।
साथियों,
आज से सेंट्रल रेलवे लाइन पर 36 नई लोकल चलने जा रही हैं। इनमें से भी अधिकतर AC ट्रेनें हैं। ये लोकल की सुविधा को विस्तार देने, लोकल को आधुनिक बनाने के केंद्र सरकार के कमिटमेंट का हिस्सा है। बीते 7 साल में मुंबई में मेट्रो का भी विस्तार किया गया है। मुंबई से सटे सबअर्बन सेंटर्स में मेट्रो नेटवर्क को तेज़ी से फैलाया जा रहा है।
भाइयों और बहनों,
दशकों से मुंबई की सेवा कर रही लोकल का विस्तार करने, इसको आधुनिक बनाने की मांग बहुत पुरानी थी। 2008 में इस 5वीं और छठी लाइन का शिलान्यास हुआ था। इसको 2015 में पूरा होना था, लेकिन दुर्भाग्य ये है कि 2014 तक ये प्रोजेक्ट अलग-अलग कारणों से लटकता रहा। इसके बाद हमने इस पर तेज़ी से काम करना शुरु किया, समस्याओं को सुलझाया।
मुझे बताया गया है कि 34 स्थान तो ऐसे थे, जहां नई रेल लाइन को पुरानी रेल लाइन से जोड़ा जाना था। अनेक चुनौतियां के बावजूद हमारे श्रमिकों ने, हमारे इंजीनीर्यस ने, इस प्रोजेक्ट को पूरा किया। दर्जनों पुल बनाए, फ्लाईओवर बनाए, सुरंग तैयार कीं। राष्ट्रनिर्माण के लिए ऐसे कमिटमेंट को मैं हृदय से नमन भी करता हूं, अभिनंदन भी करता हूं।
भाइयों और बहनों,
मुंबई महानगर ने आज़ाद भारत की प्रगति में अपना अहम योगदान दिया है। अब प्रयास है कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भी मुंबई का सामर्थ्य कई गुणा बढ़े। इसलिए मुंबई में 21वीं सदी के इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर हमारा विशेष फोकस है। रेलवे कनेक्टिविटी की ही बात करें तो यहां हज़ारों करोड़ रुपए का निवेश किया जा रहा है। मुंबई sub-urban रेल प्रणाली को आधुनिक और श्रेष्ठ टेक्नॉलॉजी से लैस किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि अभी जो मुंबई sub-urban की क्षमता है उसमें करीब-करीब 400 किलोमीटर की अतिरिक्त वृद्धि की जाए। CBTC जैसी आधुनिक सिग्नल व्यवस्था के साथ-साथ 19 स्टेशनों के आधुनिकीकरण की भी योजना है।
भाइयों और बहनों,
मुंबई के भीतर ही नहीं, बल्कि देश के दूसरे राज्यों से मुंबई की रेल कनेक्टिविटी में भी स्पीड की ज़रूरत है, आधुनिकता की ज़रूरत है। इसलिए अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड रेल आज मुंबई की, देश की आवश्यकता है। ये मुंबई की क्षमता को, सपनों के शहर के रूप में मुंबई की पहचान को सशक्त करेगी। ये प्रोजेक्ट तेज़ गति से पूरा हो, ये हम सभी की प्राथमिकता है। इसी प्रकार वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भी मुंबई को नई ताकत देने वाला है।
साथियों,
हम सभी जानते हैं कि जितने लोग भारतीय रेलवे में एक दिन में सफर करते हैं, उतनी तो कई देशों की जनसंख्या भी नहीं है। भारतीय रेल को सुरक्षित, सुविधायुक्त और आधुनिक बनाना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। हमारी इस प्रतिबद्धता को कोरोना वैश्विक महामारी भी डिगा नहीं पाई है। बीते 2 सालों में रेलवे ने फ्रेट ट्रांसपोर्टेशन में नए रिकॉर्ड बनाए हैं। इसके साथ ही 8 हज़ार किलोमीटर रेल लाइनों का electrification भी किया गया है। करीब साढ़े 4 हज़ार किलोमीटर नई लाइन बनाने या उसके दोहरीकरण का काम भी हुआ है। कोरोना काल में ही हमने किसान रेल के माध्यम से देश के किसानों को देशभर के बाज़ारों से जोड़ा है।
साथियों,
हम सभी ये भी जानते हैं कि रेलवे में सुधार हमारे देश के logistic sector में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। इसीलिए बीते 7 सालों में केंद्र सरकार रेलवे में हर प्रकार के रिफॉर्म्स को प्रोत्साहित कर रही है। अतीत में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स सालों-साल तक इसलिए चलते थे क्योंकि प्लानिंग से लेकर एग्जीक्यूशन तक, तालमेल की कमी थी। इस अप्रोच से 21वीं सदी भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण संभव नहीं है।
इसलिए हमने पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टरप्लान बनाया है। इसमें केंद्र सरकार के हर विभाग, राज्य सरकार, स्थानीय निकाय और प्राइवेट सेक्टर सभी को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने का प्रयास है। कोशिश ये है कि इंफ्रास्ट्रक्चर के किसी भी प्रोजेक्ट से जुड़ी हर जानकारी, हर स्टेकहोल्डर के पास पहले से हो। तभी सभी अपने-अपने हिस्से का काम, उसका प्लान सही तरीके से कर सकेंगे। मुंबई और देश के अन्य रेलवे प्रोजेक्ट्स के लिए भी हम गतिशक्ति की भावना से ही काम करने वाले हैं।
साथियों,
बरसों से हमारे यहां एक सोच हावी रही कि जो साधन-संसाधन गरीब इस्तेमाल करता है, मिडिल क्लास इस्तेमाल करता है, उस पर निवेश नहीं करो। इस वजह से भारत के पब्लिक ट्रांसपोर्ट की चमक हमेशा फीकी ही रही। लेकिन अब भारत उस पुरानी सोच को पीछे छोड़कर आगे बढ़ रहा है। आज गांधीनगर और भोपाल के आधुनिक रेलवे स्टेशन रेलवे की पहचान बन रहे हैं। आज 6 हज़ार से ज्यादा रेलवे स्टेशन Wi-Fi सुविधा से जुड़ चुके हैं। वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें देश की रेल को गति और आधुनिक सुविधा दे रही है। आने वाले वर्षों में 400 नई वंदे भारत ट्रेनें, देशवासियों को सेवा देना शुरू करेंगी।
भाइयों और बहनों,
एक और पुरानी अप्रोच जो हमारी सरकार ने बदली है, वो है रेलवे के अपने सामर्थ्य पर भरोसा। 7-8 साल पहले तक देश की जो रेलकोच फैक्ट्रियां थीं, उनको लेकर बहुत उदासीनता थी। इन फैक्ट्रियों की जो स्थिति थी उनको देखते हुए कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि ये फैक्ट्रियां इतनी आधुनिक ट्रेनें बना सकती हैं। लेकिन आज वंदे भारत ट्रेनें और स्वदेशी विस्टाडोम कोच इन्हीं फैक्ट्रियों में बन रहे हैं। आज हम अपने signaling system को स्वदेशी समाधान से आधुनिक बनाने पर भी निरंतर काम कर रहे हैं। स्वदेशी समाधान चाहिए, हमें विदेशी निर्भरता से मुक्ति चाहिए।
साथियों,
नई सुविधाएं विकसित करने के इन प्रयासों का बहुत बड़ा लाभ, मुंबई और आसपास के शहरों को होने वाला है। गरीब और मिडिल क्लास परिवारों को इन नई सुविधाओं से आसानी भी होगी और कमाई के नए साधन भी मिलेंगे। मुंबई के निरंतर विकास के कमिटमेंट के साथ एक बार फिर सभी मुंबईकरों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।