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महाव्यवस्थापकांच्या दौऱ्यात भुसावळकरांना, वाटाण्याच्याच की हो अक्षता! 🤗

दिनांक 28 जानेवारीला मध्य रेल्वेच्या महाव्यवस्थापकांचा भुसावळ विभागमधे तपासणी दौरा सम्पन्न झाला. मनमाड ते नाँदगाव हाय स्पीड निरीक्षण आणि जळगाव, भादली पर्यंत विविध कार्यालयीन कामकाजाचे निरीक्षण केले गेले. भुसावळमधे रनिंग रेल्वे स्टाफ, लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर टि टि ई वगैरे करीता पाच मजली अत्याधुनिक रनिंग रूम चे उद्धाटन करण्यात आले. तसेच दिल्ली येथील नैशनल रेल म्यूजियमच्या धर्तीवर बनविण्यात आलेले मिनी रेल म्यूजियम चे ही उद्धाटन करण्यात आले.

भुसावळ विभागात महाव्यवस्थापक येणार तेव्हा स्थानिक पत्रकार आपापल्या भागातील लोकांच्या समस्या, प्रश्न हाताशी घेऊन, सरसाऊन बसलेली होती. मात्र सायंकाळी सहा वाजेच्या वेळचे लांबत लांबत पार आठ/साडे आठ वाजले तरी पत्रपरिषदेला मुहूर्त लागत नव्हता. तेव्हा स्थानिक पत्रकारांनी सरळ पत्रपरिषदेचा बहिष्कार केला आणि जी फ़ीड विभागीय कार्यालयाकडून मिळेल त्यावर बातमी बनवण्यावर भर दिला. यामुळे जे जे काही स्थानिक प्रश्न महव्यवस्थापकांपुढे उपस्थित केले जाणार होते त्याला आपसूकच वाटाण्याच्या अक्षता लागल्या.

स्थानिक प्रवासी, रोज अप-डाउन करणारे हजारों लोकं मासिक पासच्या अभावी हैराण झालेले आहेत. मेल/एक्स्प्रेस गाड्यांत द्वितीय श्रेणी जनरल तिकीट उपलब्ध नाही, पुरेश्या गाड्या नाहीत, विभागाच्या एकेक मार्गावर ईगतपुरी – भुसावळ, बड़नेरा – भुसावळ, खंडवा – भुसावळ मार्गावर केवल एकेकच मेमू गाड़ी सुरू आहे. उर्वरित गाड्यांची, जनता तिव्रतेने मागणी करत आहे. भुसावळ मार्गे चालणारी मध्य रेल्वेची एकमेव राजधानी एक्स्प्रेस पण तिला भुसावळला थांबा नाही. सध्या ह्या गाड़ीला भुसावळहून रनिंग स्टाफ म्हणजे लोको पायलट, सह लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर (गार्ड) भुसावळ हुन जळगावला नेला/आणला जात आहे. एकीकडे रेल्वे अतिरिक्त खर्च वाचविण्याचे आटोकाट प्रयत्न करत आहे तर दुसरीकडे रनिंग स्टाफला भुसावळ ऐवजी जळगावला नेण्यात कोणती बचत साधली जातेय? अतिक्रमण उठवून अनेक वर्ष लोटली परंतु अजूनही रिकाम्या जागेवर रेल्वेचे कारखाने वा उद्योग आणले गेलेले नाही, भुसावळमधे साकार होत असलेली ‘रेल नीर’ फैक्टरी अजून ही सुरू झालेली नाही. असे अनेक प्रश्न अनुत्तरितच राहून गेलेले आहेत.

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रेलवे भर्ती प्रक्रिया पर प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

बीते दिनोंसे RRB-NTPC के बारे में तरह तरह की खबरे सुर्खियों में है। आम आदमी और परीक्षार्थियों के भी मन मे जो सवाल इन विवाद को लेकर है, रेल मंत्रालय की ओरसे PIB के जरिए कुछ प्रश्नोत्तर स्वरूप में खुलासा किया गया है, आइए देखते है।

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नैशनल रेल म्यूजियम के अनुरूप मिनी रेल म्यूजियम भुसावल मे आकार ले रहा है।

यूँ तो नैशनल रेल म्यूजियम दिल्ली, बहुत बड़ा और प्रेक्षणीय है और उतना बड़ा तो नहीं मगर उसे देखने लालायित कर सकने वाला मिनी म्यूजियम भुसावल में लगभग बन कर तैयार हो चुका है। इस मिनी रेल म्यूजियम की कुछ झलकियाँ हम आपके लिए ले आए है।

म्यूजियम में उपलब्ध साधनोंकी सूची
टॉय ट्रेन राइड
भुसावल में निर्मित अदभुत डीजल मिनी लोको
मूवी हॉल
हैरिटेज संग्रहालय
रिफ्रेशमेंट सेन्टर
गेम झोन

ये लुभावना रेल म्यूजियम जल्द ही 28 जनवरी से यात्री सेवा में उपलब्ध होने जा रहा है।

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रेलवे RRB-NTPC परीक्षार्थियों की समस्याओं पर विचार करने रेलवे ने उच्च अधिकार समिति का गठन किया।

RRB-NTPC के उम्मीदवार अपनी परीक्षाओं से सम्बंधित जो भी चिन्ता, समस्या, प्रश्न, सुझाव है, कमिटी को ई मेल द्वारा भेज सकते है।

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रेल ठहरावोंकी की पुनर्बहाली हेतु ‘नेपानगर’ मे रेल यात्रीयोंका आन्दोलन जारी

“संक्रमण ने सिर्फ लोगों की जान ही नहीं ली बल्कि बचे हुए जीवित लोगों का जीना भी बेहाल कर दिया है।” म प्र के एक सरकारी औद्योगिक इकाई वाले शहर नेपानगर के लोगोंके यह बोल है। नेपानगर मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले का एक महत्वपूर्ण छोटा शहर है। सन 1948 मे स्वतंत्र भारत की सबसे पहली नुजपेपर मिल तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा यहाँ पर स्थापित की गई थी।

संक्रमण पूर्व काल मे बेहतर कनेक्टिविटी वाले नेपानगर मे दो जोड़ी 51187/88 एवं 51157/58 भुसावल कटनी, भुसावल इटारसी ऐसी सवारी गाडियाँ चलती थी और इसके अलावा 12321/22 मुम्बई हावड़ा मेल वाया इलाहाबाद, 22177/78 मुम्बई वाराणसी महानगरी, 13201/02 लोकमान्य तिलक टर्मिनस पटना जनता एक्स्प्रेस, 15017/18 लोकमान्य तिलक टर्मिनस गोरखपुर काशी एक्स्प्रेस, 22537/38 लोकमान्य तिलक टर्मिनस गोरखपुर कुशीनगर एक्स्प्रेस, 11057/58 मुम्बई अमृतसर पठानकोट एक्स्प्रेस यह प्रतिदिन चलनेवाली गाडियाँ नेपानगर स्टेशन पर रुकती थी, जिनमेसे अब केवल कुशीनगर और पठानकोट एक्स्प्रेस ही रुक रही है। दो जोड़ी सवारी गाड़ियों मे से केवल एक जोड़ी भुसावल इटारसी सवारी जो की मेमू स्वरूप मे शुरू की गई चल रही है। 4 जोड़ी प्रतिदिन चलनेवाली गाड़ियोंका स्टोपेज संक्रमण काल निगल गया है ऐसी नेपानगरवासियोंकी धारणा है और भुसावल नागपूर के बीच वाया इटारसी होकर चलनेवाली त्रिसाप्ताहिक बाबाधाम एक्स्प्रेस अब तक भी पटरी पर नहीं लाई गई है।

दरअसल संक्रमण मे गाड़ियों का बंद होना और दोबारा जब गाडियाँ शुरू की गई तो रेल विभाग की पूर्वनियोजित ZBTT शुन्याधारित समयसारणी की संकल्पना नेपानगर के ठहराव के आड़े या गई। इस शून्याधारित समयसारणी मे कई स्टॉपजेस का रद्द करना, सवारी गाड़ियोंको मेमू एक्स्प्रेस मे तब्दील करना, आम मेल/एक्स्प्रेस गाड़ियोंको अपग्रेड कर सुपरफास्ट मे बदलना इत्यादि निर्धारित किया गया था। 11093/94 महानगरी एक्स्प्रेस, 11015/16 कुशीनगर एक्स्प्रेस यह दोनों गाडियाँ सुपरफास्ट कर दी गई, इनके स्टोपेज कम और गति, समयसारणी भी बदली गई। बीच के स्टेशनों पर शंटिंग ना करना पड़े इसलिए कई सारी लिंक एक्स्प्रेस और स्लिप कोच सर्विस भी बंद कर दी गई और डर है की, शायद इसी नियमावली के अंतर्गत 22111/12 भुसावल नागपूर के बीच वाया इटारसी त्रिसाप्ताहिक बाबाधाम एक्स्प्रेस को पटरी पर नहीं लाया जाएगा।

खैर यह तो रेल विभाग, भुसावल मण्डल के परेशानियों की बात हो गई, मगर नेपानगरवासी रेल्वे के इस तुग़लकी निर्णय से सकते मे है। सोचते है, आखिर ऐसा कौनसा गुनाह हो गया की बरसों चल रहे ठहरावों को रेल विभाग ने अचानक ही बंद कर दिया? अब शहर के यात्री संगठित होकर पुराने ठहरावों को पुनर्स्थापित करवाने के लिए आन्दोलन कर रहे है, सांसद, विधायक राजनेताओं को अपने ज्ञापन सौंप रहे है।

हाल ही मे 1200 करोड़ रुपये लगाकर नेपा पेपर मिल का आधुनिकीकरण किया गया है, पेपर मिल मे निर्माण क्षमता बढ़ाकर 1 लाख मैट्रिक टन न्यूज प्रिन्ट पेपर बनने जा रही है। स्टाफ और व्यापार, रोजगार बढ़ने के आसार है मगर रेल प्रशासन के ऐसे निर्णय यहाँके नागरिकों को निराश कर देते है। यहाँतक हताशा है, की जो दो जोड़ी पठानकोट एक्स्प्रेस और कुशीनगर एक्स्प्रेस के ठहराव भी प्रायोगिक ठहराव ही है और 3-3 महीने मे आगे बढाए जा रहे है, डर है की कहीं यह ठहराव भी बंद न कर दीए जाएँ! ऐसे मे अन्य गाड़ियोंके स्टॉपजेस बढ़ाने की बजाय पुराने ठहराव भी रद्द करने मे रेल और राज्य प्रशासन कौनसा विकास साधने जा रही है, यह समझ के परे है।

Photo courtesy : indiarailinfo.com, internet