Uncategorised

उत्साहजनक खबरे, मध्य रेल के लिए

मध्य रेल की पुश-पुल राजधानी के फेरे बढाए जा रहे है, कोल्हापुर निजामुद्दीन कोल्हापुर साप्ताहिक फिरसे अपनी सेवा शुरू करेगी, हावडा अहमदाबाद हावडा के बीच एक साप्ताहिक विशेष प्रायोगिक तौर पर लाई जा रही है।

01221/22 मुम्बई निजामुद्दीन मुम्बई राजधानी के फेरे द्विसाप्ताहिक से बढ़ाकर सप्ताह में 4 दिन किए जा रहे है। दिनांक 11 जून से 01221 राजधानी मुम्बई से प्रत्येक मंगलवार, बुधवार, शुक्रवार एवं शनिवार को चलेगी वही वापसीमे दिनांक 12 जून से, 01222 राजधानी हज़रत निजामुद्दीन से प्रत्येक बुधवार, गुरुवार, शनिवार एवं रविवार को निकलेगी।

02047/48 कोल्हापुर निजामुद्दीन कोल्हापुर साप्ताहिक विशेष जुलाई से शुरू करने जा रही है। 02047 साप्ताहिक विशेष दिनांक 06/7/2021 से प्रत्येक मंगलवार को कोल्हापुर से सुबह 9:10 को निकलेगी और अगले दिन शाम 17:50 को हजरत निजामुद्दीन को पोहोचेगी। वापसीमे 02048 के समयोंमे काफी परिवर्तन हुवा है, गाड़ी अच्छी स्पीड अप की गई है। 02048 दिनांक 08/7/2021 से, हजरत निजामुद्दीन से प्रत्येक गुरूवार को सुबह 5:10 को निकल अगले दिन दोपहर में 13:30 को कोल्हापुर पोहोचेगी, पहले यह गाड़ी 16:20 को कोल्हापुर पोहोंचती थी।

02412 हावडा अहमदाबाद साप्ताहिक दिनांक 07, 14, 21 एवं 28 जून को प्रत्येक सोमवार को हावडा से अहमदाबाद के लिए और 02411 अहमदाबाद हावडा साप्ताहिक 09, 16, 23 एक 30 जून को अहमदाबाद से हावडा के लिए चलेगी।

Uncategorised

01057/58 मुम्बई अमृतसर मुम्बई शुरू किए जाने की तारीख घोषित

हाँ, ना करते करते आखिरकार अब यह गाड़ी 01057 छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस मुम्बई से दिनांक 16 जून से प्रतिदिन शुरू की जा रही है, वही वापसीमे 01058 अमृतसर से दिनांक 19 जून से प्रतिदिन चलेगी। इसके साथ ही 02047/48 कोल्हापुर निजामुद्दीन कोल्हापुर साप्ताहिक गाड़ी की शुरू होने की घोषणा की गई है।

Uncategorised

यह कैसी होड़ है?

जब सम्पदाए सीमित हो तब जिसकी लाठी उसकी भैंस वाला तत्व कारगर होता है। फिलहाल यूँ कह लीजिए जिसका सांसद उसकी रेल। यह सब बातें गाड़ियोंके खींचतान को लेकर चल रही है।

रेल विभाग एक केंद्रीय व्यवस्था है, जिसपर देश की मध्यवर्ती शासन व्यवस्था का नियंत्रण रहता है। राज्य शासन की ज्यादातर दखल नही रहती। अतः रेल विभाग में राजनीतिक दखल, सुझाव, प्रस्ताव भी सम्बन्धित राजनीतिक ही देते है। आम तौर पर यात्रिओंको इन विषयोंपर ज्यादा सरोकार नही होता अपितु कुछ यात्री संगठन मसलन शौकिया या जरूरतन स्थापित डेली अप डाउन यात्री संगठन, मण्डल या क्षेत्रीय रेल उपभोक्ता समितियां जो की रेल प्रशासन द्वारा गठित की जाती है, जनमानस को अपने हक़ के प्रति जाकरुक करते रहती है। आम जन को इन्ही लोगोंकी बयानबाजी से ज्यादातर अपने नफे-नुकसान के बारे मे समझता है या समझाया जाता है।

कुछ वर्षोँपहले तक रेल प्रशासन अपने व्यवस्थाओके मुजीब गाड़ियोंका प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजता था और रेलवे बोर्ड सम्बन्धित सभी क्षेत्रीय रेलवे की सहमति लेने के बाद उस गाड़ी की घोषणा करता था। यही स्वरूप गाड़ियोंके विस्तार, फेरे बढाने में भी कायम रहता था। धीरे धीरे रेल विभाग का देशभर में विस्तार होने लगा, अलग अलग ब्रांच लाइन का गेज कन्वर्शन होने के साथ ही सीधी गाड़ियोंकी मांग होने लगी। दरअसल एक देश एक गेज, यह यूनिगेज प्रोग्राम मालवहन व्यवस्था को सुचारू करने हेतु बनाया गया था। एक गेज के मालगाड़ी से माल उतार कर दूसरे गेज की मालगाड़ियों में लदवाना बेहद तकलीफ़ों भरा था और इस वजह से रेल विभाग की मालवहन व्यवस्था सीमित हो जाती थी। यूनिगेज में देश के सुदूर इलाकोंतक माल का बिना चढ़-उतार किए बिना मालवहन हो सकता है।

जब मालगाड़ियां अलग अलग ब्रांच लाइनोंसे निकल कर मेन लाइन्स पर और फिरसे ब्रांचेस पर चलाई जा सकती है तो यात्री गाड़ियाँ क्यों नही? ऐसे करते करते देश के छोटे से छोटे ब्रांच लाइन से भी लम्बी दूरी की गाड़ियाँ चलाई जाने लगी, गाड़ियोंके विस्तार होने लगे। रेल मंत्रालय का नए गाड़ियोंकी घोषणामे, विस्तार और फेरोंके बढाए जाने में दखल बढ़ने लगा। व्यवस्थाए राजनीति के हिसाब से ढलने लगी और सत्तारूढ़ राजनीतिक अपने दलबल के आधार पर गाड़ियोंके गन्तव्य में खींचतान करने लगे। यह बातें बिल्कुल भी छिपी नही रहती बल्कि अखबारोंके प्रथम पृष्ठोंपर गौरवपूर्ण तरीकेसे, राजनीतिक के नाम, पदनाम के साथ छपती है। खास बात तो यह है, की आम जनता को भी इस दखलंदाजी से कोई एतराज नही बल्कि वह भी इसे उक्त राजनयिकों का विशेषाधिकार समझती है।

गाड़ी की यदि गति बढाई जाएगी तो समयोंमे अन्तर आना स्वाभाविक है, उसी तरह रेल विभाग अपनी व्यवस्थाओमें सुधार कर कुछ बदलाव करता है, फेरे बढ़ाता है, स्टापेजेस हटाता है या गन्तव्य में बदलाव करता है तो यात्री संगठनोंकी ओर से स्थानिक यात्रिओंको आगाह किया जाता है कि उनका नुकसान कितना हो रहा है, जब की रेल विभाग यात्रिओंके फायदे जताने का प्रयत्न करता है। अब जब भी रेल विभाग की ओरसे यात्री गाड़ियोंमे छोटे से छोटे बदलाव की खबर आती है तो यात्री संगठन से लेकर राजनीतिक सारे की सारे सक्रिय हो जाते है। होड़ मच जाती है, कोई उक्त बदलाव को अपनी उपलब्धि बताता है तो कोई क्षेत्र के जनता के घनघोर नुकसान की दुहाई देता नजर आता है। हालाँकि जनता यह सब कवायद मूक दर्शक बन देखती रहती है।

भारतीय रेल की स्थापना हुई तब से ही रेल विभाग की कार्यप्रणाली सुचारू रूप से चलती रहे इसके लिए अलग अलग क्षेत्रीय कार्यालय बनाए गए। यह सब मेन लाइन और उसपर होने वाले कार्य बहुलता को देखकर उनको अलग अलग क्षेत्रों में बाँटा गया था न की अलग अलग राज्योंकी अलग अलग क्षेत्रीय रेलवे व्यवस्था थी। मगर जिस तरह यात्री संगठन या राजनीतिक इन व्यवस्थाओंको तोड़ मरोड़ कर जनता के सामने ला रहे है, यह देखकर अचरज़ होता है की क्या मध्य रेल महाराष्ट्र, पश्चिम रेल गुजरात का प्रतिनिधित्व करती है? क्या महाराष्ट्र का नान्देड, सिकंदराबाद वाले मुख्यालय के दक्षिण मध्य रेलवे का मण्डल नही हो सकता या पश्चिम रेलवे में रतलाम मण्डल खुद को असहज महसूस करता है? या खण्डवा, बुरहानपुर यह मध्य प्रदेश के शहर पश्चिम मध्य रेलवे में सम्मिलित होने की ख्वाहिश रखते है।

यह चन्द राजनीतिक असमंजसता की विचारधारा का फलित है। अपने, श्रेय हड़पने की होड़ में देश की रेल व्यवस्था को राज्य और शहरोंतक तक ला कर रख दिया है।

Uncategorised

महाराष्ट्र एक्सप्रेस के गोंदिया से आगे रीवा तक विस्तारीकरण में गोंदियावासियों की नाराजी

हाल ही में कोल्हापुर गोंदिया महाराष्ट्र एक्सप्रेस के गोंदिया से आगे रीवा तक विस्तारीकरण का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड ने मान्य किया है।

रेलवे ने इस प्रस्ताव के समर्थन में रेलवे बोर्ड की लाय ओवर पॉलिसी को कम कर रेलवे के स्टॉक्स का यथायोग्य उपयोग करने, किसी दो अलग गाड़ियोंको एक कर के चलाने की नीति को अपनाया है। इस विस्तारीकरण से रेलवे का करीबन 120 करोड़ का फायदा होगा जिसमे 100 करोड़ के यात्री कोच और 20 करोड़ के लोको की बचत होगी ऐसे रेलवे का मानना है।

01039 कोल्हापुर गोंदिया महाराष्ट्र एक्सप्रेस के 2 घण्टे स्पीड अप का मनमाड़, चालीसगांव, जलगाँव, अकोला के स्थानीय यात्रिओंने जो रोजाना इस गाड़ी से कम अंतर में जाना आना करते है, धुर विरोध किया था। हालांकि 100-200 डेली कम्यूटर्स के मुकाबले कोल्हापुर, पुणे से जलगाँव, अकोला, नागपुर और गोंदिया तक लम्बी यात्रा करने वाले सैकडों यात्रिओंने इसके समय बदलावोंपर खुशी ही जाहिर की थी।

अब गोंदिया से रीवा के विस्तारीकरण पर गोंदिया में हलचल निर्माण की जा रही है। गोंदिया के स्थानीय यात्री समिति के सदस्य मेठी जी इस विस्तारीकरण पर नाराजी जता चुके है, उनका मानना है, रेलवे चाहे तो कोल्हापुर से रीवा के बीच अलग गाड़ी चला दे मगर महाराष्ट्र एक्सप्रेस को ना छेड़े। गौरतलब यह है, महाराष्ट्र एक्सप्रेस नागपुर से गोंदिया विस्तारित की गई थी तब नागपुर के यात्री संगठन का बर्ताव कुछ इसी तरह का था और गोंदिया वासी उत्साहित थे।

गाड़ियोंके विस्तारीकरण पर ऐसा हमेशा ही होता रहा है। महाराष्ट्र एक्सप्रेस के गोंदिया से रीवा तक विस्तारीकरण के कुछ तथ्य है, आइए हम समझते है।

कोल्हापुर से रीवा के लिए इस गाड़ी से बेहतर शार्ट रूट उपलब्ध है, दूसरा 70% जगह गोंदिया के यात्रिओंके लिए छोड़ दी जाएगी ऐसा परीपत्रक में मान्य किया गया है। अतः यह गाड़ी एन्ड टू एन्ड फूल चलेगी और गोंदिया के स्थानीय यात्रिओंको इस गाड़ी में जगह नही मिलेगी ऐसा सीधा कहना उचित नही होगा।

गाड़ी एक्सटेंशन के बाद फुल्ल रैक 22-23 कोच LHB हो जाएगी मौजूदा ICF 18 डिब्बों के ऐवज में गाड़ी की यात्री क्षमता निश्चित ही ज्यादा होगी।

गोंदिया से कोपरगाँव तक गाड़ी डबल ट्रैक पर दौड़ती है। गोंदिया से पुणे तक का रेल मार्ग विद्युतीकरण पूर्ण हुवा है और पुणे से कोल्हापुर के बीच दोहरीकरण, विद्युतीकरण का कार्य जारी है। गाड़ी का लोको दौंड में नही बदलता अपितु पुणे में बदलता है। गाड़ी दौंड जंक्शन के बजाय दौंड कॉर्ड स्टेशन से 2 मिनिट के ठहराव पश्चात रवाना हो जाती है।

कोल्हापुर – रीवा के बीच यदि कोई अतिरिक्त गाड़ी चलती भी है तो वह भुसावल से खण्डवा, इटारसी, जबलपुर, सतना होते हुए रीवा निकल जाएगी ओर ऐसी सूरत में जबलपुर से गोंदिया के बीच के स्टेशनोंको जो लाभ महाराष्ट्र एक्सप्रेस की कनेक्टिविटी का मिलने जा रहा है, वह नही मिल पाएगा।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है, हर व्यक्ति अपने स्थानीय विचारोंसे प्रभावित होता है और उसकी सोच वहीं तक सीमित कर लेता है, मगर रेल प्रशासन को अपनी तमाम इन्वेंट्री, साजोसामान का बेहतर उपयोग करते हुए निर्णय लेना होता है। दूरदराज के क्षेत्रोंकी देश के अन्य भागोंसे सम्पर्कता बढ़ती है तो गाड़ियोंके विस्तारीकरण में हर्ज ही क्या है?

Photo courtesy : indiarailinfo.com

Uncategorised

कोंकण रेलवे का मॉन्सुन टाइमटेबल

कोंकण रेलवे पर 10 जून से 31 अक्टूबर तक गाड़ियोंको नियमित समयसारणी से अलग समयोपर चलाया जाता है। यह कोंकण रेलवे की मॉन्सुन समयसारणी कहलाती है।