01151/52 दादर मडगाँव दादर जनशताब्दी विशेष और 01007/08 मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से पुणे के बीच चलनेवाली डेक्कन विशेष का रंगरूप बदलने जा रहा है।
मडगाँव जनशताब्दी जो दादर से चलायी जा रही है, वह दिनांक 10 जून से मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से चलेगी और अत्याधुनिक LHB कोच से सुसज्जित की जाएगी। आगे यही गाड़ी का रैक शेयरिंग मुम्बई पुणे के बीच चलनेवाली डेक्कन एक्सप्रेस से होने के कारण यह गाड़ी भी LHB कोच के साथ चलाई जाएगी। यज्ञपि इसके LHB करण की तारीख सुनिश्चित नही की गई है।
रेल और वाणिज्य एवं उद्योग व उपभोक्ता कार्य और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री पीयूष गोयल ने चार धाम परियोजनाओं के लिए अंतिम मील संपर्क योजनाओं की समीक्षा की
चार धाम यानी यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ से नई बीजी रेल संपर्क के लिए अंतिम स्थान सर्वेक्षण (एफएलएस) पूरा होने के करीब है
रेल और वाणिज्य एवं उद्योग व उपभोक्ता कार्य और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री पीयूष गोयल ने चार धाम परियोजनाओं के लिए अंतिम मील कनेक्टिविटी योजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कहा, “तीर्थयात्रियों को चार धामों के साथ बीजी लिंक से आगे तेज, सुरक्षित और आरामदायक गंतव्य संपर्क मिलनी चाहिए।”
मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी विकल्पों की एक विस्तृत समीक्षा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि संपूर्ण परियोजना के पूरा होने तक के लिए विस्तृत लागत अनुमानों के साथ सभी अंतिम गंतव्य की संपर्क के विकल्पों की जांच की जानी चाहिए।
मंत्री ने कहा कि पर्यटन की जरूरत को पूरा करने और तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित और समय पर मंदिर तक पहुंचने को सुविधाजनक बनाने को लेकर परियोजना के लिए एक व्यापक योजना बनाने की आवश्यकता है।
इस बात को रेखांकित किया जा सकता है कि चार धाम यानी यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ से नई बीजी रेल संपर्क के लिए अंतिम स्थान सर्वेक्षण (एफएलएस) पूरा होने के करीब है।
केदारनाथ और बद्रीनाथ रेल संपर्क कर्णप्रयाग स्टेशन से शुरू होगा, जो 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग नई बीजी रेल लाइन परियोजना का हिस्सा है, जिसका निर्माण काफी तेजी से किया जा रहा है। गंगोत्री और यमुनोत्री रेल कनेक्टिविटी मौजूदा डोईवाला स्टेशन से शुरू होगी। चार धाम बीजी रेल कनेक्टिविटी सर्वेक्षण के अनुसार, नई बीजी रेल लाइन का टर्मिनल स्टेशन बरकोट, उत्तरकाशी, सोनप्रयाग और जोशीमठ में समाप्त हो रहा है, जो कि तीव्र ढलाने वाले भूभाग और बीजी व्यवस्था की ढाल की सीमा के कारण चार धाम मंदिरों से कम हैं।
पर्यटन की जरूरत को पूरा करने और तीर्थयात्रियों के सुरक्षित और समय पर मंदिरों तक पहुंचने को सुविधाजनक बनाने के लिए, नए बीजी रेलवे टर्मिनल स्टेशनों को धामों (मंदिरों) से जोड़ने के लिए पैमाइश इंजीनियरिंग सर्वेक्षण (आरईएस) उपयुक्त प्रणाली की तलाश के उद्देश्य से किया जा रहा है, जो पर्यावरण के अनुकूल, सुरक्षित और साथ ही पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।
देशभर से बड़ी संख्या में तीर्थयात्री चार धाम में आते हैं और बड़ी संख्या में विदेशी और घरेलू पर्यटक उत्तराखंड राज्य में ट्रेकिंग और दृश्य देखने के लिए आकर्षित होते हैं। मौजूदा सड़क संपर्क कमजोर पहाड़ी ढलानों से होकर गुजरता है और भार, क्षमता, सुरक्षा व गति की गंभीर बाधाओं का सामना करता है। इन चार धामों से रेल संपर्क होने के बाद यात्रा को अधिक सुरक्षित, सस्ती, आरामदायक, पर्यावरण के अनुकूल और सभी मौसमों के अनुकूल बना देगा।
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि यह क्षति पुष्पक एक्सप्रेस के 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरने के कारण हुई है। इस संबंध में, यह स्पष्ट किया जाता है कि क्षति किसी तेज गति वाली ट्रेन के गुजरने के कारण नहीं हुई है, क्योंकि घटना दिनांक 26.5.2021 को दोपहर 3.55 बजे हुई थी और घटना के समय कोई भी ट्रेन चांदनी स्टेशन से नहीं गुजर रही थी। साथ ही पुष्पक एक्सप्रेस दिनांक 26.5.2021 को शाम 5.14 बजे स्टेशन से गुजरी थी, यानि घटना के 79 मिनट बाद।
मध्य रेल के मुख्य अभियंता (C E) द्वारा घटना स्थल पर प्रारंभिक जांच से पता चला है कि 1.8 मीटर चौड़ाई का कैंटिलीवर छज्जा जिसमें एक ड्रॉप वॉल है और 5 कैंटिलीवर बीम पर टिकी हुई है। कैंटिलीवर बीम में जंग के कारण छज्जा स्लैब स्टेशन की इमारत की सामने की दीवार से टकराकर नीचे गिर गया जिससे सामने की ओर की ईंट की दीवार को नुकसान पहुंचा है। यह भी बताया जाता है कि अन्य तीन दीवारें और छत बरकरार हैं और स्टेशन भवन सुरक्षित है।
इस घटना में किसी को भी कोई चोट नहीं आई है तथा रेल यातायात में कोई अवरोध उत्पन्न हुआ है और ट्रेनें धीमी गति से स्टेशन से गुजर रही थीं।
मौजूदा लोड बियरिंग भवन ढांचे को अस्थाई सहायता प्रदान की गई है, आज शाम को पहले ही सिग्नल पर यातायात की आवाजाही तुरंत बहाल कर दी गई है।
प्रारंभिक जांच के आधार पर उस समय इस भवन के निर्माण कार्य का सुपरविजन करने वाले वरिष्ठ अनुभाग अभियंता (कार्य) को निलंबित कर दिया गया है।
मध्य रेल के महाप्रबंधक द्वारा मुख्य अभियंता के स्तर पर जांच का आदेश दिया गया है जो घटना के कारणों की जांच करेगा, जिम्मेदारी तय करेगा और व्यवस्था में सुधार के उपाय सुझाएगा.
शिवाजी सुतार, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, मध्य रेल्वे.
मित्रों, हाल ही में सोशल मिडियापर जयपुर बीदर जयपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस के घोषित किए जाने की सम्भावना पर चर्चा ज़ोरोंसे चल रही है।
अब राजस्थान की गाड़ियोंकी हालत ऐसी रहती है, की ‘एक अनार और सौ बीमार’ गाड़ी केवल टाइमटेबल कमिटी में प्रस्तावित है, वह भी बीते वर्ष की मगर खींचातानी तो ऐसे हो रही है मानो गाड़ी चल ही पड़ी हो। खैर, हम आपको केवल इसके विभिन्न मार्ग बताए देते है। जब गाड़ी शुरू होगी तब ही पता चलेगा कि निर्णय क्या हुवा है।
वर्ष 2020, IRTTC का प्रस्ताव, इसमें स्पष्ट दिखाई दे रहा है, की तमाम क्षेत्रीय रेलवे ने इसे मंजूरी दे दी है।
अब एक बात और समझ लीजिए कि पास किया गया प्रस्ताव वर्ष 2019-2020 IRTTC का है और इसके बाद ZBTT के बिगुल बजे थे, जिसमे ढेर गाड़ियोंका समय परिवर्तन किया जाना है।
भुसावल मण्डल में, भुसावल खण्डवा मार्ग पर, भुसावल से 77 किलोमीटर मुख्य लाइन पर चाँदनी स्टेशन है। अभी दोपहर में स्टेशन बिल्डिंग अचानक ही भरभराकर ढह जाने की खबर है। जान माल का नुकसान तो नही मगर रेलवे की सिग्नलिंग व्यवस्थापर खासा असर पड़ा है। स्टेशन बिल्डिंग निर्माण निकृष्ट दर्जे का होने की आशंका जताई जाती है।