Uncategorised

ब्रेकिंग न्यूज : मध्य रेलवे के, भुसावल डिवीजन में खण्डवा के पास चाँदनी स्टेशन की बिल्डिंग ढही

भुसावल मण्डल में, भुसावल खण्डवा मार्ग पर, भुसावल से 77 किलोमीटर मुख्य लाइन पर चाँदनी स्टेशन है। अभी दोपहर में स्टेशन बिल्डिंग अचानक ही भरभराकर ढह जाने की खबर है। जान माल का नुकसान तो नही मगर रेलवे की सिग्नलिंग व्यवस्थापर खासा असर पड़ा है। स्टेशन बिल्डिंग निर्माण निकृष्ट दर्जे का होने की आशंका जताई जाती है।

Uncategorised

दक्षिण रेलवे 12 गाड़ियाँ 15 जून तक रद्द की जा रही है।

“यास” चक्रवात से पूर्व, दक्षिण पूर्व, पूर्व तटीय रेलवे की बहुत सी गाड़ियाँ 28,29 तारीख तक रद्द की गई है। बचे कई क्षेत्रीय रेलवे में संक्रमण, लॉक डाउन के निर्बंध, प्रतिबंध के चलते गाड़ियोंमे यात्री नही मिल रहे। इधर दक्षिण रेलवे ने भी अपनी 12 गाड़ियोंके रद्दीकरण को 15 जून तक बढाने का फैसला लिया है।

02685 चेन्नई सेंट्रल मँगालुरु प्रतिदिन दिनांक 15 जून तक रद्द

02686 मँगालुरु चेन्नई सेंट्रल प्रतिदिन दिनांक 16 जून तक रद्द

06316 कोचुवेली मैसूरु प्रतिदिन दिनांक 15 जून तक रद्द

06315 मैसूरु कोचुवेली प्रतिदिन दिनांक 16 जून तक रद्द

06347 तिरुवनंतपुरम मँगालुरु प्रतिदिन दिनांक 15 जून तक रद्द

06348 मँगालुरु तिरुवनंतपुरम प्रतिदिन दिनांक 16 जून तक रद्द

06791 तिरुनेलवेली पालक्कड़ प्रतिदिन दिनांक 15 जून तक रद्द

06792 पालक्कड तिरुनेलवेली प्रतिदिन दिनांक 16 जून तक रद्द

02671 चेन्नई सेंट्रल मेट्टूपालायम प्रतिदिन दिनांक 15 जून तक रद्द

02672 मेट्टूपालायम चेन्नई सेंट्रल प्रतिदिन दिनांक 16 जून तक रद्द

06191 ताम्बरम नागरकोईल अंत्योदय प्रतिदिन दिनांक 15 जून तक रद्द

06192 नागरकोईल ताम्बरम अंत्योदय प्रतिदिन दिनांक 16 जून तक रद्द

Uncategorised

भुसावल पुणे भुसावल साप्ताहिक गाड़ी में हुवा बदलाव

मध्य रेल
भुसावल मंडल
प्रेस विज्ञप्ति
भुसावल-पुणे स्पेशल ट्रेन में बदलाव
रेलवे प्रशासन द्वारा भुसावल-पुणे-भुसावल स्पेशल ट्रेन में संशोधन किया गया है।
01135/36 विशेष मेमू, भुसावल से पुणे के बजाय अब भुसावल से दौंड के बीच चलाई जाएगी। यह बदलाव दिनांक 27.05.2021 से 29.07.2021 तक किया गया है। यह बदलाव दिनांक 27.05.2021 से प्रभावी रहेगा।

  • ट्रेन संख्या 01135 स्पेशल भुसावल से हर गुरुवार को 06.15 बजे रवाना होगी और उसी दिन 15.10 बजे दौंड पहुचनेगी
  • ट्रेन संख्या 01136 स्पेशल दौंड से हर गुरुवार को 12.30 बजे रवाना होगी और उसी दिन 20.45 बजे भुसावल पहुंचेगी।
    स्टॉप – जलगाँव, चालीसगाँव, मनमाड, कोपरगाँव, बेलापुर, अहमदनगर
    विस्तृत समय और हाल्ट के लिए कृपया http://www.enquiry.indianrail.gov.in देखें या NTES App डाउनलोड करें।
    इस विशेष ट्रेन में केवल कन्फर्म यात्रियों को ही यात्रा करने की अनुमति है।
    यात्रियों को बोर्डिंग, यात्रा और गंतव्य पर यात्रा के दौरान COVID19 से संबंधित सभी मानदंडों, एसओपी का पालन करने की सलाह दी जाती है।
Uncategorised

रेल गाड़ी, रेल गाड़ी, झुक झुक, झुक झुक ……

कुsssक
झुक झुक करती हुई रेल गाड़ी गन्ने के खेतोंस गन्ना बटोरती हुई शक्कर की मिल तक जा रही है।

है न बहुत मजेदार?

दोस्तों, यह है ट्रांगकिल शुगर फैक्टरी झिम्बाब्वे की निजी रेल और गन्ने की ढुलाई करने की व्यवस्था।

यह चलचित्र हमे वॉट्सऐप आगे बढ़ाओ नीति तहत मिला है और श्री रॉब डिकिन्सन ने फिल्माया है। हम उनका आभार मानते है, की भाँपचलित रेल गाड़ी की यादें उन्होंने ताजा करा दी साथ ही हमारे पाठकोंके लिए इसको साँझा कराने के लिए भी हम उनके आभारी है।

Uncategorised

कैसे मिलते है नए स्टापेजेस, नई गाड़ियाँ, गाड़ियोंका मार्ग विस्तार या फेरोंमें वृद्धि

समयसारणी का अभ्यास करनेवालोंमें यह सहज समझ आ जाएगा कि जबसे रेल प्रशासन ने एक विशिष्ट पैटर्न छोड़कर गाड़ियाँ दौड़ाना शुरू किया है, सारा नियोजन चूक गया है। खासकर छोटे, मंझले जंक्शन के यात्रिओंके बीच तो बहुत नाराजगी है।

जिस तरह ब्रान्च लाइन के स्टेशनोंको महत्व देकर वहाँसे लम्बी दूरी की गाड़ियाँ शुरू की गई है, जंक्शन्स का कोई औचित्य ही नही रहा।

जब बुनियादी सुविधाएं बहुतायत में हो तो कोई बात भी नही, लेकिन उनके अभाव में भी गाड़ियोंकी खींचतान ब्रांच लाइनोंपर की जाती है तो व्यवस्था पर दबाव बढ़ता है, इतर स्टेशनोंकी गाड़ियोंकी मांग होने लगती है।

हमारा देश आबादी के दृष्टिकोण से काफी बड़ा है। ऐसा हो ही नही सकता कि कोई गाड़ी खाली चले मगर हिंगोली, वाशिम जैसे छोटे जिले मुम्बई के लिए रोजाना की एक्सप्रेस गाड़ी की मांग करें तो अजीब लगता है।

फिर वही ब्रांच लाईन से मुख्य मार्ग के गाड़ी की मांग। बजाय इसके ब्रांच लाइन के स्टेशन से मुख्य लाइन तक कनेक्टिंग मेमू, इंटरसिटी की व्यवस्था होनी चाहिए।

दूसरा, जितने सलाहकार समितियोंमे विद्वान ज्ञानी लोग समय समय पर नियुक्त होते है, इनका यह फर्ज है, की वे अपने क्षेत्र के यात्रिओंके लिए समुचित गाड़ियोंकी मांग करें न की अनावश्यक लम्बी दूरी की गाड़ियोंके पीछे लगे।

यह बिल्कुल सीधी बात है, आम आदमी वर्षोंमें एखाद बार 1000 किलोमीटर से ज्यादा लम्बी दूरी की यात्रा के लिए बाहर निकलता है। उसके लिए उसी के स्टेशन से लम्बी दूरी की गाड़ी निकले यह जरूरी नही, वह किसी पास के जंक्शन से अपनी यात्रा कर सकता है या किसी बड़े स्टेशन से तेज गति वाली गाड़ी चुन सकता है। यह ठीक उसी तरह है, जैसे हर यात्री अपने गांव में हवाई अड्डा बनवाने की मांग करें। प्रत्येक व्यवस्था में अभ्यास, यात्रिओंकी संख्या उनका रुझान महत्व का होता है।

किसी स्टेशन से रोजाना कई लम्बी दूरी की गाड़ियाँ चलती है, इसका यह मतलब कतई नही निकलना चाहिए की वहाँपर उस गाड़ी का ठहराव निश्चित ही हो। रेल के विभागीय कार्यालय के पास हरेक स्टेशन की टिकट बिक्री का डेटा रहता है। कौनसे स्टेशन के लिए यात्रिओंकी ज्यादा मांग है, कौनसे स्टेशन से यात्री ज्यादा आ रहे है, कौनसे क्लास की टिकटें ज्यादा बुक की जा रही है। इन सब का विश्लेषण किया जाता है और उसके अनुसार क्षेत्रीय कार्यालय को गाड़ियोंकी मांग, स्टापेजेस की मांग भेजी जाती है। सलाहकार समिति के जानकार सदस्य की सूचना भी इन मांगों में मायने रखती है।

कोई सदस्य बिना वजह किसी गाड़ी का विस्तार, फेरे बढाने, स्टापेजेस या नयी गाड़ी की मांग रखता है तो उसकी मांग को विभागीय कार्यालय के डेटा से मिलाया जाता है और उसी से, उक्त मांग या सूचना का वैटेज साथ ही उस सदस्य का अभ्यास भी पता चल जाता है।

खैर, यह काफी अंतर्गत बाते आपके सामने आ गयी है, मगर आजकल अभ्यास के साथ साथ राजनीतिक दबाव भी काम पर लगाया जाता है और बहुत सी अनावश्यक मांगे उसी से पूरी भी हो जाती है। और फिर वहीं बात बहुल आबादी के क्षेत्र में कोई भी गाड़ी चाहे कहीं से शुरू की जाए, खाली तो नही चलती, 2-4 महीनोंमें ही भर भर के चलने लगती है।