तिरुपति और कोल्हापुर के बीच चलने वाली हरिप्रिया एक्सप्रेस 28 से तिरुपति और 30 से कोल्हापुर से प्रतिदिन चलाई जाएगी। श्री वेंकटेश्वर तिरुपति बालाजी और कोल्हापुर निवासिनी महालक्ष्मी अम्बाबाई के दर्शनार्थियों के बीच यह गाड़ी बेहद लोकप्रिय है।


तिरुपति और कोल्हापुर के बीच चलने वाली हरिप्रिया एक्सप्रेस 28 से तिरुपति और 30 से कोल्हापुर से प्रतिदिन चलाई जाएगी। श्री वेंकटेश्वर तिरुपति बालाजी और कोल्हापुर निवासिनी महालक्ष्मी अम्बाबाई के दर्शनार्थियों के बीच यह गाड़ी बेहद लोकप्रिय है।


निम्नलिखित पत्रकानुसार रेल प्रशासन की यह मंशा दिखाई दे रही है, जब भी नियमित गाड़ियाँ शुरू की जाएगी तब द्वितीय श्रेणी के डिब्बें भी गाड़ियोंमे लगाए जाने लगेंगे।
अब आप बोलेंगे, की डिब्बे तो अब भी लगाए जा रहे है, इसमें नया क्या है? तो मित्रों, फिलहाल संक्रमण काल की अवधिमे सभी गाड़ियाँ स्पेशल बन कर चलाई जा रही है और कोई भी यात्री बिना आरक्षण के यात्रा नही कर सकता। यहाँतक की जो द्वितीय श्रेणी के कोचेस है, उन में भी 2S द्वितीय श्रेणी सिटिंग की बुकिंग्ज की जाती है। हर यात्री का PNR (पैसेन्जर नेम रिकॉर्ड) के तहत यह सुनिश्चित किया जाता है, की यात्री का नाम, उम्र, लिंग, उसका पता और उसे कहाँ जाना है उस जगह का पता, उसके राज्योंके संक्रमण हेतु जारी किए गए निर्देशोंके पालन करनेके प्रतिज्ञापत्र के साथ सारा रिकॉर्ड रेलवे दर्ज कर लेती है।
अब संक्रमण काल की यह जरूरत थी की यात्री का रिकॉर्ड रेल प्रशासन के पास रहें, लेकिन जब नियमित गाड़ियाँ चलेंगी और द्वितीय श्रेणी के टिकट UTS और टिकट खिड़कियों पर बेचे जाएंगे, तब ऐसे यात्रिओंका रेलवे के पास सिवाय टिकट नम्बर के कोई रिकॉर्ड नही रहेगा और न ही रेल प्रशासन का पहले के तरह यात्री संख्या पर नियंत्रण रहेगा। वहीं ढाक के तीन पात। फिर उसी तरह सेकन्ड क्लास जनरल डिब्बे अनियंत्रित भीड़ से भरे रहेंगे। फिर तुरतफुरत वाले यात्री सेकन्ड क्लास का टिकट लेकर स्लिपर क्लास या वातानुकूलित डिब्बों के TTE/ कंडक्टर के पास, जगह के लिए मंडराते नजर आएंगे। शार्ट डिस्टेन्स ट्रैवेलर्स फिरसे स्लिपर शयनयानोंमें अपना रौब जमाते, लम्बी दूरी के यात्रिओंको धमकाकर, उन्हें अपनी सिटोसे खस्काकर यात्रा करते नजर आएंगे। कुल मिलाकर कोरोना संक्रमण से पहलेवाली अराजकता रेलगाड़ियोंमें फिर से बहाल होने जा रही है।
हम मानते है, द्वितीय श्रेणी तिकिट्स होने जरूरी है, लेकिन उसके बाद जो अनियंत्रितता आती है, उस पर निजात पाना बेहद जरूरी है, उसके लिए सेकेंड सिटिंग यह बेहतरीन पर्याय रेलवे के पास उपलब्ध है। सेकन्ड क्लास केवल मेमू, डेमू, इण्टरसिटी और उपनगरीय गाड़ियोंके लिए ठीक है। बाकी सभी मेल/ एक्सप्रेस गाड़ियोंमे सेकन्ड सिटिंग याने 2S क्लास की व्यवस्था कायम की जानी चाहिए। बिना रिकॉर्ड के कोई भी यात्री लम्बी दूरी की गाड़ियोंमे, किसी भी श्रेणी में प्रवेश न कर पाए यही व्यवस्था उचित है।

1: 16866/65 तंजावूर चेन्नई एगमोर तंजावुर उझवान विशेष गाड़ी 26/27 अक्टूबर से रोजाना चलेगी।

2: 06101/02 चेन्नई एगमोर कोल्लम चेन्नई एगमोर विशेष गाड़ी 25/26 से प्रतिदिन चलेगी।

3: 02653/54 चेन्नई एगमोर तिरुचिरापल्ली चेन्नई एगमोर रॉकफ़ोर्ट विशेष गाड़ी प्रतिदिन, 27/26 से चलेगी।


यह तीनों जोड़ी गाड़ियाँ उपरोक्त तारीख से शुरू होंगी और जब तक सुचना नही मिलती तब तक चलाई जाएगी। यह सभी गाड़ियाँ केवल आरक्षण आसन व्यवस्था के साथ चलेगी।
04321/11 और 04322/12 यह दोनों भुज बरेली गाड़ियाँ त्यौहार स्पेशल के तौर पर सीमित दिनोंके लिए सम्पूर्ण आरक्षित आसन व्यवस्थाकेँ साथ शुरू की जा रही है। यात्रिओंसे निवेदन है, कृपया निम्नलिखित परीपत्रक देख अपनी यात्रा का नियोजन करें।

महामारी और श्रमिकोंका शहरोंको छोड़ कर गाँवोंकी तरफ लौटना इस संक्रमण काल की सबसे बड़ी दिलोंको झझकोर कर रख देने वाली घटना थी, जिसे कोई भुला नही सकता। मई से लेकर अगस्त तक हमने अखबारोंमें, चैनलोंपर श्रमिकोंकी ऐसी तस्वीरें देखी है, महामार्गोंपर मिले जिस वाहनसे तो कभी पैदल यात्रा करनेवाले कई परिवार हमने देखे है। इस विपदा की घड़ी में जिस तरह सीमापर सैनिक डटे रहते है, अस्पतालों में डॉक्टर, नर्सेस, सफाई कर्मचारियोंके दल, सडकोंपर पुलिस स्टेशनोंपर पुलिस मुस्तैदीसे अपनी सेवा देते रहे ठीक उसी तरह रेलवे भी अपने आवश्यक कर्मचारियोंके साथ अपना फर्ज़ निभा रही थी।
करीबन 64 लाख श्रमिक अपने परिवार सहित भारतीय रेलवे की श्रमिक विशेष गाड़ियोंमे अपने घर, गाँव लौटे है। रास्ते मे आवश्यक खाना, नाश्ता, पानी और वैद्यकीय सेवा भी रेल प्रशासन ने उपलब्ध कराई। आज कुछ ग्राफिक्स और आंकड़ोंके जरिए हम इन श्रमिक गाड़ियों और उनमें यात्रा करनेवाले यात्रिओंका लेखाजोखा लेते है।



ग्राफिक्स : हिंदुस्तान बिजनेस लाइन डॉट कॉम एवं रेलपोस्ट के सौजन्यता से