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पड़ोसी पहले….

कहते है एक अच्छा पड़ोसी, नजदीक के दस रिश्तेदारोंपर भारी। हाल में हम भारतवासी यही तो कर रहे है। भारत अपने कमजोर पडोसियोंके लिए बड़े भाई का फर्ज अदा कर रहा है।

भारतीय रेलवे से डीज़ल लोकोमोटिव के लिए बांग्लादेश रेलवे की काफी दिनोंसे माँग थी और स्थगित पड़ी थी। आज भारतीय रेलवे ने 10 WDM 3 डीज़ल इंजिन देकर पूर्तता की। यह आदान प्रदान का कार्यक्रम पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में, पूर्व रेलवे पर स्थित गेडे स्टेशन पर हुवा। स्वीकार करनेवाला स्टेशन बांग्लादेश रेलवे में दर्शना स्टेशन था। इन लोकोज के चलते बांग्लादेश का रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत होने को काफी मदत मिलेगी।

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इसको का कहते है, जुगाड़।

आपने अपनी रेल यात्रा में बहोत बार देखा होगा पटरी के बाजू कोई बन्दा रेलवे मे गैंगमैन का यूनिफॉर्म पहने खड़ा होता है, कांधे पर बजनदार थैला, हाथ मे एक नम्बर लिखी तख्ती और गाड़ी आगे बढ़ते हुए सिटी की आवाज आती है। रेलवे में यह होता है चाबीवाला।

इन चाबीवालों की ड्यूटी ठंडी गर्मी बरसात, बारों मास पटरी की देखभाल करने की होती है। इनके बजनदार थैले में पटरी, स्लीपर्स में जीन चाबियोंसे लॉक की जाती है वह 8-10 चाबियाँ, लम्बी डंडी का हथौड़ा, झंडी, सेक्शन गैंग की तख्ती, रात की ड्यूटी के लिए लालटेन ( आजकल टॉर्च ), सम्पर्क के लिए फोन की पेटी, पटरी जॉइंट्स के 8 – 10 नट बोल्ट, कसने के लिए पाने ऐसा कमसे कम 20 किलो बजन होता है।

इतना सामान ये लोग कंधे पे लादकर, पटरी की सुरक्षा हेतु रोजाना 10 – 10 किलोमीटर की एक बिट पैदल चलते है। यदि कुछ गम्भीर बात इनको पटरी पर नजर आई जैसे की पटरियों का क्रैक या टूटना तो इन लोगोंकी टीम उस स्थान पर दौड़ती है।

ऐसे वक्त में उस स्थान पर जल्द से जल्द पोहोंचना बेहद जरूरी होता है। उत्तर पश्चिम रेलवे के कर्मियों ने एक जबरदस्त उपाय खोजा है। हमारे यहाँ कार्यकुशलता की कोई कमी नही है, लीजिए आप भी देखिए।

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1 अगस्त से बन्द हो रहा है, अकोला का गुड्स शेड।

है न चौकानेवाली खबर? हाँ लेकिन यह सच है। इन दिनोंमें रेल प्रशासन जहाँ कलकारखानों में जा जाकर, अपने वाणिज्य अधिकारियोंको भेज भेजकर रेल्वे से माल ढुलाई करने के लिए व्यापारियों, किसानों और कारखानदारोंको प्रोत्साहित करने के भरकस प्रयास कर रहा है, उसमे सफल भी हो रहा है, इसी बीच मध्य रेलवे की 21 जून की इस खबर से जाहिर है हर कोई चौक गया है।

वह रेल परीपत्रक जिसमे अकोला गुड्स शेड 1 अगस्त से बन्द करने की आर्डर है।

दरअसल इस खबर को चौकाऊ बनाया है, इसके आधे अधूरे पन ने। जैसे सिक्के के दो पहलू होते है, इस खबर का दूसरा पहलू है अकोला स्टेशन का विकास। अकोला यह महाराष्ट्र का महानगर और महाराष्ट्र के विदर्भ उपविभाग का महत्वपूर्ण जंक्शन है। मुम्बई – नागपुर मार्ग की लगभग तमाम गाड़ियाँ यहाँपर रुकती है। अब आकोट लिंक भी शुरू होने जा रही है। ऐसी स्थितिमे पहलेसे ही यात्रिओंकी भीड़ रहती है वह और भी बढ़ने की संभावना है। मध्य रेलवे के पास कमोबेश 4 प्लेटफार्म और दक्षिण मध्य रेलवे की गाड़ियोंके लिए 2 प्लेटफार्म उपलब्ध है। जिसमे कुछ गाड़ियोंका शंटिंग याने लोको रिवर्सल भी होता है उस वक्त एक साथ दो लाइनें एंगेज रहती है। गाड़ियाँ ज्यादा देर भी खड़ी रहती है। प्लेटफॉर्म बढ़ाने के लिए जगह भी कम पड़ रही थी।

अब अकोला से 19 किलोमीटर दूर, बडनेरा मार्ग पर बोरगांव स्टेशनपर अकोला गुड्स शेड का काम शिफ्ट किया जा रहा है और अकोला स्टेशन की विद्यमान गुड्स शेड की जगहपर रेलवे प्लेटफार्म, बे एरिया में यात्री सुविधाएं बढ़ाई जाएगी। करीबन 9 करोड़ रुपये में अकोला स्टेशनपर होम प्लेटफार्म विकसित किया जाएगा साथ ही अकोला में रेल कोच फैक्ट्री के लिए यहांके सांसद रेल प्रशासन से 105 करोड़ रुपए आबंटित करवाने का प्रयास कर रहे है।

तो यह है अकोला गुड्स शेड बन्द कराए जाने के खबर के पीछे की खबर।

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भारतीय रेल टनलोंकी दुनिया

भारत मे रेलवे का DFC डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बहोत जोरशोर से चल रहा है।

आज हम WDFCC के दादरी मुम्बई JNPT लाइन में सोहना हरियाणा के पास बनाए गए एक किलोमीटर लम्बे टनल की तस्वीरों को प्रस्तुत कर रहे है। यह कार्य हाल ही सम्पन्न हुवा है। भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर जायंट लार्सन एंड टुब्रो कम्पनी ने इसे निर्धारित अवधि एक वर्ष से पहले ही कम्प्लीट कर दिया है। इस टनल से दादरी एवं रेवाड़ी जोड़े जा रहे है। आप यह जानकर गर्व होगा, यह दुनिया पहली डबल स्टैक कंटेनर ढोने वाली और विद्युतीकरण वाली रेलवे लाइन है।

जरा इन्हें भी देख लीजिए,

यह है TBM टनल बोअरिंग मशीन दुनिया की सबसे बड़ी साइज की टनल बोअरिंग 17.5 मीटर साइज है इसकी। मुम्बई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के लिए 14.5 मीटर वाली 3 TBM का इस्तेमाल किया जा रहा है और मुम्बई के समुद्र तटीय रोड़ के लिए 12.5 मीटर के टनल बनाए जाते है।

News & photo courtesy : Sahil Pednekar @sahi11p

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खबर समस्तीपुर, बिहार से है।

समस्तीपुर-दरभंगा रेल खंड के हायाघाट स्टेशन के पास पुल के गर्डर तक बाढ़ का पानी पहुँच जाने के कारण सुरक्षा के दृष्टिकोण से इस खंड पर अस्थायी रूप से गाड़ियों का परिचालन बंद कर दिया गया है जिसके कारण निम्न गाड़ियों का मार्ग परिवर्तन/ आंशिक समापन किया गया है l