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अकोला – आकोट मार्ग का CRS निरीक्षण जारी है।

आइए आपको वहीं लिए चलते है। आज CRS निरीक्षण होगा और कल याने 24 को होगी स्पीड टेस्ट। चलिए आज की गतिविधि देखते है।

रिपोर्ट : मनोज सोनी, खण्डवा द्वारा

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यह वीडियो देखिए, आपको हैरत होगी …..

जी हाँ। हैरत ही होगी। अब तक आपने मुम्बई की उपनगरीय गाड़ियोंकी भीड़ देखी थी, यह हमारे उत्तर भारत के गाँवोंके तरफ की भीड़ है।

हम लोगोंकी दिक्कत यह है, रोजगार पर जाने के लिए गाड़ी चाहिए। हम प्रशासन से लक्जरी नही माँग रहे, न ही कोई विशेष व्यवस्था। लेकिन रोजाना छोटे छोटे गावोंके स्टेशनोंसे जो मजदूर, कर्मचारी, विद्यार्थि शाहरोंकी ओर चलते है और शाम में लौटते है, जरा उनके हाल तो देखिए। कहीं रोटी के चक्कर मे जिंदगी न छूट जाए।

“चाहे आप बुलेट ट्रेनवाँ चलाई ले, उ राजधानियां, शताब्दियाँ चलवा लीजिए बाबुसाब, पर हमरा रोज का टुकटुकिया ना बन्द करी” यह हमारे गांव के श्रमिकोंकी माँग है। आए दिन ख़बरोंमें पढा जा रहा है, सवारी गाड़ियोंको एक्सप्रेस बनाया जाएगा। स्टापेजेस हटा दिए जाएंगे। “दो सौ का पास बनाई के रोज सहर जात रहे, दिनभर खड़े रहे, तब जाकर दो जून रोटी मिलत है बाबूजी। इब गाड़ी नाही चलिबे तो हम हु सहर कैसन जाई? बस, टेम्पो से तो का उसे किराया देई और का हम खाई?”

ऐसे ऐसे सवाल, हमारे विकास की तो बोलती ही बन्द हो गयी। इनकी जरूरतें हमारी सोच से कई अलग है। कहाँ हम इनसे हाई स्पीड, नॉन स्टॉप सुपरफास्ट गाड़ियाँ और पाँच तारा, स्टार क़्वालिटी की भोजन व्यवस्था, हाइजेनिक बेड रोल की बातें करें? इनको तो बस गांव और शहर के बीच जानेआने के लिए भले दो पग धरे जाए इतनी ही जगह वाली गाड़ी जिसे वह टुकटुकिया कहते है मिल जाए तो बहोत है।

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पश्चिम बंगाल में तीन दिन पूर्ण लॉक डाउन

पश्चिम बंगाल राज्य शासन ने 23, 25 और 29 जुलाई को राज्यव्यापी सम्पूर्ण लॉक डाउन रखने की घोषणा की है और उसी के तहत रेलवे से उन दिनों पश्चिम बंगाल के राज्य में पोहोंचने वाले यात्रिओंको यह हिदायत दी है कि वह स्टेशनपर गाडीसे उतरने के बाद अपने अपने घरोंको जाने की समुचित व्यवस्था कर ले। पश्चिम बंगाल शासन ने निम्नलिखित परीपत्रक जारी किया है, यात्रीगण कृपया नोट करें।

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आखिर कब तक लगा रहेगा बैन महाराष्ट्र में रेल यात्रा पर।

पूर्ण भारत मे अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। देश भर में सब तो नही लेकिन 230 रेलगाड़ियां लगभग रोजाना दौड़ रही है। देश के तमाम राज्योंमें जहाँ से भी रेल चल रही है, उन पर अलग से ऐसा कोई बंधन नही थोपा गया है, सिवाय महाराष्ट्र राज्य के।

महाराष्ट्र में कोई भी यात्री राज्य के भीतर ही भीतर रेल यात्रा नही कर सकता। दरअसल रेलवे प्रशासन ने बिना आरक्षण रेल में यात्रा करने मनाई कर रखी है उसी नियम के तहत महाराष्ट्र राज्य शासन ने रेल प्रशासन को किसी भी यात्री को राज्य अन्तर्गत आरक्षण नही दिया जाए ऐसी योजना कर रखी है।

यह गोंदिया से मुम्बई टिकट लेते वक्त आया हुवा मेसेज है।

यह बात और है कि यात्री किसी पड़ोस के दूसरे राज्य से महाराष्ट्र में आ सकता है या जा सकता है। गोंदिया मुम्बई टिकट आरक्षित नही की जा सकती तो डोंगरगढ़ (छग) से टिकट लेकर यात्री वहाँसे यात्रा शुरू करता है। उसी प्रकार मुम्बई से दूसरे राज्य के स्टेशन का टिकट लेकर राज्य के किसी अपने स्टेशन पर लोग उतर रहे है। जलगाँव जिले के लोग मध्यप्रदेश के बुरहानपुर से यात्रा शुरू कर रहे है।

संक्रमण रोके जाने हेतु महाराष्ट्र शासन ने यह कदम उठाए है, लेकिन जिनको यात्रा करनी है वह बेचारा क्या करे? राज्य प्रशासन की ओरसे सड़क यातायात के लिए अत्यावश्यक यात्री सेवा हेतु ई-पास जारी किए जाते है, लेकिन हर यात्री के पास निजी वाहन या टैक्सी का किराया चुकाया जा सके इतने पैसे नही होते अतः वो इस तरह के उल्टे सीधे काम करने मजबूर हो रहा है।

वही कथा उपनगरीय गाड़ियोंके लिए भी है। उपनगरीय गाड़ियोंमे सीमित प्रवेश हो, इस हेतु केवल शासकीय कर्मचारियों और कुछ सेवाभावी व्यवसायीयोंको ही वह भी कोड स्कैन कर के ही अनुमति दी जा रही है। मुम्बई की उपनगरीय सेवा मुम्बई से कसारा, कर्जत और पश्चिम में चर्चगेट से लेकर डहाणू रोड तक पसरी हुई है। क्या आम यात्री इन गाड़ियोंसे यात्रा नही कर सकता? उत्तर है नही। बिना अनुमति के गैर शासकीय सेवा वाला व्यक्ति यात्रा नही कर सकता। आज यात्रिओंका गुस्सा इसी बात पर फुट पड़ा।

उपनगरीय यातायात की रिपोर्ट शिवम राजपुरोहित द्वारा प्राप्त

नालासोपारा में रेल रोको आंदोलन.
ST बस नही मिलने से लोगो का फूटा गुस्सा ,जबरन प्लेटफॉर्म पर आए लोग , लॉकल ट्रेन को रोका गया। जी आरपी,आरपीएफ ने भीड़ को प्लेटफार्म से बाहर खदेड़ा।

हम महाराष्ट्र सरकार की मंशा समझते है, लोगोंके प्रति उनकी ज़िम्मेदारी पालने का एहसास भी समझ आता है। लेकिन नियम जब रोजीरोटी के आड़ आने लगे तो जनता भी बेबस हो जाती है। राज्य शासन को चाहिए की अपने इस नियम को समुचित व्यवस्थाओंके साथ पुनर्रचना कर सुधारित रूपमे जारी करे। निजी व्यवसायी, उनके कर्मचारी उनके लिए भी उपनगरीय गाड़ियोंमे यात्रा की जा सके ऐसे अनुमतिपत्र जारी करवाए। जिस तरह निजी वाहन लेकर राज्यान्तर्गत यातायात की जा सकती है, उसी प्रकार अनुमति लेकर रेल यात्रा की भी सेवाएं उपलब्ध कराई जाए।

आशा है, राज्य शासन जनता की माँगोंपर सहानुभूति से विचार कर उचित उपाययोजना करें।

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खुशखबर : अकोला – आकोट CRS का निरीक्षण 23 जुलाई को

अकोला – खण्डवा गेज कन्वर्शन के विवादोंके बीच अकोला – आकोट जो कि बड़ी लाइन बिछ चुकी है उसका CRS निरीक्षण की तारीख जारी हो चुकी है। 23 और 24 जुलाई को यह निरीक्षण होने वाला है।

आप को बता दे, CRS याने कमिशन ऑफ रेलवे सेफ्टी रेलवे के सुरक्षा आयुक्त। यह विभाग तमाम रेलवे के निर्माणाधीन कार्य को फाइनल जांच कर, अपनी रिपोर्ट भेजता है और क्लियर करता है तभी इस पर गाड़ियाँ चलाई जा सकती है। सभी सम्बंधित विभाग अपने अपने काम ठीक से कर के अपने स्तर पर उसकी जाँच करके फिर CRS निरीक्षण को काम की फाइनल जाँच के लिए बुलवाते है।

अकोला आकोट के बीच गांधी स्मारक रोड़ और पाटसुल नामक स्टेशन है। पहले मोटर ट्राली से निरीक्षण किया जाएगा और बादमे स्पीड ट्रायल होगी। आशा है, जल्द ही इस निरीक्षण में क्लियर होने के बाद अकोला आकोट के बीच गाड़ियाँ शुरू हो जाएगी। अकोला – पूर्णा के बीच चलने वाली गाड़ियाँ आकोट तक एक्सटेंड हो सकती है।

CRS के कार्यक्रम का चार्ट