रेल जनसंपर्क कार्यालय, इंदौर द्वारा प्राप्त प्रेस विज्ञप्ति में खजुराहो-इंदौर एक्सप्रेस का खजुराहों से आगे प्रयागराज एवं इन्दौर से आगे डॉ. अम्बेडकर नगर तक विस्तार किया जा रहा है।
पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के इंदौर से खजुराहो के मध्य चलने वाली गाड़ी संख्या 19664/19663 खजुराहो-इंदौर-खजुराहो एक्सप्रेस का एक ओर प्रयागराज एवं दूसरी ओर डॉ अम्बेडकर नगर तक विस्तार किया गया है तथा यह ट्रेन सप्ताह में चार दिन नए नम्बर 14116/14115 प्रयागराज-डॉ अम्बेडकर नगर-प्रयागराज एक्सप्रेस के रूप में चलेगी।
इसकी जानकारी देते हुए मंडल रेल प्रवक्ता ने बताया कि उत्तर मध्य रेलवे द्वारा यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए गाड़ी संख्या 19664/19663 खजुराहो-इंदौर-खजुराहो एक्सप्रेस एक ओर प्रयागराज तथा दूसरी ओर डॉ अम्बेडकर नगर तक विस्तार दिया गया है। अब यह नई गाड़ी संख्या 14116/14115 प्रयागराज-डॉ अम्बेडकर नगर-प्रयागराज एक्सप्रेस के नाम से सप्ताह में चार दिन चलेगी।
वर्तमान में सभी नियमित गाड़ियों का परिचालन बंद है तथा जैसे ही नियमित रूप से गाड़ियों का परिचालन आरंभ होगा इस ट्रेन के फेरे शुरू हो जाएंगे। इसके आरंभ होने से यात्रियों को इंदौर एवं उज्जैन से प्रयागराज जाने के लिए एक नई गाड़ी मिल जाएगी।
गाड़ी संख्या 14116 प्रयागराज-डॉ अम्बेडकर नगर एक्सप्रेस प्रति मंगलवार, शुक्रवार, शनिवार एवं रविवार को 15.20 बजे प्रयागराज से चलकर रतलाम मंडल के उज्जैन (07.20/07.30), फतेहाबाद(08.08/08.10), इंदौर(08.50/09.00) होते हुए गाड़ी चलने के दूसरे दिन09.45 बजे डॉ अम्बेडकर नगर पहुँचेगी। इसी प्रकार गाड़ी संख्या 14115 डॉ अम्बेडकर नगर प्रयागराज एक्सप्रेस प्रति सोमवार, बुधवार, शनिवार एवं रविवार को डॉ अम्बेडकर नगर से 11.15 बजे चलकर इंदौर(11.50/12.00), फतेहाबाद(12.50/12.52) उज्जैन(13.25/13.35) होते हुए दूसरे दिन 06.00 बजे प्रयागराज पहुँचेगी।
इस ट्रेन का दोनो दिशाओं में इंदौर, फतेहाबाद, उज्जैन, संत हिरदाराम नगर, सांची, विदिशा, बीना, ललितपुर जं, टिकमगढ़, खरगापुर, छतरपुर, खजुराहो, महोबा जं., बाँदा, चित्रकूटधाम कर्वी, मानिकपुर जं., शंकरगढ़ एवं नैनी स्टेशनों पर ठहराव दिया गया है।
इस ट्रेन में एक सेकेंड एसी, चार थर्ड एसी, सात स्लीपर एवं चार सामान्य श्रेणी के कोच रहेंगे।
अब तक हमारे सभी पाठक, ज़ीरो बेस टाइमटेबलिंग क्या होती है यह अच्छी तरह समझ गए होंगे। रेल प्रशासन इसे आने वाले नए टाइमटेबल से लागू करने जा रही है। हमारे कुछ पाठकगण इस ज़ीरो बेस टाइमटेबलिंग के प्रति साशंकित है, किसी को यह खिलवाड़ लगता है तो कोई बहोत उत्साहीत है। हमने सोचा, झीरो बेस टाइमटेबलिंग होनी चाहिए या नही इस पर एक डिबेट ले कर दोनों मुद्दे सामने रखते है, फिर आप लोग जो निर्णय ले।
ज़ीरो बेस टाइमटेबलिंग का सीधा मतलब है कि पुरानी सारी ट्रेनें, उनके शेड्यूल को भुलाकर, वैनिश कर नए सिरे से एक एक गाड़ी का शेड्यूल बनाना और पूरे टाइमटेबल की रचना करना। ऐसे में रेल प्रशासन ने अपने तेज गति वाले टाइमटेबल में सबसे बड़ी बाधा निर्माण करने वाली पैसेंजर ट्रेनों को एक्सप्रेस में कन्वर्ट करने का एक आसान सा उपाय ढूंढ लिया। पैसेंजर को एक्सप्रेस में कन्वर्ट करना याने उसका स्पीड बढ़ना और स्पीड बढ़ने के लिए स्टापेजेस कम करना। अब आप बताइए क्या यह उन छोटे छोटे स्टेशनोंके यात्रिओंके साथ सीधी नाइन्साफ़ी, अन्याय नही है? और यदि स्टापेजेस बन्द किए बिना यह गाड़ियाँ उसी तरह चलती रही तो उनमें बैठे यात्रिओंके साथ एक्सप्रेस के किराए वसूल करना यह भी तो अन्याय ही है।
दूसरा पैसेंजर को कन्वर्ट करना समझ आया लेकिन उन सदाबहार एक्सप्रेस और लिंक एक्सप्रेस गाड़ियोंका क्या जीन्हें बन्द, शार्ट टर्मिनेट या डाईवर्ट किया जा रहा है? 19019/20 बांद्रा देहरादून एक्सप्रेस गाड़ी को मुख्य मार्ग से हटाकर रतलाम, चित्तोड़गढ़, कोटा होकर चलाने पर बात अड़ी है। यह गाड़ी रतलाम से कोटा के बीच 220-30 किलोमीटर के लिए करीबन 7 घंटे का वक्त लेती है और 19 स्टेशनोंपर रुकती है। बिल्कुल फुल्ली ऑक्युपाई रहती है यह ट्रेन। उसी प्रकार इंदौर – उज्जैन – जयपुर लिंक बन्द की जा रही है। इंदौर से जयपुर और वापसी के लिए यह लिंक एक्सप्रेस बेहद लोकप्रिय है। बड़े राजनेता इस गाड़ी के बन्द किए जाने पर नाराज है।
यह तो 18 क्षेत्रीय रेलवे में कुछेक क्षेत्र के मिनिट्स आने पर के हाल है, यदि बाकी क्षेत्रीय रेलवे के भी परीपत्रक इसी अंदाज में आएंगे तो इस ज़ीरो बेस टाइमटेबलिंग की शुरुवात कौनसे सिरे से करनी पड़ेगी इसका पता नही।
ज़ीरो बेस टाइमटेबलिंग के लिए इस तरह के विरोध के सुर गूँज रहे है तो दूसरी तरफ प्रशासन अपनी बात पर अड़ी है और अपने सारे भविष्य के प्लानिंग की बातें करती है जो इसी ज़ीरो बेस टाइमटेबलिंग से जुड़ी है।
ज़ीरो बेस टाइमटेबलिंग के फेवर के मुद्दे भी बताते है। जब लगभग 3 महीने से यात्री गाड़ियाँ न के बराबर चल रही है तो ज़ीरो बेस टाइमटेबलिंग के लिए इससे बेहतर वक्त कोई दूसरा हो ही नही सकता। आप भूल जाइए की 19019/20 या अनेकों लिंक एक्सप्रेस ऐसी कोई गाड़ियाँ चल रही थी। जब सिरे से टाइमटेबलिंग होंगी तो ढेरों तेज और आरामदायक, सुविधाजनक समयोंके साथ यह गाड़ियाँ अवतरित होंगी। आज गाड़ियाँ नही चल रही है तो यात्री किसी ओर स्टेशनोंसे गाड़ियोंकी सेवा ले ही रहे है न? छोटे स्टेशनोंके यात्री किसी आस पास के जंक्शन से गाड़ी पकड़ या छोड़ ही रहे है न? यदि लम्बी दूरी की गाड़ियाँ उदाहरण के लिए वहीं बांद्रा देहरादून एक्सप्रेस लीजिए 1698 किलोमीटर के इस लंबे स्पैन में 98 स्टापेजेस याने एवरेज हर 17-18 किलोमीटर पर स्टापेजेस। यह कोई एक्सप्रेस गाड़ी है? इंदौर जयपुर लिंक लीजिए इंदौर पैसेंजर के 5-6 डिब्बे, भोपाल जयपुर एक्सप्रेस में उज्जैन में जुड़ते है। याने उज्जैन में 30 से 40 मिनिट का स्टॉपेज, दो लाइनें शंटिंग के लिए ब्लॉक, दोनोंमेंसे कोई गाड़ी विलम्बित हों तो दूसरी के लिए इतन्जार याने और देरी। यह लिंक एक्सप्रेस की व्यथा है। ज़ीरो बेस टाइमटेबलिंग में यह सब हटा कर के नई पुनर्रचना में डायरेक्ट गाड़ियाँ मिलेगी। छोटे स्टेशनोंके लिए इंटरसिटी, मेमू, डेमू गाड़ियाँ मिलेगी।
200-300 किलोमीटर के लिए कोई गाड़ी 3.5, 4 घंटे लगा रही है तो कोई एक्सप्रेस पैसेंजर को लाज आ जाए ऐसे 7, 7.5 घंटे लगा रही है 15017 लोकमान्य तिलक टर्मिनस गोरखपुर काशी एक्सप्रेस भुसावल से 13.45 को निकल रात 21.05 को इटारसी पोहोंचती है। यह अंतर मात्र 307 किलोमीटर का है। क्या आपको नही लगता बरसोंसे इसी समय से चलने वाली गाड़ियोंमे सुधार की जरूरत है? ब्रिटीशोंके कालसे आ रही इस तरह के टाइमटेबलिंग की पुनर्रचना किया जाना एकदम उचित कदम है।
हमारा यह मानना है ज़ीरो बेस टाइमटेबलिंग अवश्य होना चाहिए। परिवर्तन यह प्रकृति का नियम है। गाड़ियाँ बन्द करना, मार्ग बदलना, पैसेंजर को एक्सप्रेस में तब्दील करना या शार्ट टर्मिनेट करना यह सब इन नए सिरे से टाइमटेबल बनाने के शुरवाती झटके है। रेल प्रशासन ने यात्रिओंको इत्मीनान, भरोसा दिलाना चाहिए कि बदलाव यात्रिओंके जरूरत के हिसाब से भी होते रहेंगे। जहाँ गाड़ियोंकी जरूरत होंगी वहाँ पर गाड़ियाँ निश्चित ही शुरू की जा सकती है। फिर वह एक्सप्रेस की जगह मेमू या शटल भी हो सकती है। रोजाना वाली लिंक एक्सप्रेस बन्द हो कर कोई साप्ताहिक या द्विसाप्ताहिक सीधी गाड़ी मिल रही है तो इसमें हैरान ना हो। यदि लिंक वाले स्टेशन का वेटेज ज्यादा होगा तो उनकी गाड़ी की फ्रीक्वेंसी याने फेरे बढ़ाए जा सकते है।
मार्च महीने से गाड़ियाँ बन्द कर दी जिन्हें अंशतः खोला गया। पहले 12 मई 30 राजधानीयोंके और 1 जून से कुछ 200 मेल एक्सप्रेस गाड़ियोंके जरिए। यात्रिओंका उत्साह देखते कर्नाटक, ओडिशा और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने अपने राज्य में इंटरसिटी गाड़ियाँ भी शुरू करवाई।
लेकिन अब रेलवे की राह बिकट हो रही है। एक एक राज्य अपने राज्योंमें रेल गाड़ियाँ चलाने पर प्रतिबंध लगाते जा रहे है। ओडिशा ने अपने राज्य की तीन जोड़ी इंटरसिटी गाड़ियोंको कल याने 09 से लेकर 31 जुलाई तक रद्द किए जाने की घोषणा करवा दी है। तो उधर बंगाल ने 12809/10 मुम्बई हावड़ा मेल और 12833/34 अहमदाबाद हावड़ा एक्सप्रेस रोजाना चलनेवाली गाड़ियोंके चक्के सप्ताह में एक बार ऐसे सीमित करवा दिए है। 12303/04 हावड़ा नई दिल्ली स्पेशल पटना होकर और 12381/82 हावड़ा नई दिल्ली स्पेशल धनबाद होकर 11 जुलाईसे रोजाना चलनेवाली गाड़ियोंको साप्ताहिक सप्ताह में केवल एक दिन ऐसे आगे सूचना दिए जाने तक चलाने की घोषणा की है।
निम्नलिखित परिपत्रकों को ध्यान से पढ़ लीजिए और सेवाओंके दिन भी समझ लीजिएगा। उक्त गाड़ियाँ अब केवल साप्ताहिक ही चलेगी और इंटरसिटी गाड़ियाँ रद्द की जा रही है।
जब से ज़ीरो बेस टाइमटेबलिंग की बातें शुरू हुई है, उसके वजह से होने वाले परिणाम परिपत्रकोंके स्वरूप में नजर आने लगे है। कहीं गाड़ियाँ रद्द हो रही है तो कहीं कोई गाड़ियोंकी फ्रीक्वेंसी घटाई जा रही है। उत्तर पश्चिम रेलवे में पहले ही गाड़ियाँ कम चलती है। उसमें जो लिंक एक्सप्रेस के रूप में रोजाना सम्पर्कता बनी रहती थी वह भी सप्ताह में 2 दिन, 4 दिन ऐसे होने वाली है। विस्तार से जानने के लिए हम रेल बोर्ड का उत्तर पश्चिम रेलवे के लिए यह परीपत्रक देखते है।
12307/08 और 22307/08 यह गाड़ियाँ है हावड़ा जोधपुर / बीकानेर एक्सप्रेस। पहले यह समझ लेते है कि यह गाड़ियाँ कैसे चलती थी। हावड़ा से जोधपुर और बीकानेर के लिए रोजाना चलने वाली एक्सप्रेस मेड़ता रोड स्टेशन तक आ कर के कुछ कोचेस के साथ 22307 और 22308 बीकानेर लिंक एक्सप्रेस बन कर बीकानेर निकल जाती थी और बचे कोचेस हावड़ा जोधपुर एक्सप्रेस बन जोधपुर जाते थे। याने लिंक एक्सप्रेस के जरिए दो गन्तव्योंके लिए रोजाना सम्पर्कता बनी रहती थी।
अब नई व्यवस्था में लिंक एक्सप्रेस बन्द की जा रही है। मेड़ता रोड स्टेशन पर कोई शंटिंग, कोच निकलना, जोड़ना नही होगा। 12307/08 यह गाड़ी हावड़ा जोधपुर एक्सप्रेस बनी रहेगी और सप्ताह में 5 दिन चलेगी। एक अलग गाड़ी 22307/08 हावड़ा बीकानेर एक्सप्रेस सप्ताह में 2 दिन चलेगी। याने दोनों गन्तव्योंके रोजाना वाला सम्पर्क खत्म। हावड़ा से जोधपुर जाना है तो 5 दिन और बीकानेर के लिए 2 दिन। गाड़ी हावड़ा से मेड़ता रोड तक रोजाना रहेगी मगर अलग अलग नम्बरसे। ऐसा करने के पीछे रेल प्रशासन का उद्देश्य यूँ है की मेड़ता रोड स्टेशन पर जो समय शंटिंग करने में जाया हो रहा है, वह बचेगा। मैन पॉवर, 2 लाइनोंकी ब्लॉकिंग बचेगी।
इसी तरह 15631/32 गौहाटी बाड़मेर / बीकानेर एक्सप्रेस की 25631/32 मेड़ता रोड बीकानेर लिंक भी बन्द कर सप्ताह में दो दिन गौहाटी से इन दोनों गन्तव्योंके लिए चलने वाली गाड़ियोंको दो अलग अलग गाड़ियोंमे साप्ताहिक स्वरूप में लाया जा रहा है। फिर से वहीं की यह दोनों गाड़ियाँ अलग अलग नम्बर्स के साथ सप्ताह में 2 दिन मेड़ता रोड तक आएगी। और भी इसी तरह की लिंक एक्सप्रेस 12463/64 दिल्ली सराय रोहिल्ला जोधपुर / बीकानेर एक्सप्रेस और उसकी लिंक 22463 / 63 मेड़ता रोड से बीकानेर लिंक एक्सप्रेस और 14659/60 दिल्ली जैसलमेर मालिनी एक्सप्रेस और उसकी लिंक 14661/62 जोधपुर बाड़मेर एक्सप्रेस रोजाना की जगह सप्ताह 4 दिन और 3 दिन ऐसे अलग अलग गाड़ियाँ बन जाएगी।
ठीक है, रेल प्रशासन की सोच है। लेकिन हम चाहते है इस तरह की व्यवस्था में यात्री को सभी श्रेणियोमे और कंप्यूटराइज्ड ई-टिकट में, थ्रू टिकट टेलिस्कोपिक किराया दरोंसे मिलते रहना चाहिए। उदाहरण के लिए किसी यात्री को हावड़ा से बीकानेर जाना है और उस दिन सिर्फ हावड़ा जोधपुर गाड़ी ही चलती है तो उसका आरक्षण हावड़ा से मेड़ता रोड तक रहेगा और आगे मेड़ता रोड से बीकानेर तक सारे किराए टिकट के पहले भाग में वसूले गए रहेंगे दूसरे भाग में किराया ‘0’ रहेगा और केवल मेड़ता रोड़ से बीकानेर तक यात्रा की अथॉरिटी रहेगी। किराया हावड़ा से बीकानेर इकठ्ठा ले लिया जाएगा। यह व्यवस्था, जो की अभी सिर्फ गैर वातानुकूलित श्रेणियोमे और केवल PRS टिकिटिंग प्रणाली में ही मिल रही है। इससे यात्री को केवल गाड़ी मेड़ता रोड़ स्टेशन पर बदलना है। जगह या पुनः आरक्षण करने की परेशानी नही रहेगी।
इसी तरह की लिंक एक्सप्रेस वाली प्रॉब्लम उत्तर रेलवे में भी है। गाड़ी है 14887/88 बाड़मेर कालका एक्सप्रेस और उसकी लिंक 24887/88 बाड़मेर हृषिकेश लिंक एक्सप्रेस इन गाड़ियोंका शंटिंग अम्बाला जंक्शन पर होता है।
पश्चिम रेलवे पर अलग परेशानी है। वहाँपर गाड़ियोंके गन्तव्योंको शार्ट टर्मिनेट याने मेन लाइन के स्टेशन तक नही लाया जा रहा और पहले ही खत्म किया जा रहा है।
79445/54 वांकानेर राजकोट डेमू को मोरबी तक ही चलाना याने वांकानेर – मोरबी डेमू रहेगी।
69118 दाहोद वडोदरा मेमू को दाहोद से गोधरा के बीच और 69189 आणंद दाहोद मेमू को गोधरा दाहोद के बीच ही चलाया जाएगा।
19269/70 पोरबंदर मुझफ़रपुर पोरबंदर एक्सप्रेस को निर्धारित मार्ग वीरमगाम, अहमदाबाद, महेसाणा की जगह वीरमगाम, चाँदलोडिया, मेहसाणा रास्ते से चलाया जाएगा। इसमें अहमदाबाद स्टेशन स्किप किया जा रहा है।
12267/68 मुम्बई सेंट्रल राजकोट मुम्बई सेंट्रल दुरन्तो एक्सप्रेस को जामनगर तक बढ़ाया जानेवाला था जिसे अब हापा तक ही बढ़ाया जाएगा।
59477/59476 पाटण मेहसाणा पाटण पैसेंजर की जगह 59477/59478 मेहसाणा पाटण मेहसाणा पैसेंजर जोड़ी को रद्द किया जाएगा।
12929/30 बलसाड़ दाहोद बलसाड़ इंटरसिटी एक्सप्रेस को दाहोद – गोधरा के बीच रद्द करने के बजाय अब वडोदरा – दाहोद के बीच रद्द किया जा रहा है। यानी यह गाड़ी वडोदरा – बलसाड़- वडोदरा इंटरसिटी एक्सप्रेस रह जाएगी।
19019/19020 बांद्रा फ़िरोजपुर बांद्रा एक्सप्रेस का मार्ग रतलाम – चित्तौड़गढ़ – चन्देरिया – कोटा ऐसे बदला जा रहा है। पहले यह गाड़ी रतलाम – नागदा – कोटा ऐसे मेन लाइन से चलती थी।
इस गाड़ी का मार्ग बदलने की वजह शायद इसकी 29019/29020 मंदसौर नीमच लिंक एक्सप्रेस का बन्द किया जाना है।
मित्रों, जीरो बेस टाइमटेबलिंग के इंपैक्ट, परिणाम और बहोत से आने वाले है। जैसे जैसे परीपत्रक जारी होंगे हम आपको उनसे अवगत कराते रहेंगे।
मित्रों, जुलाई माह सभी रेल यात्री को पता होता है, रेलवे टाइमटेबल नया आएगा। टाइमिंग्ज बदलेंगे। न सिर्फ यात्री बल्कि रेल कर्मचारियों और रेल फैन्स के लिए भी यह बड़ी उत्सुकता का विषय रहता है। आप मे से कइयोंको शायद पता नहीं पर लोग टाइमटेबल के अभ्यास में घंटो बिता सकते है।
इस बार रेलवे अपने टाइमटेबल को ज़ीरो बेस बनाने जा रही है। अब आप के मन मे यह उत्सुकता जागृत हुई होगी कि यह ज़ीरो बेस टाइमटेबल याने क्या? तो उसका मतलब यह है कि टाइमटेबल की सारी ट्रेन्स को ज़ीरो कर के एक एक गाड़ी की, उनके शेड्यूल की पुनर्रचना करना। जो भी गाड़ियाँ बहुत ज्यादा स्टापेजेस लेती है या जिनको यात्रिओंका रिस्पॉन्स कम है उनको टाइमटेबल से हटाना याने उनका चलन बन्द करना। तेज गाड़ियाँ चलाने के लिए ज्यादा जगह बनाना ताकी गाड़ियाँ बिना रुके लम्बे अन्तर तक चलती रहे। निजी गाड़ियाँ चलाने के पीछे भी यही कारण है।
एक एक ज़ोन इस झीरो बेस टाइमटेबलिंग पर काम कर रहा है। हाल ही में हमने पश्चिम और दक्षिण रेलवे के परीपत्रक की जानकारी आपको दी थी। इन झोन ने अपनी कई सवारी गाड़ियाँ रद्द कर दी है और साथ ही मेन लाइनपर चलनेवाली कुछ ऐसी एक्सप्रेस गाड़ियाँ भी रद्द की है जो बहुत अधिक स्टापेजेस लेती थी और जिनके स्टार्टिंग पॉइंट से एन्ड पॉइंट तक चलने में एवरेज स्पीड काफी कम था। आपको ज्ञात होगा मध्य रेलवे पर भी कई ऐसी एक्सप्रेस और सुपरफास्ट गाड़ियाँ भी है जिनके हर 25 किलोमीटर पर स्टापेजेस है। महाराष्ट्र एक्सप्रेस, सेवाग्राम एक्सप्रेस, संहयाद्री एक्सप्रेस यह कुछ उदाहरण है।
अब इस जीरो बेस टाइमटेबल के असर देखते है। यदि आप किसी छोटे गांव या शहर में रहते हो, यज्ञपि आप के गांव में रेलवे स्टेशन है, दिनभर में दो चार सवारी गाड़ी या एखाद एक्सप्रेस रुकती हो फिर भी आपके गांव में गाड़ी अब शायद ही रुकेगी। क्योंकि सभी पैसेंजर गाड़ियोंको एक्सप्रेस में बदला जा रहा है। पैसेंजर जैसी एक्सप्रेस / सुपरफास्ट एक्सप्रेस को या तो बन्द किया जा रहा है या फिर उनके स्टापेजेस रद्द कर उन्हें एक्सप्रेस की परिभाषा में लाया जा रहा है।
हो सकता है, की अब आपको हवाई जहाज की यात्रा करने के लिए जिस तरह कुछ किलोमीटर की यात्रा कर एयरपोर्ट पर जा कर अपनी यात्रा शुरू करनी पड़ती है, उसी तरह अब किसी ओर रेलवे जंक्शन पर ट्रेन की सवारी करने जाना होगा। या ऐसा भी हो सकता है की भले ही आप जिला मुख्यालय के स्टेशनपर रहते हो पर आपका रेलवे स्टेशन किसी ओर गांव 5-50 किलोमीटर दूर से आपको उपयोग में लाना पड़े। जी हाँ मित्रों, हम जलगाँव, पाचोरा, चालीसगांव, नांदगांव, नासिक इधर मलकापुर, नांदुरा, शेगांव, अकोला, बुराहनपुर, खण्डवा, हरदा जैसे स्टेशन्स की बात कर रहे है। इन स्टेशनोंपर भी एक्सप्रेस गाड़ियोंके स्टापेजेस रद्द किए जा सकते है।
एक बात हम आपको बताना चाहते है, यह ज़ीरो बेस टाइमटेबल के शुरुआती झटके रहेंगे। जैसे जैसे गाड़ियाँ अपने रूटीन में आते जाएगी वैसे स्टापेजेस में भी बदल हो सकते है और जो जो सवारी गाड़ियाँ बन्द हो रही है उनकी जगहोपर इंटरसिटी एक्सप्रेस, डेमू, मेमू या सबर्बन गाड़ियाँ जरूरत के हिसाब से शुरू की जा सकती है। अब आप इस बात की चिंता छोड़ दीजिए कि कोई गाड़ी आपके स्टेशन को स्किप करती जा रही है। यदि आपको उसी गाड़ी से यात्रा करनी है तो उसे अपने पास के किसी ऐसे स्टेशन से पकड़ेंगे जहाँ वह रुक रही हो।
हमारी रेल प्रशासन से भी यह गुजारिश है, EFT एक्स्ट्रा फेयर टिकट प्रणाली जारी रखे और हो सके तो उसे कम्प्यूटराइज भी कर लें। ताकी छोटे स्टेशनोंसे सफर करनेवाले या गाड़ी बदल कर यात्रा करने वाले यात्रिओंको लम्बी दूरी की रेल यात्रा करने का ‘टेलिस्कोपिक किराए’ का फायदा और सहूलियत दोनोंही मिले।
वैसे भी इस महामारी ने हमको काफी कुछ पाठ पढ़ाए है। ज्यादा जरूरी न हो तो लोग आजकल यात्रा टाल देते है। कई रेल गाड़ियाँ बन्द होने की वजह से यात्री अपनी रेल यात्रा के लिए दूर दूर से जहाँ ट्रेन सेवा उपलब्ध है, वहाँ जाकर अपनी यात्रा का प्रारंभ कर रहे या वहाँ गाड़ी छोड़ रहे है। ऐसे में आशा है, ज़ीरो बेस टाइमटेबलिंग से रेल यात्रिओंको ज्यादा परेशानी नही होना चाहिए।