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रेलवे में शिकायत? ट्वीट करें

आप रेल यात्री है, हमेशा रेल से सफर करते है, तो हम आपसे अनुरोध करते है, आप अपना खाता ट्वीटर पर जरूर खोल ले और ट्वीट करना सीख ले। रेलवे में शिकायत करने के लिए सबसे उपयुक्त साधन ट्वीटर है। रेल प्रशासन ने अपने सारे अधिकारियोंको ट्वीटरपर मौजूद रहते है। रेल के मंत्री से लेकर जनरल मैनेजर, DRM तक सारे आला अफसर ट्वीटर के जरिए जबाबदेही के लिए सतर्क रहते है। आपके एक ट्वीट करने से सम्बन्धित विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सबको अलर्ट पोहोंच जाता है और वह तुरंत ही शिकायत के समाधान हेतु यन्त्रणा को कामसे लगा देते है।

निम्नलिखित ट्वीटर पतोंपर आप अपनी शिकायत ट्वीट के जरिए भेज सकते है। ध्यान रहे, आप जिस झोन, मण्डल में यात्रा कर रहे है, उस एरिया के अफसर को जरूर ट्वीट में शामिल करें ताकी आपकी शिकायत का समाधान जल्द हो सकें।

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भारतीय रेल में आधुनिकता का नया वर्ष, पनवेल बनेगा प्राइवेट ट्रेनोंका हब।

भारतीय रेल नेटवर्क के विस्तार का इतिहास समझना हो तो रेलोंके भारत मे शुरू होने के दिनोंसे शुरवात करनी होगी। ब्रिटीशोंने अपने देश से कई कम्पनियों को भारत मे रेल नेटवर्क शुरू करने के लिए आमंत्रित किया था। अलग अलग संस्थानोंने यहाँ आकर रेल निर्माण के लिए कम्पनियां स्थापित कर, अपनी लाइनोंको बनाने में जुट गई और एक साथ कई जगहोंपर रेल पटरी बिछने का काम शुरू किया गया। आज भारतीय रेल भी अपना नेटवर्क इसी तर्ज पर PPP पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडयूल लाकर अपने संसाधनोंका, अपने रेल नेटवर्क के आधुनिकीकरण का विस्तार करने का प्रयास कर रही है।

हाल ही में आपने सुना होगा, रेलवे ने प्रायोगिक तौरपर प्राइवेट गाड़ियाँ चलाना शुरू कर दिया है। लखनऊ से नई दिल्ली तेजस एक्सप्रेस शुरू हो चुकी है और मुम्बई अहमदाबाद तेजस शुरू होने में चंद ही रह गए है।
इन प्राइवेट गाड़ियोंको मिलने वाले अच्छे रिस्पॉन्स को देखते रेल प्रशासन ने अपने 4 सबर्बन नेटवर्कों, दस रेल मार्गों और 5 नॉन सबर्ब रेल मार्गोंको प्राइवेट भागिदारोंके लिए खोलना निश्चित किया है। यह स्ट्रेटेजिक नीति है। इसके कई उद्देश्य निकल सकते है, जैसे यात्रिओंको बेहतर सुविधा अधिमूल्य पर प्रदान करना, रेल कर्मचारीओंके कामकाज में एक तरह का व्यापारिक दृष्टिकोण निर्माण करना, सेवाओं में स्पर्धाओं का निर्माण कर उनका स्तर बढाना, यात्रिओंको उच्चतम दर्जे की सेवाओंसे अवगत कराना।

आज ही टाइम्स ग्रुप के मुम्बई मिरर संस्करण के इस विषय पर एक विस्तृत लेख आया है। उस लेख में मुम्बई के लिए पनवेल स्टेशन को प्राइवेट ट्रेनोंका हब बनाए जाने की चर्चा की है। पनवेल से 11 जोड़ी प्राइवेट गाड़ियाँ शुरू करने की तैय्यारियाँ भी शुरू है।

इन 11 जोड़ी गाड़ियोंमे मुम्बई – भुसावल – इटारसी मार्गकी 5 गाड़ियाँ आ सकती है। पनवेल – कानपुर, मंडुआडीह, प्रयागराज इलाहाबाद, पटना। भुसावल होते हुए अजनी नागपुर। मनमाड़ होते हुए औरंगाबाद। मुम्बई – पुणे – सोलापुर मार्गपर पनवेल – चारलापल्ली सिकन्दराबाद, चेन्नई, कलबुर्गी और कोंकण रेलवे से मडगांव।

इस विस्तार कार्यक्रम के लिए वर्ष 2023 की समयसीमा तय की गई है। जैसे जैसे पार्टनर्स तय होंगे वैसे ही यह गाड़ियाँ चल पड़ेंगी। वर्ष 2022 तक सारी लाइनों का विद्युतीकरण का लक्ष्य निर्धारित है। लगभग सभी मेन लाइनोंका दोहरीकरण से बढ़ाकर तीन और चार लाइनोंमें विस्तार का काम युद्व स्तर पर किया जा रहा है। मालगाड़ियोंके लिए अलगसे ‘ DFC डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ का निर्माण हो गया है, कुछ मार्गपर गाड़ियोंके ट्रायल्स शुरू हो गए है। मुख्य मार्गोंके प्लेटफार्म 26 डिब्बोंके बनाए जा रहे है, जहाँ प्लेटफार्म कम है वहाँ नए प्लेटफार्म का काम चल रहा है, रेल प्रशासन की अतिरिक्त जगहोंपर मेमू ट्रेनोंके कारख़ाने, LHB कोच मेंटेनेंस के कारखाने, अतिरिक्त पिट लाइनें, गाड़ियाँ खड़ी करने, उनके रखरखाव के लिए विस्तरित ट्रेन टर्मिनल स्टेशन बन रहे है। आप देख सकते है आने वाले वर्षोंमें रेलवे में अमूलचूल परिवर्तन आने जा रहा है।

यह बातें रेल में होने वाले विकास की है। कही कही कुछ विस्तार गाड़ियोंकी फ्रीक्वेंसी याने साप्ताहिक की जगह हफ्ते में दो दिन, तीन दिन या रोजाना चलाकर होता है, कहीं गाड़ियोंके टर्मिनल स्टेशनोके बदलकर होता है तो कहीं गाड़ी को ही अपने पुराने गन्तव्य स्टेशन से विस्तरित किया जाता है। परिवर्तन नए सृजन का आभास है। जब जब कुछ नया आना है, पुराने को अपना स्थान छोड़ना है। कुछ यात्रिओंको लगता है, उनकी नियमित गाड़ियाँ उनसे छीन जाएंगी, उंन्हे यात्रा करने में संघर्ष करना होगा, यह लेख रेलवे में आनेवाले ट्राइमेंड्स, लोकविलक्षण बदलाव का आईना है।

आनेवाला हर बदलाव रेलयात्रिओंको नई नई सौगातें ही लेकर आए, यही आशा रेलयात्रीओंको रेल प्रशासन से है।

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सिकन्दराबाद रक्सौल हॉलीडे स्पेशल

सिकन्दराबाद से दरभंगा और रक्सौल के लिए स्पेशल गाड़ियाँ चलाई जा रही है, यह गाड़ियाँ नागपुर रायपुर होते हुए या बल्हारशाह गोंदिया रायपुर होते हुए चल रही है। यह नई हॉलिडे स्पेशल नागपुर इटारसी जबलपुर होते हुए चलेगी।

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रेल यात्री, शिकायत करें आसानीसे।

यात्रिओंकी सुविधा के लिए अब सिर्फ 1 हेल्पलाइन नंबर 139 और रेल मदत ऐप।

आज नववर्ष के पहले दिनसे, रेल प्रशासन ने अपने अलग अलग हेल्पलाइन नंबर बंद कर के उसकी जगह 139 और रेल मदत इस ॲप के जरिए यात्री की विविध सहायता और शिकायतोंका निवारण किया जाएगा।

इसके पहले रेल्वे द्वारा शुरू किये गए 139, केटरिंग सर्विसेस (1800111 321), जनरल शिकायत नंबर 138, सावधानता (152210)(सतर्कता) सुविधा, दुर्घटना संरक्षण( 1072), क्लीन माय कोच सुविधा (58888 / 138), लघु संदेश ( 97176 30982) (एसएमएस) के जरिए की जाने वाली विविध शिकायत और कंप्लेट मॅनेजमेंट सिस्टम सहायता पोर्टल हे सब टोल फ्री नंबर और पोर्टल 1 जानेवारी 2020 से बंद किये जाएंगे।

139 यह सहायता केंद्र नंबर शुरू रखा जायेगा, रेल्वे द्वारा यात्रिओंकी सेवा में नया पोर्टल रेल मदत जारी किया जा रहा है। इस सहाय्यता पोर्टल का यात्री अपनी हर शिकायत या समस्या का समाधान पाने जे लिए कर पाएंगे।

वैसे तो रेल प्रशासन ने दिनांक 15 जुलै 2019 से ही सेंटर फोर रेल्वे इन्फॉर्मेशन सिस्टीम (CRIS) इसे लॉन्च कर दिया है। शिकायतोंका वर्गीकरण कर रेल्वे ने हर तरह की शिकायत के लिए अलग नम्बर या अलग कोड तैयार किए थे। ये लगभग तीस से भी ज्यादा सहायता नंबर (हेल्पलाइन नंबर) यात्रिओंके सामने रख दिए गए थे। लेकिन इससे यात्री अपनी शिकायत करना भूल नम्बर डायल करने में ही उलझ जाता और कही कोई गलती हो गयी तो फोन डिस्कनेक्ट हो जाता। यह ठीक उस तरह की हालत हो जाती, क्यों हमने शिकायत करने की सोची? आखिरकार रेलवे ने सीधे 139 यह नंबर और एक यूनिक पोर्टल यात्रिओंकी सेवा में जारी किया।

यह व्यवस्था तो अब बन्द हो गयी है, लेकिन आपकी जानकारी के लिए बताते है की एक आम यात्री को शिकायत करना हो तो कितनी गम्भीर समस्या उसको सहन करनी पड़ती थी।

हेल्पलाइन नंबर –
रेल्वे गाडीमध्ये पानी, बिजली, और वातानुकुलित यंत्रणा सुविधा हेतु शिकायत के लिये, औऱ गाडी का स्टेट्स, सीट्स की स्थिति के लिए 139 नम्बर।

गाडीमें सुरक्षा संबंधित सहायता के लिए 182, छोटे बच्चोंके सहायता हेतु 1098, रेल्वे अपघात होने की अवस्था मे 1072, चलती हुई गाड़ी में साफसफाई के लिये 58888, सतर्कता सहायता के लिए 155210 सामान्य शिकायत दर्ज कराने के लिये नंबर 138

कुछ नम्बर्स फिलहाल शुरू है, इसीमे 139, केटरिंग सर्विसेस (1800111 321), सावधानता (152210)(सतर्कता) सुविधा, दुर्घटना संरक्षण( 1072), क्लीन माय कोच सुविधा ( 58888), लघु संदेश ( 9717630982)(एसएमएस) कंप्लेट मॅनेजमेंट सिस्टम सहायता पोर्टल यह सब टोल फ्री नंबर और पोर्टल एक जानेवारीपासून एक एक करके बंद किए जा रहे है।

सभी दुःखोंकी एक दवा – रेल मदत ॲप –

यह वाकई में यात्रिओंकी सभी दुविधाओं का समाधान करने वाला ऐप साबित होगा। यात्री की किसी भी शिकायत को इस ऐप के जरिए दर्ज करने के उपरांत, तुरन्त सम्बंधित विभाग को वह शिकायत वर्ग की जाएगी और यात्री का समस्या के निराकरण का कार्य शुरू हो जाएगा। यात्री को अपनी शिकायत के लिए अलग अलग दरवाजा खटखटाने की जरूरत ही नही पड़ेगी। इसके साथही सुरक्षा हेतु 182 नम्बर फ़िलहाल शुरू रखा जा रहा है।

आज नया साल शुरू हो रहा है, थोड़ा हास्य व्यंग्य कर लिया जाय –

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आपको तो पता है, पूछताछ वाली खिड़की पर किस कदर भीड़ रहती है और कैसे कैसे वाकए घटित हो जाते है।

रेलवे स्टेशन की भीड़ भरी पूछताछ वाली खिड़की पर जैसे तैसे एक महिला पहुँची।

पहले से ही परेशान क्लर्क : ” मैडम, कोहरे के कारण सभी ट्रेनें लेट हैं, इसके अलावा कुछ और पूछना चाहती है आप? ”

महिला : ” चलिए, यही बता दें, क्या इस ड्रेस में मैं मोटी तो नहीं लग रही हूँ ? ”

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