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रेल किराया बढ़ा –

रेल मंत्रालय द्वारा निर्धारित किया गया है की दिनांक – 01.01.20 से यात्री किराए में निम्न प्रकार से बढ़ोतरी की गई है।

1) उपनगरीय ( सिंगल यात्रा किराया ) – कोई बदलाव नहीं

2) मासिक टिकट ( उपनगरीय और गैर उपनगरीय) – कोई बदलाव नहीं

3) साधारण गैर वातानुकूलित (गैर उपनगरीय )

a) द्वितीय श्रेणी साधारण – 01 पैसे , प्रति यात्री ,प्रति किलोमीटर

b) शयनयान श्रेणी साधारण – 01 पैसे , प्रति यात्री ,प्रति किलोमीटर

c) प्रथम श्रेणी साधारण – 01 पैसे , प्रति यात्री ,प्रति किलोमीटर

4) मेल एक्सप्रेस गैर वातानुकूलित

a) द्वितीय श्रेणी (मेल एक्सप्रेस) – 02पैसे , प्रति यात्री ,प्रति किलोमीटर

b) शयनयान श्रेणी(मेल एक्सप्रेस)- 02पैसे , प्रति यात्री ,प्रति किलोमीटर

c) प्रथम श्रेणी(मेल एक्सप्रेस)- 02पैसे , प्रति यात्री ,प्रति किलोमीटर

5) वातानुकूलित श्रेणी

a) वातानुकूलित चेयर कार – 04 पैसे , प्रति यात्री ,प्रति किलोमीटर

b) वातानुकूलित तृतीय श्रेणी – 04 पैसे , प्रति यात्री ,प्रति किलोमीटर

c) वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी – 04 पैसे , प्रति यात्री ,प्रति किलोमीटर

d) वातानुकूलित प्रथम श्रेणी – 04 पैसे , प्रति यात्री ,प्रति किलोमीटर

दिनांक – 31.12.19 तक बुक किये गए आरक्षित टिकट पर किराये का अंतर नही लिया जायेगा।

यह फ्लैट किराया वृद्धि है, रिजर्वेशन चार्जेस, सुपरफास्ट चार्जेस में कोई बदलाव नही।

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रेलवे के सीज़न टिकट

सीज़न टिकट : याने एक ऐसा एडवांस प्रीपेड टिकट जो निर्धारित अवधि, वर्ग और अंतर के लिए जारी किया गया है।

सीजन टिकट मासिक और त्र्यमासिक अवधिके लिए जारी किया जा सकता है। इसके जारी करने के, इस्तेमाल करने के लिए नियम बनाए गए है।
सीजन टिकट जारी करवाने के लिए अर्जी करनी पड़ती है। रेलवे सीजन टिकट के साथ अपना एक पहचान पत्र भी देगी जिसका नम्बर आपके सीजन पास पर डला रहेगा। यात्रा के दौरान आपको रेलवे द्वारा जारी किया गया पहचान पत्र अपने सीजन पास के साथ दिखाना जरूरी है। सीजन टिकट खरीदते वक्त, आपके किसी भी फोटो सहित पहचान पत्र की आवश्यकता होगी। आपने जो भी पहचान पत्र अपने सीजन पास के लिए अर्जी के साथ जोड़ा है, उसका उल्लेख रेलवे द्वारा दिए गए पहचान पत्र पर रहेगा।

मासिक सीजन टिकट को MST और त्र्यमासिक सीजन टिकट को QST कहते है, आगे लेख में हम इन शॉर्ट फॉर्म्स का ही उपयोग करेंगे। MST केवल 150km के लिए ही जारी किया जाता है। इसके लिए अपवाद 1951 के पहलेसे जारी मुम्बई – पुणे 190km और मुम्बई – नासिक 183km के मार्ग है।
MST का किराया सवारी गाड़ियोंके 15 एकल यात्रा के लगभग रहता है और QST का किराया MST से 2.7 गुना ज्यादा रहता है। सीजन टिकट, सबर्बन खण्ड और नॉन सबर्बन खण्ड की सवारी गाड़ियोंके लिए केवल सेकन्ड क्लास और फर्स्ट क्लास के लिए ही जारी किए जाते है। चूँकि नॉन सबर्बन खण्ड में फर्स्ट क्लास नही होता इसलिए इन खण्डोंपर फर्स्ट क्लास सीजन टिकट जारी नही किए जाते।
नॉन सबर्बन खण्डोंपर भी सीजन टिकट केवल सवारी गाड़ियोंके लिए ही जारी किए गए है पर कुछ मेल / एक्सप्रेस गाड़ियोंको विविध जोनल रेलवे या डिवीजन अपने अधिकार में कुछ डिब्बों में सीजन टिकटधारी यात्रिओंको यात्रा करने की अनुमति देता है। इन अनुज्ञप्ति प्राप्त गाड़ियों, डिब्बोंके अलावा किसी भी दूसरे क्लास और गाड़ियोंमे सीजन धारकोंको यात्रा करनेकी अनुमति नही है।

सीजन पास धारक अपनी यात्रा सुपरफास्ट गाडीसे भी कर सकता है, जिसके लिए उसे अपनी यात्रा करनेसे पहले अपना सीजन टिकट दिखाकर सुपरफास्ट चार्जेस का ₹15/- का टिकट खरीदना होगा। यदि यात्री चाहे तो अपनी MST पास को सुपरफास्ट गाड़ी के 15 एकल यात्रा की रकम जो की 15 X ₹15=225/- और QST में 45 एकल यात्रा याने 45X₹15=675/- अलग से देकर सुनिश्चित कर सकता है।

सबर्बन खण्डोंपर जहाँ फर्स्ट क्लास उपलब्ध नही होनेसे वातानुकूलित कुर्सीयान लगाया जाता है, फर्स्ट क्लास के सीज़न टिकट धारी यात्री, उस मण्डलके रेल अधिकारियों की अनुमति के साथ वातानुकूलित कुर्सीयान में यात्रा कर सकते है।

आजकल सबर्बन खण्डोंपर वातानुकूलित EMU गाड़ियाँ चलाई जा रही है, जिसकी अलगसे किराया सूची है, उसीके अनुसार किराया देय रहेगा।
याद रहें, एक यात्री केवल एक ही सीजन टिकट खरीद सकता है। दो या ज्यादा सीज़न टिकटोंका क्लबिंग करना, अलग अलग पासेस से लम्बी यात्रा करना कानूनन जुर्म है। यदि इस तरह कोई यात्री करते हुए पकड़ा जाता है तो उसके सीजन टिकट रद्द किए जाएंगे और दण्डित भी किया जा सकता है।

विद्यार्थियों के लिए रियायती सीजन टिकट उपलब्ध है। इसके अलावा इज्ज़त मंथली पास और अधिक रियायती सीज़न टिकट के लिए अपने पास के रेल टिकट बुकिंग कार्यालय से सम्पर्क करें।

सीजन टिकट यात्रिओंसे रेल प्रशासन का आग्रह है, वह केवल निर्देशित गाड़ियों और डिब्बों में ही यात्रा करे। रिस्ट्रिक्टेड याने वर्जित गाड़ियोंमें और आरक्षित डिब्बो में यात्रा न करें। इस प्रकारकी यात्रा के लिए उंन्हे दण्डित किया जा सकता है।

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मुम्बई मण्डल में रेल ब्लॉक जारी है …..

मुम्बई मण्डल में और 15 जनवरी तक रेल ब्लॉक की सूचना है।

मुम्बईसे पुणे होकर पंढरपुर, विजयपुरा जानेवाली पैसेंजर, पुणे पनवेल पैसेंजर यह गाड़ियाँ रद्द रहेंगी।

जी हाँ, हुतात्मा एक्सप्रेस और 15 जनवरी तक दौंड बाईपास, अहमदनगर, कोपरगाँव होते हुए चलेगी। पनवेल, नासिक नही जाएगी।

मुम्बई कोल्हापुर के बीच चलनेवाली कोयना एक्सप्रेस 15 जनवरी तक पुणे कोल्हापुर के बीच ही चलेगी।

जानकारी के परिपत्रक देखे –

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अरे, साईड लो। प्राइवेट गाड़ियोंका जमाना आ रहा है।

लख़नऊ दिल्ली तेजस के बाद अब दूसरी प्राइवेट ट्रेन मुम्बई अहमदाबाद तेजस जनवरी 19 से शुरू होने जा रही है।

यकीन मानिए, करीबन दस लंबे रेल मार्ग, चार बड़े सबर्बन रेल नेटवर्क और पांच नॉन सबर्बन नेटवर्क प्राइवेट गाड़ियोंको उतारने के लिए निश्चित कर लिए गए है। लंबे रेल मार्ग में, मुम्बई से कोलकाता, गौहाटी, और चेन्नई, नई दिल्ली से मुम्बई, कोलकाता, बंगालुरु और चेन्नई, चैन्नई से कोलकाता और जोधपुर, तिरुवनंतपुरम से गौहाटी इन रेल मार्गोंकी अगले महिनेसे प्राइवेट ऑपरेशन के लिए टेंडरिंग प्रोसीजर शुरू हो जाएगी। मुम्बई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई की सबर्बन गाड़ियाँ भी प्राइवेट प्लेयर के हाथों सौपने की तैयारी है तो नॉन सबर्बन पॉपुलर रूट्स में, नागपुर – पुणे, कोटा – जयपुर, विसाखापट्टनम – तिरुपति, गोरखपुर – लखनऊ और चंडीगढ़ – लखनऊ यहाँपर भी प्राइवेट गाड़ियाँ चलाने की व्यवस्था पूरे ज़ोरोंपर है।
रेल प्रशासन का यह कहना है, पहलेसे चलनेवाली कोई भी गाड़ी रद्द नही होगी, जो भी प्राइवेट ट्रेन चलेगी, नई ही रहेगी। अब तक तो आपने प्राइवेट ट्रेनोंकी सारी खूबियों को जान ही लिया होगा, अत्यधुनिक आसान व्यवस्था, फाइव स्टार क्वालिटी खानपान, डायनामिक रेट के किराए यह सब किसी आम यात्री के लिए नही है। वैसे भी रेल प्रशासन आम यात्री को धीरे धीरे उन्नत स्तर पर लेके जा ही रही है। आम यात्री जनरल कोचेस से स्लिपर कोच और अब वातानुकूलित 3 टियर तक में यात्रा करने तक की मजबूरी में पोहोंच गया है।

जनरल डिब्बों में वह पहले भी यात्रा नही कर पाता था तब स्लिपर क्लास ही उसका सहारा था, अब तो स्लिपर क्लास की हालत जनरल से भी गईगुज़री रहती है। जनरल क्लास से ज्यादा किराया देकर भी जनरल क्लास जैसे ही यात्रा करना हो तो थोड़ा और ज्यादा देकर वातानुकूलित 3 टियर में ही क्यों न जाया जाए? इस तरह के ख्यालातों के चलते आजकल लोग अपनी यात्रा को वातानुकूलित 3 टियर में तब्दील कर रहे है। हालाँकि इन वातानुकूलित 3 टियर में भी अनाधिकृत यात्रिओंका आक्रमण होना शुरू हो गया है। क्या ड्यूटी पास वाले, ऑन ड्यूटी रेल कर्मचारी और MST पास वाले सभी लोग बेहिचक वातानुकूलित 3 टियर में यात्रा कर लेते है।

अब इन सभी परेशानियों से आपको दूर रहना है तो अपने आप को थोड़ा और, थोडासा और अपग्रेड करना जरूरी है। कैसे? हम बताते है, आपको कोई अतिरिक्त यात्रिओंकी तकलीफ नही चाहिए तो रेलवे की प्राइवेट गाड़ियोंको अपनाना होगा। किराया थोड़ा ज्यादा लगेगा पर आराम? पूछिए मत। आपको बिल्कुल हवाई जहाज की यात्रा का एहसास होगा इसकी गारंटी। प्लेटफार्म तो एयरपोर्ट लाईक बनाए जा ही रहे है, गाड़ियाँ भी एयर होस्टेस की तौर पर ट्रेन होस्टेस की मिजबानी से तैयार है।

बस! देखना है, जोर कितना बाजुएं क़ातिल में है। याने आपके बटुए में है।

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पांच जोड़ी गाड़ियोंका वाराणसी के बजाय मंडुआडीह बनेगा टर्मिनल ।

निम्नलिखित पांच जोड़ी गाड़ियाँ 1 जनवरीसे वाराणसी जंक्शन के जगह मंडुआडीह से चलेगी और लौटने में वाराणसी में खत्म होने की जगह मंडुआडीह तक जाएगी।