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माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय

मध्य रेल के महाप्रबंधक का भुसावल मण्डल का निरीक्षण दौरा सम्पन्न हुवा। इस निरीक्षण दौरे में भुसावल मण्डल के उल्लेखनीय कार्योंको पुरस्कृत किया गया। उसमें वर्मीकल्चर प्लांट एवं गार्डन, रेल्वेज में बायो टॉयलेट प्रोजेक्ट के लिए महत्वकांक्षी प्रकल्प है।

खण्डवा, बुरहानपुर, रावेर एवं भुसावल में निर्माणाधीन प्रकल्पोंका जायज़ा लिया गया। भुसावल स्टेशनपर मल्टीलाइन डिजिटल डिस्प्ले, प्लेटफार्म क्र 3/4 पर उद्यान एवं निर्माणाधीन आलीशान वातानुकूलित विश्रामालय शामिल है।

इस दौरे की प्रमुख उपलब्धी यह रही की भुसावल डिवीजन में गाड़ियोंकी स्पीड 110 km प्रति घंटा से बढाकर 130km प्रति घंटा की जानी है और भुसावल परिसर में रेल्वेसे वर्षों पुराना अतिक्रमण हटाकर खाली की गई जगह को उपयोग में लाया जायेगा। वहाँपर आनेवाले 2 वर्षोंमें MEMU गाड़ियोंके रखरखाव का कारखाना खड़ा किया जा रहा है। महाप्रबंधक की प्रेस मिट में बताया गया, इस 120 करोड़ के प्रकल्प निर्माण की निविदाएं पटना की कम्पनी के हक़ में जा चुकी है और निर्माण कार्य जल्द ही शुरू हो जाएगा। इससे स्थानिक युवाओंकों रोजगार के अवसर मिलने की आशा है।

एक विशेष बात का उल्लेख हम यहाँ पर करना चाहेंगे, प्रेस मिट में जो गाड़ियोंके स्पीड को 110 से 130 km प्रति घंटा बढ़ाने की बात हुई याने गाड़ियोंकी गति लगभग 18% बढ़ेगी। इससे क्या होगा आपको पता है? इससे गाड़ियाँ किसी एक स्टेशन से छूटने के बाद अपने अगले स्टॉप पर जल्दी पोहोंचेगी और जब अगले स्टेशनपर गाड़ी लेने के लिए जगह नही होगी, प्लेटफॉर्म खाली नही होगा तो गाड़ी आउटरपर खड़ी रहेगी, अब आप पूछोगे, इसका क्या हल है? तकलीफ़ यही तो है इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की, प्लेटफार्म के कमी की।

यह सब मुद्दें एकदूसरे से उलझे है। गाड़ियोंकी स्पीड बढ़ती है तो पूरे के पूरे टाईम टेबल की भी पुनर्रचना करनी पड़ेगी, तब ही तो इस स्पीड बढाने का फायदा मिल पाएगा। उधना जलगांव दोहरीकरण का गाड़ियोंके टाईम टेबल पर खासा असर नही हुवा है, आज भी पश्चिम रेलवे की लगभग सभी गाड़ियाँ घंटो पहले पालधी – जलगाँव स्टेशन के बीच आकर खड़ी हो जाती है जबकी जलगाँव स्टेशनपर उनके लिए 5 नम्बर का नया प्लेटफार्म का निर्माण किया जा चुका है। लेकिन जब तक जलगाँव – भुसावल 3/4 लाइन का निर्माण पूरा नही हो जाता तब तक उधना – जलगाँव दोहरीकरण का पूरा लाभ नही मिल सकता। क्योंकी किसी भी गाड़ी का टेक्निकल स्टॉपेज भुसावल ही है। स्टाफ़ बदलना, रखरखांव करना, गाड़ी में पानी भरना जिसके लिए गाड़ी को भुसावल में ही कमसे कम 10 मिनट रुकना है न की जलगाँव में। आज भी मध्य रेलवे की मुम्बई से आनेवाली गाड़ियाँ जलगाँव से सूरत की जानेवाली गाड़ियोंकी क्रॉसिंग जलगाँव में ही करनी पड़ती है, और यह क्रॉसिंग, भुसावल – जलगाँव तीसरी, चौथी लाइन के प्रोजेक्ट में, तरसोद के ROR रेल ओवर रेल ब्रिज से ही बिना किसी गाड़ी को रोके, सम्भव है।

तो मित्रों, यह सभी प्रोजेक्ट इस तरह एक दुसरेसे जुड़े होने के कारण एक एक उपलब्धि में पूरा बेनिफिट नहीं मिलेगा, सारे प्रोजेक्ट जब कम्प्लीट हो जाए तभी पूर्ण फलदायी होंगे। तब तक ” धीरे धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होए। माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय।” यह संत कबीर दास जी का दोहा याद रखिए।

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General Manager at Bhusaval division.

आज मध्य रेल के जनरल मैनेजर संजीव मित्तल अपने वार्षिक निरीक्षण हेतु भुसावल मण्डल के दौरे पर है।

यह एकदिवसीय निरीक्षण दौरा सुबह 9 बजे खण्डवासे शुरू हुवा। खण्डवा में उन्होंने स्टेशन का सर्क्युलेटिंग एरिया, टिकट परिक्षकोंके लिए बनाई गई नई लॉबी, गार्ड और लोको पायलट की लॉबी, नए बनाए गए फुट ओवर ब्रिज एवं सीसीटीवी रूम का निरीक्षण किया। इसके पश्चात कर्मचारीओंकी रनिंग रूम, OHE डिपो और राजभाषा, सुरक्षा पर रखी गयी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। खण्डवा से नेपानगर 39km का हाई स्पीड चालान क्षमता का निरीक्षण, चाँदनी स्टेशन का SSP रूम, असीरगढ़, बुरहानपुर स्टेशन का निरीक्षण, स्टेशन पर बने सीसीटीवी के कार्य का निरीक्षण, प्लेटफॉर्म क्र 2 पर बनी कुंडी भंडारा की गैलरी का अवलोकन। रावेर स्टेशन का निरीक्षण, ‘ फिट बॉडी फिट माइन्ड’ प्रदर्शनी, संगणकीय उद्घोषणा प्रणाली और वृक्षारोपण।

भुसावल में स्टेशन का निरीक्षण, प्लेटफार्म क्र 3/4 पर नए बनाए जा रहे वातानुकूलित विश्रामालय एवं प्लेटफार्म गार्डन, दक्षिण दिशा के वेटिंग हॉल में मल्टीलाइन ट्रेन डिस्प्ले, सर्क्युलेटिंग एरिया के गार्डन, गाड़ियोंकी टंकियोंमे तेजी से पानी भरने की QWS (क्वीक वॉटरिंग सिस्टम ) का निरीक्षण, महत्वकांक्षी वर्मी कल्चर प्लांट और रोपवाटिका, महिला रेल सुरक्षा बल की कर्मचारिओंकी बैरक का निरीक्षण, DRM ऑफिस में कंट्रोल ऑफिस का निरीक्षण इस तरह कार्यक्रम तय किया गया है।

कुछ दृश्य – (फोटो – राहुल)

प्लेटफॉर्म 3/4 पर बना गार्डन

General Manager at Khandwa – ( फोटो-मनोज सोनी, खण्डवा)

General Manager visiting at Kundi Bhandara gallery on platform no.2, Burhanpur, in his Bhusawal division inspection tour.

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यह क्या हो रहा है?

51421 / 51422 पुणे निज़ामाबाद पुणे पैसेंजर दिनांक 2 जनवरीसे 31 मार्च तक रद्द, 51033 / 51034 मुम्बई साई नगर शिर्डी मुम्बई पैसेंजर 27 दिसम्बर 2019 से 31 मार्च 2020 तक रद्द और 11001 / 11002 साई नगर शिर्डी पंढरपुर साई नगर शिर्डी एक्सप्रेस 27 दिसम्बर से 31 मार्च 2020 तक रद्द।

मध्य रेलवे ने आज परिपत्रक निकालकर यह फ़रमान जारी किया है। आने वाले 3 महीनोंमें, उपरोक्त 3 जोड़ी गाड़ियाँ सोलापुर डिवीजन के दौंड – मनमाड़ रेल सेक्शनपर रेल अनुरक्षण के काम के चलते रद्द की जा रही है।

निजामाबाद से पुणे के बीच 72 छोटे स्टेशनोंको जोड़नेवाली 51421 / 51422 यह सवारी गाड़ी अपने 771 km के रन को पूरा करने के लिए लगभग 22 घंटे का समय लेती है। इन दोनों स्टेशनोंको जोड़ने के लिए केवल यही एकमेव गाड़ी है, जो हमेशा असमय, लेट चलती है और अब 3 महीने की लम्बी अवधि के लिए रद्द की जा रही है। 51033 / 51034 की भी हक़ीक़त लगभग समान है। मुम्बई शिर्डी पैसेंजर गाड़ी, इस इलाके से मुम्बई को कनेक्ट करने वाली केवल एक ही गाड़ी है, जो पिछले 4 महिनेसे रद्द ही चल रही है और आगे के 3 महीने के लिए भी रद्द कर दी गयी है। वैसे तो मुम्बईसे शिर्डी के लिए हफ्ते में 4 दिन, 2 जोड़ी सुपरफास्ट गाड़ियाँ चलती है, लेकिन वे गाड़ियाँ मनमाड़ होकर चलनेसे, बेलापुर, अहमदनगर के यात्रिओंको मुम्बई के लिए सीधी कनेक्टिविटी नही दे पाती। 11001 / 11002 इस एक्सप्रेस के क्या कहने है? 7 स्लिपर, 1 वातानुकूलित 2 टियर, 1 वातानुकूलित 3 टियर और 7 डिब्बे सामान्य श्रेणी के ऐसी संरचना वाली, दो तीर्थोंको जोड़नेवाली, पर्यटकोंमें लोकप्रिय गाड़ी को भी 3 महीने के लिए रद्द किया जा रहा है।

माना की पुणे निजामाबाद पुणे यह सवारी गाड़ी है और उसका उत्पन्न कम हो सकता है, लेकिन मुम्बई शिर्डी मुम्बई में 2 स्लिपर, 1 AC, और पंढरपुर एक्सप्रेस में 7 स्लिपर, 2 AC इन दो गाड़ियोंके कलेक्शन का तो सवाल ही नही आ सकता। बात रही अनुरक्षण कार्य के लिए बन्द करने की तो और भी तो ढेरों गाड़ियाँ इस रेल खण्ड पर रोजाना चलती है? फिर छोटे स्टेशनोके, कम आर्थिक क्षमता वाले यात्रिओंसे ही खिलवाड़ क्यों? मुम्बई विजयपुरा / पंढरपुर शिर्डी सवारी गाड़ी मुम्बई से दौंड तक आकर रोजाना शिर्डी के 8 डिब्बे विभक्त करती है और बचे डिब्बे 4 दिन विजयपुरा और 3 दिन पंढरपुर जाते है। यह गाड़ी अहमदनगर, बेलापुर क्षेत्र में मुम्बई के लिए बेहद लोकप्रिय है, हमेशा फुल्ल चलती है।

आगे 51433/51434 निजामाबाद पंढरपुर निजामाबाद पैसेंजर 3 महीने के लिए याने मार्च एन्ड तक केवल नान्देड – पंढरपुर के बीच चलेगी याने नान्देड से निजामाबाद के बीच रद्द रहेगी।

नववर्ष का बड़ा अच्छा (?) तोहफ़ा मिला है, मनमाड़ दौंड सेक्शन के रेल यात्रिओंको। इस परिपत्रक को देखकर इस खण्ड के रेल यात्री बेहद आक्रोशित है। अहमदनगर दौड़ अहमदनगर रेल मार्ग पर 4 जोड़ी सवारी गाड़ी की जगहपर, 3 महीने, जनवरीसे मार्चतक केवल 2 जोड़ी सवारी गाड़ी रह जाएगी। नववर्ष का बड़ा अच्छा (?) तोहफ़ा मिला है, मनमाड़ दौंड सेक्शन के रेल यात्रिओंको।

यह है परिपत्रक –

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लीजिए, यह है तर्कसंगत किरायोंका आधार।

“हैं भाई? जे तुम लिख दोगे, इस प्रकार किराए लगाओ तो क्या वे तर्कसंगत हो गए? बात करते हो, हर क्लास का भाड़ा 120 दिन से 30 दिन के रिजर्वेशन के लिए डबल कर दो, हैं भाई, यह क्या बात हुई?” लाला जी उबल पड़े।

शायद लाला जी ने, रेलदुनिया का,

कैसे हो रेल किराए तर्कसंगत https://wp.me/pajx4R-A2

आर्टीकल पढ़ लिया था। वैसे भी लालाजी को महंगाई पर लेक्चर देना बेहद पसंद था। चाहे कोई चीज के दाम बढ़ जाए, लालाजी अपने कैलक्यूलेटर से सीधे कितने परसेंट महंगाई बढ़ गई इसका हिसाब फौरन निकाल देते। हाँ, यह आवाज तब तक तेज रहती जब तक उनके केंद्र सरकार की पेंशन में महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की घोषणा न हो जाए।

हम भी हर तरह के विवाद को सामनेसे झेलने तैयार थे। “चलिए, बैठकर बात करते है। एक एक प्वॉइंट आरामसे समझते है। लालाजी, जब कोई यात्री 120 दिन पहले याने बुकिंग ओपन होते ही अपनी सीट बुक कराने पोहोंच जाता है मतलब उसका यात्रा करना पूर्णतया निश्चित है, उसे हर तरह से कन्फर्म जगह चाहिए ही है, और वह अपनी यात्रा रद्द भी नही करने वाला, उसकी यात्रा भी बहोत करके लंबे अंतर की रहेगी और तत्काल वाली बर्थस का कोटा छोड़कर बाकी सारी बर्थस का बुकिंग उसके लिए उपलब्ध है, तो यह प्रिमियम सर्विस हुई के नही? और मुम्बई से वाराणसी याने 1500 किलोमीटर का टिकट वह निकालता है तो 20 की जगह 40 रुपए देने में ओवरऑल कितने परसेंट बढ़ जाएंगे? यह नॉन रिफंडेबल भी होना चाहिए चूँकि आप एडवान्स रिजर्वेशन करा रहे हो तो आपकी रेल यात्रा करना निश्चित है तो रद्दीकरण के वक्त रिफण्ड के केल्क्युलेशन में आरक्षण शुल्क के अलावा बाकी रकम पर कैंसलेशन चार्जेस काटकर बाकी रकम की वापसी होगी।

दूसरा प्वाइंट यह है, 120 दिन पहले टिकट आरक्षित करने के बाद, यात्री चेंज ऑफ नेम ( अपनी जगह अपने रिश्तेदार को यात्रा कराना ), चेंज ऑफ बोर्डिंग ( अपनी सुविधानुसार यात्रा जारी करने का स्टेशन बदलना ) या पोस्टपोनमेन्ट ऑफ जर्नी ( अपनी यात्रा की तारीख बदलना ) आदि कई तरीके अपनाकर अपनी यात्रा में बदलाव कर सकता है, इतनी सब सुविधा के चलते उसे थोड़ा ज्यादा प्रिमियम देने में परेशानी कैसी?

तीसरा मुद्दा यह है, जब ज्यादा प्रिमियम देने की बात आएगी, याने ज्यादा किराया लगने का सवाल आएगा तो गैरकानूनी तत्व अपनेआप इन टिकटोसे दूर रहेंगे। और यात्रा बदलाव के कुछ अलग रूल्स भी इन 120 दिन के एडवान्स रिजर्वेशन टिकटोंपर लगाए जा सकते है। इससे वास्तविक आरक्षण चाहनेवाले यात्रिओंके लिए सिटोंकी उपलब्धता बढ़ेगी। रेलवे का राजस्व बढ़ेगा, टिकट से होने वाली आय बढ़ेगी।”

लालाजी : ” भाया, थारी ये दलील तो ठीक है, पर किरायोंमे तो ऐसे ही बढ़ोतरी होण वाली है, इन छोटी बड़ी, मतलब 20 के 40 बढाके क्या हो जाएगा?”
” तो लालाजी, इसे ही तो तर्कसंगत कहते है। हम आपको यही तो समझा रहे है, की किराए सीधे परसेंटेज में न बढाते हुए, एक एक प्वॉइंट से सिलसिलेवार बढाए जाए, ताकी यात्री को समझ आए, वह किस सेवा के लिए क्या मूल्य चुका रहा है?”

आगे प्लेटफार्म टिकट भी प्रिमियम वाले होने जा रहे है। जब आप एयरपोर्ट जैसी सेवा चाहते है तो क्या उसका मूल्य नही देना पड़ेगा? बताइए, क्या आपके जमाने मे रेलवे प्लेटफॉर्मोंपर इतनी सफाई थी, फ्री इंटरनेट सेवा थी, पाँच तारा विश्रामालय थे? यह सब छोड़िए, बुनियादी बातें ही बता दीजिए, रैम्प, एस्कलेटर, लिफ्ट, भरपूर और आरामदायक आसन व्यवस्था, ढेरों लाइटें, पंखे, चिकनी फ्लोरिंग, वेदर शेड, साफ पेय जल, चिकित्सा सुविधा और क्या क्या।”

लालाजी : भाई, थारा सब सही है। सचमें आजकल स्टेशन जाऊँ तो ऐसा लागे है, की कोई परदेस में आ गया हूँ। चाल आगे देखां, बजट में क्या होता है।

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कैसे हो रेल किराया तर्कसंगत

जैसे ही बजट की डेट पास में आने लगती है, रेल किरायोंमे वृद्धि होने की चर्चा भी जोर पकड़ लेती है। किराया वृद्धि की चर्चा बहोत आम है। कई बजट हो गए, लेकिन रेल किराया जस की तस है। आखरी रेल किरायोंमे वृद्धि वर्ष 2014 में की गई थी। यह वृद्धि 14.2% यात्री किरायोंमे और 6.5% माल भाड़े में की गई थी।

इस बजट में रेलवे के आर्थिक, सांख्यिकी विशेषज्ञोंका अनुमान है रेल के यात्री किरायोंमे कमसे कम 5% से 10% की वृद्धि होगी। इसके कई कारण है। विगत वर्षोंमें आपने देखा होगा, महसूस भी किया होगा, रेजो अग्रिम आरक्षण अवधि याने एडवांस रिजर्वेशन पीरियड 120 दिनोंका है, जिसमे एक बेहतरीन सुधार किया जा सकता है। यदिलवे में सुधार, अद्यावतता, आधुनिकीकरण बहोत तेजीसे हो रहा है। स्टेशन बदल रहे है, ट्रेनोंके डिब्बे बदल रहे है। गाड़ियोंकी गति बदल रही है। हर वो साजसज्ज़ा, सुविधाएं रेल्वेमे उपलब्ध हो रही है, जिनकी कल्पना भी यात्रिओंमेंसे किसीने नही की होगी। अभीतक तो यह डेवलपमेंट फेज में था, अब इसके लिए कुछ चुकाने की बारी आ रही है।

गणित भी किरायोंकी वृद्धि की तरफ ही इशारा कर रहा है। रेलवे की हर वर्ष की आय में लगातार कमी आते जा रही है। वर्ष 2019 की अनुमानित आय में
₹.20,000 करोड़ की कमी दिखाई दे रही है। यह आय, वर्ष 2018 की तुलना में 600 करोड़ कम है जबकी खर्च में 4099 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। कैग के रिपोर्टस यह बताते है, रेलवे का वर्ष 2017-18 का परिचालन खर्च अपनी आय के मुकाबले 98.44% है, इसका सीधा मतलब यह है, रेलवे को 100 रुपये कमाने के लिए साढ़े अठ्यानवे रुपए की लागत आ रही है। जो की गत 10 वर्षोंमें सबसे खराब प्रदर्शन रहा है।

रेलवे के आर्थिक सलाहकार यात्री किरायोंमे वृद्धि तो करना तय है, लेकिन साथ ही इसको तर्कसंगत भी करना चाह रहे है। इसमें फ्लैट सभी वर्गोंमे वृद्धि करने के बजाय विशिष्ट श्रेणी, किलोमीटर अंतर, अलग गाड़ियाँ, अलग स्टेशन, अलगसे सुविधाएं निर्धारित की जा सकती है।

जब तर्कसंगतता की बात की जाती है तब बेसिक किरायोंमे सीधी वृद्धि के बजाए विशिष्ट डिस्टेन्स और क्लास पर निशाना किया जाता है। यहाँ पर हम एक सूचना देना चाह रहे है। जो अग्रिम आरक्षण अवधि याने एडवांस रिजर्वेशन पीरियड 120 दिनोंका है, जिसमे एक बेहतरीन सुधार किया जा सकता है। यदि 120 दिन के अवधि को कम करके 30 दिनों तक ले आना सभी आरक्षण करने वाले यात्रिओंको काफी सुविधाजनक है, लेकिन इससे रेलवे के मुद्राकोष में और निधि उपयोगिता में ( फण्ड कलेक्शन एन्ड यूटिलिटी ) भारी गिरावट आ सकती है। अतः रिजर्वेशन के अवधि को तर्कसंगत करना चाहिए। 120 से लेकर 30 दिनों तकके अग्रिम आरक्षण चार्जेस में उच्चतम अधिमूल्य ( हाई प्रिमियम ) जोड़ना चाहिए, जो अभी के दरोंसे दुगुना बढ़ाने तक की गुंजाइश है। यह एडवांस रिजर्वेशन प्रिमियम सभी वर्गोंके आरक्षण पर जोड़ा जा सकता है। ज्यादा तर आरक्षण की जरूरत 120 पहले, याने 4 माह पूर्व नही रहती, केवल पर्यटक यात्रिओंके ही कार्यक्रम इतने पहले तय हो जाते है और लम्बी यात्रा होने की वजह से, रेलवे के टेलिस्कोपिक फेअर स्किम के तहत इन यात्रिओंको रिजर्वेशन प्रीमियम का ज्यादा बोझ भी नही पड़ेगा। इसका मुख्य फायदा यह होगा की बिना वजह 120 दिन पहले ही आरक्षण करने वाले लोग और टिकटोंका गोरखधंधा करने वाले एजंट भी कम हो जाएंगे।

बाकी रेलवे में बढ़ती सुविधाएं, साफ सफाई और जबाबदेही के चलते आम यात्रिओंको किराया वृद्धि से कोई परेशानी नही होनी चाहिए।