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हरिद्वार की ओर जाने वाले यात्री कृपया ध्यान दे।

हरिद्वार की यात्रा करना कठिन होने वाला है, चूँकी उत्तर रेलवे के मोरादाबाद विभाग में रेलवे के अनुरक्षण कार्य चलाए जा रहे है, इसलिए कई गाड़ियाँ पुर्णतया रद्द तो कुछ हरिद्वार के पहले ही रद्द की जा रही है।

पश्चिम रेलवे की 19565/19566 ओखा देहरादून ओखा एक्सप्रेस दिनांक 15 नवम्बर से 02 फरवरी तक पुर्णतया रद्द रहेगी।

19031 /19032 अहमदाबाद हरिद्वार अहमदाबाद एक्सप्रेस 09 नवम्बर से 07 फरवरी तक मेरठ सिटी तक ही जाएगी और वहींसे अहमदाबाद के लिए रवाना हो जाएगी। यह गाड़ी मेरठ सिटी और हरिद्वार के बीच रद रहेगी।

14712 /14711 श्रीगंगानगर हरिद्वार श्रीगंगानगर एक्सप्रेस 10 नवम्बर से 07 फरवरी तक अम्बाला तक ही जाएगी और वहींसे श्रीगंगानगर के लिए रवाना हो जाएगी। यह गाड़ी अम्बाला और हरिद्वार के बीच रद रहेगी।

परिपत्रक

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रिजर्व क्लास में अनाधिकृत यात्री

कल रेलदुनिया पर ‘ प्राइवेटाइजेशन, रेलवे की हतबलता ‘ इस शीर्षक से एक आर्टिकल प्रकाशित किया गया था। उसी थ्रेड को आज आगे बढाते है।

कल के आर्टिकल के साथ तेजस एक्सप्रेस में मांगनेवाले की फोटो थी और हमने रिजर्व डब्बोंमे अनाधिकृत प्रवेश का विषय छेड़ा था। रिजर्व क्लास में AC के फर्स्ट क्लास , 2 टियर, 3 टियर, चेयर कार, 2S और स्लिपर क्लास के डिब्बे आते है। इन सबमे, सबसे ज्यादा परेशानी स्लिपर क्लास के कन्फर्म टिकट धारकोंको होती है।

रोजाना अप डाउन करनेवाले MST पास, सीजन टिकट धारक, वेटिंग लिस्ट के PRS टिकट धारी यात्री, अनाधिकृत विक्रेता, तृतीयपंथी, मांगने वाले, और तो और सेकंड क्लास के टिकट धारी यात्री यह सब लोग स्लिपर क्लास के डिब्बामे चलते रहते है। यह अधिकृत यात्रिओंके लिए बहोत बड़ी समस्या है, जिसपर नाही रेल मंत्री और नाही प्रशासन गौर करना चाहते है।

ह्यूमिनिटी ग्राउंड या कहें मानवता के आधार पर प्रतिक्षासूची के यात्री स्लिपर क्लास में अधिकृत यात्रिओंके साथ, उनकी अप्पर बर्थपर या पैसेज में बैठ कर सफर करते रहते है। तकलीफ यह है की PRS की टिकट वेटिंग रहने के बावजूद ऑटोमेटिक कैंसल नही होती और एक कन्फर्म टिकट जितना ही किराया दे चुके यात्री किसी हालात में स्लिपर डिब्बा छोड़ने को तैयार नही रहते। किसी न किसी मजबूरी में, इमरजेंसी में व्यक्ति को यात्रा के लिए निकलना पड़ता है। कोई नही सोचता की उसे वेटिंग टिकट पे यात्रा करनी पड़े। जब टिकट चार्टिंग के बाद भी वेटिंग रह जाए तो वह भी क्या करे? और कन्फर्म यात्री भी कभी न कभी इस दौर से गुजरा होता है, इसी ख़ातिर यह सब 72 और LHB में 81 व्यक्तियोंकी क्षमता के डिब्बो में दुगुने लोग डिब्बेके फर्श पर, पैसेजेस में, यहाँ तक की बर्थ के नीचे घुसकर अपनी यात्रा किसी तरह पूरी करते है।

प्रशासन की समस्या यह है, PRS में वेटिंग लिस्ट रहने वाले कितने लोग अपना टिकट कैसल करेंगे यह उन्हें पता नही रहता। याने गाड़ी में निश्चित रूपसे कन्फर्म यात्रिओंके साथमे और कितने सेकंड क्लास के यात्री, वेटिंग लिस्ट के यात्री सफर कर रहे है। जनरल डिब्बे में भी क्षमता से कितनेही ज्यादा लोग सफर करते रहते है, इसकी कोई भी निश्चित ख़बर रेल प्रशासन को है ही नही। सुनने में ही कितना भयावह लगता है?

मानवता के आधार पर सोचें तो, प्रतिक्षासूची के और सेकेंड क्लास के यात्रिओंने क्या रेलवे में बैठ कर जाने का, या शांति से सफर करने का सोचनाही नही चाहिए?और MST/QST धारक तो रेलवे के अग्रिम किराया दे चुके यात्री है, एखाद दो घंटे का सफर करते है, क्या इनके बैठ के जाने का कोई हक नही है?

इसके लिए कुछ हल, हम प्रस्तुत करने का प्रयत्न कर रहे है।

1) सर्व प्रथम PRS सिस्टम को पूर्णतया e टिकट में बदलने की जरूरत है, ताकी वेटिंग लिस्ट टिकट चार्टिंग के बाद अपनेआप रद्द हो जाए और रद्द हुवा टिकट धारी यात्री अपनी यात्रा की कोई दूसरी व्यवस्था की ओर ध्यान दे।

2) MST धारकोंको लिए विशेष डिब्बे का प्रावधान हो, ताकी वह इधर उधर बैठनेकी खड़ा होने की कोशिश न करके केवल अपने डिब्बे में ही सफर करेंगे।

3) अनाधिकृत विक्रेता, भीख मांगनेवाले और तृतीयपंथी से निपटने के लिए RPF कृतिदल बनाया जाए।

यह सब शीघ्रतासे बदलने की जरूरत है। आज इस लेख के माध्यम से हम रेल मंत्रीजी से गुजारिश करते है, उपरोक्त समस्योंमे दख़ल दे और इसका निराकरण अग्रक्रम से करें।

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वाह री तेजस!

यह तस्वीर तेजस एक्सप्रेस की है। शॉक्ड? जी हाँ, तेजस एक्सप्रेस की ही है। 22671 चेन्नई एगमोर से मदुराई जानेवाली तेजस एक्सप्रेस।

उपरोक्त तस्वीर ट्वीटर से प्राप्त की गई है और सम्बंधित ट्वीट भी आपके लिए लेख के उपरांत प्रस्तुत है।

भारतीय रेल्वेज की सबसे प्रतिष्ठित गाड़ियोंमे से एक गाड़ी तेजस एक्सप्रेस भी है और हाल ही में कुछ 2, तेजस गाड़ियोंका संचालन IRCTC के ज़रिए प्रायवेट हाथोंमें भी सौंपा गया है। IRCTC की लखनऊ नई दिल्ली तेजस का संचालन शुरू हो गया है और मुम्बई अहमदाबाद भी जल्द ही शुरू हो जाएगी।

अब प्रश्न यह आता है, की तेजस जैसी पूर्णतया वातानुकूलित, हर कोच में रेलवे का स्टाफ़ फिर वो AC अटेंडेंट हो क्यों न हो, मौजूद। हर कोच में सीसीटीवी की निगरानी, इतनी अद्यवत गाड़ियोंमे भी जब बेगर्स, भीख मांगनेवाले पहुंच जाते है तो आम गाड़ियोंकी सुरक्षाव्यवस्था की क्या हालत अपेक्षित रह सकती है?

आज भी रेलवे के अधिकृत टिकतधारक यात्री, रेल यात्रा करते वक्त अनाधिकृत, प्रतिक्षासूची के यात्री, जनरल टिकट के यात्री, अनाधिकृत विक्रेता, तृतीय पंथी, भीख मांगने वाले, इनसे झुझते हुये अपना सफ़र करते है। यह तकलीफें कम हो इसके लिए कोशिश करते है की उच्च वर्गमे याने AC के 2 टियर, 3 टियर में ज्यादा किराया दे कर यात्रा करें, लेकिन ऐसे दृश्य देखने के बाद, ऐसा लगता है, रेलवे प्रशासन अब इतना हतबल, अक्षम हो गया हैं की अपने कर्मचारियोंसे अब अपनी ड्यूटीही नही करवा पा रहा है और शायद इसी लिए अपनी सम्पत्ति याने अपनी गाड़ियाँ प्राइवेट पार्टीज को सौप रहा है।

यह बेहद पीडादायक है।

यही वह ट्वीट है,