27 जून 2024, गुरुवार, आषाढ़, कृष्ण पक्ष, षष्टी, विक्रम संवत 2081
खड़गपुर मण्डल में अण्डल स्टेशन पर दिनांक 29 जून 2024 से 08 जुलाई 2024 तक उपरोक्त ब्लॉक रहनेवाला है।
ब्लॉक के दौरान, खड़गपुर मण्डल की रद्द की जानेवाली EMU उपनगरीय गाड़ियाँ निम्नप्रकार है, परिपत्रक के प्रत्येक तिथिनुसार रद्दीकरण में गाड़ी क्रमांक दिए गए है।
रेल ब्लॉक के दौरान निम्नलिखित मेल/एक्सप्रेस/सुपरफास्ट गाड़ियाँ दर्शायी गई तिथियोंमे रद्द रहेंगी।
निम्नलिखित गाड़ियाँ परावर्तित मार्ग / रिशेड्यूल / आँशिक रद्द और नियंत्रित कर चलाई जायेंगी।
25 जून 2024, मंगलवार, आषाढ़, कृष्ण पक्ष, चतुर्थी, विक्रम संवत 2081
रेल प्रशासन पता नही किस विचारधारा में काम कर रहा है। पहले निम्नलिखित परिपत्रक देखिए,
20413/14 वाराणसी इन्दौर वाराणसी वाया सुल्तानपुर, लखनऊ, कानपुर काशी महाकाल द्विसाप्ताहिक एक्सप्रेस एवं 20415/16 वाराणसी इन्दौर वाराणसी वाया प्रयागराज काशी महाकाल साप्ताहिक एक्सप्रेस की कोच संरचना में बदलाव होने जा रहा है। इन फुल्ली रिजर्व्ड याने पूर्णतः आरक्षित यात्री गाड़ी में चार कोच द्वितीय साधारण (LWS) जुड़ने जा रहे है।
अब हम दिशाहीनता की बात करते है, जिसका उल्लेख हमने ब्लॉग के शीर्षक में किया है। पूर्णतः आरक्षित यात्री गाड़ी में द्वितीय साधारण कोच का जोड़ा जाना याने फिर वहीं अमर्याद अनारक्षित टिकटोंकी बिक्री और इन यात्रिओंकी आरक्षित कोच की ओर होनेवाली भागदौड़ शुरू हो सकती है।
भारतीय रेल में राजधानी, शताब्दी, दुरन्तो, हमसफ़र, गरीबरथ इस तरह की कुछ गाड़ियाँ फुल्ली रिजर्व्ड ट्रेन्स घोषित रहती है। इन गाड़ियोंके लिए यात्रा हेतु अनारक्षित टिकट नहीं दिया जाता। काशी महाकाल यह पर्यटकों के लिए शुरू की गई प्रीमियम गाड़ी थी। ‘थी’ इसलिए कहेंगे की अब द्वितीय साधारण के कोच संरचना के साथ यह गाड़ी शायद सर्वसाधारण मेल/एक्सप्रेस के श्रेणी की गाड़ी बन कर रह जाएगी। आगे चलकर इसके समयसारणी में भी सुपरफास्ट से साधारण मेल/एक्सप्रेस श्रेणी का पतन होता हुवा दिखाई दे सकता है।
मित्रों, रेल प्रशासन उक्त पर्यटक हेतु विशेष संचालित इस गाड़ी में यात्रिओंकी सुविधा बढाना चाहता ही है तो इन द्वितीय श्रेणी साधारण कोच को 2S श्रेणी में याने द्वितीय श्रेणी आरक्षित सिटिंग श्रेणी में चलाए। आम तौर पर पर्यटक कभी भी अनारक्षित स्वरूप में यात्रा नही करता। चूँकि पर्यटन यह एक पूर्वनियोजित संकल्पना है और अनारक्षित यात्रा यह आकस्मिक यात्रा का कारण है और इसीलिए यह अनारक्षित कोच इस पर्यटन गाड़ी में बेमानी लग रहे है।
क्या रेल प्रशासन द्वारा, इस तरह अपनी प्रीमियम गाड़ियोंका अवपतन दिखाई देगा? क्या अब अन्य प्रीमियम गाड़ियोंमे भी द्वितीय साधारण कोच जोड़े जाएंगे? यह शुद्ध ठोस निर्णयोंमें दिशाहीनता का दर्शक है।
24 जून 2024, सोमवार, आषाढ़, कृष्ण पक्ष, तृतीया, विक्रम संवत 2081
दक्षिण मध्य रेल, नान्देड़ मण्डल से गुजरने वाली और कुछ अन्य, कुल 5 जोड़ी, तिरुपति – अकोला – तिरुपति साप्ताहिक विशेष, पूर्णा – तिरुपति – पूर्णा साप्ताहिक विशेष, हैदराबाद – नरसापुर – हैदराबाद साप्ताहिक विशेष,तिरुपति – सिकंदराबाद – तिरुपति साप्ताहिक विशेष और काकीनाड़ा टाउन – लिंगमपल्ली – काकीनाड़ा टाउन त्रिसाप्ताहिक विशेष उक्त विशेष गाड़ियोंकी परिचालन अवधि इस वर्ष के सितम्बर अंत तक बढ़ा दी गई है।
पश्चिम रेलवे ने भी अपनी 16 जोड़ी विशेष गाड़ियोंकी परिचालन अवधिमें विस्तार किया है।
23 जून 2024, रविवार, आषाढ़, कृष्ण पक्ष, द्वितीया, विक्रम संवत 2081
मित्रों, आप रेल यात्रा में आरक्षित कोच में यात्रा करते हुए कई अवैध, अनाधिकृत यात्रिओंको अपने आसपास ‘एडजस्ट’ होते हुए देख चुके, और झेल भी चुके होंगे। यह सारे अमूमन चेकिंग स्टाफ़ की रिकॉर्ड तोड़ वसूली की परमिट धारी देन होते थे।
दरअसल चेकिंग स्टाफ़ की ड्यूटी अवैध के साथ साथ अनाधिकृत यात्रिओंसे दण्ड वसूलना और कानूनी कार्रवाई करना यह होती थी। मगर रिकॉर्ड कलेक्शन नए नए उच्चान्क करने के चक्कर मे यह चेकिंग दस्ते रेलवे प्लेटफार्म पर ही अपनी ‘दुकानदारी’ शुरू कर देते थे। जी, दुकानदारी यह शब्द जिस तरह आपको पढ़ने में भद्दा लग रहा होगा, हमे भी लिखने में असहज लग रहा है, मगर इनका रवैय्या इसी तरह का होता था। गाड़ी शुरू होने के पहले, प्लेटफार्म पर ही ‘एंटीसिपेटरी बेल, अतकपूर्व जमानत’ की तरह दण्ड की रसीदें काटी जाती थी। इससे स्लिपर क्लास के 80 यात्री क्षमता के कोच में 100, 150 यात्री घुसे रहते थे। वास्तविक यात्री जिसने महीनों पहले अपनी सीट/बर्थ बुक करा रखी है या तत्काल, प्रीमियम तत्काल जैसे अतिरिक्त किराए दे कर अपनी जगह आरक्षित की है उसे अपनी रेल यात्रा असहनीय हो जाती थी। महिला यात्रिओंको अपनी सीट से उठकर टॉयलेट तक पहुँचना असम्भव हो जाता था।
जिस यात्री के पास अनारक्षित टिकट होता था या PRS का वेटिंगलिस्ट टिकट होता था और उसे आरक्षित कोच में यात्रा करने की चाहत होती थी, वह गाड़ी में सवार होने के पहले ही सीधे इस चेकिंग दस्ते के पास पहुँच जाता था। चेकिंग बाबू उसे पेनाल्टी जोड़ कर उसके गन्तव्य का रसीद बना देते थे। यह उस यात्री के लिए आरक्षित कोच में सवार होने का सीधा परमिट बन जाता था। नियमानुसार होना यह चाहिए था, की यात्री को चलती गाड़ी में चेक किया जाए, यदि वह अनाधिकृत है, अवैध है ( इस अवैध और अनाधिकृत के बीच का फर्क हम हमारे पहले ब्लॉग में दे चुके है।) तो उसे दण्डित करे, कानूनी कार्रवाई करे।
अब यात्री खुद ही अपराध करने से पहले, अपराध करने का परमिट याने पेनाल्टी रसीद ले कर अनाधिकृत यात्रा कर रहा है तो आगे उसकी पूर्ण गन्तव्य स्टेशन तक की यात्रा तक कोई भी अन्य चेकिंग दस्ता उसका कुछ भी बिगाड़ नही सकता था और ना ही कोई कार्रवाई कर पाता था। क्योंकि किसी भी अपराध की सजा, दण्ड दोबारा नही किया जा सकता है।
चेकिंग स्टाफ़ के इस गोरखधंदे को हमने बार बार अपने लेख के द्वारा उजागर किया, रेलवे चेकिंग स्टाफ़ के इस तरह रेल आरक्षण काउंटर्स से समानांतर दुकानदारी पर रोक लगाने की माँग की।आखिरकार रेल प्रशासन ने इस ‘मालप्रेक्टिस’ को समझा और चेकिंग स्टाफ़ को अंतर्गत समझाईश दी गई।
साभार : इंटरनेट वायरल
अब आरक्षित कोच में अनारक्षित यात्री, वेटिंगलिस्ट यात्री, सीजन टिकट धारकके यात्रा करने पर कड़ाई से कार्रवाई की जा रही है। इस तरह के यात्रिओंको अब दण्डित कर अगले स्टेशनपर उतार दिया जाता है और अनारक्षित कोच में यात्रा करने का सुझाव दिया जाता है।
जिस तरह रेल प्रशासन अपनी नियमावली पर कड़ाई से कार्रवाई पर उतर आया है, यात्रिओंको भी चाहिए, प्रतिक्षासूची के टिकट चार्टिंग होने के बाद भी प्रतिक्षासूची में रह जाते है तो उन्हें रद्द कर धनवापसी ले लेना चाहिए और अनारक्षित टिकट लेकर अनारक्षित कोच में यात्रा करें। प्रतिक्षासूची के टिकट पर किसी भी तरह से आरक्षित कोच में यात्रा नही की जा सकती यह समझ लेवे। रेल विभाग अपने पहले निर्णयोंको में बदलाव कर, गाड़ी संरचना में अनारक्षित कोच की संख्या में वृद्धि कर रही है।