23 जून 2024, रविवार, आषाढ़, कृष्ण पक्ष, द्वितीया, विक्रम संवत 2081
मित्रों, आप रेल यात्रा में आरक्षित कोच में यात्रा करते हुए कई अवैध, अनाधिकृत यात्रिओंको अपने आसपास ‘एडजस्ट’ होते हुए देख चुके, और झेल भी चुके होंगे। यह सारे अमूमन चेकिंग स्टाफ़ की रिकॉर्ड तोड़ वसूली की परमिट धारी देन होते थे।
दरअसल चेकिंग स्टाफ़ की ड्यूटी अवैध के साथ साथ अनाधिकृत यात्रिओंसे दण्ड वसूलना और कानूनी कार्रवाई करना यह होती थी। मगर रिकॉर्ड कलेक्शन नए नए उच्चान्क करने के चक्कर मे यह चेकिंग दस्ते रेलवे प्लेटफार्म पर ही अपनी ‘दुकानदारी’ शुरू कर देते थे। जी, दुकानदारी यह शब्द जिस तरह आपको पढ़ने में भद्दा लग रहा होगा, हमे भी लिखने में असहज लग रहा है, मगर इनका रवैय्या इसी तरह का होता था। गाड़ी शुरू होने के पहले, प्लेटफार्म पर ही ‘एंटीसिपेटरी बेल, अतकपूर्व जमानत’ की तरह दण्ड की रसीदें काटी जाती थी। इससे स्लिपर क्लास के 80 यात्री क्षमता के कोच में 100, 150 यात्री घुसे रहते थे। वास्तविक यात्री जिसने महीनों पहले अपनी सीट/बर्थ बुक करा रखी है या तत्काल, प्रीमियम तत्काल जैसे अतिरिक्त किराए दे कर अपनी जगह आरक्षित की है उसे अपनी रेल यात्रा असहनीय हो जाती थी। महिला यात्रिओंको अपनी सीट से उठकर टॉयलेट तक पहुँचना असम्भव हो जाता था।
जिस यात्री के पास अनारक्षित टिकट होता था या PRS का वेटिंगलिस्ट टिकट होता था और उसे आरक्षित कोच में यात्रा करने की चाहत होती थी, वह गाड़ी में सवार होने के पहले ही सीधे इस चेकिंग दस्ते के पास पहुँच जाता था। चेकिंग बाबू उसे पेनाल्टी जोड़ कर उसके गन्तव्य का रसीद बना देते थे। यह उस यात्री के लिए आरक्षित कोच में सवार होने का सीधा परमिट बन जाता था। नियमानुसार होना यह चाहिए था, की यात्री को चलती गाड़ी में चेक किया जाए, यदि वह अनाधिकृत है, अवैध है ( इस अवैध और अनाधिकृत के बीच का फर्क हम हमारे पहले ब्लॉग में दे चुके है।) तो उसे दण्डित करे, कानूनी कार्रवाई करे।
अब यात्री खुद ही अपराध करने से पहले, अपराध करने का परमिट याने पेनाल्टी रसीद ले कर अनाधिकृत यात्रा कर रहा है तो आगे उसकी पूर्ण गन्तव्य स्टेशन तक की यात्रा तक कोई भी अन्य चेकिंग दस्ता उसका कुछ भी बिगाड़ नही सकता था और ना ही कोई कार्रवाई कर पाता था। क्योंकि किसी भी अपराध की सजा, दण्ड दोबारा नही किया जा सकता है।
चेकिंग स्टाफ़ के इस गोरखधंदे को हमने बार बार अपने लेख के द्वारा उजागर किया, रेलवे चेकिंग स्टाफ़ के इस तरह रेल आरक्षण काउंटर्स से समानांतर दुकानदारी पर रोक लगाने की माँग की। आखिरकार रेल प्रशासन ने इस ‘मालप्रेक्टिस’ को समझा और चेकिंग स्टाफ़ को अंतर्गत समझाईश दी गई।

अब आरक्षित कोच में अनारक्षित यात्री, वेटिंगलिस्ट यात्री, सीजन टिकट धारक के यात्रा करने पर कड़ाई से कार्रवाई की जा रही है। इस तरह के यात्रिओंको अब दण्डित कर अगले स्टेशनपर उतार दिया जाता है और अनारक्षित कोच में यात्रा करने का सुझाव दिया जाता है।
जिस तरह रेल प्रशासन अपनी नियमावली पर कड़ाई से कार्रवाई पर उतर आया है, यात्रिओंको भी चाहिए, प्रतिक्षासूची के टिकट चार्टिंग होने के बाद भी प्रतिक्षासूची में रह जाते है तो उन्हें रद्द कर धनवापसी ले लेना चाहिए और अनारक्षित टिकट लेकर अनारक्षित कोच में यात्रा करें। प्रतिक्षासूची के टिकट पर किसी भी तरह से आरक्षित कोच में यात्रा नही की जा सकती यह समझ लेवे। रेल विभाग अपने पहले निर्णयोंको में बदलाव कर, गाड़ी संरचना में अनारक्षित कोच की संख्या में वृद्धि कर रही है।







