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पश्चिम रेलवे की अतिरिक्त ग्रीष्मकालीन गाड़ियाँ

27 अप्रैल 2024, शनिवार, वैशाख, कृष्ण पक्ष, तृतीया, विक्रम संवत 2081

09121/22 वलसाड दानापुर वलसाड वातानुकूल विशेष का एकल फेरा वाया भुसावल, प्रयागराज छिंवकी

09129/30 बान्द्रा टर्मिनस रीवा बान्द्रा टर्मिनस साप्ताहिक अनारक्षित विशेष वाया भेस्तान, भुसावल, इटारसी, सतना

09557/58 भावनगर दिल्ली कैंट भावनगर साप्ताहिक TOD विशेष

09655/56 अजमेर उज्जैन अजमेर TOD विशेष, वाया चित्तौड़ गढ़, रतलाम, फतेहाबाद

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द म रेल SCR में काजीपेट – कोंडापल्ली के बीच रेल तिहरीकरण हेतु लगभग एक महीने का रेल ब्लॉक

18 गाड़ियाँ रद्द, 40 गाड़ियोंका मार्ग परिवर्तन, 18 गाड़ियाँ मधिरा स्टेशन नही रुकेंगी, 05 गाड़ियाँ नियंत्रित कर चलाई जाएगी।

25 अप्रैल 2024, गुरुवार, वैशाख, कृष्ण पक्ष, द्वितीया, विक्रम संवत 2081

रद्द की गई गाड़ियाँ :

अपने नियमित मार्ग की जगह, परावर्तित मार्ग से चलाई जानेवाली गाड़ियाँ :

निम्नलिखित 18 गाड़ियाँ अस्थायी तौर पर, मधिरा स्टेशन पर अपना नियमित स्टॉपेज नही लेगी

05 गाड़ियोंको मार्ग पर नियंत्रित कर चलाया जाएगा

सिकन्दराबाद मण्डल में कुछ गाड़ियाँ और भी रद्द/आंशिक रद्द की गई है।

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यात्रीगण कृपया ध्यान दें, अगले 45 दिन बारह जोड़ी गाड़ियाँ प्रयागराज जंक्शन होकर नही जाएंगी!

25 अप्रैल 2024, गुरुवार, वैशाख, कृष्ण पक्ष, द्वितीया, विक्रम संवत 2081

उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज जंक्शन पर प्रमुख उन्नयन कार्य के दृष्टिगत प्लेटफार्म क्रमांक 7 एवं 8 को बंद करने का निर्णय लिया गया है। परिणाम स्वरूप इन  प्लेटफॉर्म्स पर नियोजित बारह जोड़ी गाड़ियोंका मार्ग परिवर्तन निम्न विवरण के अनुसार किया जायेगा। इस अस्थायी मार्ग परिवर्तन की अवधि 45 दिनोंकी है। यात्रीगण से निवेदन है, तदनुसार अपनी रेल यात्रा का नियोजन करें,

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UTS टिकट बुकिंग में दायरे के नियम में सकारात्मक बदलाव

24 अप्रैल 2024, बुधवार, वैशाख, कृष्ण पक्ष, प्रतिपदा, विक्रम संवत 2081

UTS यह भारतीय रेल का ‘अनारक्षित टिकीटिंग सिस्टम’ ऍप, वेबसाइट है। 2014 में, मुम्बई उपनगरीय अनारक्षित टिकटोंके लिए इसे भारतीय रेल की इकाई CRIS द्वारा लाया गया। वर्ष 2015/16 में दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता एवं हैदराबाद के उपनगरीय रेल यात्राओं के लिए इसका विस्तार हुवा और वर्ष 2018 से, UTS द्वारा ग़ैरउपनगरिय क्षेत्रोंमें किसी एक क्षेत्रीय रेल के स्टेशन से अन्य क्षेत्रीय रेलवे के किसी भी स्टेशन के लिए अनारक्षित टिकट खरीदे जाने के लिए शुरू कर दिया गया।

अनारक्षित रेल टिकट इस ऍप के जरिए यात्री अपने अनारक्षित रेल टिकट, सीजन पास डिजिटली (E-टिकट) बनवा सकते है। ई-टिकट खरीदने के लिए यात्री को न टिकट खिड़कियों की लम्बी कतारों में खड़ा रहना है और न ही उसका कोई समय जाया होता है।

जब यह सेवा शुरू की गई थी तब यात्री के निकटतम स्टेशन से बाहरी सीमा दो किलोमीटर तक तय की गई थी। अर्थात स्टेशन से अधिकतम, दो किलोमीटर की दूरी से उक्त स्टेशन से किसी भी स्टेशन की टिकट यात्री UTS ऍप के जरिए खरीद सकता था। जिसमे रेल विभाग ने सुधार करते हुए क्रमशः पाँच किलोमीटर और आगे बीस किलोमीटर तक बढाया था। इससे रेलवे स्टेशन के निकटवर्ती गाँव, कस्बों के रेल यात्री, अपनी रेल यात्रा के लिए घर से निकलते ही रास्ते मे टिकट खरीद लेते थे।

उपरोक्त परिपत्रकानुसार अब इस बाहरी दूरी की सीमाओंको रेल विभाग ने पूर्णतः समाप्त कर दिया है। इसका अर्थ यह है, आप किसी भी स्टेशन से किसी भी स्टेशन का अनारक्षित टिकट UTS के जरिए खरीद सकते है।

गौरतलब यह है, UTS टिकट पर अनारक्षित टिकटों के सारे नियम यथावत लागू रहते है, रहेंगे। टिकट खरीदने के बाद उपनगरीय विभागों में 30 मिनट के भीतर यात्री को अपनी रेल यात्रा शुरू करनी होगी। यही समय सीमा ग़ैरउपनगरिय रेल क्षेत्रों में 3 घण्टे या प्रथम उपलब्ध यात्री गाड़ी यह रहेगी। इससे निकटतम जंक्शन से कनेक्टिंग रेल में यात्रा करने वाले यात्रिओंको काफी फायदा होगा।

चूँकि UTS टिकीटिंग का यह बदलाव बाहरी दायरे का ही है, भीतरी दायरे में अब भी यात्री रेल परिक्षेत्र में UTS ई-टिकट नही खरीद सकता। अर्थात यात्री रेल आहाते में, प्लेटफॉर्म्स पर बिना टिकट नही जा सकता और ना ही उस एरिया में UTS द्वारा अपना अनारक्षित ई-टिकट ख़रीद पाएगा।

कुल मिलाकर UTS टिकीटिंग की बाहरी सीमा को समाप्त करने से यात्रिओंको अनारक्षित टिकट निकालने के लिए आने वाली सारी बाधाओंको समाप्त कर दिया है।

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क्या रेल यात्रिओंका यह जुनून, हुजूम, संक्रमण काल के उन प्रवासियों की याद नही दिला रहा?

21 अप्रैल 2024, रविवार, चैत्र, शुक्ल पक्ष, त्रयोदशी, विक्रम संवत 2081

“भारतीय रेल की आरक्षण व्यवस्था पतन के बिल्कुल कगार पर खड़ी है।” यह बयान बहुत नाट्यमय लग रहा हो, मगर यह किसी हद तक सच है। महीनों पहले बुक किया आरक्षित टिकट हो या मुँह मांगा दाम चुका कर लिया गया प्रीमियम तत्काल का आरक्षण हो, आपको अपनी सीट पर बिठाकर यात्रा करने की शाश्वती नही देता। कोच की यात्री क्षमता महज एक ढकोसला बनकर रह गया है।

इस ग्रीष्मकालीन छुटियोंमे केवल एक क्षेत्रीय रेलवे, पश्चिम रेलवे 2200 विशेष अतिरिक्त फेरों का नियोजन कर रहा है और इसी तरह अन्य क्षेत्रीय रेलवे भी यात्रिओंके लिए अतिरिक्त गाड़ियोंकी व्यवस्था कर रहे है। इस वर्ष ग्रीष्मकालीन विशेष गाड़ियोंके फेरोंकी कुल संख्या करीबन दस हजार तक पहुंच गई है। इसके बावजूद नियमित मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंमे यात्रिओंका जुनून उन्हें उच्च वर्ग के कोचेस में अतिक्रमण करने को रोकने में असमर्थ हो रहा है।

रेल विभाग उसके काउंटर्स और UTS सिस्टम के जरिए प्रत्येक यात्री को उसकी माँग अनुसार टिकट देते जा रहा है। जिसका गाड़ियोंमे उपलब्ध अनारक्षित आसनों से कोई तालमेल नजर नही आता।

एक तरफ नियमित मेल/एक्सप्रेस की कोच संरचनामें पहले ही अनारक्षित कोच पर्याप्त नही थे और बचीखुची कसर रेल विभाग की ‘कोच संरचना मानकीकरण’ योजना ने पूरी कर दी। इस योजनाने नियमित मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंमे अपर्याप्त अनारक्षित कोच की पूर्वपार संख्या को और सिमटा दिया। ऐसे भी ग़ैरवातानुकूलित स्लिपर कोच में कम अंतर यात्रा करनेवाले यात्री, काउंटर से खरीदे हुए और चार्टिंग के बाद प्रतिक्षासूची में कायम रहे चुके यात्री बेहिचक यात्रा कर जाते थे, अब तो रेल विभाग की रेलवे प्लेटफॉर्म्स पर सुपर तत्काल व्यवस्था (?) कार्यरत है। टिकट चेकिंग दस्ते उन्हें प्लेटफॉर्म्स पर ही अनाधिकृत यात्रा शुरू करने से पहले ही दण्डित कर ‘पैनाल्टी रसीद के तौर पर, आरक्षित कोचों में यात्रा करने का अग्रिम परमिट पकड़ा देते है। यह यात्री भी स्लिपर कोचों में गाड़ी के प्रारम्भिक स्टेशनोंसे से ही “बोनाफाइड पैसेंजर” टिकट चेकिंग स्टाफ़ द्वारा ‘प्रमाणित प्रमाणपत्र’ पेनाल्टी रसीद लेकर जम जाते है। तातपर्य यह है, नियमित मेल/एक्सप्रेस के कुल स्लिपर समेत 7, 8 ग़ैरवातानुकूलित कोच अपने प्रारम्भिक स्टेशन से ही खचाखच भर जाते है। आगे के प्रत्येक स्टेशन पर अनारक्षित टिकट धारकोंकी यह कहानी दोहराई जाती है और गाड़ियोंमे यात्रिओंका हुजूम बढ़ते चला जाता है।

याद कीजिए, यह वहीं उत्तर भारतीय प्रवासी है, जो संक्रमण के फैलाव की रोकथाम के हेतु यात्री गाड़ियोंके बन्द किए जाने पर पैदल ही हजारों किलोमीटर की यात्रा के लिए निकल पड़े थे। आज जब गाड़ियाँ सामने खचाखच भरी दिख रही है तो कोच के टॉयलेट, पैसेज, वेस्टिब्यूल और दरवाजों में लटक कर यात्रा को अन्जाम तक पहुँचाने का जुनून रखते है। इतना भयंकर जुनून इन यात्रिओंपर सवार होता है, की इन्हें अपने जीवन तक की परवाह नही है तो उच्च वर्ग के कोचों में अनाधिकृत प्रवेश की क्या होगी? उच्च वर्ग के कोचेस में कोई एखाद दो अनाधिकृत यात्री पाए जाते तो उनसे ड्यूटी स्टाफ़ निपटने का प्रयत्न करेगा मगर 50, 100 यात्रिओंके हुजूम को यह वाणिज्यिक कर्मी अकेले किस तरह झेल पाए?

टिकट बुकिंग पैटर्न देखिए, आजकल यात्री भले ही लम्बी दूरी की यात्रा करने का इच्छुक हो और उसे उसके निर्धारित गन्तव्य का आरक्षण न मिल पाए तो वह जहाँ तक की आरक्षित टिकट मिल जाए (जॉइनिंग स्टेशन के खाली कोटे में) खरीद कर गाड़ी में चढ़ जाता है और बुक्ड स्टेशन पर जगह खाली करने मे आनाकानी करता है। जे उसने अपनी आरक्षित सीट छोड़ भी दी तो कोच नही छोड़ता, वही आसपास जमे रहता है। ऐसे यात्री भी गाड़ियोंमे भीड़ करते नजर आएंगे। अब रेल टिकट बुकिंग में यात्री की मंशा समझने की तकनीक तो है नही, के वह यह भी सोच ले, गन्तव्य स्टेशन पर यात्री अपने नए आए हुए यात्री के लिए जगह खाली नही करेगा?

रेल विभाग ने एक अरसे से अपना एमिनिटीज स्टाफ़ कम कर के बहुत बड़ी चूक कर दी है। पहले प्रत्येक आरक्षित कोच चाहे वह वातानुकूल हो या ग़ैरवातानुकूलित चल टिकट निरीक्षक TTE रहता ही था, जो प्रत्येक आरक्षित यात्री का लेखाजोखा रखता था। साथ ही अनाधिकृत अवैध यात्रिओंकी घुसपैठ को भी कड़ाई से रोके रखता था। धीरे धीरे रेल विभाग टिकट चेकिंग की मूल्यावर्धित आय के ऊँची छलांगे लगाते लक्ष्यों की ओर आकर्षित होता गया और आरक्षित यात्रिओंकी सारी सुख-सुविधाओं को उसने ताक पर रख दिया। अब पूर्ण 22 कोच की गाड़ियोंके 20 यात्री कोच में बमुश्किल 2 से 3 TTE, कन्डक्टर एमिनिटी स्टाफ़ की ड्यूटी पर होते है, जो अपना काम सुचारू रूप से कतई नही कर पाते।

दूसरा कारण है, यात्रिओंका हुजूम, जुनून। कोई इनको समझाए, प्रशासनिक कायदे, कानून आम जनता याने उनके स्वतः के हितों को सहेजने के लिए बने है। अनारक्षित कोच पर यात्री क्षमता जब 90/100 यात्री लिखी हो तो उसमे 500 यात्री क्यों सवार होना चाहते है? इस तरह तो दस हजार क्या लाख भर के फेरे चलवा दिए तब भी कम पड़ेंगे और यह रोडवेज नही है, इस पर मनमाने तरीके से गाड़ियाँ नही चल सकती, न ही यात्री लद सकते है। रेल परिवहन के अपने नियम, तरीके और क्षमताएं है।

शायद वह वक्त दूर नही, की अब रेल प्रशासन मिक्स्ड यात्री वर्ग की गाड़ियाँ चलाना बन्द कर दे। ग़ैरवातानुकूलित गाड़ियाँ अलग चलेंगी और वातानुकूल गाड़ियाँ बिल्कुल अलग। हवाई जहाज की तरह सम्पूर्ण वातानुकूल गाड़ियाँ 500/1000 किलोमीटर बिना रुके चलेगी और ग़ैरवातानुकूलित गाड़ियाँ अपने सभी नियमित स्टोपेजेस के साथ चलती रहेंगी। रेल विभाग की वन्दे सीरीज शायद इस तरह की गाड़ियोंके परिचालन का आगाज़ है। कम अंतर के लिए मेमू, वन्दे मेट्रो गाड़ियाँ आ गई है, आने जा रही है। जो 300 से कम किलोमीटर के गन्तव्य के यात्रिओंको साधेंगी।

लम्बी दूरी की, किसी भी तरह की गाड़ी चाहे वह ग़ैरवातानुकूलित अमृत भारत ट्रेन हो या सम्पूर्ण वातानुकूल वन्देभारत स्लिपर ट्रेन हो पूर्णतः आरक्षित ट्रेन रहें। द्वितीय श्रेणी के लम्बी दूरी के टिकटोंको 2S आरक्षित श्रेणी में बदला जाना चाहिए। फिलहाल चल रही, लम्बे अंतर की नियमित मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंमे भी ARP किसी भी अग्रिम आरक्षण तिथि को आधार बनाकर अनारक्षित टिकट बुकिंग को पूर्णतः बन्द करना आवश्यक है।

300 किलोमीटर से ज्यादा अंतर का अनारक्षित टिकट और उसपर की जाने वाली 36, 48 घण्टों की रेल यात्रा अमानवीय श्रेणी में समझ, उसके आबंटन पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। काउंटर्स पर बेचे जानेवाले PRS प्रतिक्षासूची टिकट भी तत्काल स्वरूप में बन्द करना होगा। अवैध यात्रा करने के अग्रिम परमिटों की जो दुकानदारी रेलवे प्लेटफार्म पर चलाई जा रही है, उसे बन्द करना होगा। ट्रेनोंसे उतरने वाले यात्रिओंके टिकटोंकी की जाँच के साथ अब प्लेटफॉर्म्स पर अन्दर आने वाले सम्भावित यात्रिओंके टिकटोंकी जाँच करना होगा। आनेवाले 60 मिनटों में यदि कोई अनारक्षित ट्रेन न हो तो उस टिकटधारियों का प्लेटफॉर्म्स पर प्रवेश रोक दिया जाए।

रेल विभाग को यदि अपनी यात्री व्यवस्था में सुधार करना है तो इस तरह के कड़े निर्णय लेना ही होगा।

( आरक्षित कोचों में अवैध घुसपैठ के अनगिनत वीडियो, तस्वीरें सोशल मीडिया पर उपलब्ध है। कई तो हम हमारे ब्लॉग में पहले डाल भी चुके है और पाठक भी इन परिस्थितियों से भलीभाँति अवगत है। इसीलिए प्रस्तुत लेख में उन्हें जोड़ने के लिए, कटाक्ष से टाला गया है।)