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भारतीय रेल के लोको हमे देश के सैनिकोंके सर्वोच्च बलिदान की याद दिलाएंगे।

15 मार्च 2024, शुक्रवार, फाल्गुन, शुक्ल पक्ष, षष्टी, विक्रम संवत 2080

भारतीय रेलवे ने हाल ही में अपने इंजनों, लोको का नवीनीकरण और रंग-रोगन शुरू किया है, और प्रत्येक इंजन शहीद सैनिक के नाम के साथ शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है….🫡

यह भारतीय रेलवे द्वारा शुरू की गई, प्रशंसनीय पहल है। देश के प्रत्येक नागरिक को यह पता होना चाहिए, देश का जवान, देश का सैनिक, देश की सुरक्षा और शांति के लिए मुस्तैद है और इसके लिए वह अपनी असीम पराकाष्ठा के साथ आवश्यकता पड़ने पर अपना सर्वोच्च बलिदान भी देने में हिचकिचाता नही। ऐसे वीर जवानों का नाम, देश को सदा स्मरण रहे, इस के लिए भारतीय रेल के लोको, जो भारतीय रेल के मानबिन्दु है, उनपर अंकित किया जाना यह पूरे देश के लिए गौरव है।

हम भारतीय रेल के इस अनुपम प्रयास की प्रशंसा करते है।

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बड़ी खबर : गरीब रथ वातानुकूल गाड़ियोंके पुराने कोच, वातानुकूल थ्री टियर इकोनॉमी में बदले जाएंगे।

14 मार्च 2024, गुरुवार, फाल्गुन, शुक्ल पक्ष, पंचमी, विक्रम संवत 2080

आज भारतीय रेल मुख्यालय द्वारा एक राहत भरी सूचना जारी की गई। वातानुकूलित गरीब रथ गाड़ियोंकी कोच संरचना में लगे, पुराने (साइड मिडल बर्थ वाले) ICF कोच बदल कर अब वातानुकूल थ्री टियर इकोनॉमी के कोच लगाए जाएंगे। इन बदले कोचों से अब गरीब रथ के यात्रिओंका ‘साइड मिडल बर्थ’ वाली परेशानी से छुटकारा मिलने जा रहा है।

फोटो : indiarailinfo.com के सौजन्य से
गरीब रथ गाड़ी की ‘साइड मिडल बर्थ’☺️

दरअसल यह बदलाव इसलिए होने जा रहा है, ICF इंटीग्रल कोच फैक्ट्री पेरंबूर ने गरीब रथ के कोच का निर्माण बन्द कर दिया है और गरीब रथ गाड़ियोंके पुराने होते जा रहे कोचों को अन्य कोई पर्याय नही रह गया है। चूँकि गरीब रथ गाड़ियाँ फिलहाल यथावत परिचालित करना है तो उनके पुराने ICF कोच जिनकी ‘कोडल लाइफ’ खत्म होने के कगार पर है और उन्हें अन्य कोच में बदलना जरूरी हो गया है। तब सामने वातानुकूल थ्री टियर इकोनॉमी कोच का ही विकल्प बेहतर था, जिसे अपनाया जा रहा है। आगे हम रेल प्रशासन के  उक्त परिपत्रक का सीधा अनुवाद दे रहे है,

“ICF गरीब रथ कोचों का उत्पादन बंद कर दिया गया है और इन्हें LHB AC 3 टियर इकोनॉमी क्लास (LWACCNE) कोचों से बदला जाना है। तदनुसार, चरणबद्ध तरीके से ICF गरीब रथ (WACCNH) कोचों को LWACCNE कोचों से बदलने का निर्णय लिया गया है: –

  1. उत्तर रेलवे के स्वामित्व वाले सभी नौ गरीब रथ रेकों को एलएचबी एसी-III इकोनॉमी क्लास (एलडब्ल्यूएसीसीएनई) कोचों से बदला जाना चाहिए। एनईआर और उपरे NWR से उत्तर रेलवे NR के गरीब रथ रेक के रूपांतरण के लिए वातानुकूल थ्री टियर इकोनॉमी कोचों की संचलन योजना अनुबंध “ए” (संलग्न) में दर्शाई गई है।
  2. उत्तर रेलवे NR के गरीब रथ कोचों को वातानुकूल थ्री टियर इकोनॉमी कोचों से बदलने पर, उत्तर रेलवे से जारी आईसीएफ गरीब रथ कोचों को अनुबंध “बी” (संलग्न) में दर्शाए अनुसार अन्य क्षेत्रीय रेलवे में स्थानांतरित किया जाना चाहिए।
  3. इन रेक की किराया संरचना गरीब रथ ट्रेनों के वर्गीकरण के अनुसार जारी रहेगी।”
वातानुकूल थ्री टियर इकोनॉमी के प्रत्येक 50 कोच पूर्वोत्तर रेलवे NER एवं उ प रेल्वे NWR से उत्तर रेलवे NR को भेजे जाएंगे।
उत्तर रेलवे NR के 174 पुराने गरीब रथ कोच 11 अन्य क्षेत्रीय रेलवे को भेजे जाएंगे।

कुल मिलाकर बात यह है, कोच बदलने की प्रक्रिया उत्तर रेलवे की गरीब रथ गाड़ियोंसे शुरू होगी और शनै शनै अन्य क्षेत्रीय रेलवे की सभी गरीब रथ गाड़ियोंमे लागू होगी।

यात्रीगण को सूचित कर रहे है, भले ही गरीब रथ के कोच वातानुकूल थ्री टियर इकोनॉमी में बदले जाए मगर रेल प्रशासन ने गरीब रथ गाड़ियोंकी किराया श्रेणी को फिलहाल यथावत रखने का निर्णय लिया है।

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पश्चिम रेलवे की होली विशेष गाड़ियाँ

12 मार्च 2024, मंगलवार, फाल्गुन, शुक्ल पक्ष, तृतीया, विक्रम संवत 2080

भारतीय रेल में, होली त्यौहार के लिए मुम्बई क्षेत्र से उत्तरी भारत की ओर जाने के लिए यात्रिओंकी भारी मांग रहती है। इसी के मद्देनजर पश्चिम रेलवे ने विशेष गाड़ियोंका आयोजन किया है।

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प्रधानमंत्री आज विविध परियोजनाओं का शिलान्यास एवं राष्ट्र को समर्पित करेंगे

12 मार्च 2024, मंगलवार, फाल्गुन, शुक्ल पक्ष, तृतीया, विक्रम संवत 2080

भारतीय रेलवे की ओर से जारी परिपत्रक,

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दो गाड़ियाँ, जिन्होंने यात्रिओंको बडी लम्बी प्रतीक्षा करवाई; 12 मार्च को हो रहा शुभारम्भ!

सनावद – खण्डवा और उज्जैन – चित्तौड़ गढ़ के बीच मेमू गाड़ी एक लंबा इंतज़ार और आज आई तारीख़ 12 मार्च!!

10 मार्च 2024, रविवार, फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, अमावस्या, विक्रम संवत 2080

09 जनवरी 2023 को सुरक्षा निरीक्षण हो चुके खण्डवा – सनावद रेल मार्ग पर दिनांक 12 मार्च को , करीबन 14 माह के बाद यात्री गाड़ी का शुभारंभ होने जा रहा है। यूँ कहे तो यह अमान परिवर्तन के इन्दौर – खण्डवा खण्ड का छोटासा 54 किलोमीटर का खण्ड है, जिसने वर्ष 2008 में अपनी पटरियाँ, यात्री गाड़ियाँ खो दी थी। (सनावद – खण्डवा – अकोला मीटर गेज खण्ड 01 जनवरी 2017 में गेज परिवर्तन के लिए बन्द किया गया।) चलिए, देखते है लम्बी प्रतीक्षा के बाद खण्डवा – सनावद को क्या मिला है!

01091/92 खण्डवा – सनावद – खण्डवा TOD विशेष मेमू

8 कोच और परिचालन सप्ताह में पाँच दिन, दोनों दिशाओं में प्रत्येक सोमवार, मंगलवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार को चलेगी।

वैसे ज्ञात रहे,

यह खण्ड पश्चिम रेल के रतलाम मण्डल का है और इस पर सेवा मध्य रेल का भुसावल मण्डल देगा, क्योंकि रतलाम मण्डल की इन्दौर – खण्डवा सम्पर्कता गेज परिवर्तन के विलम्बित कार्य के वजह से अधर में है।

अब इसी रतलाम मण्डल की एक अति – विलम्बित और यात्रिओंको लम्बी प्रतिक्षा करवाने वाली उज्जैन – चित्तौड़गढ़ – उज्जैन मेमू को भी आखिरकार 12 मार्च को पटरी पर दौड़ना नसीब होने वाला है।

उद्धाटन विशेष

चूँकि इस गाड़ी के शुरू होने में कई स्थानीय रुकावटें, उलझनें थी और उनके चलते यह गाड़ी बार बार घोषित होते चलने की रह जाती थी। यूँ तो परिपत्रक में इसे प्रतिदिन परिचालित दिखाया गया है, मगर ‘फ़ुटनोट’ देखें, समस्याएं अभी खत्म नही हुई है और नियमित समयसारणी जारी होने के लिए हो सकता है, थोड़ी प्रतीक्षा बढ़ सकती है। 😊