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कैबिनेट ने भारतीय रेलवे में 6 मल्टी ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी

08 फरवरी 2024, गुरुवार, माघ, कृष्ण पक्ष, त्रयोदशी/चतुर्दशी, विक्रम संवत 2080

यात्रा को आसान बनाने, रसद लागत को कम करने, तेल आयात को कम करने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए उक्त परियोजना कारगर सिध्द होंगी।

इन परियोजनाओं से अनुभागों की मौजूदा लाइन क्षमता में वृद्धि होगी जिससे ट्रेन परिचालन सुचारू होगा और समय की पाबंदी के साथ-साथ वैगन टर्न अराउंड (वैगन्स वापसी) समय में भी सुधार होगा।

इनसे भीड़भाड़ में कमी आएगी और रेल यातायात में वृद्धि होगी।

परियोजनाएं निर्माण के दौरान लगभग 3 (तीन) करोड़ मानव दिवसों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करेंगी।

परियोजनाओं का वित्तीय व्यय लगभग 12,343 करोड़ रुपये होगा और वर्ष 2029-30 तक इनके पूरा होने की संभावना है।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने रेल मंत्रालय की छह परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिनकी कुल अनुमानित लागत लगभग ₹.12,343 करोड़ रहेगी और केंद्र सरकार से 100% वित्त पोषण के साथ यह कार्य किया जाएगा। मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्तावों से परिचालन में आसानी होगी और भीड़भाड़ कम होगी, जिससे भारतीय रेलवे के सबसे व्यस्त खंडों पर आवश्यक ढांचागत विकास उपलब्ध होगा। परियोजनाएं माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं जो क्षेत्र में व्यापक विकास के माध्यम से क्षेत्र के लोगों को “आत्मनिर्भर” बनाएगी जिससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

6 राज्यों यानी राजस्थान, असम, तेलंगाना, गुजरात, आंध्र प्रदेश और नागालैंड के 18 जिलों को सम्मिलित करने वाली छह परियोजनाएं भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में 1020 किलोमीटर की वृद्धि कराएंगी और राज्यों के लोगों को लगभग तीन करोड़ मानव दिवस का रोजगार प्रदान करेगी।

ये परियोजनाएं मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के लिए पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का परिणाम हैं जो एकीकृत योजना के माध्यम से संभव हुई हैं और लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी।

1: अजमेर – चंदेरिया ( राजस्थान ) 178.28 किलोमीटर, अनुमानित लागत ₹- 1813.28 करोड़

2: जयपुर – सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) 131.27 किलोमीटर, अनुमानित लागत ₹-1268.57 करोड़

3: लूणी – समदड़ी – भीलड़ी ( गुजरात एवं राजस्थान ) 271.97 किलोमीटर, अनुमानित लागत ₹-3530.92 करोड़

4:  नए रेल सह सड़क पुल के साथ अगथोरी – कामाख्या (असम ) 7.062 किलोमीटर, अनुमानित लागत ₹-1650.37 करोड़

5: लुमडिंग – फुरकटिंग ( असम और नागालैंड ) 140 किलोमीटर, अनुमानित लागत ₹-2333.84 करोड़

6: मोटुमारी – विष्णुपुरम और मोटुमारी में रेल के ऊपर रेल पुल निर्माण ( तेलंगाना और आंध्र ) 88.81 किलोमीटर और 10.87 किलोमीटर, अनुमानित लागत ₹- 1746.20

– pib.nic.in के सौजन्य से

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ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस का तीन माह तक स्थानांतरण। ताम्बरम से नई दिल्ली के बीच चला करेगी।

06 फरवरी 2024, मंगलवार, माघ, कृष्ण पक्ष, एकादशी, विक्रम संवत 2080

12615/16 पुरुच्ची थलाइवार डॉ एम जी रामचन्द्रन चेन्नई सेंट्रल – नई दिल्ली – पुरुच्ची थलाइवार डॉ एम जी रामचन्द्रन चेन्नई सेंट्रल ग्रैंड ट्रंक प्रतिदिन सुपरफास्ट एक्सप्रेस के टर्मिनल स्टेशन में बदलाव होने जा रहा है। यह गाड़ी अब पुरुच्ची थलाइवार डॉ एम जी रामचन्द्रन चेन्नई सेंट्रल के स्थान पर ताम्बरम स्टेशन से परिचालित किया करेंगी।

12615 दिनांक 07 फरवरी से अगले तीन माह तक चेन्नई एग्मोर होते हुए ताम्बरम तक जाएगी और वापसीमे 12616 ग्रैंड ट्रंक सुपरफास्ट एक्सप्रेस दिनांक 09 फरवरी से अगले तीन माह तक ताम्बरम से शुरू होकर, चेन्नई एग्मोर होते हुए नई दिल्ली को जाएगी।

उपरोक्त अवधिमे यह गाड़ी दोनोंही दिशाओं में पुरुच्ची थलाइवार डॉ एम जी रामचन्द्रन चेन्नई सेंट्रल होकर नही जाएगी। विस्तारित भाग की समयसारणी निम्नप्रकार है। यात्रीगण ज्ञात रहे, गुडूर – नई दिल्ली के बीच समयसारणी में कोई बदलाव नही किया जा रहा है। साथ ही चेन्नई सेंट्रल से पूर्व आरक्षण कर चुके यात्रिओंको यह सुविधा प्रदान की जा रही है, वे चेन्नई सेंट्रल के स्थान पर चेन्नई एग्मोर या ताम्बरम से अपनी यात्रा कर सकते है।

यह टर्मिनल स्टेशन का अस्थाई बदलाव डॉ एम जी रामचन्द्रन चेन्नई सेंट्रल पर चल रहे विस्तार कार्य के लिए किया गया है।

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वर्धा – नान्देड़ रेल मार्ग का छोटा सा हिस्सा वर्धा – कळम्ब पर रेल यात्री सेवा शुरू होने जा रही है।

03 फरवरी 2024, शनिवार, माघ, कृष्ण पक्ष, अष्टमी, विक्रम संवत 2080

वर्धा – नान्देड़ निर्माणाधीन रेल मार्ग जिसकी लम्बाई लगभग 270 किलोमीटर है उसमें से वर्धा से कळम्ब 47 किलोमीटर रेल मार्ग बनकर तैयार हो गया है और इस खण्ड पर जल्द ही एक यात्री गाड़ी शुरू होने जा रही है।

वर्धा – नान्देड़ रेल मार्ग का मानचित्र
वर्धा – कळम्ब रेल मार्ग

रेल मुख्यालय ने वर्धा – कळम्ब रेल मार्ग पर सप्ताह में पाँच दिन 51119/20 यह वर्धा – कळम्ब – वर्धा सवारी गाड़ी चलाने की घोषणा की है। उपरोक्त यात्री सेवा में 08 द्वितीय साधारण जनरल कोच और 02 एसएलआर कोच ऐसे कुल 10 कोच रहेंगे। मार्ग में वर्धा – कळम्ब के बीच यह गाड़ी दोनों दिशाओं में देवळी और भिड़ी स्टेशनोंपर रुकेगी। समयसारणी निम्नप्रकार रहेगी।

रेल मार्ग के मानचित्र : सौजन्य – indiarailinfo.com

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दादर – पंढरपुर – दादर त्रिसाप्ताहिक एक्सप्रेस का सातारा तक विस्तार

02 फरवरी 2024, शुक्रवार, माघ, कृष्ण पक्ष, सप्तमी, विक्रम संवत 2080

11027/28 दादर पंढरपुर दादर त्रिसाप्ताहिक एक्सप्रेस वाया पुणे, दौंड, कुरडूवाड़ी का मिरज के रास्ते सातारा तक विस्तार किया जा रहा है। रेल प्रशासन ने इस सम्बन्धी निम्नलिखित परिपत्रक जारी किया है और इसे जल्द ही लागू करने के लिए कहा गया है।

विस्तारित मार्ग पंढरपुर से सातारा के बीच यह गाड़ी दोनोंही दिशाओँ में, सांगोळा, म्हसोबा डोंगरगांव, जत रोड, ढालगांव, कवठे महाँकाल, मिरज, सांगली, भिलवाड़ी, किर्लोस्कर वाड़ी, टाकरी, कराड, मासुर, कोरेगांव इन स्टेशनोंपर रुकेगी।

गाड़ी के परिचालन दिनोंमें और दादर से पंढरपुर के बीच समयसारणी में किसी प्रकार का बदलाव नही दर्शाया गया है। पंढरपुर से सातारा के बीच संक्षिप्त समयसारणी निम्न प्रकार रहेगी।

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रेल बजट 2024-25 : ‘वन्देभारत’ के सन्दर्भ में बड़ा सम्भ्रम!

02 फरवरी 2024, शुक्रवार, माघ, कृष्ण पक्ष, सप्तमी, विक्रम संवत 2080

कल आम बजट संसद में प्रस्तुत हुवा। आम बजट में ही रेल विभाग के बजट आबंटन की घोषणा रहती है। भारतीय रेल को वर्ष 2024-25 के लिए, अन्तरिम बजट में 2,52,000 करोड़ रुपए आबंटित किए गए है। इसके साथ ही कुछ प्रमुख बुनियादी ढांचे के सुधार हेतु घोषणाएं हुई। जिनमे रेल विभाग, गति शक्ति कार्यक्रम के तहत तीन प्रमुख रेल कॉरिडोर बनाने जा रहा है। एनर्जी, मिनरल्स और सीमेंट क्षेत्र के लिए यह रेल कॉरिडोर होंगे। इसके साथ ही पोर्ट कनेक्टिविटी और हाई ट्रैफिक डेन्सिटी कॉरिडोर के भी निर्माण की बात भी की गई है। ज्ञात रहे, पहले मालभाड़े हेतु समर्पित गलियारों, WDFC और EDFC के अलावा अन्य (डेडिकेटेड फ़्रेट कॉरिडोर) घोषित किए गए थे जिन्हें अबतक रद्द करार बताया जा रहा था और अब जो नए कॉरिडोर की घोषणाएं की गई है, वह भी लगभग उन्ही क्षेत्रोंसे जुड़ी है, जिन्हें ठण्डे बस्ते में डाला गया था।

अगली विशेष घोषणा है, वन्देभारत सन्दर्भ में। निम्नलिखित ट्वीट देखिए,

विरोधाभास कहाँ है, रेल मंत्रालय, मा. अर्थ मन्त्री अपने घोषणा में वन्देभारत मानक की बोगियाँ बनाकर उन्हें सामान्य यात्री कोच में लगाया जाएगा, वहीं दूसरे ट्वीट्स में सामान्य यात्री कोचेस वन्देभारत मानक में बदले जाएंगे यह कहा जा रहा है।

मित्रों, सबसे पहले आपको बता दूँ, तकनीकी भाषा मे बोगी और कोच बिल्कुल अलग चीजें है। “बोगी” और “कोच” रेल गाड़ी की प्रणाली के विभिन्न घटकों को संदर्भित करते हैं और उन्हें एक – दूसरे के बदले प्रयोग कतई नही किया जा सकता हैं। बोगी यह एक प्रकार का चक्कों का अंडरकेरेज आहे जो रेल गाड़ी के यात्री डिब्बे का आधार और उसे सस्पेंशन प्रदान करता है। दूसरी ओर, कोच एक निजी रेलवे वाहन है जिसे हम लोग आम तौर पर रेल गाड़ी का यात्री डिब्बा कहते है। जो यात्रियों या सामान ले जाने के लिए निर्माण किया गया है। हालाँकि आम लोगों के लिए ट्रेन के डिब्बे को सामान्य अर्थ में “बोगी” शब्द का उपयोग करना सहज बात है, लेकिन ऐसा करना तकनीकी रूप से गलत है।

यह होती है, ‘बोगी’
और यह होता है ‘कोच’

अब जहाँ 40,000 सामान्य कोचों को वन्देभारत मानक पर बदले जाने की चर्चा पर आते है। 40,000 पुराने आई सी एफ कोच है, जिन में से कुछेक को ‘उत्कृष्ट’ कोच कार्यक्रम के अंतर्गत लाया गया था। हालाँकि यह कोच अपनी ‘उत्कृष्टता’ को बरकरार नही रख पाए यह और बात है। एक तरफ आई सी एफ कोच नियमित यातायात से हटाकर एल एच बी कोच की संरचना में बदले जा रहे है। आए दिन फलाँ गाड़ी LHB सुसज्जित होने की खबरें आती रहती है, उसमे यह वन्देभारत का ट्विस्ट कैसे आ गया? एक तरफ वन्देभारत के जनक, तकनीशियन्स का मानना है, पुराने कोच वन्देभारत मानक में बदले जा ही नही सकते। दोनों तकनीक बिल्कुल ही बिल्कुल भिन्न है।

जहाँ तक हमे लगता है, वन्देभारत की बोगियाँ अर्थात केवल चक्कों की असेम्बली का उपयोग पुराने आई सी एफ कोचोंमे कर उन्हें फिर से गाड़ियोंकी संरचना में लाया जायेगा। और गौर फरमाएं, जो डर आम रेल यात्रिओंमें फैल रहा था, इस बदलाव से यात्रिओंको किसी तरह से वन्देभारत के किरायोंकी चपत नही लगेंगी।

(लेख में प्रस्तुत बोगी और कोच के चित्रोंके लिए हम The News Insight के आभारी है।)