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अहमदाबाद – तिरुचिरापल्ली के बीच विशेष गाड़ी के चलेंगे 6 फेरे

09419 अहमदाबाद तिरुचिरापल्ली विशेष दिनांक 22 दिसम्बर से 26 जनवरी तक प्रत्येक गुरुवार को चलेंगी और वापसी में 09420 तिरुचिरापल्ली अहमदाबाद विशेष दिनांक 25 दिसम्बर से 29 जनवरी तक प्रत्येक रविवार को चलेंगी। गाड़ी की डिब्बा संरचना 1 वातानुकूल टू टियर, 5 वातानुकूल थ्री टियर, 12 स्लीपर, 4 द्वितीय श्रेणी अनारक्षित और 2 एसएलआर ऐसे कुल 24 कोच रहेंगे। यात्रीगण ध्यान रहें गाड़ी का 1.3 गुना ज्यादा रहेगा, साथ ही विशेष गाड़ियोंके नियमानुसार ‘डिस्टेंस रिस्ट्रिक्शन’ भी लागू रहेगा। समयसारणी निम्नलिखित है।

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क्या चाहता है, आम यात्री रेल प्रशासन से?

बीते छह, सात वर्षोंमें रेलवे स्टेशनोंपर, रेल व्यवस्थाओं में जिस तरह क्रांतिकारी बदलाव दिखाई दे रहा है, आम रेल यात्री अचरज़ भरी दृष्टी से उसे देख रहा है, महसूस कर रहा है।

सबसे ऊपर हम रखेंगे साफसफाई को। रेल्वे स्टेशनोंका साफ़सुथरा रहना, सुन्दर रहना रेल यात्री न सिर्फ महसूस कर रहे है अपितु उसमे रेल कर्मियों को पुरजोर सहयोग भी कर रहे है। एक वक्त था, रेलवे स्टेशन यह गांवभर के भिखारियों, जुवारियों, नशेड़ियों का रैन बसेरा हुवा करता था। अब यह स्थिति व्यापक रूपसे बदली जा रही है। मवेशी, गायें, कुत्ते रेलस्टेशन के सर्क्युलेटिंग एरिया में अपने अड्डे बनाये रखते थे। कूड़ाकचरे के ढेर दिखना बहुत साधारण लगता था। मगर अब यह बीती बातें हो चुकी है। रेलवे स्टेशन के सर्क्युलेटिंग एरिया में देश की सांस्कृतिक झलकियाँ अंकित कर उन्हें प्रेक्षणीय बनाया जा रहा है। आम यात्रिओंको अब रेलवे स्टेशन पहुँचकर कोफ़्त की जगह प्रसन्नता मिलती है।

पहले बड़े-बूढ़े रेल यात्री केवल मजबूरी रहती तभी रेल यात्रा करते थे, क्योंकी रेल प्लेटफार्म पर पहुंचने में होने वाली दिक्कतें। सीढ़ी चढ़ना, उतरना, गाड़ी आनेपर लगभग एखाद किलोमीटर तक भागदौड़ कर गाड़ी में चढ़ना यह सारी जद्दोजहद लगती थी। मगर अब लगभग प्रत्येक जंक्शन या ऐसे महत्वपूर्ण स्टेशन जहाँ आम यात्री की आवाजाही ज्यादा है सभी स्टेशनोंपर सीढ़ियों के साथ साथ रैम्प लगाए गए है, जा रहे है। जहाँ रैम्पस है, वहाँ बैटरी चलित गाड़ियाँ प्लेटफार्म और सर्क्युलेटिंग एरिया के बीच यात्रिओंके लिए उपलब्ध कराई जा रही है। गाड़ी के कोच कहाँ आएंगे यह दर्शाने वाले डिजिटल डिस्प्ले, लिफ्ट्स, एस्कलेटर लगाए जा रहे है। कहने को यह सारी व्यवस्था किसी जमाने मे स्वप्नवत थी और आज हक़ीकत है।

भारतीय रेलवे की डिजिटल टिकिटिंग प्रणाली; यूँ तो यह उपलब्धि नई नही है मगर इसका उल्लेख न करना यहॉं ठीक न होगा। देशभर में किसी भी गांव, कस्बे, शहर से अपने घरोंमें, दफ्तरों में रास्ते मे चलते-फिरते यात्री रेल का ई टिकट बड़ी सुगमता से निकाल सकता है। हर उपलब्ध वर्ग, आरक्षित या अनारक्षित टिकट बड़ी आसानी से निकाले जा सकते है।

भारतीय रेल में विविधता पूर्ण गाड़ियाँ और प्रत्येक स्तर के यात्री हेतु अलग अलग प्रकार के वर्ग के कोचेस उपलब्ध कराए जाते है। उच्च वर्ग या बिजनेस क्लास के लिए वन्देभारत शताब्दी राजधानी जैसी तीव्र गति की गाड़ियाँ तो आम यात्री के लिए जनसाधारण, जनशताब्दी, गरीब रथ जैसी तीव्रगामी और डेमू, मेमू, इन्टरसिटी जैसी हर छोटे-बड़े स्टेशन की सम्पर्कता बनाये रखने वाली गाड़ियाँ उपलब्ध है। वैसे ही आरामदायक एग्जिक्यूटिव क्लास से लेकर सस्ती द्वितीय श्रेणी तक के विभिन्न रेट्स के किरायेवाली आसन व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है।

अब ऐसी सारी व्यवस्था में हम आप के सामने रेल और उनके आम यात्री इनकी आशा, अपेक्षाओंको रखने जा रहे है। नई डिब्बा संरचना में मानकीकरण के नामपर रेल विभाग ने ग़ैरवातानुकूल डिब्बे जिसमे स्लीपर और द्वितीय श्रेणी के कोच आते है, कम किये जा रहे है। आम यात्री इस व्यवस्था से बेहद आहत और पीड़ित हो रहा है। वहीं रेल विभाग इस मानकीकरण को अपनी नियोजित गाड़ियोंकी समयपालन से जोड़ती है। जे कोई गाड़ी किसी अप्रत्याशित कारणोंसे देरीसे चल रही है तो उसके रैक से लिंक की गई गाड़ी को मजबूरन देरी से छोड़ना पड़ता है। यही कभी रैक मानकीकरण के चलते जो रैक अन्य गाड़ी का है और प्रारम्भिक स्टेशनपर उपलब्ध है तो उसे उस देरी से चलनेवाली गाड़ी का इंतज़ार किये बगैर छोड़ा जा सकता है। रेल विभाग और आम यात्री अपनी अपनी जगह ठीक है, मगर कम दूरी के अनारक्षित यात्रिओंके लिए डेमू, मेमू या इन्टरसिटी गाड़ियाँ आवश्यकता नुसार चलती रहे तो वह यात्री लम्बी दूरी की आरक्षित, उच्च वर्ग के वातानुकूल वर्ग की तरफ मुड़ेगा ही नही।

रेल विभाग अपनी किराया प्रणाली में राजनीतिक दखल से परेशान है। एक तरफ प्रत्येक यातायात के किराए दर आम उत्पन्न वृद्धि, खर्च करने की क्षमता नुसार बढ़े है, लगभग दुगुने हो गए है, वहीं रेल के किराये जस के तस है। जब नियमित उत्पाद में दर बढाने में बन्धन लग जाते है तो दरोंको अलग उत्पाद लाकर बढाया जाता है, यह सर्वसाधारण वाणिज्यिक संहिता है। द्वितीय, स्लीपर श्रेणी के किरायोंमे वृद्धि को जबरन रोके जाने की स्थिति में सवारी गाड़ियोंकी बलि चढ़ चुकी है और वातानुकूल वर्ग के कोचेस लगातार बढ़ रहे है। तत्काल/ प्रीमियम तत्काल के आरक्षित कोटे हर गाड़ी में लागू हो गए है। नियमित गाड़ियोंके साथ-साथ TOD ट्रेन ऑन डिमाण्ड वाली 1.3 विशेष किराया श्रेणी की विशेष गाड़ियोंका परिचालन अप्रत्याशित रूपसे बढ़ा है। यह दूसरे दरवाजे से बढ़ी हुई किराया वृध्दि ही तो है जो सीधी दिखाई नही देती मगर आम यात्री के जेब को बराबर चुना लगा जाती है

भारतीय रेल पर यात्रा करनेवाला आम यात्री 200-300 किलोमीटर चलनेवाला या 50-100 किलोमीटर तक रोजाना अप डाउन करनेवाला नियमित यात्री है। उसे किसी लग्जरी या वातानुकूल की आवश्यकता नही अपितु केवल थोड़ा सा टिकने या पग धरनेभर की जगह मिले ऐसी रेल चाहिए। उसके आवश्यकता के अनुसार सम्पर्कता चाहिए। उसे रोजाना यात्रा के लिए फिलहाल किसी वन्देभारत या शताब्दी की नही बल्कि डेमू/मेमू और इन्टरसिटी की जरूरत ज्यादा है।

लम्बी दूरी के गाड़ियोंमे यात्री को सुरक्षित वातावरण, अवैध विक्रेताओं, किन्नरों और भीख माँगनेवालोंसे मुक्तता, अवैध अनारक्षित यात्रिओंकी अनावश्यक आवाजाही से बचाव चाहिए है। प्रत्येक कोच में रेलवे की ओरसे निगरानी हेतु कर्मचारियों की नियुक्ति हो, यात्री को रेलवे द्वारा उपलब्ध कराई गई सारी सुखसुविधा यथावत, बिना मांगे मिलती रहनी चाहिए। अनियमितता फिर वह कर्मी द्वारा हो या यात्री द्वारा उसका कड़ाई से और तुरन्त निपटान हो यह अपेक्षित है।

हमे लगता है, हमने आम यात्री की सारी अपेक्षाएं यहां प्रस्तुत कर दी है। यदि कोई बात आपको छुटी या अधूरी लगती हो तो आप हमसे सम्पर्क कीजिये हम इस बात को आगे बढाने का प्रयत्न करेंगे।

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‘द रॉयल टिकट’

रेल में यात्रा करने हेतु ऐसा टिकट चाहिए की यात्री को किसी भी वर्ग, कोई भी मार्ग, कोई भी यात्री गाड़ी में यात्रा करने से रोंका न जाये। वह चाहे तो अपनी यात्रा जारी रखे या किसी जंक्शन पर उतर कर कोई दूसरी यात्री गाड़ी में सवार हो जाये।

है न मजे की टिकट? मित्रों, ऐसी टिकट केवल विदेशी नागरिकोंको मिल सकती है, उसका नाम है “इंडरेल टिकट” इस टिकट में केवल यात्रा की अवधि और वर्ग अंकित होता है। यात्री चाहे, उस मार्ग, यात्री गाड़ी और टिकट उच्चतम वर्ग की हो तो चाहे उस वर्ग में अपनी रेल यात्रा कर सकता है।

मगर, यात्री के पास धन खर्च करने की क्षमता और मजबूत इच्छाशक्ति, शारारिक बल हो तो द्वितीय श्रेणी का टिकट भी लगभग इसी तरह काम दे सकता है। उदाहरण के लिए मुम्बई से हावडा वाया नागपुर की द्वितीय श्रेणी टिकट लेकर यात्री प्लेटफार्म पर अपनी रेल यात्रा करने पहुंचता है। उसे जरूरी नही है की वह सीधी हावडा की ही गाड़ी में यात्रा करें। वह जो प्रथम उपलब्ध यात्री गाड़ी जो उस मार्ग पर चलनेवाली हो, चाहे मनमाड़, भुसावल, नागपुर तक चले अपनी यात्रा शुरू कर सकता है। प्रत्येक जंक्शन पर उसे गाड़ी बदलकर आगे बढ़ना होगा। रही बात जगह की तो उसे प्रत्येक यात्रा खण्ड के लिए TTE से मिल अपनी आसन व्यवस्था करनी पड़ेगी अन्यथा अनारक्षित कोच में तो वह किसी तरह से यात्रा कर ही सकता है।

आजकल प्लेटफार्म टिकट के भी चर्चे हो रहे है, यात्री यह टिकट खरीदकर जिस तरह भी चाहे, अपनी रेल यात्रा को अन्जाम दे सकता है। यूँ तो इस सम्बंध का नियम नया नही अपितु काफी पुराना है। पहले प्रिप्रिन्टेड, कार्ड टिकट होते थे, जिनकी उपलब्धता हमेशा ही नही रहती थी। तब टिकटबाबू BPT ब्लैंक पेपर टिकट बनाकर यात्री को दे देते थे। मगर अब सारी रेल प्रणाली कम्प्यूटराइज्ड हो गयी है, जिस स्टेशन की मांग हो, टिकट बनाई जा सकती है। संक्रमण के काल मे गाड़ियोंमे यात्री टिकट नही मिल रही थी, सभी गाड़ियाँ केवल आरक्षित आसन व्यवस्था में चलाई जा रही थी इस स्थिति में यात्री के पास केवल एक ही पर्याय था की प्लेटफार्म टिकट खरीद कर गाड़ी पर पहुंचे, TTE को अपनी स्थिति बताकर, यात्रा टिकट बनवाकर यात्रा करें। आम दिनोंमें भी अपने बोर्डिंग स्टेशन को साबित करने के लिए ‘प्लेटफार्म टिकट’ ही सबसे वैध सबूत है। अब वह टिकट जाँच दल के विवेक पर निर्भर करता है, की वह यात्री को दण्डित कर टिकट बनाये या सर्वसाधारण टिकट बनाये।

दूसरा मुद्दा ‘गार्ड सर्टिफिकेट’ वाला भी होता था। यात्री गाड़ी का गार्ड, जिसे अब ट्रेन मैनेजर कहते है, यात्री गाड़ी का इंचार्ज होता है, उससे अनुमति लेकर यात्री गाड़ी में यात्रा कर सकता है। इसमे गार्ड सम्बन्धित TTE या स्टेशन मैनेजर को सूचना देकर यात्री से टिकट शुल्क वसुल करवाएगा।

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NWR उ प रेल की 38 गाड़ियाँ रहेगी रद्द! ब्लॉक के चलते और भी कुछ यात्री गाड़ियाँ बाधित होंगी।

उत्तर रेलवे के दिल्ली मण्डल में, पटेलनगर स्टेशन पर रेलवे का यार्ड रिमॉडलिंग कार्य हेतु ब्लॉक लिया जा रहा है। दिल्ली से रेवाड़ी के बीच की बहुतांश गाड़ियाँ इससे बाधित होंगी। इस संदर्भ में उत्तर पश्चिम रेल के मुख्यालय से जारी यह परिपत्र देख लीजिए,

निम्नलिखित परिपत्रक अंग्रेजी भाषा मे भी जारी हुवा है, जो ज्यादा विस्तृत है,

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मुम्बई, पुणे – नागपुर के बीच विशेष गाड़ियाँ, विशेष किराया दरों पर चलाई जा रही है।

01443 पुणे अजनी वातानुकूल साप्ताहिक विशेष 06 दिसम्बर से 03 जनवरी तक प्रत्येक मंगलवार को और वापसीमे 01444 अजनी पुणे वातानुकूल साप्ताहिक विशेष 07 दिसम्बर से 04 जनवरी तक प्रत्येक बुधवार को चलेगी।

01451 नागपुर पुणे वातानुकूल साप्ताहिक विशेष 07 दिसम्बर से 04 जनवरी तक प्रत्येक बुधवार को चलेगी और वापसी में 01452 पुणे नागपुर वातानुकूल साप्ताहिक विशेष 08 दिसम्बर से 05 जनवरी तक प्रत्येक गुरुवार को चलेगी।

01449 लोकमान्य तिलक टर्मिनस नागपुर वातानुकूल साप्ताहिक विशेष 06 दिसम्बर से 03 जनवरी तक प्रत्येक मंगलवार को और वापसीमे 01450 नागपुर लोकमान्य तिलक टर्मिनस वातानुकूल साप्ताहिक विशेष 09 दिसम्बर से 07 जनवरी तक प्रत्येक शुक्रवार को चलेगी।