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मनमाड़ – मुम्बई – मनमाड़ गोदावरी बहाल परन्तु ….

12118/17 लोकमान्य तिलक टर्मिनस मनमाड़ के बीच चलाई जानेवाली गोदावरी संक्रमण काल मे बन्द हुई थी, वह 11 अप्रेल से बहाल की जा रही है। इस बहाली की थोडी ट्वीस्ट समझिये,

गोदावरी एक्सप्रेस नाशिककर यात्रिओंके लिए बेहद अहम गाड़ी है, लेकिन रेल प्रशासन ने उसे ‘लागत के अनुपात में कमाई कम’ यह कारण बताकर शुरू करने से मनाई कर दी थी। यात्रियों का दबाव या स्थानीय सांसद, केंद्रीय मंत्री के आग्रह पर उसे बहाल तो किया जा रहा है मगर विशेष गाड़ी के स्वरूप में। यह विशेष गाड़ी 11 अप्रेल से प्रतिदिन 15 मई तक पर्यन्त चलाई जाएगी।

अब विशेष गाड़ी है तो विशेष स्वरूप भी जान लीजिए। यात्री किराये में 1.3 गुना वृद्धि, हालांकि परिपत्रक मे अलग से उल्लेख नही है परंतु विशेष गाड़ी याने केवल आरक्षित आसन व्यवस्था रहना स्वाभाविक समझ लेना चाहिए।

02102/01 मनमाड़ मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (लोकमान्य तिलक टर्मिनस की जगह ) मनमाड़ गर्मी विशेष गाड़ी 11 अप्रेल से 15 मई तक प्रतिदिन चलाई जानी है। अर्थात मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस तक चलनेवाली है इसीलिए समयसारणी में थोड़ाबहुत बदलाव रहना लाजिमी है। निम्नलिखित परिपत्रक देखिए,

ताजा जानकारी यह बताती है, 8 चेयर कार, कुर्सी यान में से 5 कुर्सी यान अनारक्षित टिकट धारकोंके लिए उपलब्ध रहेंगे। अनारक्षित द्वितीय श्रेणी सुपरफास्ट मेल/एक्सप्रेस का यात्री किराया देय रहेगा।

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मनमाड़ – मुम्बई – मनमाड़ गोदावरी दाखल परन्तु ….

12118/17 लोकमान्य टिळक टर्मिनस मनमाड़ च्या दरम्यान चालणारी गोदावरी दाखल तर होत आहे पण पार बदललेल्या स्वरुपात.

आता गोदावरी नाशिककरांसाठी 11 एप्रिल पासून दररोज धावेल पण केवळ 15 में पर्यन्त आणि ते देखील विशेष गाडीच्या स्वरुपात.

विशेष गाड़ी चे स्वरूप म्हणजे काय, तर भाड़े 1.3 पटीने जास्त लागेल. परिपत्रकात वेगळा उल्लेख नाही पण विशेष गाड़ी म्हणजे केवळ आरक्षित आसन व्यवस्था असणे ही स्वाभाविकच तर मित्रांनो, आलिया भोगासी असावे सादर

02102/01 मनमाड़ मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (लोकमान्य टिळक टर्मिनस ऐवजी) मनमाड़ उन्हाळी विशेष गाड़ी 11 एप्रिल ते 15 मे पर्यन्त दर रोज धावेल. अर्थात मुम्बई च्या छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पर्यन्त धावणार असल्याने वेळेत ही काहीसा बदल आहेच. तो बदल खालील परिपत्रकात समजून घ्यावा आणि जास्तीचे टिकिट दर देवून या गाडीचा अलभ्य (?) लाभ पदरात पाडुन घ्यावा.

ताज्या माहितीनुसार कळत आहे की, द्वितीय श्रेणी चेयर कार च्या 8 डब्याँ पैकी 5 डबे जनरल म्हणजे सामान्य द्वितीय श्रेणी अनारक्षित असणार आहेत. या अनारक्षित प्रवासासाठी सुपरफास्ट मेल/एक्सप्रेस चे भाड़े लागेल. उर्वरित द्वितीय श्रेणीचे 3 कोच हे आरक्षित असणार आहे. या व्यतिरिक्त 1 वातानुकूल चेयर कार आणि 2 एसएलआर डबे असतील.

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कैग ने रेलवे पर रिपोर्ट बना दी, उपाय भी सुझाएं, मगर इनको असली जामा कैसे और कब पहनाया जाए? बाबागाड़ी छाप सुपरफास्ट, बैलगाड़ी छाप मेल/एक्स्प्रेस गाडियाँ क्या यह पहचान बनने जा रही है भारतीय रेल की?

‘धरलं तर चावतय अन सोडलं तर पळतय’ यह मराठी भाषा की कहावत है। इसका अर्थ यह है, किसी बेहद जरूरी कार्य को करने की दिशा ही नही मिल रही, आखिर उसे कहाँसे शुरु करें। रेल प्रशासन भी शायद इसी उलझन में उलझे जा रही है।

कैग ने कहा, अढाई लाख करोड़ रुपये बुनियादी सुविधा में खर्च हो गए, परिणाम शून्य है, बल्कि गति बढ़ाने के मामले की ग्रोथ माइनस है। दरअसल गच्चा कहाँ पड़ता है, देखिए;

शून्याधारित समयसारणी मे चार तरह की गाड़ियोंकी गति के आधार पर ग्रुपिंग की बात कही गई है, राजधानी और उस तरह की HST तेज गति वाली गाडियाँ130 kmph, मेल/एक्सप्रेस को 110 kmph, मेमू गाड़ियों को 100 kmph और EMU को 96 kmph मगर जो दिक्कतें है वह जस की तस है। इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर प्लेटफार्म नही बढ़े, लूप लाइन्स नही बढ़ी, टर्मिनल फैसिलिटी नही बढ़ी। स्टेशन डेवलपमेंट के नाम पर स्टेशनोंकी रंगरोगन, पत्थर लगवाना, चमकती लाइटें और यात्री सुविधाये मगर जो आवश्यक था वह छूटते चला गया। नए RKMP में क्या प्लेटफॉर्म बढ़े, या टर्मिनल फैसिलिटी बढ़ी? बड़ा प्रश्न है। जब रेल प्रशासन को लंबी दूरी की गाड़ियोंके स्टोपेजेस रदद् करने है तो उन रद्द स्टेशनोंके यात्रीओं के लिए विकल्प भी तो होना चाहिए ना? ZBTT, शून्याधारित समयसारणी को लागू करने में सबसे पहले सवारी गाड़ियाँ बढानी चाहिए, रेल्वेज के पास ICF कोच की भरमार है। जब तक मेमू रैक उपलब्ध नहीं किए जा सकते तब तक सवारी गाडियाँ जो भी रद्द हुई है या अतिरिक्त स्वरूप मे कोई गाडियाँ लानी है, बेशक छोटे दूरी के लिए ICF कोच की गाडियाँ सेवा मे उतारी जा सकती है। यात्री स्टोपेजेस के लिए आंदोलन, उपोषण पर उतर जाते है, अपने क्षेत्र के नेताओंके कान खाते है, नेता ऊपर जाकर क्षेत्र के जनता की दुर्दशा एवं परेशानी बयाँ कर वोटोंकी दुहाई देते है और उन्हे 3 माह का एक्सपेरिमेंटल हॉल्ट लेकर लौटा दिया जाता है, 3 महीने बाद और एक्सटेंशन मिल जाता है, स्टॉपजेस का खेला चलते रहता है।

कैग रिपोर्ट में वैज्ञानिक तरीकेसे, ZBTT शून्याधारित समयसारणी बनाने पर खासा जोर दिया है। WTT वर्किंग टाइमटेबल से शुरवात कर एक एक गाड़ी सेट करना, रखरखाव के लिए अलग टाइम स्लॉट बनाना, समयसारणी में मालगाड़ियोंके लिए अलग जगह रखना यह सब बातें है। संक्रमण काल मे रेल प्रशासन को यह सब प्रयोग करने के लिए बेहतर समय था, मगर अब, अब न देश रुकने के लिए राजी है न देश की जनता। वर्ष 2007 मे रेल्वे ने अपने गाड़ियोंकी सुपरफास्ट श्रेणी की व्याख्या तय की, 55 किलोमीटर औसत गति, आरंभ से अंत तक के स्टेशनोंके बीच। 110 kmph गति से चल सकने वाले चल स्टॉक को यह 55 वाली एवरेज स्पीड साध्य करना बहुत आसान है, ऐसा नहीं लगता आपको? बिल्कुल, रेल प्रशासन चाहे तो अपनी सारी मेल/एक्स्प्रेस को सुपरफास्ट श्रेणी मे एक झटके मे ही ला सकती है। इसका अर्थ यह हुवा की सूपरफास्ट के लिए 55 kmph वाला मापदण्ड बिल्कुल ही खोखला है। आज की हकीकत यह है, रेल्वे के बहुत से खंड 130 kmph क्षमता के हो गए है, चल स्टॉक अर्थात LHB कोच 200 kmph क्षमता के है, लोको, सिग्नल प्रणाली बेहतर है, लेकिन 55 kmph का मापदंड अभी भी वहीं का वहीं ही है। जब जब कोई गाड़ी मेल/एक्स्प्रेस से सुपरफास्ट मे उन्नयन की जाती तो उसके गति और समयसारणी की जगह उसके बढ़ाए गए सुपरफास्ट चार्ज की चर्चा ज्यादा होती है। और क्यों न हो, हमारे यहाँ सुपरफास्ट गाड़ियोंकी कतार मे ऐसी गाडियाँ है जो हर 25 किलोमीटर पर स्टॉपज लेती है भले उसकी एवरेज गति 55 क्यों न हो। अब तो यह चल रहा है की 25/30 kmph गति की, प्रत्येक स्टेशन पर रुकनेवाली भूतपूर्व सवारी गाड़ियों को भी जबरन एक्सप्रेस श्रेणी मे चलाया जा रहा है।


यह तरीका सही नही है, ना ही स्थायी है। लम्बी दूरी के गाड़ियोंके हर 25 किलोमीटर पर हाल्ट, बन्द होने ही चाहिए। 200 KM से अंदर लंबी दुरी की गाड़ी को ठहराव नही दिया जाना चाहिए। जब रेल प्रशासन के पास यात्री बुकिंग का विवरण होता है, प्रायोगिक ठहरावोके आँकड़े सामने रख ठहराव रद्द करना योग्य कैसे है इसका विवरण परिपत्र के जरिए यात्रीओं के सामने रखा जाना उचित व्यवस्था हो सकती है। गाड़ियाँ काफी उन्नत हो गयी है। 130 kmph बड़ी सहजता से निकल जाती है। 110 kmph तो आम बात है। लेकिन बात फिर वही अटकती है, गाड़ी यदि प्रत्येक 25 किलोमीटर पर लूप लाइन मे ले जा कर रोकनी है और फिर से मेन लाइन पर ला कर दौड़ानी है, कहाँ से एवरेज गति 55 से ऊपर की मिलेगी? फिर उसके पीछे चलने वाली राजधानी टाइप HST गाड़ी भी पीटती है, उसे भी एवरेज गति नहीं मिल पाती। पटरियों पर इंसानों, मवेशियों का घूमना आम बात है। उसके लिए ट्रैक के दोनों ओर बाड़ लगाना बेहद जरूरी है। कई ऐसी छोटी छोटी मगर बेहद जरूरी बातें है जिन्हे शुरु करें तो रेल्वे की गति मे सुधार होगा।

रेल प्रशासन को कभी न कभी कड़े निर्णय लेना ही पड़ेगा फिर वह स्टोपेज रद्द के हों या सवारी गाडियोंका रद्दीकरण हो! क्या भारतीय रेल्वे अब भी वही 25 kmph के नीचे एवरेज मे चलनेवाली सवारी गाडियाँ चलाने का विचार रख रही है? फिर क्यों नहीं रद्द कर देते सवारी गाड़ियोंकी टिकट श्रेणी? 55 kmph वाली सुपरफास्ट कहलवाने मे रेल प्रशासन को खुद को शर्मिंदगी महसूस नहीं होती? यदि ना होती हो तो राजधानी और उस श्रेणी की हाई स्पीड गाड़ियोंके लिए एक ‘अल्ट्रा सुपरफास्ट श्रेणी’ बनाकर उसमे एक अलग सरचार्ज की उगाही कर सकते है ऐसी सलाह भी हम देते है। हाँ साहब, यदि सुपरफास्ट से बजाय तेज गति के केवल राजस्व बढ़ाने की ही अपेक्षा रखनी है तो ऐसे ही सही, अन्यथा यह सुपरफास्ट कहलाने का हक केवल उचित गाड़ियों को ही प्रदान करें। जल्द से जल्द शून्याधारित समयसारणी लागू करे, बंद पड़ी गाडियाँ शुरु करवाएं, टर्मिनल क्षमतावान न हो तो मुख्य स्टेशन पर गाड़ी खाली कर अगले स्टेशन पर पार्किंग करवाए, रखरखाव की व्यवस्था रेल कर्मियों को वहाँ भेज कर करवाए। अब बहुत समय जाया हो चुका है, क्या और आने वाले वर्षों मे भी रेल प्रशासन को, कैग के ताने ही सुनना है?

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कैग की भारतीय रेल पर रिपोर्ट और भारतीय रेल की परिचालन मजबूरीयाँ

CAG अर्थात कंट्रोलर एण्ड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया, भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक यह भारत के संविधान द्वारा स्थापित एक प्राधिकारी है जो भारत सरकार तथा प्रादेशिक सरकारों द्वारा प्रस्तुत सभी लेखों का अंकेक्षण करता है।

हाल ही मे CAG ने भारतीय रेल पर बनी एक रिपोर्ट कल संसद के पटल पर रखी गई, जिसमे भारतीय रेल के ‘मिशन रफ्तार’ प्रोजेक्ट पर कडा प्रश्नचिन्ह उपस्थित किया गया है। वर्ष 2008 से लेकर 2019 तक भारतीय रेल ने अपने बुनियादी ढांचे पर ढाई लाख करोड़ रुपयों का खर्च किया उसके बावजूद परिणामों मे कोई खासा सुधार नजर नहीं या रहा है।

भारतीय रेल ने वर्ष 2016 मे ‘मिशन रफ्तार’ नामक एक योजना तय की थी, जिसके अंतर्गत मेल/एक्स्प्रेस गाड़ियों विद्यमान औसत गति 50 kmph को बढ़ाकर 75 kmph करना और मालगाड़ियोंकी औसत गति 25 kmph को बढ़ाकर 50 kmph करना निर्धारित किया गया। कैग ने इस योजना के कार्यान्वयन पर उंगली उठाई है। वर्ष 2021 तक रेल्वे के परिचालन मे केवल संयुक्तिक 0.18% सुधार दर्ज किया गया जिसमे मेल/एक्स्प्रेस गाड़ियोंकी औसत गति मे 0.18% याने 50 से बढ़कर 50.6kmph सुधार हुवा तो मालगाड़ियों के सुधार के आँकड़े निगेटीव्ह आए है। वहाँ 25 की जगह 23.6 याने -9.75% गति सुधरी? है।

भारतीय रेल प्रशासन की परेशानियाँ देखेंगे तो गति मे 160 kmph तक सुधार करने की मूल योजना 1960 से शुरू की गई थी मगर हर बार लक्ष्य की तिथि को आगे बढ़ा बढ़ाकर आज तक भी उस लक्ष्य को अछूता रख रखा है। जब कैग ने गाड़ियों की गति के लिए नई दिल्ली – हावड़ा खंड अभ्यास के लिए चुना तो उन्हे एक अजीब सी स्थिति दिखी। रेल्वे के सुरक्षा मानक कहते है, किसी एक ब्लॉक मे केवल एक ही गाड़ी चलना चाहिए मगर समयसारणी मे मांग के दबाव मे एक ब्लॉक सेक्शन मे कई गाडियाँ चलाई जा रही है। जिन्हे रेलवे की भाषा मे विवाद कहा जा सकता है, सिर्फ उदाहरण के लिए चुने गए खण्ड मे 12,500 ऐसे मामले मिले। कैग की सिफारिश यह थी की वैज्ञानिक तरीकेसे समयसारणी की पुनर्रचना की जाए ताकि इस तरह के विवाद टाले जा सकें। यहाँपर शून्याधारित समयसारणी की संकल्पना का निर्माण हुवा।

शून्याधारित समयसारणी मे 4 तरह की गाड़ियोंका समूह बनाया गया है। राजधानी और उस प्रकार की HST हाई स्पीड ट्रेन – 130 kmph, मेल/एक्स्प्रेस – 110 kmph, मेमू – 100 kmph और EMU 96 kmph अब इनका वर्गीकरण करना है तो स्टेशन टर्मिनल की कमी, रखरखाव के लिए पर्याप्त समय, मुख्य ट्रेन टर्मिनल्स पर दबाव, और आरंभिक स्टेशनों से गाड़ी छोड़ने / गंतव्यों पर पहुँचने का लोकप्रिय समय संभालने की कवायद इतनी सारी मदों को ध्यान मे रखते हुए शून्याधारित समयसारणी मे बदलाव लाने मे खासी परेशानी होने वाली है। उसमे जो जो स्टॉपजेस शून्याधारित समयसारणी की मांग अनुसार रद्द करने का प्रयास किया जाता है, राजनीतिक दबाव के कारण वह भी असफल हो रहे है।

कैग इन मामलोंमे सिफारिश करती है, रेल्वे के परिचालनिक समयसारणी मे ZBTT का प्रयोग किया जा रहा है तो नई दिल्ली – हावड़ा खण्ड के 12466 विवादों मे 4900 विवाद तकरीबन 5 – 5 मिनिट के परिचालन समस्या वाले थे जिन्हे आसानी से निपटाया जा सकता था मगर बचे हुए 7566 मामले बड़े पेचीदा थे। 1) 130 kmph वाली गाड़ी के सामने 110 kmph वाली गाड़ी का चलना, 2) मेल/एक्स्प्रेस के सामने EMU/MEMU का चलना, 3) मेमू गाड़ियों का सुस्त समयसारणी, अनियमित अनुमति का कारण गाड़ियोंका असंगत परिचालन, 4) आगे चलने वाली गाड़ियों का अवकालिक ठहराव व अनियमित कारणों से रुका रहना, 5) तीव्र गति की गाड़ियोंको वरीयता देने के लिए अवैज्ञानिक तरीकेसे साइड ट्रैकिंग कराना, 6) प्रमुख टर्मिनलों पर प्लेटफॉर्मों का कुप्रबंधन इन छह मुद्दों पर रेल प्रशासन को काम करने की सिफारिशें कैग समिति करती है।

मालगाड़ियों को समयसारणी मे अंतर्भूत करना, अतिरिक्त स्टॉपेजेस पर नियंत्रण करना, लंबी दूरीकी गाड़ियोंके स्लिप कोचेस, लिंक सेवा हटाना, ZBTT की सिफारिशों के अनुसार गाड़ियोंका परिचालन करना इस तरह के काम रेल प्रशासन ने अपने कार्यशैली मे लाना शुरू कर दिया है। जो बुनियादी ढांचे मे अढ़ाई लाख करोड़ रुपये का खर्च किया गया है, उसमे पटरियाँ बिछाना, रेल विद्युतीकरण करना, मालगाड़ियोंके लिए अतिरिक्त गलियारों का निर्माण करना, ROB/RUB बनाकर लेवल क्रॉसिंग हटवाना, पादचारी पुल का निर्माण, हाई स्पीड पटरियों के दोनों तरफ सुरक्षा दीवारों का निर्माण इसके अलावा आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली विकसित करना इत्यादि काम किए जा रहे है।

रेल प्रशासन अपने तरफ से भरकस प्रयास कर रही है। कुछ समय और लग सकता है, बाधाएं बहुत है, रेल स्टॉक का निर्माण भी जोरोंपर है, हाई स्पीड लोको, सेल्फ प्रोपलड़ रैक, LHB कोच, मेमू गाडियाँ, सम्पूर्ण विद्युतीकरण यह सब उसी दिशा मे किए जाने वाले काम है।

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दक्षिण रेल SR की चेन्नई से नागरकोइल, तिरुवनंतपुरम, शिर्डी, तिरुवनंतपुरम – मुम्बई के बीच चलनेवाली नियमित गाड़ियाँ जल्द शुरु होने जा रही है।

1: 12689/90 एम जी आर चेन्नई नागरकोईल के बीच साप्ताहिक सुपरफास्ट एक्सप्रेस

12689 चेन्नई सेंट्रल से 15 अप्रेल से प्रत्येक शुक्रवार को नागरकोईल के लिए निकलेगी और वापसीमे 12690 नागरकोईल से 17 अप्रेल से प्रत्येक रविवार को चलेगी।

2: 22207/08 एम जी आर चेन्नई तिरुवनंतपुरम के बीच द्विसाप्ताहिक सुपरफास्ट एक्सप्रेस

22207 चेन्नई सेंट्रल से 15 अप्रेल से प्रत्येक मंगलवार एवं शुक्रवार को तिरुवनंतपुरम के लिए निकलेगी और वापसीमे 22208 तिरुवनंतपुरम से 17 अप्रेल से प्रत्येक बुधवार एवं रविवार को चलेगी।

3: 22601/02 एम जी आर चेन्नई साइनगर शिर्डी के बीच साप्ताहिक सुपरफास्ट एक्सप्रेस

22601 चेन्नई सेंट्रल से 13 अप्रेल से प्रत्येक बुधवार को साइनगर शिर्डी के लिए निकलेगी और वापसीमे 22602 साइनगर शिर्डी से 15 अप्रेल से प्रत्येक शुक्रवार को चलेगी।

4: 16332/31 तिरुवनंतपुरम मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के बीच साप्ताहिक एक्सप्रेस

16332 तिरुवनंतपुरम से 16 अप्रेल से प्रत्येक शनिवार को मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के लिए निकलेगी और वापसीमे 16331 मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से 18 अप्रेल से प्रत्येक सोमवार को चलेगी।