संक्रमण काल मे रेल यात्रा करने में बड़े निर्बंध लगाए गए थे। सारी यात्री गाड़ियाँ आरक्षित और आरक्षण फॉर्म में भी यात्री को अपने गंतव्य रेलवे स्टेशन के साथ वह कहाँ उतरने वाला है, अर्थात उसके गन्तव्य का पता लिखना भी अनिवार्य था।चूँकि 31 मार्च से इन निर्बन्धों मे काफी छूट दी गयी है, अतः रेल प्रशासन ने आरक्षण मांग पत्र से गन्तव्य का पता लिखने की अनिवार्यता को बन्द करने का निर्णय लिया है। इस सबन्धी जारी पत्र में रेल्वे के सारे PRS एवं IRCTC रेलवे की ई-टिकट सेवा को गन्तव्य स्टेशन का यात्री के उतरने, ठहरने का पता लिखने के कॉलम हटाने को कहा गया है।
01037 पुणे से कानपुर के लिए दिनांक 17 अप्रेल से 12 जून तक प्रत्येक रविवार को रवाना होगी वापसीमे 01038 कानपुर से पुणे के लिए दिनांक 18 अप्रेल से 13 जून तक प्रत्येक सोमवार को रवाना होगी।
गाजर हे खरचं दाखवण्यापुरते असते आणि सध्या त्याचा रेल्वे गाडयांच्या बाबतीत सुयोग्य वापर सुरू असलेला दिसतो. त्याचे कारण असे आहे मित्रांनो, गेल्या दोन वर्षात देशभरात संक्रमणाने जो कोण कहर केला होता आणि त्यानिमित्ताने आपल्या काळजीपोटी रेल्वे विभागाने त्यांच्या सर्व प्रवासी गाड्या देखील बन्द करून टाकल्या होत्या. गेल्या वर्ष दीड वर्षात हळू हळू का होईना पण बऱ्याचशा गाड्या मार्गी लागलेल्या आहेत.
आता मग माशी शिंकली कुठे? अहो आपल्या विदर्भात, विदर्भ म्हणजे महाराष्ट्र मधील एक प्रान्त. मराठवाडा, उत्तर महाराष्ट्र, पश्चिम महाराष्ट्र, कोंकण विभाग तसाच विदर्भ. पण अनास्था बघा, महाराष्ट्राच्या विदर्भात चंद्रपूर हा जिल्हा, भारतीय रेल्वेच्या ग्रैंड ट्रंक अश्या महत्वपूर्ण असलेल्या दिल्ली – चेन्नई मार्गावरील बल्हारशहा हे प्रमुख रेल्वे स्टेशन आणि जंक्शन चंद्रपूरच्या अगदी जवळ. मुम्बई या महाराष्ट्र च्या राजधानीशी रेल्वे मार्गाने व्यवस्थितरित्या जोडलेले हे शहर. एक दररोज धावणारी बल्हारशहा – वर्धा – मुम्बई सेवाग्राम लिंक एक्सप्रेस आणि दोन मुम्बई ते बल्हारशहा आनंदवन आणि ताडोबा साप्ताहिक एक्स्प्रेस गाड्या परंतु साहेब, ही जुनी गोष्ट झाली हो. सध्या एक ही सरळ गाड़ी मुम्बई आणि चंद्रपूर यांच्या दरम्यान धावत नाही.
रेल्वे विभागाने मध्यंतरी देशभरातुन सर्व लिंक एक्स्प्रेस गाड्या बंद केल्या त्यांना रेल्वे स्टेशनावरचे शंटिंग आणि त्यामुळे वाया जाणारा वेळ, मानवी श्रम वाचवयाचे होते. त्यात ही आपली चंद्रपूर ची लाड़की आणि सोईची सेवाग्राम लिंक एक्सप्रेस बळी गेली, बन्द करण्यात आली. संक्रमणमधे बंद केल्या गेलेल्या आनंदवन एक्स्प्रेस आणि ताडोबा एक्स्प्रेस परत कधी ही म्हणजे आजवर देखील सुरू झालेल्या नाहीत.
ही बाब रेल्वे अधिकारी म्हणा वा जनप्रतिनिधि म्हणा यांच्या लक्षात आली व त्यानी दादर ते बल्हारशहा अशी चंद्रपूरला मुम्बईशी सरळ जोडणारी आठवड्यातुन दोन दिवस चालेल अश्या एक सुट्टी विशेष गाड़ीची योजना तयार केली. ही गाड़ी जर प्रवासीच्या पसंतीस उतरली तर तिला कायम सुरू ठेवण्याचे ही प्रयोजन विचाराधीन होते. ही दादर बल्हारशहा द्विसाप्ताहिक विशेष गाड़ी 10 एप्रिल पासून दाखल होणार होती. पण शेवटी काय तर ते गाजरच ठरले आणि गाड़ी कुठे हरवली ही काही कळलेच नाही.
एकूण महाराष्ट्राचा विदर्भ विभाग हा रेल्वेच्या बाबतीत असाच दुर्लक्षित राहतो. आजही चंद्रपूर, वाशिम हे असे जिल्हे आहेत की तेथे रेल्वेचे मजबूत आणि व्यवस्थित जाळे असून सुद्धा रेल्वे विभाग मुम्बई या राज्याच्या राजधानी ला जोडणाऱ्या गाड्या देवू शकत नाही हे या भागातील लोकांच दुर्दैव समजाव की जनप्रतिनिधीची अनास्था?
विषय है, पश्चिम रेल्वे की कुछ गाडियाँ पुनरबहाली का। दरअसल पश्चिम रेल्वे ने निम्नलिखित परिपत्रक दिनांक 08 अप्रेल को जारी किया और उसमे पहली ही गाड़ी 19303/04 इन्दौर भोपाल इन्दौर एक्स्प्रेस है जो दिनांक 14 अप्रेल से इन्दौर से और दिनांक 15 अप्रेल से भोपाल से शुरू हो जाएगी। अब दिक्कत यह है, रेल प्रशासन ने इस गाड़ी को ‘फुल्ली रिजर्व्ड’ अर्थात सम्पूर्ण आरक्षित रहेगी ऐसा फरमान दिया है।
19303/04 इन्दौर भोपाल इन्दौर एक्स्प्रेस यह कोई नई गाड़ी या गर्मी/छुट्टी या त्यौहार विशेष गाड़ी तो है नहीं की उसे प्रशासन सम्पूर्ण आरक्षित आसन व्यवस्था के साथ चला रहा है? हम यहाँपर पर कुछ पुराने चित्र, अखबार के पन्नों पर छपी खबरें और खुद रेल प्रशासन द्वारा छपा टाइमटेबल भी दे रहे है,
19303/04 गाड़ी की नेमप्लेटवर्ष 2019, माह जुलै, वेस्ट झोन टाइम टेबल में छपा टेबल नम्बर 16A, गाड़ी 19303 इन्दौर भोपाल एक्सप्रेस की समयसारणी
इसके उपरान्त रेल्वे बोर्ड ने इन पुनर्स्थापित किए जानेवाली गाड़ियों के बारे मे एक अलग से पत्र जिसे यहाँ संलग्न कर रहे है, पत्र क्र CC/06 of 2022 दिनांक 28 फरवरी 2022 को जारी कर यह आदेश दिया था “जो भी गाड़ीया अपने पुराने गाड़ी क्रमांक से पुनर्स्थापित की जाएगी, उनमे द्वितीय श्रेणी अनारक्षित आसनों को संक्रमनपूर्व अवस्था मे ही बहाल किया जाएगा।” अब यह अलगसे कहने की जरूरत नहीं की यह पश्चिम रेल प्रशासन की क्षेत्र के यात्रीओं के साथ सरासर ज्यादती है। जब यह गाड़ी पुनर्स्थापित की जा रही है तो उसे सम्पूर्ण आरक्षित क्यों किया जा रहा है?
हालांकि इस गाड़ी के आरक्षण अभी शुरू नहीं हुए है, और यात्रीओंको इस बात की बेसब्री से प्रतीक्षा है, आखिर रेल प्रशासन ने 08 अप्रेल को इस गाड़ी के साथ ही 17 जोड़ी और भी गाडियाँ शुरू करने की घोषणा की थी और विशेष बात यह है की उन्मे कई सारी गाडियाँ विशेष गाड़ी क्रमांक से चलाई जाने के बावजूद अनारक्षित आसन व्यवस्था के साथ रहेंगी। तो फिर इस पुनर्स्थापित गाड़ी 19303/04 इन्दौर भोपाल इन्दौर एक्सप्रेस को ही आरक्षित कर क्यूँ चलाया जा रहा है? तमाम यात्रीओं मे इस गाड़ी के द्वितीय श्रेणी साधारण वर्ग को आरक्षित कर चलाया जाएगा या अनारक्षित ही रहेगा इस बात की चर्चा है। कई यात्री तो इसे प रे की ‘गलती से मिस्टेक’ मान कर चल रहे है।