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प म रेल की अनारक्षित मेमू गाड़ियाँ

कोटा से नागदा, झालावाड़ और बीना के चलेगी मेमू ट्रेन, रेल राज्य मंत्री दर्शना जरदोष दिनांक 5 जनवरी से करेंगी शुभारंभ।

कोटा से नागदा, झालावाड़, और बीना के लिए मेमू ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। रेल राज्य मंत्री दर्शना जरदोश और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला 5 जनवरी को झंडी दिखाकर इन ट्रेनों की शुरुआत करेंगे। उसके उपरान्त एक – दो दिन में सभी ट्रेनें नियमित रूप से चलने लगेंगी। उद्घाटन कार्यक्रम नवनिर्मित सोगरिया स्टेशन पर सुबह करीब 11 बजे शुरू होगा। इसी दिन रेल राज्य मन्त्री और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला सोगरिया स्टेशन का भी उद्घाटन करेंगे।

यूँ तो आधिकारिक परिपत्र आया नही है, मगर सुत्रोंसे पता चलता है की मेमू गाड़ियोंकी समयसारणी कुछ इस प्रकार रह सकती है।

मेमू गाड़ी संख्या 61616 कोटा से सुबह 6:00 बजे रवाना होकर 10:25 बजे नागदा पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी संख्या 60615 नागदा से दोपहर 14:25 बजे रवाना होकर शाम 19:00 बजे कोटा पहुंचेगी।

कोटा से गाड़ी संख्या 61614 शाम 19:10 बजे झालावाड़ के लिए रवाना होगी। झालावाड़ में यह ट्रेन रात 21:35 बजे पहुंचेगी। झालावाड़ से गाड़ी संख्या 61613 सुबह 5:55 बजे रवाना होकर 8:20 बजे कोटा पहुंचेगी।

कोटा से गाड़ी संख्या 61611 सुबह 8:30 बजे रवाना होकर शाम 16:45 बजे बीना पहुंचेगी। बीना से गाड़ी संख्या 61612 सुबह 10:30 बजे रवाना होकर शाम 18:50 बजे कोटा पहुंचेंगी।

मेमू ट्रेनों का संचालन रोजाना किया जाएगा।

ट्रेन संचालन के लिए मेमू के रेक बीना पहुंच चुके हैं। यहां इनका रखरखाव यहीं किया जाएगा। दो-तीन दिन में इन रेकों के कोटा पहुंचने की संभावना है। बीना, नागदा और झालावाड़ के लिए कुल चार रेक चलेंगे।

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क्या क्लोन गाड़ियाँ चलाने की तकनीक को पाला मार गया है?

भारतीय रेल में बीते वर्ष बड़े जोरशोर से शुरू की गई ‘क्लोन’ गाड़ियोंके चलने का सिलसिला अचानक ही थम सा गया लगता है। नियमित गाड़ियाँ यात्रिओंसे खचाखच भर कर चल रही है।

यूँ तो रेल के हर कोच पर उसकी यात्री क्षमता लिखी रहती है, मगर ताज्जुब की बात यह है की यह लिखी हुई यात्री संख्या न तो सवार यात्रीओंको समझ पड़ती है और ना ही रेल अधिकारियों को। 90 यात्री संख्या के द्वितीय श्रेणी कोच में बड़े आसानी से 200 यात्री आपको यात्रा करते मिल जाएंगे। यह हाल जब है, जब यह कोच सम्पूर्ण आरक्षित व्यवस्था में चलाए जा रहे है और अनारक्षित बुकिंग बन्द है।

अब आप आसानी से समझ सकते है, की कोच पर लिखित यात्री संख्या और सवार यात्री संख्या का दूर दूर तक कोई मेल क्यों नही है। भई, जिनके आरक्षण नही है वह यात्री लोग बिना टिकट मतलब बिना अनुमति यात्रा कर रहे है। मगर यह बात रेलवे के अधिकारी, टिकट जांच दल, सुरक्षा दल इनको तो बिल्कुल दिखाई नही देता, ना ही वे इनकी कोई शिकायत सुन सकते है और ना ही उनको कुछ सलाह देते है। जी, आप सही समझे है, न देखना, न सुनना और न ही बोलना।

लम्बी दूरी की लगभग हर गाड़ी का द्वितीय श्रेणी कोच जो की पूरे गाड़ी में केवल 2 या 3 कोच ही होते है, आरम्भ के स्टेशन से ही फूल हो जाता है। जितने भी प्रतिक्षासूची के यात्री है, सब धरे के धरे रह जाते है, कन्फर्म ही नही हो पाते तो बीचवाले स्टेशन के यात्रिओंकी क्या बात करेंगे? ऐसी स्थिति में यात्री क्या करें? 100-200 की टिकट, रद्द करें तो पैसे कटेंगे अलग। यात्री उसी अवस्था मे गाड़ी में चढ़ जाता है, किसी चेकिंग कर्मी या सुरक्षा कर्मी ने पकड़ा तो माँगा गया जुर्माना देकर वहीं बैठे बैठे अपने गंतव्य तक पहुंच जाता है।

आप यकीन कर सकते है, कितनी दयनीय अवस्था है? टिकट के पूरे पैसे चुकाए, जुर्माना भी दिया फिर भी वह यात्री बिना टिकट ही। और तो और यात्रा भी कर लेगा कोच के जमीन पर बैठ कर, लेट कर या दरवाजे के पास या फिर टॉयलेट के दरवाजे के बाजुमे या बेसिन के नीचे या सामान रखने के मात्र 1 फुट के संकरे से रैक पर। यह हमारे देश के मजदूर, कामगार वर्ग के हाल है। उत्तरी भारत से बड़े शहरोंकी और जाने वाली प्रत्येक गाड़ी का यह आंखों देखा हाल है। मित्रों, बहुत बुरा हाल है, बहुत ही बुरा हाल है।

रेल प्रशासन क्या आरक्षण के इस वर्ग पर निगरानी रखना छोड़ चुका है? क्या उनको इस द्वितीय श्रेणी की बुकिंग से कोई लेनादेना नही है? क्या क्लोन गाड़ियाँ केवल वातानुकूल या शयनयान की प्रतिक्षासूची देखकर ही चलाई जाती है? बहुत गम्भीर प्रश्न है।

यह यात्रिओंका वर्ग तो इतना सहनशील है, बेचारोंकी रेल प्रशासन से बहुत मामूली सी माँग है, बस! द्वितीय श्रेणी अनारक्षित टिकटें शुरू करवा दीजिए, हम पहले की तरह हर 90 यात्री क्षमता के कोच में 200-300 यात्री भर के निकल लेंगे, कमसे कम बिना टिकट तो यात्रा नही करनी पड़ेगी। हमे हमारे हाल पर छोड़ दीजिए, हम किसी तरह अपने रोजी रोटी की जगह पहुंच जाएंगे।

देखिए, रेल प्रशासन, यह यात्री टिकट लेने के लिए तैयार है, रेलवे को पैसा देकर सन्मान से यात्रा करना चाहते है और एक यह व्यवस्था है की टिकटें ही उपलब्ध नही है। रेल विभाग को चाहिए की जब उन्होंने द्वितीय श्रेणी को आरक्षित कर ही दिया है तो उसके प्रतिक्षासूची की भी मोनिटरिंग यथावत करें और उन प्रतिक्षासूची के लोगों को अतिरिक्त कोच या अतिरिक्त गाड़ियोंकी व्यवस्था करें। अपनी ‘क्लोन’ गाड़ियोंको सिर्फ वातानुकूल या शयनयान के आधारपर ही चलाने के बजाए द्वितीय श्रेणी के प्रतिक्षासूची पर भी चलाने की व्यवस्था करें।

Photo courtesy indiarailinfo.com

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पश्चिम रेलवे, प म रेल में मल्हारगढ़, गरोठ, शामगढ़, सुवासरा, दलौदा, जावरा, जावद रोड और पिपलिया स्टेशन पर मिली ठहरावोंकी सौगात!

शून्याधारित समयसारणी में पश्चिम रेलवे के लगभग 1000 से भी ज्यादा ठहरावोंको खत्म करने का प्रस्ताव था। जैसे ही संक्रमणकाल के बाद गाड़ियोंका परिचालन शुरू हुवा तो कई छोटे छोटे स्टेशन के ठहराव रद्द कर दिए गए। यात्री बेचारे भौचक रह गए थे, आखिर करे तो क्या करे? छोटे स्टेशनोंके यात्रिओंकी सुनवाई तक नही होती, फिर उनकी बात रेल विभाग के अधिकारियों, मंत्रियों तक पहुंचाने का जिम्मा यात्री संगठनों ने लिया। अपनी सारी समस्याएं उन्होंने क्षेत्र के सांसद सुधीर गुप्ता के सामने रखी। सांसद गुप्ता भी रेल मंत्रालय से लगातार संपर्क में रहे और आखिरकार इन छोटे स्टेशनोंके यात्रिओंको न्याय मिला और बहुतसे ठहराव के पुनर्बहाली की अनुमति मिल गयी है। आइए देखते है,

🚂19327/28 रतलाम उदयपुर सिटी रतलाम प्रतिदिन एक्सप्रेस का मल्हारगढ़ स्टेशन पर स्टॉपेज स्वीकृत !

🚂 09801/02 नागदा कोटा नागदा इंटरसिटी प्रतिदिन का गरोठ स्टेशन पर !

🚂 20941/42 बांद्रा गाजीपुर बांद्रा द्विसाप्ताहिक सुपरफास्ट का शामगढ़ स्टेशन पर !

🚂 19037/38 बान्द्रा बरौनी बान्द्रा प्रतिदिन अवध एक्सप्रेस का शामगढ़ स्टेशन पर !

🚂 20845/46 बिलासपुर बीकानेर बिलासपुर द्विसाप्ताहिक सुपरफास्ट का सुवासरा स्टेशन पर !

🚂14801/14802 जोधपुर इंदौर जोधपुर प्रतिदिन एक्सप्रेस का दलौदा स्टेशन पर स्टॉपेज स्वीकृत !

🚂17019/20 जयपुर हैदराबाद जयपुर वाया भुसावल, मनमाड़, औरंगाबाद साप्ताहिक एक्सप्रेस का जावरा स्टेशन पर स्टॉपेज स्वीकृत !

🚂19329 /30 इंदौर उदयपुर इन्दौर वीर भूमि प्रतिदिन एक्सप्रेस का पिपलिया एवं जावद रोड स्टेशन पर स्टॉपेज स्वीकृत !

इन ठहरावोंसे यात्रिओंको बहुत राहत मिलने वाली है। यात्री संगठन, संक्रमणकाल के बाद गाड़ियाँ दोबारा पटरी पर आने के बाद से, इन रद्द हुए ठहरावोंकी लगातार माँग कर रहे थे। सांसद सुधीर गुप्ता के विशेष प्रयासोंका ही यह नतीजा है की ठहरावोंकी पुनर्बहाली हो पाई और क्षेत्र के यात्री उनका इसके लिए हृदय से आभार प्रकट करते है। आशा है, रेल विभाग भी अब जल्द ही ठहरावोंके समय को लेकर अपना परिपत्रक जारी कर दे।

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बान्द्रा बाड़मेर बान्द्रा साप्ताहिक विशेष गाड़ी वाया भीलड़ी, जालोर, समदड़ी, 31 दिसम्बर से 8 फेरे

09037 बान्द्रा बाड़मेर साप्ताहिक विशेष दिनांक 31 दिसम्बर से 18 फरवरी तक प्रत्येक शुक्रवार को बाड़मेर के लिए चलेगी वापसीमे 09038 बाड़मेर बान्द्रा साप्ताहिक विशेष दिनांक 01 जनवरी से 19 फरवरी तक प्रत्येक शनिवार को बाड़मेर से चलेगी। 21 कोच की इस गाड़ी में 12 वातानुकूल थ्री टियर, 6 द्वितीय श्रेणी शयनयान स्लिपर, 2 LRRM और 1 पेंट्रीकार रहेगी। यह गाड़ी 19091/92 बान्द्रा गोरखपुर बान्द्रा हमसफ़र एक्सप्रेस के लाय ओवर समय मे समायोजित की गई है। यात्रीगण से निवेदन है, निम्नलिखित समयसारणी के PTT (पब्लिक टाइमटेबल) समय ही ध्यान में लेवे। WTT याने वर्किंग टाइमटेबल होता है जिसका उपयोग रेल्वके परिचालन विभाग हेतु बनाया गया रहता है।

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पंजाब में किसान आंदोलन समाप्त हुवा, अब ट्रेनें सीधी चलने लगेगी।

अभी की ताजा खबर है, पश्चिम रेलवे ने एक घोषणा के जरिए यह कहा है, उनके यहांसे चलने वाली गाड़ियाँ अब शार्ट टर्मिनेट नही होगी और सीधे अपने नियोजित गन्तव्योंतक चलेगी।