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चालीसगांव धुळे चालीसगांव मेमू गाड़ियोंके दो फेरे चल पड़ेंगे।

चालीसगांव धुळे के बीच दो जोड़ी अनारक्षित विशेष मेमू सप्ताह में 6 दिन चलाने की घोषणा की गई है। यह दोनों जोड़ी गाड़ियाँ 13 दिसम्बर से अपने फेरे सोमवार से लेकर शनिवार तक करती रहेगी। रविवार को कोई भी गाड़ी नही चलेगी।

01303 चालीसगांव धुळे विशेष सुबह 6:30 को चालीसगांव से चलकर धुळे को 7:35 को पहुचेंगी। इसी तरह 01313 चालीसगांव धुळे विशेष शाम 17:30 को चालीसगांव से चलकर धुळे को शाम 18:35 को पहुचेंगी।

वापसी के दो फेरे इस प्रकार है,

01304 धुळे चालीसगांव विशेष सुबह 7:50 को धुळे से निकल सुबह 8:55 को चालीसगांव पहुचेंगी। 01314 धुळे चालीसगांव विशेष शाम 19:20 को धुळे से निकल शाम 20:25 को चालीसगांव पहुचेंगी।

समयसारणी निम्नलिखित है,

यह दोनों जोड़ी अनारक्षित विशेष गाड़ियोंके फेरे संक्रमनकालीन सभी निर्बन्धों का पालन करते हुए चलाए जाएंगे। रेल प्रशासन यात्रिओंसे निवेदन करती है, सम्पूर्ण टीकाकरण प्राप्त और महाराष्ट्र राज्य द्वारा जारी युनिवर्सल पास और नियम पालन करनेवाले व्यक्ति ही इन गाड़ियोंमे यात्रा करें। सैनिटाइजर का उपयोग करे और यात्रिओंके बीच यथोचित अन्तर बनाए रखे

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रेल सम्बन्धी स्थायी समिति की सूचनाओं के अलावा यात्रीओंकी और भी अपेक्षाएं है। यात्रीओं को यह भी जानकारी चाहिए,

कल रेल आरक्षण प्रणाली पर सांसदों की रेल सम्बन्धी स्थायी समिति की रिपोर्ट पर हमारे ब्लॉग के लेख पर यात्रीओं की कई सारी प्रतिक्रियाएं आई। बहुतांश प्रतिक्रियाओं का सुर नाराजगी की तरफ जा रहा था।किसी ठोस एवं समाधानपूर्ण मांग का अभाव इस रिपोर्ट मे साफ साफ दिखाई दे रहा था। रेल आरक्षण करते वक्त यात्रीओं को धरातल पर जो परेशानीयों का सामना करना पड़ता है, उसका समाधान क्या केवल आरक्षण प्रणाली को अद्यतन करना इतनाही ही है? आरक्षण प्रणाली उच्च तकनीक और तीव्र गति वाली हो यह तो अध्यारूत है, वह तो होनाही चाहिए परंतु और भी बहुत सारे छोटे छोटे उपाय किए जा सकते है।

यात्रिओंको सिर्फ टिकटोंकी नही बल्कि कन्फर्म टिकटोंकी उपलब्धि चाहिए है। रेल प्रशासन PRS के अलावा डाकघर, IRCTC की वेबसाइट और ऍप, YTSK काउंटर्स पर आरक्षित टिकट उपलब्ध कराती है। YTSK काउंटर के सर्विस चार्ज का भी एक अलग गणित है। रेलवे समिति को कुछ और ही बता रही है और हकीकत में वसूली कुछ अलग ही हो रही है। YTSK यात्री टिकट के बारे में समिती को यह दर्शाया गया है की पर टिकट शुल्क लिया जाता है न की प्रति यात्री, जब की ऐसा नही है। निम्नलिखित YTSK टिकट और नियमावली देखी जा सकती है।

वातानुकूल वर्ग के लिए YTSK का ₹40/- प्रति यात्री शुल्क लगा टिकट
YTSK की नियमावली : सर्विस चार्ज प्रति पैसेंजर लगता है
समिति के रिपोर्ट में YTSK या बुकिंग एजेन्ट प्रति तिकिट सर्विस चार्ज लेंगे यह दर्शाया गया है।

दोनोंही परिपत्रक हाल ही के है, फिर समिति को रेल प्रशासन क्यों कर सही चार्जेस नही दिखा रही है?

रेलवे की कोटा सिस्टम :-

रेलवे की कोटा प्रणाली समझने के लिए हमे थोड़ा पीछे जाना होगा। जब PRS सिस्टम नही था और सारे आरक्षण भौतिक रूप से चलते थे तब प्रत्येक स्टेशन या यूं समझिए जंक्शन स्टेशन, ब्रांच लाइन के स्टेशन पर बहुतांश गाड़ियोंमे यात्रिओंके किए आरक्षण कोटा निर्धारित किया जाता था। वह कोटा निर्देशित स्टेशन से ही आबंटित होता था। फिर कम्प्यूटर PRS आरक्षण सिस्टम कार्यान्वित हुई तो कई स्टेशनोंके कोटे सिमट गए और लम्बी दूरी की गाड़ियोंमे 2-4 स्टेशनोंके बीच में रह गए। उदाहरण के तौर पर 12627 बेंगलुरू नई दिल्ली कर्नाटक एक्सप्रेस को लीजिए। इस गाड़ी मे बंगलुरु, कलबुरगी, मनमाड और भुसावल से कोटा दिया गया है। मगर आम यात्री को यह कोटा पता नहीं होता और उसके चलते वह प्रतीक्षासूची मे अटक कर रह जाता है। यदि सभी गाड़ियोंके सामने स्टेशन कोटा पता लग सके तो यात्री पहले स्टेशन का कोटा ले कर अपने टिकट खरीद सकता है, जिससे रेल्वे का राजस्व भी बढ़ेगा और यात्रीओंको भी सुविधा मिलेगी।

रेल यात्रिओंकी यह मांग है, रेल प्रशासन सभी गाड़ियोंके कोटे स्टेशनवाईज दर्शाए। जब निजी वेबसाइटों पर यह कोटे स्टेशन से सामने दिख सकते है तो रेलवे की अधिकृत वेबसाइटों पर क्यों नही दिखाए जा सकते?

रेल द्वारा नियुक्त बुकिंग एजन्ट को किसी भी अन्य PRS पर भौतिक टिकट बुक कराने की अनुमति न दी जाए, इसके एवज में उनके स्वामित्व वाले टर्मिनल्स पर समयसीमा का बंधन हटा देना चाहिए। एक तरफ रेल प्रशासन टिकट बुक कराने एजंट नामित करता है और दूसरी और जब सबसे ज्यादा मांग होती है उन समय मे टिकट निकालने मनाही करता है। यह किस तरह की व्यवस्था है?

यह साधारण सी बात है की मांग ज्यादा और वितरण की कमी ( डिमाँड़ एण्ड सप्लाय ) यह नियम लागू होता है। आरक्षण करनेवाले प्रत्येक यात्री की फ़ोटो आइडेंटिटी को अनिवार्य किया जाए तो भी आरक्षण के गैरप्रकार कम हो सकते है। ज्यादा तर लम्बी दूरी की गाड़ियोंमे कम अंतर की यात्रा करनेवाले यात्री भीड़ करते है, इसके लिए कम अंतर वाली इंटरसीटी गाड़ियोंका प्रावधान बेहतर हो सकता है। यात्रीओंकी संख्या ज्यादा है और जगह कम तो कालाबाजारी होना स्वाभाविक है। कालाबाजारी को रोकने के लिए उपाय तो किए जाते है परंतु वहीं यदि गाड़ियों मे जगह बढ़ती है तो यह भी कालाबाजारी पर अंकुश लगा सकती है।

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पूर्व तटीय रेल ECoR के सम्बलपुर मण्डल मे रेल ब्लॉक की सूचना

यात्रीगण कृपया ध्यान दीजिए, सम्बलपुर मण्डल के सम्बलपुर – टीटीलागढ़ खण्ड पर सम्बलपुर से हीराकुड के बीच रेल दोहरीकरण का कार्य चल रहा है। इस कार्य के तहत 20 गाड़ियाँ रद्द, 16 गाड़ियाँ परावर्तित मार्ग से और 1 जोड़ी गाड़ी अंशतः रद्द रहेगी। यह रेल ब्लॉक 08 से 14 दिसम्बर के बीच रहेगा।

सम्बलपुर से पूरी के बीच उपरोक्त दिनोंमें रेल यात्रा का नियोजन हो तो कृपया रेल हेल्पलाइन 139 या रेलवे की वेबसाइट, ऍप से गाड़ियोंके परिचालन को समझ ले और तदनुसार अपनी रेल यात्रा का नियोजन करे।

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भारतीय रेल यात्री आरक्षण प्रणाली मे और सुधार की आवश्यकता है : रेल संबंधी स्थायी समिति की समीक्षा

भारतीय रेल हमारे देश की जीवन वाहिनी, नैशनल कैरियर मानी जाती है। भारतीय रेल न सिर्फ परिवाहन का सबसे किफायती और पर्यावरण अनुकूल संसाधन है बल्कि देश के सामाजिक, आर्थिक विकास मे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारतीय रेल प्रतिदिन 13,500 यात्री गाड़ियोंमे लगभग 2,30,00,000 यात्रीओंको लाने – ले जाने की लिए लंबा रास्ता तय करती है। यात्रीओं की इतनी व्यापक संख्या को देखते हुए रेल्वे की यह जिम्मेदारी बनती है की वे अपने यात्रीओं के लिए देशभर से कहीं से भी यात्रा करने के लिए किसी भी स्टेशन से टिकट बुकिंग करने की उचित सुविधा प्रदान करे।

रेल्वे मे पहले आरक्षित एवं अनारक्षित टिकट मैनुअल तरिके से बुक की जाती थी। अब यह काम कंप्यूटर से ऑनलाइन PRS प्रणाली से किया जा रहा है। चूंकि विषय आरक्षण प्रणाली का है, तो उसी को ले कर आगे बढ़ते है। ऑनलाइन PRS प्रणाली की शूरवात सितंबर 1985 से CMC के सहयोग मे नई दिल्ली से हुई जिसे रेल्वे की तकनीकी उपकम्पनि CRIS एवं CONCERT द्वारा सिकंदराबाद, मुम्बई, कोलकाता और चेन्नई मे आगे बढ़ाया गया। अप्रेल 1999 से यह प्रणाली पूरे देशभर मे कार्यान्वित की गई। 30 जून 2020 तक 4043 आरक्षण केंद्र मे 10725 टर्मिनल रेल्वे आरक्षण का काम सुचारु रूप से कर रहे है। इनमे रेल्वे के PRS काउंटर, आईआरसीटीसी के वेबसाइट और ऐप, डाकघर के PRS, YTSK यात्री टिकट सुविधा केंद्र और गैर रेल्वे केंद्र जो भौतिक रूप के टिकट बुक करते है, शामिल है।

भारतीय रेल्वे अपनी आरक्षण प्रणाली को दिन ब दिन मजबूत और अद्यतन करते रहती है। वर्ष 2019-20 मे PRS का अधिकतम लेन – देन प्रति मिनट (TPM) 8,711 था जो फिलहाल 28,915 तक उन्नत किया गया है। जनवरी 2020 के आँकड़े यह बताते है की एवरेज 14,16,990 लेन – देन प्रतिदिन हो रहे है जिस मे लगभग 84% टिकट की बुकिंग और 16% रद्दीकरण किया जा रहा है। आईआरसीटीसी के ई-टिकट और PRS के भौतिक टिकट मे एक बहुत बड़ा फर्क है। ई-टिकट यदि अंतिम चारटींग के बाद प्रतीक्षा सूची मे रह गए तो अपने आप रद्द हो जाते है जब की PRS टिकट रद्द कराने के लिए व्यक्तिशः पहल करनी पड़ती है। यज्ञपि रेल्वे उसका PNR क्रमांक रद्द कर देती है फिर भी उस टिकट पर अनारक्षित कोच मे यात्री यात्रा कर सकता है। अब इसमे सबसे बड़ी तकलीफ यह है की वह यात्री अपनी प्रतीक्षासूची वाली टिकट लेकर आरक्षित कोच मे जबरन यात्रा करने का प्रयत्न करता है। हालांकि रेल प्रशासन उस यात्री को आरक्षित कोच मे यात्रा करने के लिए दंडित करता है मगर व्यापक निगरानी के अभाव मे ऐसे यात्री को आरक्षित कोचों मे आम तौर पर सहज ही पाया जाता रहा है। रेल प्रशासन को चाहिए की ऐसे PRS टिकट को भी पूर्णतया रद्द समझ कर रिफ़ंड प्रोसेस के लिए आवश्यक माना जाए और ऐसे टिकट को अनारक्षित कोच मे भी रद्द समझा जाना चाहिए। यात्रा करने के लिए उचित टिकट ही वैध माना जाना चाहिए, यात्री को प्रतीक्षा सूची टिकट को अनारक्षित टिकट का विकल्प रद्द किया जाना चाहिए।

रेल्वे प्रशासन द्वारा यात्री सुविधा के लिए दिसम्बर 1997 से तत्काल आरक्षण प्रणाली शुरू की गई। शुरुवात मे तत्काल व्यवस्था केवल 110 गाड़ियोंमे और स्लीपर क्लास के लिए ही शुरू की गई थी लेकिन इसके उत्साहवर्धक परिणाम देखने के बाद अगस्त 2004 से इसे देशभर की सभी गाड़ियोंमे लागू किया गया। अक्तूबर 2014 से तत्काल कोटे मे एक प्रीमियम तत्काल नामक एक और कोटा शुरू किया गया। जिस मे टिकट का दर प्रीमियम डायनामिक रेट से बढ़ता है। प्रत्येक गाड़ी के तत्काल और प्रीमियम तत्काल कोटे का निर्धारण संबंधित क्षेत्रीय रेल्वे के पास है। तत्काल टिकट गाड़ी के प्रस्थान स्टेशन से एक दिन पहले शुरू होता है और पहले चार्टिंग तक आबंटित किया जाता है। इसके पश्चात यदि कोई जगह खाली रह जाती है तो उसे संबंधित स्टेशन के जनरल कोटे मे वर्ग कर दिया जाता है।

आरक्षण रद्दीकरण के नियम :

रेल यात्री किरायोंमे रियायत :

भारतीय रेल देश के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भागीदारी रखती है और जनता में यह स्तर बराबरी में रखने हेतु अलग अलग मदों में यात्री किरायोंमे छूट के प्रावधान प्रदान करती है। 54 वर्ग में रियायत दी जाती है जिसमे बच्चोंसे लेकर बुजुर्ग, मरीज, दिव्यांग, विविध राष्ट्रीय पुरस्कार, पत्रकार, किसान और युवा आदि आते है। बीते वित्त वर्ष 2018-19 में, रियायतोंके चलते रेलवे ने लगभग 2000 करोड रुपए का राजस्व खोया है। समिति ने रेल्वेसे रियायतों के क्षेत्र में सभी प्रवर्ग में रेलवे की उचित निगरानी बनाए रखने की सिफारिश की है। समिति ने रेल कर्मियों को दिए जाने वाली पास पीटीओ की भी जानकारी ली। रेल प्रशासन ने उसे रियायत नही बल्कि सेवा पात्रता का दर्जा दिया है। कई रेल कर्मी सुविधा होते हुए भी उसका उपयोग नही करते या उनको उसकी आवश्यकता ही नही पड़ती। इसका अलग से लेखाजोखा भी रेल विभाग के पास नही होने से इस मद पर कितना खर्च होता है इसका समिति द्वारा आकलन नही किया जा सका।

स्वतंत्रता सेनानी और उनके परिवार में भी रेल किरायों की रियायत दी गयी है। वर्ष 2016-18 में 10435 स्वतन्त्रता सेनानी पास जारी किए गए जिसपर कुल 34 करोड़ रुपये का भुगतान गृह विभाग से किया गया। आजादी को लगभग 75 वर्ष हो गए और औसतन स्वतंत्रता सेनानी की उम्र 85-90 के आसपास होनी चाहिए ऐसे में समिति ने इस प्रवर्ग में यथोचित समीक्षा कर स्मार्ट कार्ड जारी करने की सूचना की है। इस रियायत में रेलवे की कोई हानि नही होती, किराए का भुगतान गृह विभाग कर देता है।

समिति ने रेलवे के पूरे आरक्षण प्रणालीपर जानकारी लेने के बाद कुछ टिप्पणीयाँ और सूचनाएं दी है। रेल्वे के ऑनलाइन आरक्षण प्रणाली को और मजबूत और सुचारू करने हेतु उन्नत किया जाए, बुकिंग एजंट पर यथायोग्य निगरानी रखी जाए, सेकण्ड चार्टिंग की उपयोगिता की समीक्षा की जाए, महंगे फ्लेक्सी/डायनामिक किरायोंकी समीक्षा कर उन्हें तर्कसंगत बनाए, यात्री किराया रियायतें सामाजिक समानता रखने हेतु दी जाती है परंतु इसका ग़ैरफ़ायदा असामाजिक तत्व उठाते है इसलिए ऐसे तत्वों की यथोचित छानबीन कर उनपर अंकुश लगना चाहिए। रेल कर्मियों के पास लेने / छोड़ने का अलग से लेखाजोखा रखा जाए।

यूँ तो समिति ने व्यापक समीक्षा की है और रेलवे के आरक्षण प्रणाली पर समाधान व्यक्त किया है। समिति ने इसी व्यवस्था को कायम रखते हुए कुछ और सुधारणा करने के प्रस्ताव दिए है। हालांकि धरातल पर जब नियमोंके पालन का वक्त आता है तो मनुष्यबल की कमी के चलते कुछ तत्व इनका फायदा लेकर सही जरूरतमंद को वंचित रखते है। PRS काउंटर पर रेलवे द्वारा नियुक्त एजेन्टोंको विशिष्ट टिकटोंकी बुकिंग करते वक्त कुछ देरी से टिकट बुकिंग की अनुमति है मगर यात्रिओंकी मांग है, इन एजेण्टों को केवल IRCTC से ही टिकट निकालने की पात्रता रखी जाए और हर तरह के PRS टिकट की अनुमति रद्द की जाए। PRS टिकट और ई-टिकट के बुकिंग/रद्दीकरण के नियम प्रत्येक स्तर पर समान रखे जाए। PRS टिकट में सेवा शुल्क नही लिया जाता वहीं ई-टिकट में बुकिंग और रद्दीकरण दोनों अवस्था मे वह लगता है। इस तरह की असमानता पर समिति ने गौर कर इसे खत्म करना चाहिए था ऐसी लोकभावना है।

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लम्बी दूरी की तेज गति वाली गाड़ियाँ यात्री सुविधाभिमुख की जाए।

भारतीय रेल में तेज गति की गाड़ियोंका काफी बोलबाला है। शताब्दी, राजधानी, दुरंतो, गतिमान, हमसफ़र इनके अलावा भी कई सुपरफास्ट गाड़ियाँ ऐसी है जो 200-300 किलोमीटर तक बिना ठहरावोंके चलती है। हालाँकि तेज गति वाली गाड़ियोंकी ‘कम ठहराव’ यह विशेषता है, मगर कई यात्रिओंके इस बारे में सुझाव है जो न सिर्फ उनके अपितु रेल प्रशासन के परिचालन में भी बहुत उपयोगी साबित हो सकते है।

जब यह गाड़ियाँ अपने मुख्य टर्मिनल के शुरवाती स्टेशन से चलती है तब उनके उपनगरीय स्टेशनोंपर यदि 2 मिनट का भी ठहराव लेती है तो वह यात्रिओंके दृष्टिकोण से काफी सुविधाजनक हो सकता है। यही स्टोपेज लौटते वक्त भी कायम हुवा तो यात्रिओंका अपने घर पहुंचने के समय मे काफी बचत होगी। साथ ही मुख्य टर्मिनल स्टेशनपर भी यात्रिओंका दबाव कम होगा। उदाहरण के तौर पर मध्य रेल के मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल को लीजिए। यहाँसे कोई सुपरफास्ट गाड़ी चले और दादर, ठाणे, कल्याण में जाते-आते दोनोंही वक्त स्टोपेज ले तो यात्रिओंके लिए बहुत सुविधाजनक होगा। इसी प्रकार मुम्बई सेंट्रल के लिए दादर, बोरीवली, विरार, डहाणू रोड है, नागपुर के लिए अजनी और इतवारी है और भी मुख्य स्टेशन के आसपास के उपनगर गिनाए जा सकते है।

चूँकि रेलवे के टर्मिनल स्टेशन और उपनगरीय स्टेशन लोकवस्ती में से जाते है, व्यापार व्यवसाय और मार्केट से भी निकटतम होते है अतः यात्रिओंको 10-15 मिनट में स्टेशनपर पहुंचकर गाड़ी पकड़ने की सुविधा रहती है। वही हवाई यात्रा भले ही रेलवे से कई गुना तेज है मगर यात्री को अपने रिहायशी इलाके या व्यवसाय की जगहोंसे हवाई अड्डे पर पहुंचने में 2-3 घंटे लग जाते है। यही कारण के लिए सड़क परिवहन ज्यादा लोकप्रिय है। सड़क परिवहन “एप्रोचिंग टाइम” शून्य के बराबर होता है। रेलवे भी अपनी कई गाड़ियोंमे टिकिटोंकी गणना के आधार पर ऐसे स्टोपेजेस बढाने का निर्णय ले सकती है।

यह तो हुई मुख्य टर्मिनल की बात, की जहाँसे गाड़ी आगे जाती ही न हो, मगर जो उपनगर आजकल सैटेलाइट टर्मिनल बनाए जा रहे है, उनमें भी एक सुझाव हक़ीक़त में लाया जा सकता है। मध्य रेलवे की मुम्बई, पुणे से नागपुर जानेवाली गाड़ियाँ अजनी की जगह नागपुर से आगे इतवारी में और बिलासपुर से आनेवाली गाड़ियाँ अजनी में टर्मिनेट की जाए। इससे दोनों ओरसे चलनेवाली गाड़ियोंको नागपुर स्टेशन के स्टोपेज का लाभ मिल पाएगा। इस तरह की सुविधा पटना स्टेशन के दोनों दिशाओं की गाड़ियोंमें राजेंद्रनगर और दानापुर स्टेशन, जबलपुर में मदनमहल और आधारतल, भोपाल में रानी कमलापति और निशातपुरा इस तरह हो सकती है।

रेल प्रशासन को वाकई ऐसे लोकभावना वाले सुझावोंपर विचार करने की आवश्यकता है।