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बड़ी खबर : मध्य रेलवे की मुम्बई चेन्नई मेल, मुम्बई पुणे इंटरसिटी और द रे की चेन्नई सालेम गाड़ियाँ दिसम्बर के पहले सप्ताह से बहाल होने जा रही है।

1: 11027/28 दादर चेन्नई एग्मोर के बीच प्रतिदिन चलनेवाली चेन्नई मेल सुपरफास्ट स्वरुप और त्रिसाप्ताहिक स्वरुप में बहाल होने जा रही है। इस बदले रूप में इसका गाड़ी क्रमांक 22157/58 और टर्मिनल बदलाव होकर, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से चेन्नई एग्मोर के बीच चलाई जाएगी। 22157 दिनांक 01 दिसम्बर से प्रत्येक सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार को छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस मुम्बई से चलेगी और वापसीमे 22158 दिनांक 04 दिसम्बर से प्रत्येक गुरुवार, शनिवार एवं सोमवार को चलाई जाएगी। यात्रीगण कृपया बदले हुए टर्मिनल, परिचालन दिन एवं समयसारणी पर ध्यान दीजिएगा

2: 11063/64 चेन्नई एग्मोर सालेम के बीच प्रतिदिन चलनेवाली एक्सप्रेस अब सुपरफास्ट स्वरुप और त्रिसाप्ताहिक स्वरुप में बहाल होने जा रही है। इसका गाड़ी क्रमांक 22153/54 रहेगा। 22153 दिनांक 02 दिसम्बर से प्रत्येक मंगलवार, गुरुवार एवं शनिवार को चेन्नई एग्मोर से रवाना होगी। वापसीमे 22154 दिनांक 03 दिसम्बर से प्रत्येक बुधवार, शुक्रवार एवं रविवार को सालेम से चलाई जाएगी। यात्रीगण कृपया बदले हुए परिचालन दिन एवं समयसारणी पर ध्यान दीजिएगा।

3: मुम्बई पुणे के बीच यात्रिओंकी चहेती 12127/28 इंटरसिटी सुपरफास्ट एक्सप्रेस 01 दिसम्बर से दोनोंही दिशाओं से यात्री सेवा में दाखिल हो रही है।

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छोटे स्टेशनोंके बीच मेमू/डेमू गाड़ियाँ चलने से, रेल पार्सल के ताबूत मे बची आखरी कील भी ठोंक दी

पहले ही रेल प्रशासन अपने कई रेलवे स्टेशनोंसे पार्सल व्यवस्था बन्द करते चली जा रही थी। इसका कारण गाड़ियोंका स्पीड अप किया जाना यह कारण बताया जाता रहा है। रेल प्रशासन का नियम है, किसी स्टेशन पर 5 मिनट से ज्यादा का ठहराव हो तभी पार्सल विभाग अपना आदान – प्रदान कर सकती है और हाल में मुख्य जंक्शन स्टेशनोंपर भी रेल गाड़ियोंके वाणिज्यिक ठहराव 5 मिनट से ज्यादा नही दिए जाते तो छोटे स्टेशनोंकी तो बात ही क्या?

यह बात तो हम मुख्य मार्ग के मेल/एक्सप्रेस स्टॉपिंग स्टेशनोंकी बात कर रहे है मगर जो छोटे स्टेशन है, जहाँपर केवल सवारी गाड़ियाँ ही रुकती थी, उनका तो रेलवे पार्सल विभाग का नाता कब से ही कमजोर हो चुका था, न के बराबर था। बची खुची कसर इन डेमू/मेमू गाड़ियोंके रैक चलने से हो गयी। दरअसल पुराने रैक में गार्ड (अब ट्रेन मैनेजर) के डिब्बे में पार्सल, लगेज का हिस्सा होता था और छोटे स्टेशन से कभी कभार कृषि साधन, उपज का बुकिंग्ज हो जाया करता था। मगर इन रैक की जगह भारतीय रेल ने अत्याधुनिक डेमू/मेमू गाड़ियाँ चलाने का निर्णय लिया जिनमे लगेज/पार्सल के लिए कोई विशेष व्यवस्था बिल्कुल नही है।

रेल प्रशासन अब छोटे किसान, गाँव के छोटे व्यवसायी को अपनी किसी भी सेवा के लिए शहर के बड़े रेल्वे स्टेशनों या सड़क मार्ग का उपयोग करने मजबूर कर रही है। कुल मिलाकर यह समझ ले, छोटे रेलवे स्टेशन अब केवल रेल गाड़ियोंको हरी झण्डी दिखाने का ही काम करेंगे। दिनभर में 2-4 डेमू/मेमू गाड़ियाँ उनके स्टेशनोंकी शोभा बढाने और वह एक रेलवे स्टेशन है इसका एहसास दिलाने आती जाती रहेंगी।

इस संक्रमण काल के लगभग 18 महीनोंके अंतराल ने छोटे स्टेशनोंकी अर्थव्यवस्था वैसे ही मृतप्रायः कर दी। बची कसर दिनभर में, छुटपुट एक्का दुक्का चलनेवाली डेमू/मेमू गाड़ियाँ चलाने के निर्णय ने मृतप्राय स्टेशनोंके ताबूत में ठोके जानेवाली आखरी कील का काम किया है।

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रेल्वे की यात्री सेवाओं मे अभी बहुत कुछ नियमित होना बाकी है..

भारतीय रेल मे गाड़ियोंके विशेष दर्जे को हटाकर उनके गाड़ी क्रमांक के नियमितीकरण की प्रक्रिया दिनांक 15 नवंबर से शुरु कर दी गई है। इन विशेष श्रेणी की कई गाड़ियोंमे जो त्यौहार स्पेशल कहलाती थी , यात्री किराये भी 1.3 गुना ज्यादा लगते थे, यात्रा दूरी का भी निर्बंध था वह इस गाड़ियोंके नियमितीकरण मे हट जाएगा। मगर आम यात्री की जो धारणा गाड़ियोंके नियमितीकरण होने से थी उसमे और इसमे बहुत अंतर रह गया है।

आम यात्री ने जैसे ही गाड़ियोंका नियमितीकरण हो रहा है ऐसी खबर सुनी तो उसकी बाँछे खिल गई थी। उसे लगा, अब पुराने गाड़ी क्रमांक से चलने लगेगी, समयसारणी, बिछड़े स्टोपेज नियमित हो जाएंगे, नियमित किराया श्रेणी बहाल हो जाएगी। उसे तो वाकई संक्रमणधारित निरबन्धो से मुक्ति मिलने का एहसास हुवा। मगर हाय! यह क्या? अब भी किन्तु, परन्तु, यदि, यद्यपि अभी खत्म नहीं हुए है। अभी भी रेल्वे का सम्पूर्ण नियमितीकरण बाकी है।

अभी भी यात्री रियायतें जिसमे दिव्यांग और मरीज की रियायतें छोड़कर सभी रियायते बंद ही है, खास तो ‘वरिष्ठ नागरिक रियायत’ जिस का बहुत वरिष्ठ नागरिकों को इंतजार था, वह यात्री मन मसोसकर रह गए। आम यात्री ही क्या बड़े बड़े अखबारों तक के पत्रकार चकमा खा गए और “जनरल टिकट याने द्वितीय श्रेणी टिकट, अब सभी गाड़ियों मे मिलेगा, द्वितीय श्रेणी सवारी गाड़ियोंकी टिकटें वहीं 10/- रुपए मिनिमम किराये वाली टिकट फिर से बहाल हो जाएगी, पुराने दिनों जैसे MST धारक यात्रा कर सकेंगे” ऐसी खबरे उन्होंने छपवा दी। मुसीबत यह थी की रेल्वे प्रशासन ने अपने परिपत्रक मे कुछ लाइने लिखी थी उन पर उन्होंने गौर ही नहीं किया। द्वितीय श्रेणी अनारक्षित टिकट मिलेगी लेकिन केवल क्षेत्रीय रेल्वे द्वारा निर्देशित गाड़ियों मे ही मिलेगी। सवारी गाड़ियोंका एक्सप्रेस गाड़ियोंमे, मेमू/डेमू गाड़ियों मे रूपांतरण कर दिया है। इनमे सीधे सीधे मेल/एक्स्प्रेस के द्वितीय श्रेणी अनारक्षित किराए लग रहे है। गौरतलब यह है समयसारणी, ठहराव सब सवारी गाड़ियों के मगर किराया मेल/एक्स्प्रेस का। यह बात आम यात्रीओं को हजम होने मे मुश्किल हो रही थी और रहीसही कसर इन उत्साही पत्रकारों और सोशल मीडिया के ज्ञानवंतों ने कर दी।

अभी भारतीय रेल के किसी भी क्षेत्रीय रेल्वे मे सवारी गाड़ियोंकी टिकट श्रेणी नहीं चल रही है और न ही कोई सवारी गाड़ी चलाई जा रही है। लंबी दूरी की बहुतांश गाड़ियों मे द्वितीय श्रेणी आरक्षित रूप मे ही उपलब्ध है केवल कम दूरी की कुछ ही गाड़ियोंमे संबंधित क्षेत्रीय रेल्वे द्वारा कुछ कोच अनारक्षित घोषित किए गए है और उसमे ही अनारक्षित टिकट धारक यात्रा की जा सकती है। अभी भी बहुत सी गाडियाँ पटरी पर नहीं आई है, जिसमे मुख्यतः वही सवारी गाडियाँ और ज्यादा ठहरावों वाली इंटरसिटी गाडियाँ है, जो कम दूरी की यात्रा करनेवाले यात्रीओं की मूलभूत जरूरत है। ऐसे कई क्षेत्रीय रेल्वे है, जहाँ अभी भी अनारक्षित टिकट, मासिक पास शुरू नहीं किए गए है और दैनिक यात्रीओंकी परेशानी की सबब बने हुए है। केवल गाड़ी क्रमांक के नियमितीकरण से रेल यात्रा नियमित नहीं हो जाएगी अभी बहुत कुछ नियमित करना बाकी है….

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हैदराबाद बीकानेर के बीच निजामाबाद, नान्देड, अकोला, भुसावल, सुरत, अहमदाबाद, भीलड़ी, जालौर, जोधपुर होते हुए एकल फेरा

07037 विशेष गाड़ी हैदराबाद से दिनांक 20 नवम्बर, शनिवार को 23:50 को चलेगी और दिनांक 22 को दोपहर 14:35 को बीकानेर पहुचेंगी। वापसीमे 07038 विशेष गाड़ी बीकानेर से दिनांक 23 नवम्बर को, मंगलवार शाम 19:35 को निकल दिनांक 25 नवम्बर गुरुवार को सुबह 11:00 बजे हैदराबाद पहुचेंगी। यात्रीगण ध्यान दे, यह केवल एकल यात्रा ही है, लेकिन आशा करने में हर्ज नही की आगे इस मार्ग से नियमित गाड़ी चलने का रास्ता खुल गया है।

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पश्चिम रेलवे में नागदा, खाचरोद के लिए खुशखबर, मिले बिछुड़े ठहराव

पश्चिम रेलवे के नागदा और खाचरोद को रेल मन्त्री अश्विनी वैष्णव से बड़ी सौगात मिली है। संक्रमण के पहले जो स्टोपेजेस चले आ रहे थे, शून्याधारित समयसारणी के तहत रेलवे बोर्ड की सूचनानुसार बन्द कर दिए गए थे। यात्रिओंकी मांग लिए क्षेत्र के सांसद काफी दिनोंसे प्रयासरत थे।

12951/52 मुम्बई सेंट्रल नई दिल्ली मुम्बई सेंट्रल राजधानी एक्सप्रेस को प्रयोगात्मक तौर पर दिनांक 18 नवम्बर से, मुम्बई और नई दिल्ली से चलने वाली गाड़ियोंमे, नागदा स्टेशन पर छह महीने के लिए ठहराव दिया गया है।

22943/44 दौंड इन्दौर दौंड एक्सप्रेस को प्रयोगात्मक तौर पर दिनांक 18 नवम्बर से दोनोंही दिशाओं से चलने वाली गाड़ियोंमे, खाचरोद स्टेशन पर छह महीने के लिए ठहराव दिया गया है।

19039/40 बान्द्रा बरौनी बान्द्रा को प्रयोगात्मक तौर पर दिनांक 20 नवम्बर से विक्रमगढ़ आलोट स्टेशन पर छह महीने के लिए, दिनांक 18 मई 2022 तक हॉल्ट दिया गया है।

19019/20 बान्द्रा देहरादून बान्द्रा को प्रयोगात्मक तौर पर दिनांक 20 नवम्बर से महिदपुर रोड स्टेशन पर छह महीने के लिए, दिनांक 18 मई 2022 तक हॉल्ट दिया गया है।

चूँकि यह ठहराव प्रयोगात्मक दृष्टिकोण रख, छह महीनोंके लिए दिए गए है, रेल मण्डल को इसका बारीकी से अभ्यास करने के आदेश दिए गए है। यात्रिओंकी समुचित संख्या यदि कायम रहती है तो ही इन स्टोपेजेस को आगे कायम किया जाएगा। आशा है, यात्रीगण इन ठहरावोंका लाभ लेंगे।