आज दिनांक 13 दिसम्बर को रेल राज्यमंत्री रावसाहेब दानवे पाटील द्वारा वीडियो लिंक के जरिए दिल्ली से किया गया। उनके साथ धुळे के सांसद सुभाष भामरे एवं जलगाँव लोकसभा संसदीय क्षेत्र के सांसद उन्मेष पाटील उपस्थित थे।
उद्धाटन प्रसंगपर सम्बोधन में रेल राज्यमंत्री रावसाहेब दानवे पाटील ने संक्रमणकाल में रेल कर्मियों के अथक प्रयासों की सराहना की। इतने गम्भीर संकट के दौरान भी मालगाड़ियोंके जरिए रेल कर्मचारी देश सेवा में निरन्तर डटे रहे। रेल सेवा यह सड़क परिवहन के मुकाबले कई अधिक किफायती है। जहाँ चालीसगांव से धुळे के सड़कमार्ग से 80-90 रुपये लगते है, वहीं रेल का यात्री किराया 35 रुपए लगेगा, सिवाय यात्रा भी तेज गति से और आरामदायक होगी।
रेलवे महाराष्ट्र राज्य के प्रगति में अग्रसर है, निधि की कोई कमी नही है। महारेल के साथ मिलकर कई रेल मार्ग को साकार किया जा रहा है। अहमदनगर बीड रेल मार्ग, नागपुर मुम्बई हाई स्पीड रेल मार्ग के निर्माणाधीन प्रोजेक्ट इसके उदाहरण है। आगे रेलराज्य मन्त्री ने महाराष्ट्र सरकार से अपील की, की वे जमीन उपलब्ध करा दे और प्रोजेक्ट की लागत में बराबर की हिस्सेदारी उठाए तो रेलवे राज्य में कहीं पर भी रेलवे मार्ग बिछाने के लिए तैयार है।
दो जोड़ी मेमू गाड़ियोंकी संक्षिप्त समयसारणीउद्धाटन कार्यक्रम की कुछ झलकियाँ
कार्यक्रम का समारोप भुसावल मण्डल व्यवस्थापक केड़िया ने रेल राज्यमंत्री रावसाहेब दानवे, सांसद सुभाष भामरे एवं उन्मेष पाटील इनका आभार प्रगट कर किया। साथ ही उन्होंने चालीसगांव के उपस्थित नेतागण, मान्यवरों और सज्जनों के लिए भी धन्यवाद व्यक्त किया।
देशाभरात 15 नोव्हेम्बर पासून रेलवे गाड्यांची प्रवासी वाहतूक सामान्य करण्यात आलेली आहे. जवळपास प्रत्येक क्षेत्रीय रेलवे ने आपापल्या क्षेत्रातील प्रवाश्याना द्वितीय श्रेणीतिल अनारक्षित तिकिट उपलब्ध करून दिलेले आहेत आणि सामान्य गाड़यां ही सुरु केलेल्या आहेत. परंतु मध्य रेलवे म्हणजे म रे, ‘रोज मरे त्यास कोण रडे?’
कालच मध्य रेल्वेने आपल्या चाळीसगाव – धुळे मार्गावर 2 जोड्या अनारक्षित मेमू सेवा चालवण्याची घोषणा केली आहे आणि यामुळे संपूर्ण मध्य रेल्वेवर दररोज प्रवास करणाऱ्या प्रवाशांच्या मनात आशेचा किरण निर्माण झाला आहे. आजही मध्य रेल्वेच्या अनेक भागात स्थानिकांसाठी व रोज प्रवास करणाऱ्यासाठी गाड्या उपलब्ध नाहीत आणि जे काही आहे ते एकतर आरक्षित पद्धतीने चालवले जात आहे किंवा मोजक्याच सेवा दिल्या जात आहेत. उदाहरणार्थ भुसावळ बडनेरा भुसावळ ही एकच मेमू, भुसावळ बडनेरा नागपूर मार्गावर धावत आहे. दुसऱ्या भागात बडनेरा-नरखेड आणि अमरावती-नागपूर चालवण्यात येत आहे. संक्रमणपूर्व काळात भुसावल हुन भुसावळ ते नरखेड, वर्धा आणि नागपूर अशा तीन जोडी गाड्या धावत होत्या.
त्याचवेळी भुसावळ-खंडवा-इटारसी मार्गावर ही अशीच दुरावस्था झालेली आहे. मेमू एक्स्प्रेस म्हणून फक्त एक ट्रेन सुरू करण्यात आली आहे, तर आधी या मार्गावर दैनंदिन प्रवाशांसाठी 2 जोडी प्रवासी गाड्याही धावत होत्या. सर्वात वाईट अवस्था भुसावळ-मनमाड-मुंबई रस्त्याची आहे. या मार्गावर भुसावळ देवळाली ते भुसावळ मुंबई दरम्यान प्रत्येकी एक-एक गाड्या धावत होत्या, गेल्या पावणे दोन वर्षांपासून बंद असून आजतागायत सुरू होण्याची चिन्हे नाहीत. मनमाड इगतपुरी दरम्यानची शटलही बंद आहे. 11025/26 भुसावळ-पनवेल-पुणे दरम्यान दररोज धावणारी हुतात्मा एक्स्प्रेस अद्याप सुरू झालेली नाही. विशेष म्हणजे राज्य सरकारने दिलेल्या परवानगी पत्रातही ही गाड़ी सुरू करण्याचा उल्लेख होता.
स्थानिक प्रवाशांची अवस्था अत्यंत कठीण झालेली आहे. मुख्य मार्गावरील गाड्यांमध्ये द्वितीय श्रेणी अनारक्षित श्रेणी सुरू केली जात नाही. यामुळे सर्वसामान्य प्रवासी, रोजचा प्रवासी अखेर त्यांच्या रोजगारापर्यंत कसा पोहोचेल? महाराष्ट्रात तर राज्य परिवहनच्या बसेसही संपावर आहेत. एकीकडे भुसावळ मंडळच्या वाणिज्य विभागाला मध्य रेल्वेच्या मुख्यालयातून सुमारे आठ कोटींचा दंड वसूल करण्यात आला म्हणून मानाची ढाल का क़ाय ते बक्षीस देण्यात आले आहे. येथील सर्वसामान्य प्रवासीला तिकिटांअभावी दंड भरून प्रवास करावा लागत असून रेलवे तो वसूल करणाऱ्यांचा सत्कार व बक्षिसे वाटत आहे. मोठा लाजीरवाणा प्रकार आहे. हाच पुरस्कार प्रवासी सेवेसाठी दिला गेला असता तर किती अभिमान वाटला असता?
मनमाड-दौंड-पुणे, पुणे-सोलापूर-वाडी, पुणे-सांगली- कोल्हापूर या मार्गावरील प्रवाशांचीही किंबहुना हीच परिस्थिती आहे. म्हणजेच मध्य रेल्वेच्या या वृत्तीने मध्य रेल्वेच्या सर्वच गैर-उपनगरीय भागातील प्रवासी प्रचंड नाराज आहेत. विशेष म्हणजे अनेक प्रश्नांची उत्तरे न देण्याचा रेल्वे प्रशासनाचा स्वभाव बनला आहे.
उत्तर रेलवे ने अपनी 30 सुपरफास्ट सहित मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंमें द्वितीय श्रेणी अनारक्षित यात्री सेवा शुरू कर दी है। निम्नलिखित परिपत्रक में 30 गाड़ियोंकी सूची दर्ज है साथ ही उनके कौनसे और कितने कोच अनारक्षित निर्धारण किए गए है यह भी लिखा गया है।
यहाँपर चिन्तनीय बात यह है, मध्य रेलवे यह कदम अपने क्षेत्र के यात्रिओंके लिए कब ले रही है इसका स्थानीय यात्रिओंको बेसब्री से इंतजार है। जहाँतक प्रश्न इतर क्षेत्रीयरेलवे का आता है, देशभर के लगभग सभी जगहोंपर अनारक्षित द्वितीय श्रेणी यात्रीटिकट सामान्य रूप से मिल रहा है।सुपरफास्ट सहित मेल/एक्सप्रेस यात्री गाड़ियोंमे भी सामान्य अनारक्षित टिकट उपलब्ध है।
कल ही मध्य रेलवे ने अपने चालीसगांव – धुळे मार्गपर 2 जोड़ी अनारक्षित मेमू सेवा चलाने की घोषणा की है और इससे पूरे मध्य रेल पर रोजाना अप डाउन करनेवाले यात्रिओंके मन मे आशा की किरण जगी है। आजतक भी मध्य रेल के कई क्षेत्र में स्थानियोंको के लिए गाड़ियाँ उपलब्ध नही और जो है वह या तो आरक्षित व्यवस्था में चलाई जा रही है या एक्का दुक्का सेवाएं दी जा रही है। उदाहरण के लिए भुसावल बड़नेरा नागपुर मार्ग पर केवल एक भुसावल बडनेरा भुसावल मेमू चल रही है। दूसरे हिस्से में बड़नेरा – नरखेड और अमरावती – नागपुर चलाई जा रही है। संक्रमणपूर्व काल मे सिर्फ भुसावल से नरखेड, वर्धा और नागपुर ऐसी 3 जोड़ी गाड़ियाँ चल रही थी।
वहीं हाल भुसावल -खण्डवा – इटारसी मार्ग का है। सिर्फ एक गाड़ी मेमू एक्सप्रेस रूप में शुरू की गई है, जब की इस मार्ग पर भी 2 जोड़ी सवारी गाड़ियाँ रोजाना यात्रिओंके लिए चलती थी। सबसे भयंकर हाल भुसावल – मनमाड़ – मुम्बई मार्ग का है। इस मार्ग पर भुसावल देवलाली और भुसावल मुम्बई के बीच प्रत्येकी एक जोड़ी गाड़ी चलती थी, जो विगत पौने दो वर्षोंसे बन्द है और अब तक भी शुरू किए जाने के कोई आसार दिखाई नही दे रहे है। मनमाड़ इगतपुरी के बीच शटल भी बन्द है। 11025/26 भुसावल – पनवेल – पुणे के बीच रोजाना चलनेवाली हुतात्मा एक्सप्रेस अब तक भी शुरू नही की गई। जबकी राज्य शासन द्वारा जारी किए गए अनुमति पत्र में इस गाड़ी के शुरू करने का भी जिक्र था।
स्थानीय यात्रिओंके बेहद हाल बेहाल है। मुख्य मार्ग की गाड़ियोंमे द्वितीय श्रेणी अनारक्षित खोला नही जा रहा है। इसके चलते आम यात्री, रोजाना वाला यात्री आखिर अपने रोजगार पर किस तरह पहुंचे? महाराष्ट्र में तो राज्य परिवहन के बसें भी हड़ताल में बन्द चल रही है। एक तरफ भुसावल मण्डल के वाणिज्य विभाग को तकरीबन 8 करोड़ जुर्माना वसूलने के लिए मध्य रेल मुख्यालय से पुरस्कृत किया गया है। यहाँ का आम यात्री बेबस और मजबूर है टिकट के अभाव में जुर्माना भर भर के यात्रा करने के लिए और वहाँ सत्कार और पुरस्कार बाँटे जा रहे है। बड़ी कोफ़्त होती है।
यही पुरस्कार यदि यात्री सेवा के लिए दिया जाता तो कितना गौरवपूर्ण होता? खैर! कुछ यही हाल मनमाड़ -दौंड – पुणे, पुणे – सोलापुर – वाड़ी, पुणे – सांगली – कोल्हापुर इन मार्गोंके यात्रिओंके भी हो रहे है। यूँ कहिए, मध्य रेल के सभी गैर-उपनगरीय क्षेत्र के यात्री मध्य रेल के इस रवैये से बेहद परेशान है। खास बात तो यह है, ढेर प्रश्नोंपर उत्तर ही नही देना यह रेल प्रशासन की फ़ितरत हो गयी है।
चालीसगांव धुळे के बीच दो जोड़ी अनारक्षित विशेष मेमू सप्ताह में 6 दिन चलाने की घोषणा की गई है। यह दोनों जोड़ी गाड़ियाँ 13 दिसम्बर से अपने फेरे सोमवार से लेकर शनिवार तक करती रहेगी। रविवार को कोई भी गाड़ी नही चलेगी।
01303 चालीसगांव धुळे विशेष सुबह 6:30 को चालीसगांव से चलकर धुळे को 7:35 को पहुचेंगी। इसी तरह 01313 चालीसगांव धुळे विशेष शाम 17:30 को चालीसगांव से चलकर धुळे को शाम 18:35 को पहुचेंगी।
वापसी के दो फेरे इस प्रकार है,
01304 धुळे चालीसगांव विशेष सुबह 7:50 को धुळे से निकल सुबह 8:55 को चालीसगांव पहुचेंगी। 01314 धुळे चालीसगांव विशेष शाम 19:20को धुळे से निकल शाम 20:25 को चालीसगांव पहुचेंगी।
समयसारणी निम्नलिखित है,
यह दोनों जोड़ी अनारक्षित विशेष गाड़ियोंके फेरे संक्रमनकालीन सभी निर्बन्धों का पालन करते हुए चलाए जाएंगे। रेल प्रशासन यात्रिओंसे निवेदन करती है, सम्पूर्ण टीकाकरण प्राप्त और महाराष्ट्र राज्य द्वारा जारी युनिवर्सल पास और नियम पालन करनेवाले व्यक्ति ही इन गाड़ियोंमे यात्रा करें। सैनिटाइजर का उपयोग करे और यात्रिओंके बीच यथोचित अन्तर बनाए रखे।