Uncategorised

पश्चिम रेलवे की 11 जोड़ी मेल/एक्सप्रेस एवं सवारी गाड़ियाँ

पश्चिम रेल्वेने 11 जोड़ी याने 22 मेल/एक्सप्रेस एवं सवारी गाड़ियोंके पुनर्चलन की घोषणा की है। निम्नलिखित विशेष गाड़ियोंमे MSPC याने मेल/एक्सप्रेस विशेष और PSPC याने सवारी गाड़ी विशेष है। हालांकि परीपत्रक में सवारी विशेष गाड़ियोंके किरायोंकी बात नही की गई है। जहाँतक इन सभी विशेष गाड़ियोंके किराए मेल/एक्सप्रेस के दरों से ही लगाए जाएंगे। फर्क केवल अनारक्षित द्वितीय श्रेणी की उपलब्धता का रह सकता है।

1: 09345 रतलांम भीलवाड़ा एक्सप्रेस विशेष दिनांक 09 अगस्त से प्रतिदिन और 09346 भीलवाड़ा रतलाम एक्सप्रेस विशेष दिनांक 10 अगस्त से प्रतिदिन चलेंगी।

2: 09389 डॉ आंबेडकर नगर रतलांम सवारी विशेष दिनांक 09 अगस्त से प्रतिदिन और 09390 रतलाम डॉ आंबेडकर नगर सवारी विशेष दिनांक 10 अगस्त से प्रतिदिन चलेंगी।

3: 09347 डॉ आंबेडकर नगर रतलांम सवारी विशेष दिनांक 09 अगस्त से प्रतिदिन और 09348 रतलाम डॉ आंबेडकर नगर सवारी विशेष दिनांक 10 अगस्त से प्रतिदिन चलेंगी।

4: 09507 इन्दौर उज्जैन सवारी विशेष दिनांक 09 अगस्त से प्रतिदिन और 09506 उज्जैन इन्दौर सवारी विशेष दिनांक 12 अगस्त से प्रतिदिन चलेंगी।

5: 09516 उज्जैन नागदा सवारी विशेष दिनांक 10 अगस्त से प्रतिदिन और 09517 नागदा उज्जैन सवारी विशेष दिनांक 11 अगस्त से प्रतिदिन चलेंगी।

6: 09545/46 रतलाम नागदा रतलाम सवारी विशेष दिनांक 10 अगस्त से प्रतिदिन चलना शुरू होगी।

7: 09341 नागदा बीना एक्सप्रेस विशेष दिनांक 10 अगस्त से प्रतिदिन और 09342 बीना नागदा एक्सप्रेस विशेष दिनांक 11 अगस्त से प्रतिदिन चलेंगी।

8: 09553/54 नागदा उज्जैन नागदा सवारी विशेष दिनांक 09 अगस्त से प्रतिदिन चलना शुरू होगी।

9: 09509/10 पालीताणा भावनगर पालीताणा सवारी विशेष दिनांक 09 अगस्त से प्रतिदिन चलना शुरू होगी।

10: 09534 भावनगर सुरेंद्रनगर और 09527 सुरेन्द्रनगर भावनगर सवारी विशेष दिनांक 09 अगस्त से प्रतिदिन चलना शुरू होगी।

11: 09401 असरवा हिम्मतनगर सवारी विशेष सप्ताह में 6 दिन रविवार व्यतिरिक्त और 09402 हिम्मतनगर असरवा सवारी विशेष सप्ताह में 6 दिन शनिवार व्यतिरिक्त दिनांक 09 अगस्त से प्रतिदिन चलना शुरू होगी।

यात्रीगण से निवेदन है, किरायों और समयसारणी की समुचित जानकारी के लिए रेलवे की अधिकृत वेबसाइट, हेल्पलाइन से सम्पर्क करें।

Uncategorised

हुजुरसाहिब नान्देड और अम्ब-अंदुरा और फैज़ाबाद रामेश्वरम के बीच साप्ताहिक गाड़ियोंका पुनर्चलन प्रारम्भ होगा

05427 हुजुरसाहिब नान्देड अम्ब अंदुरा साप्ताहिक दिनांक 03 अगस्त से प्रत्येक मंगलवार को चलेगी और 05428 अम्ब अंदुरा हुजुरसाहिब नान्देड साप्ताहिक दिनांक 05 अगस्त से प्रत्येक गुरुवार को चलेगी।

06793 रामेश्वरम फैज़ाबाद साप्ताहिक दिनांक 19 सितम्बर से प्रत्येक रविवार को चलेगी और 06794 फैज़ाबाद रामेश्वरम साप्ताहिक दिनांक 022 सितम्बर से प्रत्येक बुधवार को चलेगी।

उपरोक्त दोनोंही गाड़ियाँ सम्पूर्ण आरक्षित आसन व्यवस्थान्तर्गत चलाई जाएगी।

Uncategorised

आख़िर चाहते क्या हो?

भारतीय रेलवे ने अपने आरक्षण केंद्र पर आरक्षित टिकट बनवाने वाले यात्रिओंको UPI के जरिए अदायगी करने पर टिकिटोंके बेसिक शुल्क में 5% की छूट को 12 जून 2022 तक जारी रखने की घोषणा की है। इसी पर आज हम अपनी बात करने जा रहे, पर पहले आप परीपत्रक देख लीजिए।

उपरोक्त परीपत्रक में छूट के प्रावधान, वर्ष 2018 के परीपत्रक क्रमांक 16, 16A और 16B के नियम और शर्तों के अनुसार जारी रहेंगे ऐसा कहा गया है, अतः वे भी परीपत्रक हम यहाँ दे रहे है। 16A, 16B में और उसके आगे के दो परीपत्रकों में अवधीके विस्तार के बारे में लिखा गया है।

उपरोक्त परीपत्रक में छूट के लिए दिए गए नियमोंपर गौर कीजिए,

5% छूट केवल रिजर्वेशन काउंटर से खरीदे गए और UPI या BHIM ऍप के जरिए भुगतान करने पर ही मिलेगी। यह छूट ₹100/- या उससे से ज्यादा मूल्य के बेसिक किरायोंके आरक्षित टिकटोंके लिए ही रहेंगी। यह छूट ज्यादासे ज्यादा ₹50/- तक रहेगी।

इस छूट का प्रावधान MST/QST, एकल यात्रा अनारक्षित टिकट या आईआरसीटीसी के जरिए निकाले जानेवाले ऑनलाइन ई-टिकट, I – टिकट के लिए नही है।

यह छूट गाड़ियोंके प्रथम चार्टिंग तक ही उपलब्ध रहेगी, उसके बाद नही। मगर उसके बाद यदि करन्ट बुकिंग्ज में कोई जगह उपलब्ध है तो उसके लिए जो 10% रियायत वाली योजना यथावत जारी रहेगी।

चलिए, अब हम हमारी बात रखते है,

रेल प्रशासन चाहता है, की आरक्षण व्यवस्था का डिजिटलाइजेशन हो तो यह UPI से भुगतान के लिए छूट का प्रावधान केवल आरक्षण केन्द्रोंके टिकटों के लिए ही क्यों? आईआरसीटीसी के ऑनलाइन टिकटोंके लिए क्यों नही?

आरक्षित केन्द्रोंके टिकटोंके लिए रेल प्रशासन को ऑनलाईन टिकटोंके मुकाबले निश्चित ही ज्यादा खर्च लगता है, स्टेशनरी लगती है। इसके बावजूद ऑनलाईन टिकटों में अतिरिक्त सर्विस चार्ज वसूला जाता है। इस फर्क को यूँ समझिए, मुम्बई से हावडा का ऑनलाईन स्लिपर क्लास का टिकट है। उसका मूल्य सभी अतिरिक्त चार्ज मिलाकर ₹780/- होगा जिसमें 726 रुपिया बेसिक किराया है। और आईआरसीटीसी के लगभग 17 या 20 और जोड़ लीजिए। कुल हो जाएगा ₹800/- अब यही टिकट आरक्षण केंद्र से निकाला जाएगा तो सिर्फ 780/- में और UPI/BHIM ऍप से भुगतान किया तो ₹740/- कुल फर्क हुवा प्रति व्यक्ति ₹60/- जिसमे 5% वाली छूट के ₹36/- काटे गए है। समझ लीजिए, दस लोगों के ग्रुप को अमूमन ₹350 से 400/- बचते है।

ऐसी योजना में आम यात्री के पैसोंकी बचत होती है तो वह आरक्षित केंद्र पर ही जाकर भीड़ करेगा, वहींसे टिकट लेने जाएगा। क्या इस संक्रमण काल मे भीड़ को प्रोत्साहित करना उचित है? क्या यह UPI के जरिए भुगतान को प्रोत्साहन देने का तरीका है? यदि प्रशासन चाहता तो, UPI/BHIM ऍप के जरिए भुगतान किए जानेपर दी जानेवाली 5% की छूट ऑनलाईन टिकटों पर भी जारी रख सकता था। उससे यात्री अपने अपने घरोंसे, सुरक्षित स्थानों से टिकट खरीद सकते थे। पैसे बचाने हेतु और प्रशासन द्वारा केवल आरक्षण केद्रोंपर ही छूट दिए जाने से प्रोत्साहित होकर स्टेशनोंके आरक्षण केद्रोंपर भीड़ न लगाते।

और भी आगे जाकर हम यह कहते है, रेल प्रशासन ऐसी छूट देकर, आखिर कहना क्या चाहता है? जहाँ कश्ती तूफान में है, निजी क्षेत्रोंको रेल में भागीदारी देकर निधि जमा करने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है, यात्री ट्रैफिक में ऐसे ही बहुत रियायती किराए है जिनमें सुधार लाना नितान्त आवश्यक हो चुका है, ऐसेमें 50 रुपए तक की छूट देने का लालच देने में प्रशासन क्या हासिल करना चाहते है? एक तरफ कई नियमित गाड़ियाँ चलवाने की मांग को अनदेखी किया जा रहा है। कई क्षेत्र में सवारी गाड़ियों पर निर्णय नही हो पा रहा है तो कहीं उन्हें एक्सप्रेस के किरायोपर चलाया जा रहा है। MST/QST वाले पास के अभाव में दिन ब दिन हैरान-परेशान हो रहे है, आक्रोश कर रहे है। बताइए, किसी ज्ञानी से हम जानना चाहते है,”आखिर कहना क्या चाह रहे हो?”

Uncategorised

तेजस के रैक वाली राजधानी एक्सप्रेस गाड़ियोंकी किराया तालिका

हाल ही में 02951/52 मुम्बई नई दिल्ली के बीच चलनेवाली राजधानी एक्सप्रेस गाड़ियोंको अत्याधुनिक तेजस एक्सप्रेस के कोचेस से चलाया जाना शुरू किया गया है। इन तेजस कोचेस की विशेषताओं पर हमारे ब्लॉग में पोस्ट आ चुका है। इन रैक के लिए राजधानी गाड़ियोंकी अलग किराया तालिका बनाई गई है। राजधानी एक्सप्रेस के बेसिक किराया दरों से तेजस रैक वाली राजधानी गाड़ी का किराया लगभग 5 प्रतिशत ज्यादा रहेगा। इसके अलावा राजधानी एक्सप्रेस में जितने भी अतिरिक्त सरचार्ज लगाए जाते है, जैसे की आरक्षण, सुपरफास्ट, प्रीमियम इत्यादि यथावत लगते रहेंगे।

Uncategorised

क्या सचमुच स्टेशन, रेल गाड़ियाँ, पटरियाँ बिक गयी, या बेची जाएंगी?

हमारे देश मे आजकल एक अलग विचारधारा चलाई जाती है। एक तरफ बरसों पुराने या यूं कह सकते है की सदियों पुराने गन्दे से माहौल से रेलवे स्टेशन, रेल गाड़ियाँ, कुछ कर्मचारियोंकी अकर्मण्यता को ढर्रे पर ला कर एक नए साफ-सुथरे, सुन्दर लोकोपयोगी वातावरण में ले जाया जा रहा है तो दूसरी तरफ आम यात्रिओंको अज्ञानता भरी बातें कह कर बरगलाया जा रहा है।

आप बिलकुल सहजता से आजसे 8-10 वर्ष पहले के रेलवे स्टेशनों, गाड़ियों और उनकी सुविधाओंमें आया फर्क समझ सकते है। भुसावल यह मध्य रेलवे का मण्डल है, बहुत बड़ा जंक्शन है। एक जमाना था, हम लोग उम्रदराज यात्रियों और दिव्यंगों के लिए रैम्प की मांग करते रहते थे और रेलवे की ओरसे जवाब तक नही आता था। अधिकारी वर्ग में इस रैम्प के मांग की हँसी उड़ाई जाती थी। आज वहीं अधिकारियोंके पद है और तमाम भारतभर में न सिर्फ भुसावल बल्कि लगभग हर जंक्शन स्टेशन जहाँपर यात्री संख्या ज्यादा है, रैम्प बनाए गए है और बनाए जा रहे है।

रेम्प की क्या बात है, कई ऐसे रेलवे स्टेशन है की वहांके स्थानीय यात्रिओंने अपनी जिंदगी शायद पहली बार किसी एस्कलेटर पर कदम धरा हो, या भारतीय रेलवे स्टेशनोंपर 1 या 2 नही 4-4 लिफ्ट लगाए जाने का सपना देखा हो, मगर यह अब हकीकत है। एक वक्त था, स्टेशनोंपर कूड़ा-कचरा फेंकने के लिए कूड़ादान भी ढूंढने पड़ते थे वहाँ अब कचरे का नामोनिशान तक नही रहता।

जो इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल डिस्प्ले केवल मुम्बई जैसे महानगरों के रेलवे स्टेशनोंकी शोभा हुवा करते थे, वो आज सभी भारतीय रेलवे स्टेशनोंके बड़े, मझौले स्टेशनोंपर यात्रिओंकी सेवा के लिए लगाए गए है। रेलवे स्टेशन की हालात इस कदर सुधारी गई है कि पहले प्लेटफार्म पर गाड़ी पहुंचती थी तो मख्खियों के झुंड उठते थे, प्लेटफार्म के बगल की पटरियों पर भयावह गन्द रहती थी। उसकी जगह आकर्षक, साफसुथरे, चकाचक ग्रेनाइट कोटा स्टोन से सजे प्लेटफार्म दिखते है।

रेलगाड़ियाँ भी दिन ब दिन आधुनिक LHB कोच से सुसज्जित की जा रही है। गाड़ियोंकी गति में सुधार किया जा रहा है। प्रदूषण बढाने वाले डीजल लोको को धीरे धीरे कम कर सम्पूर्ण विद्युतीकरण की ओर भारतीय रेल को ले जाया जा रहा है। कई रेलवे स्टेशनोंपर सोलर विद्युतीकरण से कामकाज किया जा रहा है। रेल प्रोजेक्ट्स अब सिर्फ घोषणाएं ही नही रह जाती बल्कि उनको धरातल पर लाने की छटपटाहट बड़ी आसानी से समझ आती है।

यह सारी बाते हम इस लिए कह पा रहे है, क्योंकि हमने वह रेलवे स्टेशनोंके दृश्य भी जिए है और आज के आधुनिक सुविधाओंसे भरपूर व्यवस्थाओके भी लाभ लिए जा रहे है। जब हमारे दिव्यांग या बुजुर्ग यात्री बन्धुओंको बैटरी चलित गाड़ियोंसे रैम्प के जरिए ठेठ प्लेटफार्म पर गाडीके डिब्बे के पास उतरते देखते है तो सचमुच सार्थकता महसूस करते है। ऐसा लगता है, यह है सार्वजनिक व्यवस्थाओं में सुधार।

प्रोजेक्ट्स घोषित होते है और मशीनरी धड़क जाती है, काम शुरू हो जाते है। नजरों के सामने ही धड़ाधड़ विद्युतीकरण, एक लाइन की दो और दो की तीन रेल लाइन बढ़ती जा रही है। गाड़ियाँ 130 kmph की स्पीड दिखा रही है। रेलवे स्टेशनोंपर तारांकित होटल्स बनाए जा रहे है। रेलवे की टिकटें आजकल स्कूली बच्चे अपने मोबाइल पर यूँ बना देते है। है ना बदलाव?

मगर दोस्तों, हम तो पहले भी स्टेशनोंपर जाते थे, सामान ज्यादा होता या बुजुर्ग, दिव्यांग यात्री साथ रहते तो कुली उनको उठाकर प्लेटफार्म पार कराते। गाड़ियाँ आने पर अपने डिब्बों को ढूंढने भागदौड़ कर लेते। गन्दगी, कूड़ा करटक सार्वजनिक जगहोंपर देखना आदतन था। तो बताइए क्या वह सब ठीक था? इतना सुधार, सुविधाएं जिन्हें हम एक सपने की तरह देखते थे, हमारे नजरोंके सामने है जिनपर हम कुछ सुनते ही नही और ऐसी आधीअधुरी अज्ञानतापूर्ण बातें सुनकर अपने विचारों को खराब करते है।

जितनी भी PPP या निजीकरण की योजनाएं है उनका विस्तृत ब्यौरा रेलवे की वेबसाइटों पर उपलब्ध होता है, जिन्हें आप देखकर समझ सकते है की बेचना क्या होता है और किराएपर, लीज पे देना क्या होता है।